Bihar Board Class 12 Economics Question Paper 2023 with Answer Key pdf is available for download here. The exam was conducted by Bihar School Examination Board (BSEB). The question paper comprised a total of 138 questions divided among 2 sections.

Bihar Board Class 12 Economics Question Paper 2023 with Answer Key

Bihar Board Class 12 Economics Question Paper 2023 PDF Bihar Board Class 12 Economics Answer Key 2023 PDF
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Question 1:

ऐसी वस्तुएँ जिनका एक-दूसरे के बदले प्रयोग किया जाता है, कहलाती है।

  • (1) पूरक वस्तुएँ
  • (2) स्थानापन्न वस्तुएँ
  • (3) आरामदायक वस्तुएँ
  • (4) विलासिता वस्तुएँ
Correct Answer: (2) स्थानापन्न वस्तुएँ
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जिन वस्तुओं का उपयोग एक-दूसरे के स्थान पर किया जा सकता है (जैसे चाय–कॉफ़ी), उन्हें स्थानापन्न (substitutes) कहते हैं। पूरक (complements) वे हैं जो साथ‑साथ उपभोग होती हैं (जैसे चाय–चीनी)। Quick Tip: स्थानापन्न में कीमत बढ़ने पर दूसरी वस्तु की माँग बढ़ने की प्रवृत्ति देखें; पूरक में एक की कीमत बढ़े तो दोनों की माँग घट सकती है।


Question 2:

माँग वक्र की ढाल सामान्यतः होती है।

  • (1) बायें से दायें ऊपर की ओर
  • (2) बायें से दायें नीचे की ओर
  • (3) x-अक्ष के समान्तर
  • (4) x-अक्ष पर लम्बवत
Correct Answer: (2) बायें से दायें नीचे की ओर
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माँग का नियम कहता है कि अन्य स्थितियाँ समान रहने पर कीमत बढ़ने से माँग घटती है, इसलिए माँग वक्र की ढाल सामान्यतः ऋणात्मक होती है—बायें से दायें नीचे की ओर। Quick Tip: अक्षों को याद रखें: ऊर्ध्वाधर (y) = कीमत, क्षैतिज (x) = मात्रा; नकारात्मक संबंध ⇒ नीचे ढलान।


Question 3:

माँग का संकुचन तब होता है जब

  • (1) कीमत बढ़ती है और माँग घटती है
  • (2) कीमत बढ़ती है और माँग भी बढ़ती है
  • (3) कीमत स्थिर रहती है और माँग घटती है
  • (4) कीमत घटती है लेकिन माँग स्थिर रहती है
Correct Answer: (1) कीमत बढ़ती है और माँग घटती है
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संकुचन (contraction) of demand उसी माँग वक्र पर ऊपर की ओर गतिशीलता है जो कीमत बढ़ने से होती है। (3) में माँग का ह्रास (decrease) है—वक्र का बाँयी ओर सरण। Quick Tip: गतिशीलता = कीमत में परिवर्तन, सरण = अन्य कारकों में परिवर्तन (आय, रुचि, विज्ञापन आदि)।


Question 4:

राष्ट्रीय आय की गणना में निम्नलिखित में से किसे सम्मिलित किया जाता है ?

  • (1) नई अंतिम वस्तुएँ एवं सेवाएँ
  • (2) मध्यवर्ती वस्तुएँ
  • (3) पुरानी वस्तुओं का क्रय-विक्रय
  • (4) हस्तांतरण भुगतान
Correct Answer: (1) नई अंतिम वस्तुएँ एवं सेवाएँ
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दोहरी गणना से बचने हेतु केवल अंतिम (final) वस्तुओं/सेवाओं का चालू अवधि का मूल्य वर्धन जोड़ा जाता है। मध्यवर्ती वस्तुएँ, पुरानी वस्तुओं का पुनः क्रय-विक्रय, तथा हस्तांतरण भुगतान राष्ट्रीय आय में नहीं जोड़े जाते। Quick Tip: Value Added पद्धति सोचें: प्रत्येक चरण पर \(\textbf{आउटपुट − इंटरमीडिएट इनपुट}\) जोड़ें।


Question 5:

GNP अवस्फीतिक क्या है ?

  • (1) \( GNP अवस्फीतिक = \dfrac{नकद GNP \times 100}{वास्तविक GNP} \)
  • (2) \( GNP अवस्फीतिक = \dfrac{वास्तविक GNP \times 100}{नकद GNP} \)
  • (3) \( GNP अवस्फीतिक = \dfrac{वास्तविक GNP}{नकद GNP} \)
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (1) \( \displaystyle \text{GNP अवस्फीतिक} = \frac{\text{नकद GNP} \times 100}{\text{वास्तविक GNP}} \)
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GNP अवस्फीतिक (deflator) मूल्य स्तर का विस्तृत सूचकांक है: \(Deflator = \frac{Nominal (नकद) GNP}{Real (वास्तविक) GNP} \times 100\). Quick Tip: \(\textbf{Nominal}\) चालू कीमतों पर; \(\textbf{Real}\) स्थिर कीमतों पर—दोनों का अनुपात \(\times 100\) ही deflator देता है।


Question 6:

मूल्य वृद्धि से गिफिन वस्तुओं की माँग

  • (1) बढ़ जाती है
  • (2) घट जाती है
  • (3) स्थिर रहती है
  • (4) अस्थिर हो जाती है
Correct Answer: (1) बढ़ जाती है
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Giffen वस्तुओं में आय प्रभाव इतना प्रबल (ऋणात्मक) होता है कि कीमत बढ़ने पर भी उपभोक्ता सस्ती, निम्नतर वस्तु अधिक खरीदता है—परिणामस्वरूप माँग बढ़ती है। Quick Tip: सामान्य वस्तु: \(P\uparrow \Rightarrow Q\downarrow\). गिफिन: \(P\uparrow \Rightarrow Q\uparrow\) (विशेष/दुर्लभ स्थिति)।


Question 7:

आयताकार अतिपरवलयाकार माँग वक्र निम्न में से क्या दिखाता है ?

  • (1) पूर्ण बेलोचदार माँग
  • (2) पूर्ण लोचदार माँग
  • (3) इकाई माँग लोच
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (3) इकाई माँग लोच
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आयताकार अतिपरवलय (rectangular hyperbola) पर हर बिंदु पर \(P\times Q\) स्थिर रहता है, अतः \(\eta = 1\) (unitary elasticity)। Quick Tip: यदि कुल व्यय (P×Q) स्थिर रहे ⇒ माँग लोच \(\;= 1\) मानी जाती है।


Question 8:

आवश्यक वस्तुओं की माँग की लोच होती है।

  • (1) शून्य
  • (2) इकाई से अधिक
  • (3) असीमित
  • (4) इकाई से कम
Correct Answer: (4) इकाई से कम
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आवश्यक (necessities) की माँग कीमत के प्रति कम संवेदनशील होती है, इसलिए लोच \((\eta)\) सामान्यतः \(\,0<\eta<1\) होती है। Quick Tip: Necessities = कम लोच; Luxuries = अधिक लोच—याद रखने का नियम।


Question 9:

माँग की लोच कितने प्रकार की होती है ?

  • (1) सात
  • (2) तीन
  • (3) चार
  • (4) पाँच
Correct Answer: (4) पाँच
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सामान्य वर्गीकरण: (i) पूर्णतः बेलोचदार, (ii) पूर्णतः लोचदार, (iii) इकाई लोच, (iv) 1 से कम (अलोचदार), (v) 1 से अधिक (लोचदार) — कुल पाँच। Quick Tip: ग्राफ से याद रखें: पूर्णतः बेलोचदार = ऊर्ध्वाधर; पूर्णतः लोचदार = क्षैतिज।


Question 10:

निम्नांकित में से कौन-सा कथन सत्य है ?

  • (1) आवश्यक वस्तु की माँग की लोच शून्य होती है
  • (2) माँग की लोच गुणात्मक कथन है।
  • (3) माँग की लोच मापने के लिए प्रतिशत विधि का प्रतिपादन मार्शल ने किया था
  • (4) माँग की लोच छः प्रकार की होती है
Correct Answer: (3) माँग की लोच मापने के लिए प्रतिशत विधि का प्रतिपादन मार्शल ने किया था
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(1) आवश्यक वस्तुओं की लोच सामान्यतः \(\,0<\eta<1\) होती है, शून्य नहीं। (2) लोच एक मात्रात्मक माप है। (4) मानक वर्गीकरण पाँच प्रकार का माना जाता है। अतः (3) सत्य है। Quick Tip: विधियाँ याद रखें: Total Expenditure (Marshall), Percentage/Proportionate, Point (Marshall), Arc (Allen)।


Question 11:

सीमान्त उपयोग प्रवृत्ति (MPC)

  • (1) \( \dfrac{Y}{C} \)
  • (2) \( \dfrac{\Delta Y}{\Delta C} \)
  • (3) \( \dfrac{C}{Y} \)
  • (4) \( \dfrac{\Delta C}{\Delta Y} \)
Correct Answer: (4) \( \dfrac{\Delta C}{\Delta Y} \)
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सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति (MPC) का अर्थ है—आय में \(\Delta Y\) की एकाई वृद्धि से उपभोग में जितनी \(\Delta C\) वृद्धि होती है। अतः

\[ MPC=\frac{\Delta C}{\Delta Y}, \qquad 0

(1) व (3) औसत अनुपात हैं (APC या उसका व्युत्क्रम), जबकि

(2) \(\Delta Y/\Delta C\) MPC का उलटा है। Quick Tip: \(\textbf{MPC बनाम APC:}\) \( APC=\dfrac{C}{Y}\) (औसत), \( MPC=\dfrac{\Delta C}{\Delta Y}\) (सीमान्त)। प्रश्न में उपयोग लिखा है, प्रसंग उपभोग है।


Question 12:

``साम्य वह स्थिति है जिसमें गति की शुद्ध प्रवृत्ति न हो।'' यह कथन किसका है?

  • (1) बोल्डिंग
  • (2) स्टिगलर
  • (3) हिक्स
  • (4) चैम्बरलिन
Correct Answer: (3) हिक्स
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J.R. Hicks ने साम्य (equilibrium) को ऐसी स्थिति बताया जिसमें परिवर्तन की शुद्ध प्रवृत्ति न हो—अर्थात शक्ति‑संतुलन के कारण न आगे बढ़ने की न पीछे हटने की प्रवृत्ति हो। यह परिभाषा आंशिक व सामान्य दोनों साम्य पर लागू होती है। Quick Tip: साम्य = no net tendency to change; असाम्य = शक्तियों में असंतुलन ⇒ परिवर्तन की प्रवृत्ति।


Question 13:

व्यवस्था की जोखिम सहने के बदले में उद्यमी क्या प्राप्त करता है?

  • (1) ब्याज
  • (2) लगान
  • (3) मजदूरी
  • (4) लाभ
Correct Answer: (4) लाभ
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वितरण सिद्धान्त में लाभ (profit) उद्यमी को जोखिम व अनिश्चितता वहनतथा नवोन्मेष के प्रतिफल के रूप में मिलता है। ब्याज पूँजी का, लगान/किराया भूमि/सम्पदा का, और मजदूरी श्रम का प्रतिफल है। Quick Tip: याद रखें: भूमि→किराया, श्रम→मजदूरी, पूँजी→ब्याज, उद्यमिता→लाभ।


Question 14:

किसने राष्ट्रीय आय के लेखांकन का पहला प्रयास किया?

  • (1) कीन्स
  • (2) कुजनेट्स
  • (3) गाईगल
  • (4) ग्रेगरी किंग
Correct Answer: (4) ग्रेगरी किंग
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Gregory King (17वीं शताब्दी के अंत) ने इंग्लैंड की राष्ट्रीय आय का प्रारम्भिक अनुमान दिया। बाद में कुजनेट्स ने आधुनिक सांख्यिकीय पद्धतियों से राष्ट्रीय लेखांकन को विकसित किया, पर पहला प्रयास किंग का माना जाता है। Quick Tip: पहला अनुमान—ग्रेगरी किंग; आधुनिक मापन/शृंखला—साइमन कुजनेट्स।


Question 15:

एकाधिकार का माँग वक्र कैसा होता है?

  • (1) बेलोचदार
  • (2) लोचदार
  • (3) पूर्णतः लोचदार
  • (4) पूर्णतः बेलोचदार
Correct Answer: (2) लोचदार
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एकाधिकार फर्म पूरे बाज़ार का माँग वक्र सामना करती है जो नीचे की ओर ढलान वाला होता है। संतुलन बिंदु पर \(MR=MC\) होने के लिए माँग की लोच \(\varepsilon>1\) (लोचदार भाग) पर ही उत्पादन संभव है; पूर्णतः लोचदार/बेलोचदार नहीं। Quick Tip: मोनोपॉली में \(MR=AR\!\left(1-\dfrac{1}{\varepsilon}\right)\); लाभ–अधिकतम हेतु \(\varepsilon>1\) आवश्यक।


Question 16:

आर्थिक वृद्धि की अवधारणा अर्थशास्त्र की परिभाषा में किनके द्वारा सम्मिलित की गयी?

  • (1) एडम स्मिथ
  • (2) मार्शल
  • (3) रॉबिन्स
  • (4) सैमुअलसन
Correct Answer: (4) सैमुअलसन
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Paul A. Samuelson की आधुनिक परिभाषा में संसाधनों के दुर्लभता‑आवंटन के साथ-साथ काल आयाम और आर्थिक वृद्धि (growth over time) को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। स्मिथ/मार्शल की परिभाषाएँ कल्याण/धन पर केंद्रित थीं; रॉबिन्स ने दुर्लभता‑चयन पर बल दिया। Quick Tip: Samuelson = scarcity + choice + growth over time.


Question 17:

पूँजीगत खाता किसके अंतरण से सम्बन्धित है?

