BSEAP 2023 Sanskrit Paper Question Paper (Set II) is available here with Solutions PDF.
The BSEAP Class 10 Sanskrit exam consists of a theory paper worth 100 marks, designed to assess students' proficiency in Sanskrit language, comprehension, grammar, and creative writing skills.
The question paper includes a mix of multiple-choice questions (1 mark each), short-answer questions (2 and 3 marks each), and long-answer questions (4 and 8 marks each), collectively evaluating students' understanding of Sanskrit literature, grammatical concepts, and written expression.
BSEAP 2023 Sanskrit Question Paper (Set II) 2023 with Solutions
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I. भावानुवादम् - प्रतिसन्देवनम्
(1) अधः दत्तं श्लोकं पठित्वा, प्रश्नानां समाधानानि लिखन्तु ।
उदासस्य तृणं चिन्तां
शूरस्य मरणं तृणं ।
विपन्नस्य तृणं भार्या
निर्बुद्धस्य तृणं जगत् ॥
अ) कस्य तृणं चिन्तां ?
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उदासस्य तृणं चिन्तां। अर्थात्, जो व्यक्ति उदास होता है, उसके लिए चिंता का कोई महत्व नहीं होता, वह उसे तृण (घास) के समान तुच्छ समझता है।
Quick Tip: किसी भी श्लोक को समझते समय उसके शब्दार्थ एवं भावार्थ को ध्यानपूर्वक समझना आवश्यक है।
आ) शूरस्य किं तृणं ?
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शूरस्य मरणं तृणं। अर्थात्, वीर व्यक्ति मृत्यु को तुच्छ मानता है और उससे भयभीत नहीं होता।
Quick Tip: शूर और वीर शब्द समानार्थक होते हैं, जो बहादुरी और निर्भीकता को दर्शाते हैं।
इ) विपन्नस्य तृणं का ?
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विपन्नस्य भार्या तृणं। अर्थात्, जो व्यक्ति विपन्न (दुर्भाग्यग्रस्त) होता है, उसके लिए पत्नी (भार्या) का कोई विशेष महत्व नहीं होता।
Quick Tip: संस्कृत श्लोकों में अनेक प्रकार के भावार्थ होते हैं, जिन्हें संदर्भ के अनुसार समझना चाहिए।
ई) कस्य तृणं जगत् ?
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निर्बुद्धस्य तृणं जगत्। अर्थात्, जो व्यक्ति बुद्धिहीन होता है, उसके लिए सम्पूर्ण संसार तुच्छ प्रतीत होता है।
Quick Tip: श्लोकों में प्रयुक्त विशेषणों (जैसे 'निर्बुद्ध' या 'शूर') को सही अर्थों में समझकर अनुवाद करना चाहिए।
अधः दत्तं अनुच्छेदं पठित्वा प्रश्नानां समाधानानि लिखन्तु ।
भारतीयभाषाः संस्कृतभाषा अति नीतिसरा। वाल्मीकिः अस्माकं आदिकविः। रामायणं अस्माकं आदिकाव्यं। रामायणे श्रीरामः कथानायकः। रावणः प्रतिनायकः। महाभारतं व्यासेन विरचितम्। संस्कृतसाहित्ये कविकुलगुरुः कालिदासः। रघुवंशं कालिदासेन विरचितम्।
अ) कः अस्माकं आदिकविः ?
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अस्माकं आदिकविः वाल्मीकिः। अर्थात्, संस्कृत साहित्य में महर्षि वाल्मीकि को प्रथम कवि माना जाता है।
Quick Tip: वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण संस्कृत साहित्य का आदि काव्य माना जाता है।
आ) रामायणे कः कथानायकः ?
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रामायणे कथानायकः श्रीरामः। अर्थात्, रामायण महाकाव्य में श्रीराम मुख्य नायक हैं।
Quick Tip: रामायण में श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।
इ) महाभारतं केन विरचितम् ?
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महाभारतं व्यासेन विरचितम्। अर्थात्, महर्षि व्यास ने महाभारत की रचना की थी।
Quick Tip: महाभारत को पंचम वेद भी कहा जाता है और इसमें 100,000 श्लोक हैं।
ई) संस्कृतसाहित्ये कविकुलगुरुः कः ?
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संस्कृतसाहित्ये कविकुलगुरुः कालिदासः। अर्थात्, कालिदास को संस्कृत साहित्य में कविकुलगुरु कहा जाता है।
Quick Tip: कालिदास द्वारा रचित ‘अभिज्ञानशाकुंतलम्’ संस्कृत साहित्य की प्रसिद्ध कृति है।
एकं श्लोकं पूरयित्वा भावं लिखन्तु ।
अ) तपस्विः ………………………….. वर्ततु शिष्यः॥
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तपस्विः स्वयं सत्कर्म करे, ततः वर्ततु शिष्यः। अर्थात्, एक तपस्वी को पहले स्वयं अच्छे कर्म करने चाहिए, तभी उसका शिष्य भी उसी मार्ग पर चलेगा। यह श्लोक गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व दर्शाता है।
Quick Tip: गुरु को स्वयं अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे शिष्य उसे देखकर प्रेरित हों।
आ) सिंहादेकं ………………………….. कुक्कुटात्॥
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सिंहादेकं न गृह्णीयात्, कुक्कुटात्। अर्थात्, सिंह से एक ही गुण सीखना चाहिए, लेकिन मुर्गे से कई बातें सीखने योग्य होती हैं। यह श्लोक हमें विभिन्न प्राणियों से शिक्षा लेने की प्रेरणा देता है।
Quick Tip: प्रकृति एवं जीवों से प्रेरणा लेकर मनुष्य को अपने जीवन में सद्गुणों को अपनाना चाहिए।
II. भावव्यक्तीकरणम् - सर्जनात्मकता
(4) अधः दत्तायः प्रश्नायः, एकस्य समाधानं लिखन्तु।
लोकहितं कथं करणीयम् ?