  • (1) पूँजीगत से
  • (2) वित्त से
  • (3) परिसम्पत्तियों से
  • (4) दायित्वों से
Correct Answer: (3) परिसम्पत्तियों से
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भुगतान संतुलन (BoP) का पूँजीगत खाता परिसम्पत्तियों/पूँजी के स्वामित्व‑अधिकारों के स्थानांतरण और वित्तीय दावों में बदलाव (FDI, FPI, ऋण आदि) को दर्ज करता है—अर्थात एसेट्स (और उनसे सम्बद्ध दायित्वों) की गतियाँ। Quick Tip: \(\textbf{Current Account}\) = वस्तु/सेवा/आय; \(\textbf{Capital/Financial}\) = assets & liabilities में परिवर्तन।


Question 18:

कुल आय और कुल उपभोग के अनुपात को क्या कहते हैं?

  • (1) औसत निवेश प्रवृत्ति
  • (2) औसत बचत प्रवृत्ति
  • (3) औसत उपभोग प्रवृत्ति
  • (4) सीमांत उपभोग प्रवृत्ति
Correct Answer: (3) औसत उपभोग प्रवृत्ति
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औसत उपभोग प्रवृत्ति (APC) की परिभाषा: \[ APC=\frac{C}{Y}=कुल उपभोग/कुल आय. \]
यह बताती है कि आय का औसतन कितना अंश उपभोग में व्यय हो रहा है। MPC \(\Delta C/\Delta Y\) होता है। Quick Tip: APC घटता‑बढ़ता रह सकता है; पर बहुत दीर्घावधि में प्रायः स्थिर/कम होता दिखता है।


Question 19:

किसने सबसे पहले स्फीतिक अन्तराल (Inflationary Gap) की अवधारणा प्रस्तुत की?

  • (1) रॉबर्ट्सन
  • (2) कीन्स
  • (3) हाल्म
  • (4) माल्थस
Correct Answer: (2) कीन्स
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J.M. Keynes ने पूर्ण रोजगार के निकट/पर कुल माँग और पूर्ण‑रोजगार उत्पादन के बीच अधिमाँग को Inflationary Gap की संज्ञा दी—युद्धकालीन वित्तन (How to Pay for the War, 1940) में इसका विश्लेषण मिलता है। यह अत्यधिक माँगजन्य स्फीति को समझाने का उपकरण है। Quick Tip: Inflationary Gap = AD at full employment - Full‑employment output (valued at base prices).


Question 20:

भुगतान संतुलन का घाटा किसके द्वारा ठीक किया जा सकता है?

  • (1) आयात प्रतिस्थापन
  • (2) निर्यात संवर्धन
  • (3) उत्पादन वृद्धि
  • (4) इनमें से सभी
Correct Answer: (4) इनमें से सभी
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BoP घाटा कम करने हेतु बहु‑आयामी उपाय अपनाए जाते हैं—आयात को घटाना/प्रतिस्थापित करना, निर्यात को बढ़ाना, घरेलू उत्पादन‑क्षमता व प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना, साथ ही विनिमय दर/पूँजी प्रवाह नीतियाँ। अतः सभी उपाय प्रासंगिक हैं। Quick Tip: AD–AS नज़र: विदेशी मुद्रा \(\uparrow\) लाने के लिए निर्यात \(\uparrow\), पूँजी प्रवाह \(\uparrow\); बाहर जाना घटाने के लिए आयात \(\downarrow\)।


Question 21:

किस बाजार में \(AR = MR\) होता है?

  • (1) एकाधिकार
  • (2) एकाधिकार प्रतिस्पर्धा
  • (3) पूर्ण प्रतिस्पर्धा
  • (4) अल्पाधिकार
Correct Answer: (3) पूर्ण प्रतिस्पर्धा
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पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म मूल्य‑स्वीकारी होती है; फर्म का माँग वक्र क्षैतिज (P = स्थिर) होता है। अतः \[ AR = \frac{TR}{Q} = P,\qquad MR=\frac{d(TR)}{dQ}=P \Rightarrow AR=MR. \]
अन्य बाजारों में \(AR\) ढलानयुक्त ⇒ \(MR < ar\).
Quick Tip: \(\textbf{Price taker}\) ⇒ \(P\) स्थिर ⇒ \(TR=P\cdot Q\) ⇒ \(MR=P=AR\).


Question 22:

निम्न में से कौन‑सा संबंध सही है?

  • (1) \( AR = MR \left(\dfrac{\varepsilon}{\varepsilon-1}\right) \)
  • (2) \( MC = MR \left(\dfrac{\varepsilon}{\varepsilon-1}\right) \)
  • (3) \( MR = MC \left(\dfrac{\varepsilon}{\varepsilon-1}\right) \)
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (1) \( AR = MR \left(\dfrac{\varepsilon}{\varepsilon-1}\right) \)
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TR \(=P(Q)\cdot Q\). अतः \[ MR=\frac{dTR}{dQ}=P+Q\frac{dP}{dQ}. \]
माँग‑लोच \(\varepsilon=-\dfrac{dQ}{dP}\cdot\dfrac{P}{Q}\Rightarrow Q\dfrac{dP}{dQ}=-\dfrac{P}{\varepsilon}\).
इसे MR में रखने पर \[ MR=P-\frac{P}{\varepsilon}=AR\!\left(1-\frac{1}{\varepsilon}\right). \]
अतः \(\displaystyle \frac{AR}{MR}=\frac{\varepsilon}{\varepsilon-1}\Rightarrow AR=MR\!\left(\frac{\varepsilon}{\varepsilon-1}\right).\) Quick Tip: \(\varepsilon>1\) (लोचदार भाग) पर \(MR>0\); \(\varepsilon=1\) पर \(MR=0\); \(\varepsilon<1\) पर \(MR<0\)।


Question 23:

नरसिंहम समिति का सम्बन्ध किससे है?

  • (1) कर सुधार
  • (2) बैंकिंग सुधार
  • (3) कृषि सुधार
  • (4) शिक्षा सुधार
Correct Answer: (2) बैंकिंग सुधार
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नरसिंहम समिति (1991 और 1998) ने भारत में बैंकिंग/वित्तीय क्षेत्र के ढाँचागत सुधारों—NPAs, पूँजी पर्याप्तता, prudential norms, प्रतिस्पर्धा व नियमन—संबंधी सिफारिशें दीं। Quick Tip: Narasimham I (1991) = संरचनात्मक सुधार; Narasimham II (1998) = NPA/Recapitalisation/मर्जर पर बल।


Question 24:

बैंकिंग लोकपाल योजना की घोषणा किस वर्ष की गई?

  • (1) 1990
  • (2) 1995
  • (3) 1997
  • (4) 2000
Correct Answer: (2) 1995
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भारतीय रिज़र्व बैंक ने Banking Ombudsman Scheme 1995 में आरम्भ की—ग्राहक शिकायत निवारण हेतु। बाद में इसे 2002, 2006 (और आगे) में संशोधित/विस्तारित किया गया। Quick Tip: याद रखने का तरीका: 1991—उदारीकरण; 1995—Ombudsman; 1998—Narasimham II.


Question 25:

प्रत्येक बाज़ार दशा में एक फर्म के संतुलन के लिए कौन‑सी शर्त आवश्यक है?

  • (1) \(AR=MC\)
  • (2) \(MR=MC\)
  • (3) \(MC\) वक्र \(MR\) वक्र को नीचे से काटे
  • (4) (2) और (3) दोनों
Correct Answer: (4) (2) और (3) दोनों
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लाभ‑अधिकतम संतुलन के लिए आवश्यक (first‑order) शर्त \(MR=MC\) है। पर्याप्त (second‑order) शर्त—उस बिंदु पर \(MC\) बढ़ती (उर्ध्वमुख) हो, अर्थात \(MC\) वक्र \(MR\) को नीचे से काटे। केवल \(MR=MC\) कह देने से अधिकतम/न्यूनतम में भेद स्पष्ट नहीं होता। Quick Tip: Rule of thumb: \(MR=MC\) & \(dMC/dQ>0\) (या \(MC\) cuts \(MR\) from below) ⇒ स्थिर संतुलन।


Question 26:

`General Theory of Employment, Interest and Money' नामक पुस्तक के लेखक कौन हैं?

  • (1) जे. बी. से
  • (2) जे. एम. कीन्स
  • (3) जे. एस. मिल
  • (4) रिकार्डो
Correct Answer: (2) जे. एम. कीन्स
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यह पुस्तक J.M. Keynes (1936) की रचना है, जिसने पारम्परिक/क्लासिकल धारणा (पूर्ण रोजगार, Say’s Law) को चुनौती देकर प्रभावी माँग (effective demand), निवेश–बचत असंतुलन, तरलता वरीयता (liquidity preference) और अनैच्छिक बेरोज़गारी जैसे विचारों से आधुनिक समष्टि अर्थशास्त्र की नींव रखी। Quick Tip: याद रखें—Employment, Interest and Money शब्द देखकर सीधे \(\textbf{Keynes (1936)}\) याद करें।


Question 27:

कौन-सा कथन सत्य है?

  • (1) \( MPC + MPS = 0 \)
  • (2) \( MPC + MPS < 1 \)
  • (3) \( MPC + MPS = 1 \)
  • (4) \( MPC + MPS > 1 \)
Correct Answer: (3) \( \text{MPC} + \text{MPS} = 1 \)
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आय का विभाजन उपभोग \((C)\) और बचत \((S)\) में होता है: \(Y=C+S\)। अतः सीमांत रूप में \(\Delta Y=\Delta C+\Delta S\Rightarrow \frac{\Delta C}{\Delta Y}+\frac{\Delta S}{\Delta Y}=1\), यानि \(\textbf{MPC+MPS=1}\)। दोनों का मान 0 और 1 के बीच रहता है। Quick Tip: \(APC=\dfrac{C}{Y}\) और \(MPC=\dfrac{\Delta C}{\Delta Y}\); उसी तरह \(APS=\dfrac{S}{Y}\), \(MPS=\dfrac{\Delta S}{\Delta Y}\) और \(APC+APS=1\) भी सत्य है।


Question 28:

अन्य बातें समान रहें तो वस्तु की कीमत तथा पूर्ति की मात्रा में धनात्मक सम्बन्ध व्यक्त करता है?

  • (1) माँग का नियम
  • (2) पूर्ति का नियम
  • (3) पूर्ति की लोच
  • (4) पूर्ति फलन
Correct Answer: (2) पूर्ति का नियम
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पूर्ति का नियम कहता है कि \(ceteris paribus\) कीमत \((P)\) बढ़ने पर आपूर्तिकर्ता अधिक मात्रा \((Q_s)\) उपलब्ध कराते हैं—लाभ‑प्रेरणा और बढ़ती सीमांत लागत के कारण \(P\uparrow \Rightarrow Q_s\uparrow\)। इसलिए पूर्ति वक्र प्रायः ऊर्ध्वगामी होता है। (1) माँग का नियम \(\,P\uparrow \Rightarrow Q_d\downarrow\) बताता है; (3) लोच मापन है, नियम नहीं। Quick Tip: अपवाद: perishable वस्तुएँ, time‑lags, fixed capacity—अल्पकाल में ढाल कम/स्थिर हो सकती है।


Question 29:

सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति (MPC) निम्न में से कौन है?

  • (1) \( \dfrac{\Delta Y}{\Delta C} \)
  • (2) \( \dfrac{\Delta C}{\Delta Y} \)
  • (3) \( \dfrac{\Delta Y}{\Delta I} \)
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (2) \( \dfrac{\Delta C}{\Delta Y} \)
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Keynesian उपभोग फलन \(C=a+cY\) में \(c=\dfrac{dC}{dY}\) ही MPC है—आय में \(\Delta Y\) वृद्धि से उपभोग में \(\Delta C\) की वृद्धि। इसलिए \(MPC=\dfrac{\Delta C}{\Delta Y}\) (0 और 1 के बीच)। (1) उसका व्युत्क्रम, (3) निवेश गुणक से संबंधित है। Quick Tip: \(MPC\uparrow \Rightarrow\) \(\textbf{गुणक}\) \(k=\dfrac{1}{1-MPC}\uparrow\) — समान निवेश से अधिक आय‑वृद्धि।


Question 30:

निम्नांकित में से कौन-सा कथन सत्य है?

  • (1) अल्पकाल में पूर्ति पूर्णतः लोचदार होती है।
  • (2) पूर्ति की लोच की श्रेणियों को तीन भागों में बाँटा जा सकता है।
  • (3) किसी वस्तु की पूर्ति की लोच उस वस्तु की प्रकृति पर निर्भर नहीं करती है
  • (4) पूर्ति लोच की माप की \(\textbf{दो}\) विधियाँ हैं
Correct Answer: (4) पूर्ति लोच की माप की दो विधियाँ हैं
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पूर्ति‑लोच (Elasticity of Supply) मापन की मानक दो विधियाँ—बिंदु (point) और आर्क (arc)—स्वीकार्य हैं। (1) गलत; अल्पकाल में क्षमता सीमाएँ होने से पूर्ति कम लोचदार रहती है। (2) सामान्य वर्गीकरण पाँच प्रकार का माना जाता है (शून्य, इकाई से कम, इकाई, इकाई से अधिक, पूर्णतः लोचदार)। (3) प्रकृति/तकनीक/समयावधि पर लोच अवश्य निर्भर करती है। Quick Tip: आरेख पर \(\eta_s=\dfrac{P}{Q}\cdot\dfrac{dQ}{dP}\). Point—अत्यल्प परिवर्तन; Arc—क्षेत्र/दो बिंदुओं के बीच औसत।


Question 31:

जब कुल उपयोगिता अधिकतम होती है तब सीमांत उपयोगिता

  • (1) धनात्मक होती है
  • (2) ऋणात्मक होती है
  • (3) शून्य होती है
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (3) शून्य होती है
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कार्डिनल उपयोगिता सिद्धान्त के अनुसार \(MU=\dfrac{d(TU)}{dq}\)। जब TU अधिकतम होती है, उसका ढाल \(MU=0\) होता है; इसके बाद अतिरिक्त इकाइयाँ असंतोष/भीड़‑भाव के कारण \(MU<0\) कर सकती हैं जिससे TU घटने लगती है। Quick Tip: सार: \( MU>0 \Rightarrow TU\uparrow,\; MU=0 \Rightarrow TU\) अधिकतम, \( MU<0 \Rightarrow TU\downarrow\).


Question 32:

सबसे पहले किसने ‘माइक्रो’ शब्द का प्रयोग किया?

  • (1) मार्शल
  • (2) बॉल्डिंग
  • (3) कीन्स
  • (4) रेजनर फ़्रिश
Correct Answer: (4) रेजनर फ़्रिश
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Ragnar Frisch (1933) ने अर्थशास्त्र को माइक्रो और मैक्रो में विभाजित कर शब्दावली स्थापित की। माइक्रो—व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन; मैक्रो—समष्टि चर (आय, मूल्य‑स्तर, बेरोज़गारी) का अध्ययन। Quick Tip: Frisch (1933) = micro/macro पद; Keynes (1936) = General Theory.


Question 33:

किस अर्थव्यवस्था में कीमत तंत्र के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं?

  • (1) समाजवादी
  • (2) पूँजीवादी
  • (3) साम्यवादी
  • (4) मिश्रित
Correct Answer: (2) पूँजीवादी
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पूँजीवादी/बाज़ार अर्थव्यवस्था में कीमत तंत्र (price mechanism) संसाधनों के आवंटन का मुख्य उपकरण है—माँग‑पूर्ति से बनी कीमतें संकेत भेजती हैं और उत्पादन/उपभोग के निर्णय निर्देशित होते हैं। समाजवादी में केन्द्रीय नियोजन प्रभावी है; मिश्रित में दोनों का मेल। Quick Tip: Price = incentive + information: उच्च कीमत ⇒ उत्पादन बढ़ाने का संकेत।


Question 34:

निम्नलिखित में से किसके अनुसार ``मुद्रा वह धुरी है जिसके चारों ओर समस्त अर्थव्यवस्था चक्कर लगाती है''?

  • (1) कीन्स
  • (2) रॉबर्टसन
  • (3) मार्शल
  • (4) हॉटरि (Hawtrey)
Correct Answer: (3) मार्शल
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यह प्रसिद्ध उक्ति Alfred Marshall की है, जो मुद्रा की केन्द्रीय भूमिका को दर्शाती है—लेन‑देन का माध्यम, मूल्य‑मापन, भविष्य देनदारियों का मानक और संचय का साधन; अतः समूची आर्थिक गतिविधियाँ मुद्रा के इर्द‑गिर्द संगठित होती हैं। Quick Tip: Marshall \(\Rightarrow\) Money as the pivot; Robertson \(\Rightarrow\) परिभाषाएँ; Keynes \(\Rightarrow\) मौद्रिक नीति व मैक्रो सिद्धान्त।


Question 35:

एक समाजवादी अर्थव्यवस्था का मूल उद्देश्य होता है

  • (1) अधिकाधिक उत्पादन
  • (2) आर्थिक स्वतंत्रता
  • (3) मुनाफा कमाना
  • (4) अधिकतम लोक कल्याण
Correct Answer: (4) अधिकतम लोक कल्याण
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समाजवादी व्यवस्था में प्रमुख साधनों पर सामाजिक स्वामित्व तथा योजनाबद्ध संसाधन‑आवंटन द्वारा समानता और लोक‑कल्याण प्राप्त करना ध्येय होता है। (3) निजी लाभ सर्वोपरि पूँजीवाद का लक्ष्य है; (2) आर्थिक स्वतन्त्रता सीमित होती है। Quick Tip: Equity & Welfare समाजवाद का मूल; Efficiency & Profit पूँजीवाद का मूल।


Question 36:

निवेश गुणक क्या होगा यदि सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) \(0.2\) हो?

  • (1) 200
  • (2) 5
  • (3) 2
  • (4) 1.20
Correct Answer: (2) 5
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Keynesian गुणक \(k\) का सूत्र: \(k=\dfrac{1}{1-c}=\dfrac{1}{MPS}\). जब \(MPS=0.2\Rightarrow k=\dfrac{1}{0.2}=5\). इसका अर्थ—स्वायत्त निवेश में 1 इकाई वृद्धि से आय 5 इकाइयों तक बढ़ेगी (अन्य बातें समान)। Quick Tip: \(MPC+ MPS=1\). \(MPC\) जितनी अधिक, \(k\) उतना बड़ा।


Question 37:

निम्न में कौन समाजवादी अर्थव्यवस्था की विशेषता नहीं है?

  • (1) सामाजिक स्वामित्व
  • (2) आर्थिक स्वतंत्रता
  • (3) प्रतियोगिता की अनुपस्थिति
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (2) आर्थिक स्वतंत्रता
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समाजवाद में उत्पादन के साधनों पर सामूहिक/राज्य स्वामित्व और नियोजन प्रमुख है; व्यापक आर्थिक स्वतंत्रता (private choice, profit‑seeking) इसकी विशेषता नहीं है। प्रतिस्पर्धा सीमित/अनुपस्थित रहती है। Quick Tip: Private ownership \(\uparrow\) & freedom \(\uparrow\) ⇒ पूँजीवाद; Public ownership \(\uparrow\) & planning ⇒ समाजवाद।


Question 38:

‘अर्थशास्त्र का अध्ययन’ व्यक्ति अर्थशास्त्र एवं समष्टि अर्थशास्त्र में किस वर्ष विभाजित हुआ?

  • (1) 1930
  • (2) 1933
  • (3) 1931
  • (4) 1935
Correct Answer: (2) 1933
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1933 में Ragnar Frisch ने micro और macro शब्दों को औपचारिक रूप से स्थापित किया—व्यक्तिगत इकाइयों का विश्लेषण बनाम समष्टि चर का विश्लेषण—जिससे अर्थशास्त्र के अध्ययन की दो शाखाएँ स्पष्ट हुईं। Quick Tip: Frisch (1933) ⇒ micro/macro; Keynes (1936) ⇒ General Theory.


Question 39:

जब किसी अर्थव्यवस्था का संबंध किसी दूसरे देश से हो, तो उसे क्या कहा जाता है?

  • (1) खुली अर्थव्यवस्था
  • (2) बन्द अर्थव्यवस्था
  • (3) आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था
  • (4) मिश्रित अर्थव्यवस्था
Correct Answer: (1) खुली अर्थव्यवस्था
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Open economy वह है जहाँ विदेश व्यापार/पूँजी प्रवाह की अनुमति होती है और मूल्य/आय का निर्धारण बाह्य क्षेत्र से प्रभावित होता है। (2) बंद अर्थव्यवस्था में विदेशी क्षेत्र अनुपस्थित माना जाता है। Quick Tip: मॉडलिंग में—खुली अर्थव्यवस्था \(NX\neq 0\) (निर्यात–आयात), बंद अर्थव्यवस्था \(NX=0\)।


Question 40:

निम्नांकित में से कौन संकुचित मुद्रा (Narrow Money) है?

  • (1) \(M_1\)
  • (2) \(M_2\)
  • (3) \(M_3\) एवं \(M_4\)
  • (4) \(M_1\) एवं \(M_2\)
Correct Answer: (4) \(M_1\) एवं \(M_2\)
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भारतीय मनी‑एग्रीगेट वर्गीकरण (RBI) में संकुचित मुद्रा में \(M_1\) तथा \(M_2\) को रखा जाता है—सबसे अधिक तरल घटक: \(M_1=\) चालू मुद्रा + माँग जमा + RBI में अन्य जमा; \(M_2=M_1+\) डाक बचत/अन्य निकट‑तरल जमा। \(M_3, M_4\) व्यापक (broad) मनी हैं। Quick Tip: याद रखें—तरलता क्रम: \(M_1\) (सबसे तरल) \(\rightarrow\) \(M_2\) \(\rightarrow\) \(M_3\) \(\rightarrow\) \(M_4\) (सबसे व्यापक)।


Question 41:

सट्टा के उद्देश्य से मुद्रा की माँग किस पर निर्भर करती है?

  • (1) राष्ट्रीय आय
  • (2) मूल्य स्तर
  • (3) बाज़ार ब्याज दर
  • (4) व्यय
Correct Answer: (3) बाज़ार ब्याज दर
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Keynesian speculative demand for money \(L_2\) व्यक्तियों की भविष्य की ब्याज‑दर अपेक्षाओं पर निर्भर है—\(\,i\downarrow \Rightarrow \,L_2\uparrow\) क्योंकि बांड कीमतें ऊँची हैं और दर के बढ़ने के जोखिम से लोग मुद्रा धारण करते हैं। इसलिए \(L_2=f(i)\) घटता संबंध है। Quick Tip: कुल माँग \(L=L_1(Y)+L_2(i)\): transactions/precautionary \(L_1\) आय पर; speculative \(L_2\) ब्याज दर पर।


Question 42:

गुणक \( \dfrac{1}{1-c} \) में \(c\) क्या है?

  • (1) उपभोग
  • (2) सीमांत उपभोग प्रवृत्ति
  • (3) उपभोग का जीवन निर्वाह स्तर
  • (4) पूँजी
Correct Answer: (2) सीमांत उपभोग प्रवृत्ति
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सरल Keynesian निवेश गुणक \(k=\dfrac{1}{1-c}\) में \(c=\textbf{MPC}\) है। \(c\) जितना बड़ा (लोग अतिरिक्त आय का उतना अधिक भाग उपभोग में खर्च करते हैं), गुणक उतना अधिक और आय‑परिणाम उतना बड़ा। Quick Tip: यदि \(c=0.8\Rightarrow k=5\); यदि \(c=0.5\Rightarrow k=2\) — नीति‑निर्माण में महत्त्वपूर्ण।


Question 43:

निम्न में से किसने एकाधिकार प्रतिस्पर्धिता (Monopolistic Competition) की धारणा दी?

  • (1) हिक्स
  • (2) चैम्बरलिन
  • (3) श्रीमती रॉबिन्सन
  • (4) सैमुअलसन
Correct Answer: (2) चैम्बरलिन
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E.H. Chamberlin (1933) ने The Theory of Monopolistic Competition में भेदुकृत (differentiated) उत्पादों, विक्रय‑व्यय और ब्रांड प्रतिस्पर्धा के साथ ऐसे बाजार का विश्लेषण किया जिसमें अनेक फर्में होती हैं, पर प्रत्येक को कुछ मूल्य‑नियंत्रण (market power) प्राप्त होता है। Quick Tip: Joan Robinson (1933)—Imperfect Competition; Chamberlin—Monopolistic Competition.


Question 44:

भुगतान संतुलन में असंतुलन का निम्न में से कौन अधिक कारण है?

  • (1) अंतरराष्ट्रीय सम्बन्ध
  • (2) राजनीतिक अस्थिरता
  • (3) व्यापार चक्र
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (3) व्यापार चक्र
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समय‑समय पर व्यापार चक्र (boom–recession) के कारण आयात‑निर्यात, पूँजी प्रवाह और आय/माँग में उतार‑चढ़ाव होता है, जो BoP को असंतुलित कर देता है। शेष विकल्प भी प्रभाव डालते हैं, पर आवर्ती और व्यापक प्रभाव का प्रमुख कारण trade cycle है। Quick Tip: Boom ⇒ आयात \(\uparrow\), कीमतें \(\uparrow\) ⇒ घाटा; मंदी ⇒ आयात \(\downarrow\) ⇒ अधिशेष की प्रवृत्ति।


Question 45:

दृश्य मदों (Visible items) के अन्तर्गत किसे शामिल किया जाता है?

  • (1) बैंकिंग
  • (2) सूचना
  • (3) मशीन
  • (4) बीमा
Correct Answer: (3) मशीन
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Visible items माल/वस्तुओं (merchandise) के भौतिक आयात‑निर्यात को दर्शाते हैं—जैसे कपड़ा, मशीन, खाद्यान्न आदि। बैंकिंग/बीमा/पर्यटन/रॉयल्टी जैसी सेवाएँ invisible items में आती हैं। Quick Tip: Trade balance = \(\textbf{visible}\) निर्यात − आयात; current account = visible + invisible + आय/हस्तांतरण।


Question 46:

निम्नांकित में से कौन‑सी वस्तु किसी देश के भुगतान संतुलन में चालू खाते के क्रेडिट पक्ष में दर्ज की जाएगी?

  • (1) विदेश से ऋण
  • (2) मशीनरी का आयात
  • (3) चाय का निर्यात
  • (4) विदेशी प्रत्यक्ष निवेश
Correct Answer: (3) चाय का निर्यात
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चालू खाता वस्तुओं/सेवाओं के प्रवाह को दर्ज करता है। निर्यात विदेशी मुद्रा लाता है—इसलिए क्रेडिट (receipts) पक्ष में। (1) व (4) पूँजी/वित्तीय खाते के क्रेडिट हैं; (2) आयात डेबिट में जाता है। Quick Tip: Credit = विदेशी मुद्रा प्रवाह अन्दर; Debit = प्रवाह बाहर।


Question 47:

निम्नलिखित में से कौन‑सा कथन गलत है?

  • (1) लेखांकन की दृष्टि से भुगतान‑शेष सदैव संतुलन की दशा में रहता है।
  • (2) निजी ऋण का भुगतान पूँजी खाते को देनदारी प्रविष्टि में आता है।
  • (3) अदृश्य मदों के अन्तर्गत कपड़ा और मशीन को शामिल किया जाता है।
  • (4) व्यापार‑शेष में दृश्य मदें सम्मिलित होती हैं।
Correct Answer: (3) अदृश्य मदों के अन्तर्गत कपड़ा और मशीन को शामिल किया जाता है।
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कपड़ा/मशीन visible (माल) हैं; अतः (3) गलत। (1) BoP by accounting हमेशा बराबर बनता है (असंतुलन basic या overall की अवधारणा से व्यक्त किया जाता है)। (2) निजी ऋण का भुगतान पूँजी डेबिट में आता है—देयता में कमी। (4) व्यापार‑शेष = दृश्यमदों का शेष। Quick Tip: BoP always balances क्योंकि \(Credit=Debit\) (statistical discrepancy सहित)।


Question 48:

रोज़गार गुणक सिद्धान्त के जनक कौन थे?

  • (1) कीन्स
  • (2) काह्न
  • (3) हेंसन
  • (4) मार्शल
Correct Answer: (2) काह्न
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R.F. Kahn (1931) ने Employment Multiplier की परिकल्पना दी—एक प्राथमिक रोजगार के सृजन से व्युत्पन्न (secondary) रोजगार के कई दौर बनते हैं। Keynes ने 1936 में इसे Investment Multiplier के रूप में आय‑निर्धारण में प्रतिपादित किया। Quick Tip: Kahn ⇒ employment multiplier, Keynes ⇒ income/investment multiplier.