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लोकहितं करणीयं यतः समाजस्य उन्नतिरेव सर्वेषां हिताय भवति। परोपकारः, सत्यं, अहिंसा च मुख्याः मार्गाः भवन्ति लोकहितस्य सिद्धये।
Quick Tip: समाजस्य हिताय परोपकारं, नैतिकता च पालनं आवश्यकं भवति।
रघोः वदनंति अधिकृत्य स्वीयवाक्येः लिखन्तु।
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रघोः वदनंति सत्यं, धैर्यं च दृढतया प्रतिबिंबति। सः सत्यप्रियः, धर्मनिष्ठः च आसीत्।
Quick Tip: महापुरुषानां चरित्राणि अनुसरित्वा, आत्मानं प्रेरणया संमार्गे स्थापयामः।
अ) विवेकानन्दस्य आशयानां प्रशंसनम्: मित्राय पत्रं लिखन्तु।
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प्रिय मित्र,
स्वामी विवेकानन्दस्य विचाराः सर्वदा प्रेरणादायकाः भवन्ति। सः युवा शक्ति, आत्मविश्वासं, कर्मयोगं च उपदिशति। अस्माभिः अपि जीवनं तस्य विचारानुसारं नीयते।
तव मित्रः,
(नाम लिखन्तु)
Quick Tip: स्वामी विवेकानन्दस्य जीवनस्य अध्ययनं आत्मविकासाय प्रेरणादायकं अस्ति।
आ) इतप्रागपि किं किं शिख्षम इति कर्पत्रकं लिखन्तु।
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अस्माभिः अतीतेभ्यः शिक्षां गृहीत्वा आगामिनि जीवनं निर्मीयते। नीतिशिक्षा, परिश्रमः, धैर्यम्, सत्यं च जीवनस्य मूलाधारः।
Quick Tip: भूतकालेभ्यः शिक्षां गृह्णीयात्, भविष्योत्तमं करणीयम्।
III. भाषाशाः
(6) अधः दत्तयोः बहुविकल्पप्रश्नयोः, समुचितं समाधानं चित्वा लिखन्तु।
अ) रामः नाम ________ आसीत्। (‘‘राजन्’’ शब्दस्य प्रथमा विभक्तिरूपम्।)
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रामः नाम राजा आसीत्।
Quick Tip: संस्कृत भाषा में प्रथमा विभक्ति कर्ता को दर्शाती है और इसका प्रयोग कर्तृपद में होता है।
आ) गृहः सत्यं ________। (समुचितधातुरूपम्।)
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गृहः सत्यं वदति।
Quick Tip: संस्कृत में धातु रूपों को काल और कर्ता के अनुसार सही प्रकार से पहचानना आवश्यक होता है।
सूचना: अधः दत्तानां रेखांकितपदनाम् निर्देशानुसारं समाधानानि लिखन्तु।
इ) नेत्रः गृहे गच्छति। (संधिपदं विच्छेद्यत।)
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नेत्रः = नेत्र + अः, गृहे = गृहम् + ए, गच्छति = गम् + छति।
Quick Tip: संस्कृत संधि नियमों को पहचानकर शब्दों का सही रूप स्पष्ट किया जा सकता है।
ई) लोकेहितं कर्तव्यम्। (विपर्ययपदं लिखन्तु।)
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लोकेहितं कर्तव्यम् स्वार्थं न कर्तव्यम्।
Quick Tip: संस्कृत विपर्ययपदानि (विलोम शब्द) पाठ्यक्रम में विशेष स्थान रखते हैं।
उ) दानी दानं करोति। (समानार्थकपदं लिखन्तु।)
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दानी दानं करोति सत्पुरुषः दानं ददाति।
Quick Tip: समानार्थक शब्दों को जानकर वाक्य की विविधता बढ़ाई जा सकती है।
ऊ) वणिक् व्यापारं करोति। (समानार्थकपदं लिखन्तु।)
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वणिक् व्यापारं करोति कुशली विपणिं करोति।
Quick Tip: व्यापार और विपणि दोनों शब्द व्यवसाय को दर्शाते हैं।
ए) माता: एव रक्षिता। (विशेष्यधिकारं लिखन्तु।)
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माता: एव रक्षिता परिवारस्य रक्षिका।
Quick Tip: संस्कृत व्याकरण में विशेष्य और विशेषण का प्रयोग वाक्य को स्पष्ट करता है।
ऐ) सदा हितं कर्तव्यम्। (विशेष्यार्थकपदं लिखन्तु।)
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सदा हितं कर्तव्यम् नित्यं शुभं कर्तव्यम्।
Quick Tip: विशेष्यार्थक शब्दों का प्रयोग वाक्य की सटीकता को बढ़ाता है।



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