Question 49:

उत्पत्ति (ह्रास) नियम लागू होने के मुख्य कारण कौन‑सा है?

  • (1) साधनों की सीमितता
  • (2) साधनों का अपूर्ण स्थानापन्न
  • (3) (1) और (2) दोनों
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (3) (1) और (2) दोनों
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उदासीनता वक्र सिद्धान्त में घटती सीमांत प्रतिस्थापन दर (diminishing MRS) तथा उत्पादन सिद्धान्त में घटते प्रतिफल—दोनों की आधारभूत वजहें हैं: (i) संसाधनों/वस्तुओं की सीमितता और (ii) उनका अपूर्ण स्थानापन्न होना; इसलिए क्रमशः उपभोग में एक वस्तु को दूसरी से बदलना कठिन होता जाता है और उत्पादन में स्थिर कारकों के कारण सीमांत उत्पाद घटता है। Quick Tip: \(Scarcity + Imperfect Substitutability\Rightarrow\) वक्रों का convex होना, और उत्पादन में diminishing returns।


Question 50:

किसी वस्तु में मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति की क्षमता को क्या कहते हैं? इसकी

  • (1) उत्पादकता
  • (2) सन्तुष्टि
  • (3) उपयोगिता
  • (4) लाभदायकता
Correct Answer: (3) उपयोगिता
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अर्थशास्त्र में उपयोगिता (utility) किसी वस्तु/सेवा की वह विशेषता है जिससे इच्छा‑पूर्ति होती है—यह आनन्द/नैतिकता से निरपेक्ष अवधारणा है। उत्पादकता उत्पादन‑क्षमता का, लाभदायकता वित्तीय लाभ का माप है—दोनों utility के पर्याय नहीं। Quick Tip: Utility ≠ usefulness; यह \(\textbf{want‑satisfying power}\) है—व्यक्तिनिष्ठ (subjective)।


Question 51:

निम्नलिखित में से किसके अनुसार ``मुद्रा वह है जो मुद्रा का कार्य करे''?

  • (1) हार्टले विदर्स
  • (2) हॉट्रे
  • (3) प्रो. थामस
  • (4) कीन्स
Correct Answer: (1) हार्टले विदर्स
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यह कार्यात्मक परिभाषा (functional definition) है—मुद्रा की पहचान उसके कार्यों से होती है, न कि उसके भौतिक रूप से। हार्टले विदर्स के अनुसार जो वस्तु विनिमय का माध्यम, लेखा की इकाई, मूल्य का संचय और स्थगित भुगतान का मानक जैसे कार्य विश्वसनीय रूप से कर दे, वही मुद्रा है। इस परिभाषा का लाभ यह है कि इतिहास में सिक्का, कागज़ी नोट, बैंक जमा या डिजिटल बैलेंस—सभी को मुद्रा मानना संभव हो जाता है बशर्ते वे मुद्रा जैसे कार्य कर रहे हों। Quick Tip: Money is what money does—कार्यों को याद रखें:

\(\textbf{Medium of Exchange, Unit of Account, Store of Value, Standard of Deferred Payment}\).


Question 52:

निम्नलिखित में से कौन-सा मुद्रा का कार्य नहीं है?

  • (1) विनिमय का माध्यम
  • (2) कीमत स्थिरता
  • (3) मूल्य संचय
  • (4) लेखा की इकाई
Correct Answer: (2) कीमत स्थिरता
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मुद्रा के मूल कार्य—विनिमय का माध्यम, लेखा/मूल्य की इकाई, मूल्य का संचय और स्थगित भुगतान का मानक—स्वीकृत हैं। कीमत स्थिरता मुद्रा का कार्य नहीं, बल्कि मौद्रिक/आर्थिक नीति का लक्ष्य है। कीमत स्थिर रखने के लिए केंद्रीय बैंक मुद्रा‑आपूर्ति, ब्याज दर, आरक्षित अनुपात आदि साधनों का प्रयोग करता है, पर स्वयं मुद्रा यह कार्य करती नहीं। Quick Tip: Functions बनाम Objectives: Currency के \(\textbf{कार्य}\) 4; \(\textbf{लक्ष्य}\)—मुद्रास्फीति नियंत्रण, विकास, स्थिरता आदि।


Question 53:

मुद्रा के स्थैतिक एवं गतिशील कार्यों का विभाजन किसने किया?

  • (1) रैगनर फ़्रिश
  • (2) पॉल एंजिग
  • (3) मार्शल
  • (4) हॉट्रे
Correct Answer: (2) पॉल एंजिग
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मुद्रा के कार्यों को कई विद्वानों ने वर्गीकृत किया है, पर पॉल एंजिग (Paul Einzig) ने उन्हें स्थैतिक और गतिशील दो श्रेणियों में बाँटा। स्थैतिक कार्य वे हैं जो रोज़मर्रा के लेन–देन में स्थिर भूमिका निभाते हैं—जैसे विनिमय माध्यम, मूल्य मापक, भुगतान की इकाई और मूल्य संचय। इसके विपरीत गतिशील कार्य अर्थव्यवस्था की गति और विकास को प्रभावित करते हैं—जैसे ऋण-सृजन, निवेश प्रवाह, आय–उत्पादन पर प्रभाव, तथा व्यापार–चक्रों में मुद्रा की भूमिका। रैगनर फ़्रिश का प्रमुख योगदान इकोनोमेट्रिक्स/डायनामिक्स में, मार्शल का मूल्य-सिद्धांत में और हॉट्रे का मौद्रिक व्यापार–चक्रों में रहा; इसलिए स्थैतिक–गतिशील विभाजन का श्रेय एंजिग को दिया जाता है। Quick Tip: याद रखें: \(\textbf{एंजिग = Static & Dynamic functions of money}\); static = रोज़मर्रा कार्य, dynamic = ऋण, निवेश, चक्रों पर प्रभाव।


Question 54:

दीर्घकालीन उत्पादन फलन का सम्बन्ध निम्न में से किससे है?

  • (1) माँग के नियम
  • (2) उत्पत्ति वृद्धि नियम
  • (3) पैमानों का प्रतिफल नियम (Returns to Scale)
  • (4) माँग की लोच
Correct Answer: (3) पैमानों का प्रतिफल नियम (Returns to Scale)
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दीर्घकाल (long run) में सभी कारक परिवर्ती होते हैं; इसलिए उत्पादन फलन \(Q=f(L,K,\ldots)\) में इनपुटों के समानुपाती परिवर्तन से आउटपुट कैसे बदलता है—इसी को पैमाने के प्रतिफल कहते हैं:


अल्पकाल में चर के प्रतिफल (Law of Variable Proportions) का अध्ययन होता है, पर दीर्घकालीन उत्पादन विश्लेषण returns to scale पर केन्द्रित रहता है। Quick Tip: Short run ⇒ कुछ कारक स्थिर ⇒ \(\textbf{Variable Proportions}\); Long run ⇒ सभी कारक परिवर्ती ⇒ \(\textbf{Returns to Scale}\).


Question 55:

उत्पादन का सक्रिय साधन है—

  • (1) पूँजी
  • (2) श्रम
  • (3) भूमि
  • (4) संगठन
Correct Answer: (2) श्रम
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क्लासिकल वर्गीकरण में भूमि और पूँजी निष्क्रिय (passive) कारक हैं—वे स्वयं कुछ नहीं करते जब तक कोई श्रम (मानव प्रयत्न) उन्हें उत्पादन में न लगाए। इसलिए श्रम को सक्रिय कारक कहा जाता है। आधुनिक सिद्धान्त में उद्यमिता/संगठन भी सक्रिय मानी जाती है, पर पारम्परिक उत्तर में labour को ही the active factor स्वीकार किया जाता है। Quick Tip: याद रखें: Land/Capital—passive inputs; \(\textbf{Labour/Entrepreneur}\)—active/organising inputs।


Question 56:

साख (क्रेडिट) गुणक होता है—

  • (1) \( \dfrac{1}{CRR} \)
  • (2) नकद \(+\) \( \dfrac{1}{CRR} \)
  • (3) नकद \(+\) \(CRR\)
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (1) \( \dfrac{1}{\text{CRR}} \)
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सरल जमा‑सृजन मॉडल में वाणिज्यिक बैंक आरक्षित अनुपात (cash reserve ratio, \(rr\) या CRR) रखते हैं और शेष ऋण देते हैं। डिपॉज़िट/क्रेडिट गुणक \[ m=\frac{1}{rr}=\frac{1}{CRR} \]
बताता है कि प्रारम्भिक जमा से अधिकतम कितनी अधिशेष जमा/साख प्रणाली में बन सकती है। उदाहरण: \(CRR=0.2\Rightarrow m=5\)। व्यावहारिक रूप में मनी‑मल्टीप्लायर में करेंसी‑डिपॉज़िट अनुपात और अधिशेष आरक्षित भी शामिल हो सकते हैं, फिर भी परीक्षाओं में आधारभूत रूप \(1/CRR\) ही पूछा जाता है। Quick Tip: CRR \(\uparrow\) ⇒ गुणक \(m\downarrow\) ⇒ जमा‑सृजन क्षमता घटती; CRR \(\downarrow\) ⇒ \(m\uparrow\) ⇒ साख विस्तार।


Question 57:

निम्नलिखित में से कौन स्थिर लागत नहीं है?

  • (1) बीमे का प्रीमियम
  • (2) ब्याज
  • (3) कच्चे माल की लागत
  • (4) फैक्ट्री का किराया
Correct Answer: (3) कच्चे माल की लागत
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स्थिर लागत (Fixed Cost) वह है जो उत्पादन‑मात्रा बदलने पर अल्पकाल में नहीं बदलती—किराया, बीमा, स्थायी कर्मचारियों का वेतन, पूँजी पर ब्याज आदि। कच्चा माल सीधे उत्पादन‑मात्रा पर निर्भर होता है, इसलिए यह चर लागत (Variable Cost) में आता है। Quick Tip: Short run: \(TC=FC+VC\). \(Q=0\) पर भी \(FC>0\), पर \(VC=0\).


Question 58:

जब औसत लागत घट रही हो, तब सीमांत लागत औसत लागत की तुलना में—

  • (1) \(MC>AC\)
  • (2) \(MC=AC\)
  • (3) \(MC < ac\)
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (3) \(MC View Solution


Question 59:

भारतीय रिज़र्व बैंक है—

  • (1) केंद्रीय बैंक
  • (2) व्यावसायिक बैंक
  • (3) सहकारी बैंक
  • (4) ग्रामीण बैंक
Correct Answer: (1) केंद्रीय बैंक
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RBI भारत का केंद्रीय बैंक है—मुद्रा निर्गमन, बैंकिंग पर्यवेक्षण, अंतिम ऋणदाता, विदेशी मुद्रा प्रबंधन, भुगतान‑प्रणाली, मौद्रिक नीति आदि के लिए जिम्मेदार। व्यावसायिक/सहकारी/ग्रामीण बैंक इसके अधीन कार्य करते हैं। Quick Tip: केंद्रीय बैंक के \(\textbf{दो}\) क्लासिक कार्य: note issue और banker to banks & government.


Question 60:

मुद्रा पूर्ति का नियमन कौन करता है?

  • (1) भारत सरकार
  • (2) रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया
  • (3) व्यावसायिक बैंक
  • (4) योजना आयोग
Correct Answer: (2) रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया
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मौद्रिक नीति के माध्यम से RBI मुद्रा‑आपूर्ति और ऋण स्थितियों को नियंत्रित करता है—CRR/SLR, रेपो/रिवर्स‑रेपो दरें, OMOs, LAF, मैक्रो‑प्रुडेंशियल उपाय आदि। सरकार फिस्कल नीति बनाती है; व्यावसायिक बैंक RBI के नियामकीय ढाँचे के भीतर कार्य करते हैं। Quick Tip: \(\uparrow\) रेपो/CRR ⇒ तरलता घटे ⇒ मुद्रा पूर्ति \(\downarrow\); \(\downarrow\) रेपो/CRR ⇒ तरलता बढ़े ⇒ मुद्रा पूर्ति \(\uparrow\)।


Question 61:

निम्नांकित में से कौन वस्तु कर नहीं है?

  • (1) GST
  • (2) उत्पाद शुल्क
  • (3) वैट
  • (4) आयकर
Correct Answer: (4) आयकर
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वस्तु/लेन‑देन पर लगने वाले अप्रत्यक्ष कर—GST, VAT, Excise—commodity taxes हैं। आयकर व्यक्ति/संस्था की आय पर लगता है; यह प्रत्यक्ष कर है, वस्तु कर नहीं। Quick Tip: Indirect (GST/VAT/Excise) \(\neq\) Direct (Income/Corporate/Wealth) taxes.


Question 62:

बचत और आय के संबंध को क्या कहते हैं?

  • (1) उपभोग फलन
  • (2) निवेश फलन
  • (3) बचत फलन
  • (4) इनमें से सभी
Correct Answer: (3) बचत फलन
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Saving function आय \(Y\) और बचत \(S\) के बीच सम्बन्ध बताता है। सरल रूप में \(S=-a+(1-c)Y\) जहाँ \(a\) स्वायत्त उपभोग और \(c=MPC\) है। यह दिखाता है कि उच्च आय स्तर पर बचत का अनुपात बढ़ता है; \(MPS=1-MPC\)। Quick Tip: उपभोग फलन \(C=a+cY\) से \(S=Y-C\Rightarrow S=-a+(1-c)Y\).


Question 63:

कॉफ़ी के मूल्य में वृद्धि होने से चाय की माँग—

  • (1) बढ़ती है
  • (2) स्थिर रहती है
  • (3) घटती है
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (1) बढ़ती है
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चाय और कॉफ़ी स्थानापन्न (substitutes) हैं। कॉफ़ी का मूल्य \(P_c\uparrow\Rightarrow\) उपभोक्ता अपेक्षाकृत सस्ती चाय की ओर मुड़ता है, इसलिए चाय की माँग वक्र दाहिने शिफ्ट करता है और माँग बढ़ती है। Quick Tip: Substitutes: \(P_A\uparrow \Rightarrow Q_B\uparrow\). Complements: \(P_A\uparrow \Rightarrow Q_B\downarrow\).


Question 64:

अक्षों के केन्द्र से निकलने वाली पूर्ति रेखा की लोच होती है—

  • (1) इकाई से कम
  • (2) इकाई से अधिक
  • (3) इकाई के बराबर
  • (4) शून्य के बराबर
Correct Answer: (3) इकाई के बराबर
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यदि आपूर्ति रेखा \((0,0)\) से गुजरती है तो किसी भी बिंदु \(P(Q)\) पर \(\eta_s=\dfrac{P}{Q}\cdot\dfrac{dQ}{dP}\) की मान 1 आती है—क्योंकि ऐसे ray पर \(\dfrac{\Delta Q}{Q}=\dfrac{\Delta P}{P}\) का समानुपात बना रहता है। अतः यह unitary elastic supply दर्शाती है। Quick Tip: ग्राफ में origin से गुजरती straight supply ⇒ \(\eta_s=1\) हर बिंदु पर।


Question 65:

स्थिर मूल्य पर आकिलित सकल राष्ट्रीय उत्पाद क्या है?

  • (1) वास्तविक \(GNP\)
  • (2) वास्तविक \(GDP\)
  • (3) मुद्रा \(GNP\)
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (1) वास्तविक \(GNP\)
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स्थिर (आधार) कीमतों पर मापा गया GNP \(\Rightarrow\) Real GNP—यह केवल उत्पाद की भौतिक मात्रा में परिवर्तन को दर्शाता है, मूल्य‑स्तर परिवर्तन के प्रभाव को हटाकर। चालू कीमतों पर मापा GNP \(\Rightarrow\) Nominal/Money GNP। Quick Tip: Deflator: \(GNP Deflator=\dfrac{Nominal GNP}{Real GNP}\times 100\).


Question 66:

भारत में बैंकिंग क्षेत्र सुधार किस वर्ष प्रारम्भ हुआ?

  • (1) 1969
  • (2) 1981
  • (3) 1991
  • (4) 2001
Correct Answer: (3) 1991
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आर्थिक उदारीकरण (1991) के साथ नरसिंहम समिति की सिफारिशों पर भारत में बैंकिंग/वित्तीय क्षेत्र सुधार आरम्भ हुए—NPAs पर नियम, पूँजी पर्याप्तता, प्रतिस्पर्धा, नियमन‑ढाँचा आदि। 1969 राष्ट्रीयकरण का वर्ष है; पर sectoral reforms का आरम्भ 1991 से माना जाता है। Quick Tip: Timeline: 1969—Nationalisation; 1991—Reforms; 1998—Narasimham II (NPA/recap/merger)।


Question 67:

बजट की अवधि क्या होती है?

  • (1) वार्षिक
  • (2) दो वर्ष
  • (3) पाँच वर्ष
  • (4) दस वर्ष
Correct Answer: (1) वार्षिक
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सरकार एक वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित आय‑व्यय का बजट प्रस्तुत करती है—भारत में यह 1 अप्रैल से 31 मार्च तक है। पंचवर्षीय योजनाएँ दीर्घावधि थीं, पर बजट हमेशा वार्षिक दस्तावेज़ है। Quick Tip: Annual Financial Statement = संविधान अनुच्छेद 112 के अंतर्गत \(\textbf{केंद्र}\) का बजट।


Question 68:

भुगतान संतुलन की निम्नलिखित में से कौन‑सी विशेषता है?

  • (1) क्रमबद्ध लेखा रिकॉर्ड
  • (2) निश्चित समय अवधि
  • (3) व्यापकता (सभी बाह्य लेन‑देन)
  • (4) इनमें से सभी
Correct Answer: (4) इनमें से सभी
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BoP एक देश के सभी बाह्य लेन‑देन (माल, सेवाएँ, आय, पूँजी प्रवाह, हस्तांतरण) का क्रमबद्ध लेखा‑विवरण है जो एक निश्चित अवधि (प्रायः वर्ष/तिमाही) के लिए तैयार किया जाता है। अतः दी गई सभी विशेषताएँ लागू होती हैं। Quick Tip: BoP = \(\textbf{Current Account}\) + \(\textbf{Capital/Financial Account}\) \(+\) त्रुटि/उपेक्षा।


Question 69:

एक खुली अर्थव्यवस्था में सामूहिक माँग का संघटक कौन है?

  • (1) उपभोग (\(C\))
  • (2) निवेश (\(I\))
  • (3) उपभोग \(+\) सरकारी व्यय (\(C+G\))
  • (4) \(C+I+G+शुद्ध निर्यात (X-M)\)
Correct Answer: (4) \(C+I+G+(X-M)\)
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खुली अर्थव्यवस्था में विदेशी क्षेत्र भी शामिल होता है। इसलिए \(\textbf{AD}=C+I+G+(X-M)\). यहाँ \(X-M\) शुद्ध निर्यात है—निर्यात माँग को बढ़ाता है, आयात घरेलू माँग का लीकेज है। Quick Tip: बन्द अर्थव्यवस्था: \(AD=C+I+G\). खुली: \(AD=C+I+G+(X-M)\).


Question 70:

महामंदी किस वर्ष आई?

  • (1) 1919
  • (2) 1929
  • (3) 1939
  • (4) 1949
Correct Answer: (2) 1929
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अक्टूबर 1929 में अमेरिकी शेयर बाज़ार पतन (Wall Street Crash) से Great Depression आरम्भ हुआ—वैश्विक उत्पादन, व्यापार और रोज़गार पर भीषण प्रभाव पड़ा। Keynes की General Theory (1936) इसी संदर्भ में सामने आई। Quick Tip: याद सूत्र: 29 crash → 30s depression → 1936 Keynes.


Question 71:

निम्न में से कौन अप्रत्यक्ष कर है?

  • (1) आयकर
  • (2) संपत्ति कर
  • (3) निगम कर
  • (4) बिक्री कर
Correct Answer: (4) बिक्री कर
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अप्रत्यक्ष कर वह है जिसका कानूनी भार (legal incidence) और आर्थिक भार (economic burden) अलग‑अलग हो सकते हैं—विक्रेता इसे कीमत में जोड़कर उपभोक्ता पर स्थानांतरित कर देता है। बिक्री कर/GST इसी प्रकार का है; आय/संपत्ति/कॉर्पोरेट कर प्रत्यक्ष हैं। Quick Tip: Indirect: shiftable; Direct: non‑shiftable.


Question 72:

निम्न में से प्राथमिक घाटे की सही माप कौन‑सी है?

  • (1) राजकोषीय घाटा \(-\) राजस्व घाटा
  • (2) राजस्व घाटा \(-\) ब्याज भुगतान
  • (3) राजकोषीय घाटा \(-\) ब्याज भुगतान
  • (4) पूँजीगत व्यय \(-\) राजस्व व्यय
Correct Answer: (3) राजकोषीय घाटा \(-\) ब्याज भुगतान
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Primary Deficit सरकार के कुल राजकोषीय घाटे से ब्याज भुगतान निकाल कर मिलता है: \[ PD=FD - Interest Payments. \]
यह बताता है कि पिछले ऋणों के ब्याज को छोड़ दें तो चालू वर्ष का शुद्ध घाटा कितना है—आर्थिक नीति की वर्तमान ढील/कसाव का बेहतर सूचक। Quick Tip: यदि \(PD=0\Rightarrow\) सरकार केवल ब्याज चुका रही है; \(PD>0\Rightarrow\) ब्याज के अतिरिक्त भी उधारी हो रही है।


Question 73:

तरलता पाश (Liquidity Trap) में ब्याज दर का स्तर सामान्यतः—

  • (1) औसत
  • (2) न्यूनतम
  • (3) ऊँचा
  • (4) कम
Correct Answer: (2) न्यूनतम
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Liquidity Trap वह स्थिति है जब ब्याज दर बहुत कम/निम्न स्तर पर आ जाती है और लोग अतिरिक्त मुद्रा को बांड में लगाने के बजाय नकद रूप में रखना पसंद करते हैं—उन्हें दर बढ़ने (बॉन्ड कीमत गिरने) का भय रहता है। इसलिए मौद्रिक विस्तार से भी निवेश/आय पर प्रभाव नहीं पड़ता। Quick Tip: Keynes: \(i\downarrow\) (very low) ⇒ speculative demand \(L_2\uparrow\) अत्यधिक ⇒ monetary policy weak.


Question 74:

उदासीनता वक्र (Indifference Curve) की ढाल—

  • (1) धनात्मक
  • (2) ऋणात्मक
  • (3) शून्य
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (2) ऋणात्मक
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एक ही संतोष स्तर पर रहने के लिए यदि उपभोक्ता वस्तु \(X\) को \(\Delta X>0\) बढ़ाता है तो उसे वस्तु \(Y\) को \(\Delta Y<0\) घटाना पड़ता है—इसी कारण IC नीचे ढलान (negative) होती है। यह non‑satiation (अधिक वस्तु वांछनीय) और trade‑off का परिणाम है; ढाल का परिमाण \(MRS_{XY}=\left|dY/dX\right|\) है, जो सामान्यतः घटता है। Quick Tip: ICs: downward sloping, convex to origin, non‑intersecting; \(MRS\downarrow\) as \(X\uparrow\).


Question 75:

निम्नांकित में से किस बाज़ार में मूल्य कम और उत्पादन अधिक होता है?

  • (1) पूर्ण प्रतिस्पर्धा
  • (2) अल्पाधिकार
  • (3) एकाधिकार
  • (4) इनमें से सभी
Correct Answer: (1) पूर्ण प्रतिस्पर्धा
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तुलनात्मक रूप से—पूर्ण प्रतिस्पर्धा में कीमत \(P=MC\) (दीर्घकाल \(=AC_{\min}\)) और उत्पादन अधिकतम सामाजिक कुशल स्तर तक होता है। मोनोपॉली में फर्म \(MR=MC\) पर उत्पादन करती है जहाँ \(P>MC\), इसलिए कम उत्पादन/ऊँची कीमत और deadweight loss होता है। अल्पाधिकार में भी सांठगांठ/बाज़ार शक्ति के कारण \(P\) अपेक्षाकृत अधिक और \(Q\) कम हो सकता है। Quick Tip: Benchmark: \(Q_{PC}>Q_{monopoly}\) और \(P_{PC} < p_{monopoly}\); pc="सामाजिक दृष्टि से कुशल।"


Question 76:

सीमान्त उपयोगिता ह्रास नियम के प्रतिपादक कौन थे?

  • (1) गॉसन
  • (2) एडम स्मिथ
  • (3) चैपमैन
  • (4) हिक्स
Correct Answer: (1) गॉसन
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गॉसन ने 1854 में प्रकाशित अपने ग्रंथ में उपभोक्ता व्यवहार के दो नियम दिए जिन्हें गॉसन के नियम कहा जाता है। पहला नियम सीमान्त उपयोगिता ह्रास बताता है: किसी वस्तु की खपत की अतिरिक्त इकाइयों से प्राप्त सीमान्त उपयोगिता क्रमशः घटती जाती है, अन्य बातें समान रहने पर।

परिकल्पनाएँ: समान प्रकृति की इकाइयाँ, उपभोक्ता की रूचि स्थिर, वस्तु विभाज्य, वास्तविक आय निश्चित, तृप्ति का नियम लागू।
निहितार्थ: कुल उपयोगिता पहले बढ़ती है, जब MU शून्य हो जाए तो TU अधिकतम; उसके बाद MU ऋणात्मक होने पर TU घटने लगता है।
उदाहरण: एक-एक करके पानी के गिलास पीने पर पहले गिलास से सबसे अधिक संतोष, अगले गिलासों से कम।

जैवन्स, मेंगर और मार्शल ने बाद में इसे लोकप्रिय बनाया, पर मूल प्रतिपादक गॉसन ही माने जाते हैं। Quick Tip: याद रखें: TU अधिकतम होने पर MU = 0; MU घटता है इसलिए उपभोक्ता संतुलन में अनुपात \( \frac{MU_x}{P_x}=\frac{MU_y}{P_y} \) का नियम भी उपयोगी होता है।


Question 77:

जब सीमान्त उपयोगिता घटती जाती है तो उसे क्या कहा जाता है?

  • (1) उपयोगिता वृद्धि नियम
  • (2) उपयोगिता ह्रास नियम
  • (3) प्रतिस्थापन का नियम
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (2) उपयोगिता ह्रास नियम
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सीमान्त उपयोगिता का क्रमशः कम होना उपयोगिता ह्रास कहलाता है। उपभोक्ता एक ही वस्तु की अधिक इकाइयाँ लेता है तो हर अतिरिक्त इकाई से प्राप्त संतोष पिछले से कम होता है। यही कारण है कि किसी बिंदु पर उपभोक्ता और अधिक मात्रा नहीं लेता और अन्य वस्तु की ओर संसाधन मोड़ देता है।

यह नियम कीमत निर्धारण, उपभोक्ता संतुलन और मांग वक्र की नीचे ढलान की व्याख्या करता है।
प्रतिस्थापन का नियम अलग अवधारणा है जो दो वस्तुओं के बीच स्थानांतरण को बताता है। Quick Tip: गणितीय रूप में \( MU = \frac{d(TU)}{dq} \). यदि \( MU \downarrow \) तो \( TU \) बढ़ती गति से नहीं, धीमी गति से बढ़ेगी और अन्ततः अधिकतम पर पहुँचकर समतल हो जाएगी।


Question 78:

उत्पादन विधि द्वारा घरेलू उत्पादन की गणना में किसे जोड़ा जाता है?

  • (1) उत्पादन को
  • (2) वृद्धि मूल्य को
  • (3) आय को
  • (4) व्यय को
Correct Answer: (2) वृद्धि मूल्य को
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उत्पादन (मूल्य वर्धन) विधि में अर्थव्यवस्था के सभी उत्पादन चरणों पर कुल मूल्य वर्धन जोड़ा जाता है। मूल्य वर्धन = उत्पादन का बाजार मूल्य − मध्यवर्ती उपभोग। \[ GDP_{mp} = \sum GVA_{mp}^{(सभी\;क्षेत्र)} \]
इसके बाद आवश्यकतानुसार अप्रत्यक्ष कर घटा और अनुदान जोड़कर factor cost पर रूपांतरण किया जाता है, तथा अपमूल्यन घटाकर शुद्ध प्राप्त किया जाता है। मध्यवर्ती वस्तुओं को जोड़ने पर दोहरी गणना हो जाती। Quick Tip: मुख्य तीन रास्ते: \(\textbf{उत्पादन}\) (Value Added), \(\textbf{आय}\), \(\textbf{व्यय}\). उत्पादन में हमेशा \(\textbf{Intermediate consumption}\) घटाना न भूलें।


Question 79:

``Economic Consequences of the Peace'' पुस्तक के लेखक कौन हैं?

  • (1) कीन्स
  • (2) एडम स्मिथ
  • (3) रिकार्डो
  • (4) मिल
Correct Answer: (1) कीन्स
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यह पुस्तक J. M. Keynes ने 1919 में लिखी। इसमें प्रथम विश्व युद्ध के बाद वर्साय संधि से जर्मनी पर लादे गए कठोर दायित्वों की आलोचना की गई और चेतावनी दी गई कि अत्यधिक क्षतिपूर्ति मांगें यूरोप की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करेंगी। इस पुस्तक ने युद्धोत्तर वित्त और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीति पर गहरा प्रभाव डाला। Quick Tip: Keynes—1919: \(\textbf{Economic Consequences of the Peace}\); 1936: \(\textbf{General Theory}\).


Question 80:

यदि सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति (MPC) \(0.2\) हो तो सीमान्त बचत प्रवृत्ति क्या होगी?

  • (1) \(0.8\)
  • (2) \(0.2\)
  • (3) \(0.4\)
  • (4) \(-0.2\)
Correct Answer: (1) \(0.8\)
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आय का सीमान्त विभाजन नियम: \[ MPC + MPS = 1. \]
दिया है \(MPC = 0.2\). अतः \[ MPS = 1 - 0.2 = 0.8. \]
यह बताता है कि अतिरिक्त आय का 80 प्रतिशत भाग बचत में जाएगा। Quick Tip: गुणक \(k=\frac{1}{1-MPC}=\frac{1}{MPS}\). यहाँ \(k=\frac{1}{0.8}=1.25\).


Question 81:

निम्नलिखित में से कौन-सा स्टॉक है?

  • (1) आय
  • (2) निवेश
  • (3) लाभ
  • (4) सम्पत्ति
Correct Answer: (4) सम्पत्ति
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स्टॉक वह परिमाण है जो किसी समय बिंदु पर मापा जाता है, जैसे संपत्ति, पूँजी भंडार, मुद्रा भंडार। फ्लो वह है जो समय अवधि में मापा जाता है, जैसे आय, निवेश, लाभ। इसलिए संपत्ति स्टॉक है जबकि आय, निवेश और लाभ फ्लो हैं। Quick Tip: याद रखें: बिंदु पर मापन = \(\textbf{स्टॉक}\), अवधि में मापन = \(\textbf{फ्लो}\)।


Question 82:

कौन समष्टि अर्थशास्त्र के अध्ययन का विषय है?

  • (1) राष्ट्रीय आय का सिद्धान्त
  • (2) उपभोग का सिद्धान्त
  • (3) उत्पादन का सिद्धान्त
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (1) राष्ट्रीय आय का सिद्धान्त
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समष्टि अर्थशास्त्र का फोकस सकल आय, रोजगार, मूल्य स्तर, निवेश, व्यापार चक्र जैसे समष्टि चर हैं। राष्ट्रीय आय का सिद्धान्त इन समष्टि चरों में सबसे मूल विषय है। उपभोग और उत्पादन के सूक्ष्म सिद्धान्त माइक्रो अर्थशास्त्र के क्षेत्र में चर्चा किए जाते हैं। Quick Tip: Macro के मूल प्रश्न: आय और रोजगार का निर्धारण, मुद्रास्फीति/मंदी, आर्थिक विकास, भुगतान संतुलन।


Question 83:

किसने कहा कि ``अर्थशास्त्र धन का विज्ञान है''?

  • (1) मार्शल
  • (2) रॉबिन्स
  • (3) एडम स्मिथ
  • (4) जे. के. मेहता
Correct Answer: (3) एडम स्मिथ
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एडम स्मिथ की परिभाषा में अर्थशास्त्र को धन के उत्पादन, वितरण और विनिमय के अध्ययन के रूप में देखा गया। बाद में मार्शल ने इसे कल्याण से जोड़ा, रॉबिन्स ने दुर्लभता और चयन पर बल दिया और सैमुअलसन ने समय और वृद्धि को शामिल किया। Quick Tip: धन → कल्याण → दुर्लभता → वृद्धि: परिभाषाओं का विकास इसी क्रम में याद रखें।


Question 84:

निम्नलिखित में से कौन उत्पादन का साधन नहीं है?

  • (1) भूमि
  • (2) श्रम
  • (3) मुद्रा
  • (4) पूँजी
Correct Answer: (3) मुद्रा
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उत्पादन के पारम्परिक साधन हैं भूमि, श्रम, पूँजी और उद्यमिता/संगठन। मुद्रा स्वयं भौतिक उत्पादन कारक नहीं है; यह विनिमय का माध्यम है जो संसाधन आवंटन को आसान बनाता है, पर संसाधन का विकल्प नहीं है। Quick Tip: पूँजी बनाम मुद्रा: पूँजी = भौतिक उत्पादक संपत्तियाँ; मुद्रा = वित्तीय साधन।


Question 85:

चार-क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के चक्रीय प्रवाह में संतुलन की शर्त क्या है?

  • (1) \(C+I\)
  • (2) \(C+I+G\)
  • (3) \(C+I+G+(X-M)\)
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (3) \(C+I+G+(X-M)\)
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चार क्षेत्र हैं: परिवार, फर्म, सरकार, विदेशी क्षेत्र। संतुलन पर \(\textbf{कुल आय} = \textbf{कुल व्यय}\): \[ Y = C + I + G + (X-M). \]
यहाँ \(X-M\) शुद्ध निर्यात है। यदि \(X>M\) तो बाह्य माँग आय को बढ़ाती है; यदि \(M>X\) तो यह घरेलू माँग का रिसाव है। किसी भी विचलन पर समायोजन तंत्र कीमत, आय और विनिमय दरों के माध्यम से काम करता है। Quick Tip: बन्द अर्थव्यवस्था में \(Y=C+I+G\); विदेशी क्षेत्र जोड़ते ही \(+ (X-M)\) आवश्यक है।


Question 86:

तृतीयक क्षेत्र के अंतर्गत निम्न में से कौन-सी सेवा सम्मिलित है?

  • (1) कृषि
  • (2) संचार
  • (3) खनन
  • (4) निर्माण
Correct Answer: (2) संचार
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आर्थिक गतिविधियों का वर्गीकरण: प्राथमिक (कृषि, वानिकी, मत्स्य, खनन), द्वितीयक (उद्योग, निर्माण) और तृतीयक या सेवाएँ (परिवहन, संचार, बैंकिंग, पर्यटन, बीमा आदि)। इसलिए संचार तृतीयक क्षेत्र की गतिविधि है। Quick Tip: याद रखने के लिए: Primary = extractive, Secondary = transformative, Tertiary = services.


Question 87:

सीमान्त अवसर लागत निम्न में से क्या है?

  • (1) \( \dfrac{\Delta Y}{\Delta I} \)
  • (2) \( \dfrac{\Delta Y}{\Delta X} \)
  • (3) \( \dfrac{MU_X}{MU_Y} \)
  • (4) \( \dfrac{\Delta Y}{\Delta C} \)
Correct Answer: (2) \( \dfrac{\Delta Y}{\Delta X} \)
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उत्पादन संभावना वक्र पर यदि वस्तु \(X\) की एक अतिरिक्त इकाई बनानी हो तो वस्तु \(Y\) की जितनी मात्रा त्यागनी पड़ती है, वही सीमान्त अवसर लागत है: \[ MOC of X = \frac{\Delta Y}{\Delta X}. \]
संसाधनों के असमान दक्ष होने से MOC सामान्यतः बढ़ती है, इसलिए PPC उत्तल होती है। Quick Tip: PPC पर आगे बढ़ते हुए \(X\) बढ़ाएँ तो \(Y\) का त्याग बढ़ता है ⇒ MOC बढ़ती है।


Question 88:

उस वक्र का नाम बताइए जो आर्थिक समस्या को दर्शाता है।

  • (1) उत्पादन वक्र
  • (2) माँग वक्र
  • (3) उदासीनता वक्र
  • (4) उत्पादन संभावना वक्र
Correct Answer: (4) उत्पादन संभावना वक्र
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आर्थिक समस्या का सार दुर्लभता और चयन है। उत्पादन संभावना वक्र उपलब्ध संसाधनों और तकनीक के साथ अधिकतम संभावित उत्पादन संयोजनों का मानचित्र है। वक्र पर हर बिंदु पर एक वस्तु की अतिरिक्त इकाई प्राप्त करने के लिए दूसरी वस्तु का कुछ त्याग करना पड़ता है, जो अवसर लागत दिखाता है। Quick Tip: PPC के बाहर असंभव, भीतर संसाधनों का अपूर्ण उपयोग, वक्र पर कुशल संयोजन।


Question 89:

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

  • (1) जी. एन. पी. एक राष्ट्रीय अवधारणा है
  • (2) स्थायी पूँजी के उपयोग को मूल्य ह्रास कहते हैं
  • (3) प्रयोज्य आय = निजी आय − प्रत्यक्ष कर
  • (4) \(NDP_{fc}\) की गणना में अनुदान जोड़ा जाता है
Correct Answer: (3) प्रयोज्य आय = निजी आय − प्रत्यक्ष कर
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असत्य (3) है, क्योंकि प्रयोज्य आय का सही रूप वैयक्तिक आय से सीधे कर घटाकर प्राप्त होता है, न कि निजी (Private) आय से।

(1) सही: GNP राष्ट्रीय (निवासियों की) आय का माप है जबकि GDP घरेलू क्षेत्र का।
(2) सही: स्थिर पूँजी के क्षय को अपमूल्यन/मूल्य ह्रास कहते हैं।
(4) सही: बाजार मूल्य से factor cost पर आने के लिए अप्रत्यक्ष कर घटाते हैं और अनुदान जोड़ते हैं। Quick Tip: रूपान्तरण: \(NDP_{fc}=NDP_{mp} - अप्रत्यक्ष कर + अनुदान\).


Question 90:

किसी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं के बाजार मूल्य को क्या कहते हैं?

  • (1) कुल राष्ट्रीय उत्पाद
  • (2) राष्ट्रीय आय
  • (3) कुल घरेलू उत्पाद
  • (4) विश्वद्रव्य राष्ट्रीय उत्पाद
Correct Answer: (3) कुल घरेलू उत्पाद
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परिभाषा के शब्द किसी अर्थव्यवस्था के भीतर और बाजार मूल्य सीधे GDP at market prices की ओर संकेत करते हैं। GNP निवासियों द्वारा अर्जित, चाहे देश के भीतर या बाहर, का माप है; राष्ट्रीय आय factor cost पर शुद्ध आय का माप है। Quick Tip: GDP (domestic) बनाम GNP (national): भौगोलिक सीमा बनाम निवासिता का भेद।


Question 91:

\(e_s = 0\) का अर्थ है कि पूर्ति की लोच

  • (1) पूर्णतः लोचदार है
  • (2) पूर्णतः बेलोचदार है
  • (3) कम लोचदार है
  • (4) इकाई लोचदार है
Correct Answer: (2) पूर्णतः बेलोचदार है
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\(\,e_s=0\,\) का अर्थ है कि कीमत बदलने पर आपूर्ति मात्रा नहीं बदलती। ग्राफ में यह ऊर्ध्वाधर आपूर्ति वक्र से प्रदर्शित होता है। ऐसी स्थिति बहुत अल्पकाल में, जैसे नाशवान वस्तुओं या पूर्ण क्षमता बाधा के समय, देखने को मिल सकती है। Quick Tip: \(e_s= \frac{P}{Q}\cdot\frac{dQ}{dP}\). यदि \(dQ=0\Rightarrow e_s=0\).


Question 92:

अवस्फीतिक अंतराल माप बताता है

  • (1) न्यून माँग
  • (2) अधिशेष माँग
  • (3) पूर्ण संतुलन
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (1) न्यून माँग
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Deflationary gap वह अंतर है जो पूर्ण रोजगार पर संभाव्य उत्पादन पर आवश्यक संचयी माँग और वास्तविक संचयी माँग के बीच रह जाता है। इसका अर्थ है कि अर्थव्यवस्था में कुल माँग अपर्याप्त है, परिणामस्वरूप बेरोजगारी और उत्पादन क्षमता का अपूर्ण उपयोग होता है। Quick Tip: उपचार: सार्वजनिक व्यय बढ़ाना, करों में कमी, निवेश और मुद्रा आपूर्ति बढ़ाना।


Question 93:

अधिशेष माँग होने के निम्नलिखित में से कौन से कारण हैं?

  • (1) सार्वजनिक व्यय में वृद्धि
  • (2) मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि
  • (3) करों में वृद्धि
  • (4) (1) और (2) दोनों
Correct Answer: (4) (1) और (2) दोनों
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अधिशेष माँग तब उत्पन्न होती है जब पूर्ण रोजगार के स्तर पर संचयी माँग उत्पादन क्षमता से अधिक हो जाती है। इसके प्रमुख कारण हैं सरकारी व्यय में वृद्धि, निवेश में उछाल, उपभोग प्रवृत्ति में वृद्धि, करों में कमी, तथा मुद्रा आपूर्ति में तेज बढ़ोतरी। अतः (1) और (2) दोनों अधिशेष माँग के कारण हैं, जबकि करों में वृद्धि माँग को दबाती है। Quick Tip: Excess demand ⇒ मुद्रास्फीति दबाव; Deficient demand ⇒ बेरोजगारी और मंदी।


Question 94:

समरूप उत्पाद किसकी विशेषता है?

  • (1) केवल पूर्ण प्रतिस्पर्धिता की
  • (2) केवल पूर्ण एकाधिकार की
  • (3) (1) और (2) दोनों
  • (4) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (1) केवल पूर्ण प्रतिस्पर्धिता की
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पूर्ण प्रतिस्पर्धा में सभी फर्में समरूप (एक जैसे) उत्पाद बेचती हैं, जिससे खरीदारों को ब्रांड के आधार पर भेदभाव नहीं दिखाई देता। परिणामस्वरूप एक फर्म का माँग वक्र पूर्ण लोचदार होता है और फर्म मूल्य-स्वीकारी बनती है। एकाधिकार में उत्पाद का कोई न कोई भेद या विशिष्टता मौजूद रहती है। Quick Tip: PC की चार बुनियादी शर्तें: अनेक खरीदार-विक्रेता, समरूप उत्पाद, मुक्त प्रवेश-निकास, पूर्ण जानकारी।


Question 95:

किस बाज़ार में फर्म का माँग वक्र पूर्ण लोचदार होता है?

  • (1) पूर्ण प्रतिस्पर्धिता
  • (2) एकाधिकार
  • (3) एकाधिकार प्रतिस्पर्धिता
  • (4) अल्पाधिकार
Correct Answer: (1) पूर्ण प्रतिस्पर्धिता
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पूर्ण प्रतिस्पर्धा में एक फर्म इतनी छोटी होती है कि उसके उत्पादन से बाजार-कीमत प्रभावित नहीं होती। इसलिए फर्म को क्षैतिज माँग वक्र मिलता है जहाँ \(\textbf{AR}= \textbf{MR}=P\) स्थिर रहता है। अन्य बाजार रूपों में फर्म को नीचे ढलान वाला माँग वक्र मिलता है और \(MR < AR \)>Quick Tip: PC में फर्म का संतुलन: \(MR=MC\) और दीर्घकाल में \(P=MC=AC_{\min}\).>


Question 96:

किस राजकोषीय उपाय के अंतर्गत न्यून माँग को दुरुस्त करने हेतु शामिल नहीं किया जाता है?

  • (1) सार्वजनिक व्यय
  • (2) कराधान
  • (3) सार्वजनिक ऋण
  • (4) बैंक दर
Correct Answer: (4) बैंक दर
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न्यून माँग को बढ़ाने के राजकोषीय उपाय हैं: सरकारी व्यय बढ़ाना, करों में कमी करना, घाटा वित्त या सार्वजनिक ऋण के माध्यम से खर्च बढ़ाना। बैंक दर मौद्रिक नीति का उपकरण है जिसे केंद्रीय बैंक प्रयोग करता है, राजकोषीय नहीं। Quick Tip: Fiscal: \(G\) और \(T\) पर काम करता है; Monetary: \(i\), CRR, OMO पर काम करती है।


Question 97:

किसने कीमत निर्धारण की प्रक्रिया में समय तत्व का विचार प्रस्तुत किया?

  • (1) रिकार्डो
  • (2) वॉल्रास
  • (3) मार्शल
  • (4) पिगू
Correct Answer: (3) मार्शल
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ए. सी. मार्शल ने मूल्य निर्धारण में समय तत्व जोड़ा—market period, short run और long run का भेद। market period में आपूर्ति लगभग स्थिर रहती है; अल्पकाल में कुछ कारक स्थिर; दीर्घकाल में सभी कारक परिवर्ती। इससे समझ आता है कि तत्काल कीमत मांग से अधिक प्रभावित होती है, जबकि दीर्घकाल में लागतें निर्णायक भूमिका निभाती हैं। Quick Tip: मार्शल का चाकू: मूल्य का निर्धारण माँग और आपूर्ति की संयुक्त धारों से होता है; समय के साथ धारों का महत्व बदलता है।


Question 98:

पूर्ण प्रतिस्पर्धिता में किसी वस्तु का मूल्य किससे निर्धारित होता है?

  • (1) माँग-आपूर्ति दबाव
  • (2) उत्पादन लागत द्वारा
  • (3) सीमांत उपयोगिता द्वारा
  • (4) माँग एवं पूर्ति द्वारा
Correct Answer: (4) माँग एवं पूर्ति द्वारा
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उद्योग स्तर पर संतुलन मूल्य माँग वक्र और आपूर्ति वक्र के प्रतिच्छेद पर निर्धारित होता है। किसी एक पक्ष में परिवर्तन होने पर नया संतुलन बनता है। लागतें आपूर्ति वक्र को प्रभावित करती हैं, पर मूल्य का निर्धारण केवल लागत से नहीं, माँग के साथ मिलकर होता है। Quick Tip: फर्म के लिए \(P\) दिया हुआ; \(\textbf{उद्योग}\) का \(P\) = \(D\) और \(S\) का प्रतिच्छेद।


Question 99:

भारत में एक रुपया का नोट कौन जारी करता है?

  • (1) भारतीय रिज़र्व बैंक
  • (2) भारतीय स्टेट बैंक
  • (3) भारत सरकार का वित्त मंत्रालय
  • (4) विश्व बैंक
Correct Answer: (3) भारत सरकार का वित्त मंत्रालय
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भारत में ₹1 के नोट का निर्गमकर्ता भारत सरकार का वित्त मंत्रालय है; इन नोटों पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। अन्य सभी प्रचलित नोटों का निर्गमन RBI करता है और उन पर RBI गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं। ₹1 का सिक्का भी भारत सरकार जारी करती है। Quick Tip: ₹1 नोट/सिक्का = भारत सरकार; ₹2 और उससे ऊपर = RBI.


Question 100:

निम्नलिखित में से कौन-सी राजस्व प्राप्ति नहीं है?

  • (1) ऋणों की वसूली
  • (2) विदेशी अनुदान
  • (3) सार्वजनिक उपक्रम के लाभ
  • (4) संपत्ति कर
Correct Answer: (1) ऋणों की वसूली
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सरकारी प्राप्तियाँ दो भागों में बाँटी जाती हैं: राजस्व प्राप्ति और पूँजी प्राप्ति। कर, शुल्क, डिविडेंड/लाभांश, ब्याज, अनुदान आदि राजस्व प्राप्तियाँ हैं क्योंकि वे दायित्व नहीं बनातीं और संपत्ति में कमी नहीं लातीं। ऋणों की वसूली पूँजी प्राप्ति है; यह सरकार द्वारा दिए गए ऋण की वापसी है जिससे वित्तीय संपत्ति का रूपांतरण होता है। Quick Tip: राजस्व प्राप्ति = नियमित और दायित्व-मुक्त; पूँजी प्राप्ति = दायित्व बढ़ाती/वित्तीय संपत्ति बदलती, जैसे उधार, विनिवेश, ऋण-वसूली।


Question 101:

नकद कोषानुपात (CRR) और सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) में अंतर स्पष्ट करें।

Correct Answer:
CRR वह न्यूनतम अंश है जिसे वाणिज्यिक बैंकों को अपनी शुद्ध माँग और समय देनदारियों का नकद रूप में भारतीय रिज़र्व बैंक के पास रखना होता है। SLR वह अंश है जिसे बैंक अपने पास स्वीकृत तरल परिसंपत्तियों में रखते हैं, जैसे नकदी, स्वर्ण और सरकारी प्रतिभूतियाँ; CRR पर सामान्यतः ब्याज नहीं मिलता।
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दोनों अनुपात प्रणाली की तरलता और स्थिरता सँभालने के उपकरण हैं, पर स्वरूप और प्रभाव अलग हैं। CRR पूरी तरह RBI के पास नकद रिज़र्व के रूप में रखा जाता है, इसलिए यह सीधे बैंकों की उधारी योग्य निधि घटाता है; इस पर बैंक प्रायः आय नहीं कमाते। SLR बैंक अपने पास रखते हैं और इसे नकद, सोना या मुख्यतः सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश कर सकते हैं; अतः क्रेडिट पर अंकुश तो रहता है, पर इससे कुछ आय अर्जित होती है। CRR मौद्रिक नीति का तेज साधन है, जबकि SLR सावधानी और सॉल्वेंसी सुनिश्चित करने का भी उपाय है। दोनों के परिवर्तन से उधार लागत, बाज़ार ब्याज दरें और कुल मुद्रा आपूर्ति प्रभावित होती हैं। परीक्षा में याद रखें: CRR with RBI, SLR with bank. Quick Tip: CRR = cash with RBI; SLR = liquid assets with bank. CRR पर प्रायः शून्य आय, SLR पर प्रतिभूति–आय संभव।


Question 102:

व्यापारिक बैंक के दो कार्य बताइए।

Correct Answer:
पहला, जमाएँ स्वीकार करना—चालू, बचत और सावधि खातों के माध्यम से जनसामान्य की बचत को संग्रहीत करना। दूसरा, ऋण और अग्रिम देना—नकद ऋण, ओवरड्राफ्ट, बिल-विनिमय, उपभोक्ता व उद्योग ऋण आदि। इनसे बैंक क्रेडिट सृजन करते हैं और भुगतान‑सेवाएँ भी प्रदान करते हैं।
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वाणिज्यिक बैंक आधुनिक अर्थव्यवस्था के केन्द्रीय वित्तीय मध्यस्थ हैं। जमा कार्य से वे बिखरी बचत को संचित करते हैं, भुगतान सुविधा देते हैं और धन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। खातों की प्रकृति के अनुसार निकासी अधिकार और ब्याज भिन्न रहते हैं। उधार/अग्रिम कार्य द्वारा बैंक उत्पादक उपक्रमों और उपभोक्ताओं को धन उपलब्ध कराते हैं—नकद ऋण, ओवरड्राफ्ट, नकदी साख, बिल‑डिस्काउंट, टर्म लोन और परियोजना वित्त इसके रूप हैं। इसी प्रक्रिया में बैंक क्रेडिट सृजन करते हैं जिससे निवेश और आय का विस्तार होता है। सहायक एजेन्सी कार्यों में चेक‑ड्राफ्ट क्लीयरिंग, NEFT/RTGS, ट्रस्ट/कर भुगतान, विदेशी मुद्रा सेवा, लॉकर सेवा, और परामर्श शामिल हैं। नियामकीय ढाँचा CRR, SLR और पूँजी पर्याप्तता जैसे मानकों से स्वास्थ बनाए रखता है। Quick Tip: दो मूल: \(\textbf{Accept Deposits}\) और \(\textbf{Lend/Invest}\). इन्हीं पर भुगतान सेवाएँ और क्रेडिट‑सृजन आधारित हैं।


Question 103:

विधेयाधर मुद्रा क्या है?

Correct Answer:
विधेयाधर मुद्रा वह धन है जिसकी स्वीकृति जारीकर्ता पर विश्वास के कारण होती है, न कि धातु‑आधार या बाध्यकारी वैधानिक आदेश के कारण। बैंक जमाएँ, चेक‑ड्राफ्ट, देय पर परिवर्तनीय नोट इत्यादि उदाहरण हैं; इनका मूल्य जारीकर्ता की गारंटी और जनता के भरोसे पर आधारित रहता है।
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मुद्रा को प्रायः धातु मुद्रा, वैध निविदा मुद्रा और विधेयाधर या विश्वास‑आधारित रूपों में समझाया जाता है। विधेयाधर मुद्रा का स्वीकार मुख्यतः विश्वास से होता है—कि जारीकर्ता संस्था समय पर इसे वैध मुद्रा में भुना देगी। बैंक जमाएँ और उनके विरुद्ध चेक, डेबिट कार्ड, ड्राफ्ट आदि दैनिक लेनदेन में व्यापक रूप से चलते हैं, पर इन्हें स्वीकार करना कानून से अनिवार्य नहीं; इन्हें जनता जारीकर्ता की साख के कारण अपनाती है। इसके विपरीत कानूनी निविदा (legal tender) जैसे केंद्रीय बैंक के नोटों को कोई व्यक्ति देनदारी चुकाने में अस्वीकार नहीं कर सकता। पाठ्यक्रम में कभी‑कभी fiat और fiduciary शब्द साथ आते हैं: fiat कानूनी आदेश से, fiduciary विश्वास से—प्रश्न में विधेयाधर को विश्वास‑आधारित अर्थ में समझें। Quick Tip: Legal tender = क़ानून से चलती; Fiduciary/विधेयाधर = भरोसे से चलती (जैसे बैंक जमाएँ, चेक)।


Question 104:

माँग के आवश्यक तत्व बताइए।

Correct Answer:
माँग के अनिवार्य तत्व हैं: वस्तु के प्रति इच्छा; क्रय‑शक्ति के साथ भुगतान करने की तत्परता; वस्तु का निश्चित मूल्य; एक निर्दिष्ट समय अवधि और बाज़ार। केवल इच्छा माँग नहीं कहलाती, उसे क्रय‑शक्ति और खरीदने की इच्छा के समर्थन की आवश्यकता होती है।
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अर्थशास्त्र में माँग का अर्थ है किसी वस्तु की वह मात्रा जिसे उपभोक्ता एक निर्धारित समय और निश्चित मूल्य पर क्रय‑शक्ति सहित खरीदने को तैयार हो। इसलिए चार चीजें स्पष्ट लिखी जाती हैं: वस्तु, मूल्य, समय और स्थान/बाज़ार। इच्छा के साथ paying capacity और willingness to pay अनिवार्य हैं, तभी अनुमानित माँग का तालिका या वक्र बनाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त अन्य परिस्थितियाँ समान रहने की धारणा लगती है ताकि आय, रुचि, संबंधित वस्तुओं के मूल्य, विज्ञापन, अपेक्षाएँ आदि के प्रभाव को अलग रखा जा सके। परीक्षा के लघु‑उत्तर में इन तत्त्वों को एक‑एक शब्द में लिखना सबसे साफ रहता है और उदाहरण के तौर पर मोबाइल फोन की माँग में आय और कीमत के साथ समय अवधि अवश्य बताइए। Quick Tip: Demand = Desire + Purchasing power + Willingness, at a given Price, Time and Market.


Question 105:

उदासीनता वक्र क्या है?

Correct Answer:
उदासीनता वक्र वह वक्र है जो दो वस्तुओं के उन सभी संयोजनों को दिखाता है जिनसे उपभोक्ता को समान संतोष मिलता है। यह सामान्यतः बाईं से दाईं ओर नीचे ढलान और उद्गम की ओर उत्तल होता है; ऊँचे वक्र उच्चतर संतोष स्तर का प्रतिनिधित्व करते हैं और दो IC एक‑दूसरे को नहीं काटते।
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उदासीनता विश्लेषण उपभोक्ता की पसंद को क्रमिक रूप में मापता है। किसी IC पर प्रत्येक बिंदु के संयोजन उपभोक्ता को समान उपयोगिता देते हैं, इसलिए वह उन बिंदुओं के बीच उदासीन रहता है। IC की ढाल सीमान्त प्रतिस्थापन दर का परिमाण है, जो बढ़ती मात्रा में X लेने पर घटती है; इसी से वक्र उद्गम की ओर उत्तल बनता है। मूल बुनियादी गुण: नीचे ढलान, उत्तलता, दो IC का न काटना, ऊँचा IC अधिक संतोष। बजट रेखा के साथ IC का स्पर्श बिंदु उपभोक्ता संतुलन देता है जहाँ \( \frac{MU_x}{P_x} = \frac{MU_y}{P_y} \). यह उपकरण उपभोक्ता अधिशेष और कीमत‑परिवर्तन के प्रभावों को भी स्पष्ट करता है। Quick Tip: ढाल का अर्थ याद रखें: \(MRS_{XY} = \left| \frac{dY}{dX} \right|\); उच्च IC = उच्च संतोष।


Question 106:

आर्थिक क्रिया को स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
आर्थिक क्रिया वे मानवीय गतिविधियाँ हैं जिनका उद्देश्य आय अर्जित करना और आवश्यकताओं की पूर्ति करना है। इनमें उत्पादन, उपभोग, विनिमय, वितरण और निवेश जैसी क्रियाएँ आती हैं। इनका आकलन प्रायः धन में होता है और ये बाज़ार तथा संसाधन‑आवंटन से सीधा सम्बन्ध रखती हैं।
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मनुष्य अनेक कार्य करता है; पर आर्थिक क्रियाओं की पहचान दो विशेषताओं से होती है—पहली, वे आय या अन्य मौद्रिक प्रतिफल से जुड़ी होती हैं; दूसरी, उनका लक्ष्य दुर्लभ संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग कर इच्छाओं की पूर्ति करना होता है। उत्पादन क्रिया में भूमि, श्रम, पूँजी और उद्यमिता से वस्तुएँ‑सेवाएँ बनती हैं। उपभोग में उपभोक्ता इनका उपयोग करता है। विनिमय क्रिया कीमत तंत्र के माध्यम से वस्तुओं को खरीदारों तक पहुँचाती है। वितरण क्रिया प्रतिफलों—किराया, मजदूरी, ब्याज, लाभ—का बँटवारा करती है, और निवेश भविष्य के उत्पादन के लिए पूँजी निर्माण करता है। सरकारी गतिविधियाँ जैसे कर व सार्वजनिक व्यय भी आर्थिक क्रियाएँ हैं क्योंकि वे आय और संसाधन उपयोग को प्रभावित करती हैं। Quick Tip: आर्थिक क्रियाएँ = आय से जुड़ी और संसाधन‑आवंटन पर प्रभाव डालने वाली गतिविधियाँ।


Question 107:

उपयोगिता से आप क्या समझते हैं?

Correct Answer:
उपयोगिता किसी वस्तु या सेवा की वह क्षमता है जो मानवीय इच्छा की पूर्ति करती है। यह व्यक्तिनिष्ठ, परस्थितिजन्य और नैतिकता से निरपेक्ष अवधारणा है; अलग‑अलग व्यक्तियों तथा समय‑स्थान के साथ बदल सकती है। कार्डिनल व ऑर्डिनल दोनों दृष्टियों से इसका विश्लेषण किया जाता है।
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उपयोगिता को संतोष से जोड़कर समझना आसान है, पर दोनों एक नहीं हैं। अर्थशास्त्र में उपयोगिता का माप व्यक्ति की पसंद पर निर्भर करता है; इसी कारण यह व्यक्तिनिष्ठ है। हवा की उपयोगिता सामान्यतः बहुत है पर शून्य कीमत; विष की किसी विशेष संदर्भ में उपयोगिता हो सकती है, इसलिए यह नैतिकता से स्वतंत्र मानी जाती है। कार्डिनल दृष्टि में उपयोगिता को संख्यात्मक इकाइयों में लेकर कुल व सीमांत उपयोगिता का अध्ययन किया जाता है; ऑर्डिनल दृष्टि में केवल क्रम पर्याप्त है और उदासीनता वक्र बजट रेखा से उपभोक्ता संतुलन निकाला जाता है। प्रयोग में यह समझना ज़रूरी है कि कीमतें उपयोगिता और दुर्लभता दोनों से प्रभावित होती हैं। Quick Tip: उपयोगिता = want‑satisfying power; व्यक्ति, समय, स्थान के साथ बदलती है।


Question 108:

लागत फलन क्या है?

Correct Answer:
लागत फलन उत्पादन की मात्रा और लागत के बीच संबंध दिखाता है। सामान्य रूप में \(C = f(Q, w, r, T)\) जहाँ \(Q\) उत्पादन, \(w,r\) इनपुट कीमतें तथा \(T\) तकनीक है। अल्पकाल में \(C=FC+VC(Q)\), दीर्घकाल में सभी लागतें परिवर्ती मानी जाती हैं।
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किस स्तर का उत्पादन करने पर कुल, औसत और सीमांत लागतें क्या होंगी—यह निर्णय लागत फलन से मार्गदर्शन लेता है। इनपुट कीमतें और तकनीक नियत रहते हुए अधिक उत्पादन प्रायः पहले पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं के कारण लागत कम करता है, फिर भीड़‑भाड़ और प्रबंधकीय सीमाओं से बढ़ा सकता है। अल्पकाल में कुछ कारक स्थिर रहने से \(FC\) अपरिवर्तित और \(VC\) मात्रा पर निर्भर होती है; दीर्घकाल में सभी कारक परिवर्ती होने से \(LAC\) आरेख U‑आकार का बनता है। सीमांत लागत \(MC=\frac{dC}{dQ}\) उत्पादन निर्णय का मुख्य आधार है; लाभ‑अधिकतम पर \(MR=MC\) और स्थिर संतुलन हेतु \(MC\) नीचे से काटता है। नीति स्तर पर कर, सब्सिडी, मजदूरी और ब्याज दर जैसे तत्व लागत फलन को स्थानांतरित करते हैं। Quick Tip: याद सूत्र: \(TC=FC+VC(Q)\); निर्णय नियम: \(MR=MC\) और \(MC\) नीचे से काटे।


Question 109:

चक्रीय प्रवाह से आप क्या समझते हैं?

Correct Answer:
चक्रीय प्रवाह अर्थव्यवस्था में परिवारों और फर्मों के बीच वस्तु‑सेवा तथा आय‑व्यय के सतत दोमार्गी प्रवाह को कहते हैं। वास्तविक प्रवाह में संसाधन और वस्तुएँ चलती हैं, जबकि मौद्रिक प्रवाह में वेतन, किराया, ब्याज, लाभ तथा उपभोग‑निवेश व्यय का प्रवाह शामिल होता है।
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सरल द्विक्षेत्रीय मॉडल में परिवार कारक सेवाएँ फर्मों को देते हैं और बदले में आय पाते हैं; यही आय वस्तु बाज़ार में उपभोग व्यय बनकर फर्मों को जाती है। यह धन प्रवाह और वस्तु प्रवाह निरंतर वृत्त बनाते हैं। तीन और चार‑क्षेत्रीय मॉडलों में सरकार और विदेशी क्षेत्र जुड़ते हैं, जहाँ लीकेज (बचत, कर, आयात) तथा इंजेक्शन (निवेश, सरकारी व्यय, निर्यात) संतुलन को तय करते हैं। यदि इंजेक्शन अधिक हों तो आय बढ़ती है, अन्यथा घटती है। बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय बाज़ार इस प्रवाह को मध्यस्थता देकर प्रभावी बनाते हैं। यह ढांचा राष्ट्रीय आय की मापन विधियों और गुणक सिद्धान्त को समझने का आधार है। Quick Tip: Two flows याद रखें: \(\textbf{Real}\) (goods, factors) और \(\textbf{Money}\) (incomes, expenditures).


Question 110:

प्राथमिक क्षेत्र तथा द्वितीयक क्षेत्र में अंतर स्पष्ट करें।

Correct Answer:
प्राथमिक क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों के प्रत्यक्ष दोहन से संबंधित है—कृषि, वानिकी, मत्स्य, खनन। द्वितीयक क्षेत्र कच्चे माल को रूपांतरित कर औद्योगिक वस्तुएँ बनाता है—विनिर्माण, निर्माण, बिजली। प्राथमिक में प्रकृति पर निर्भरता अधिक, द्वितीयक में पूँजी, तकनीक और मूल्य‑वर्धन अधिक होता है।
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क्षेत्रीय वर्गीकरण से संरचनात्मक परिवर्तन स्पष्ट होते हैं। प्राथमिक क्रियाएँ भूमि और प्राकृतिक उपहारों पर निर्भर हैं; मौसम, मानसून और भू-संपदा इनके निर्णायक कारक हैं। रोजगार सघनता अधिक पर उत्पादकता सामान्यतः कम रहती है। द्वितीयक क्षेत्र में कच्चा माल मशीनों और तकनीक से संसाधित होकर मूल्य‑वर्धित उत्पादों में बदलता है—उद्योग, निर्माण, बिजली‑गैस‑पानी आदि। यह क्षेत्र पूँजी‑गहन और कौशल‑आधारित होता है तथा शहरीकरण, निर्यात और आय वृद्धि को गति देता है। विकास के साथ श्रम प्राथमिक से द्वितीयक/तृतीयक की ओर शिफ्ट होता है, जिसे संरचनात्मक परिवर्तन कहा जाता है। नीतियाँ भी इसी परिवर्तन को प्रोत्साहित करती हैं ताकि उत्पादकता और आय स्तर बढ़े। Quick Tip: Primary = extraction, Secondary = transformation; मूल्य‑वर्धन और तकनीक का स्तर द्वितीयक में अधिक।


Question 111:

हस्तांतरण भुगतान क्या है?

Correct Answer:
हस्तांतरण भुगतान वह सरकारी भुगतान है जो वर्तमान वस्तुओं‑सेवाओं के बदले में नहीं किया जाता, बल्कि आय के पुनर्वितरण हेतु दिया जाता है। पेंशन, छात्रवृत्ति, बेरोजगारी भत्ता, सामाजिक सुरक्षा, सब्सिडी आदि इसके उदाहरण हैं। इन्हें राष्ट्रीय आय की गणना में शामिल नहीं किया जाता।
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राष्ट्रीय आय लेखांकन में कारक भुगतान और हस्तांतरण अलग रखे जाते हैं। कारक भुगतान वर्तमान उत्पादन में लगे श्रम, पूँजी, भूमि और उद्यमिता के प्रतिफल हैं और मूल्य‑वर्धन का हिस्सा बनते हैं। इसके विपरीत हस्तांतरण भुगतान किसी वर्तमान उत्पादन के बदले नहीं दिए जाते, इसलिए वे GDP या NDP में सीधे नहीं जोड़े जाते। सरकार इन्हें सामाजिक सुरक्षा, असमानता कम करने, आय स्थिरीकरण और प्रोत्साहन नीतियों के लिए इस्तेमाल करती है। सब्सिडी मूल्य‑सहायता का रूप है; पेंशन और स्कॉलरशिप विशिष्ट समूहों को राहत देती हैं। लेखांकन में निजी और सरकारी दोनों प्रकार के हस्तांतरण होते हैं; पर अवधारणा समान रहती है—कोई नई वस्तु या सेवा इसके विरुद्ध प्रवाहित नहीं होती। Quick Tip: Transfer ≠ factor payment; \(\textbf{no current production}\) ⇒ national income में शामिल नहीं।


Question 112:

वैयक्तिक प्रयोज्य आय क्या है?

Correct Answer:
वैयक्तिक प्रयोज्य आय वह राशि है जो व्यक्तियों के पास उपभोग और बचत हेतु उपलब्ध रहती है। सूत्र: प्रयोज्य आय = वैयक्तिक आय − प्रत्यक्ष कर तथा अन्य अनिवार्य भुगतान। यह कर‑कटौती के बाद की शुद्ध आय है जिससे परिवार उपभोग‑व्यय और बचत तय करते हैं।
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मापन क्रम समझें। राष्ट्रीय आय से निगमित आय कर, अप्रितरित लाभ आदि समायोजित कर और हस्तांतरण जोड़कर वैयक्तिक आय मिलती है; यह सभी व्यक्तियों द्वारा प्राप्त सकल आय है। इससे व्यक्तिगत प्रत्यक्ष कर तथा अनिवार्य अंशदान घटाएँ तो वैयक्तिक प्रयोज्य आय प्राप्त होती है। यही वह नकदी प्रवाह है जो परिवार उपभोग और बचत के बीच बाँटते हैं, इसलिए उपभोग फलन और गुणक विश्लेषण में यह प्रमुख चर है। नीति‑निर्माता कर दरों और हस्तांतरणों को बदलकर प्रयोज्य आय पर प्रभाव डालते हैं जिससे सामूहिक माँग नियंत्रित होती है। ध्यान दें कि प्रयोज्य आय निजी आय से नहीं, वैयक्तिक आय से निकाली जाती है। Quick Tip: Disposable Personal Income = Personal Income − Direct Taxes (and compulsory payments).


Question 113:

अतिशेष माँग के दो प्रमुख कारण बताइए।

Correct Answer:
दो प्रमुख कारण हैं: सरकार तथा निजी क्षेत्र के व्यय या निवेश में तीव्र वृद्धि और मुद्रा‑आपूर्ति/ऋण में विस्तार। करों में कटौती, निर्यात बढ़त या आय‑अपेक्षाओं के कारण उपभोग में उछाल भी संचयी माँग को पूर्ण‑रोजगार उत्पादन से ऊपर ले जाकर अधिशेष माँग पैदा करते हैं।
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अधिशेष माँग वह स्थिति है जब पूर्ण रोजगार पर संभाव्य आउटपुट की कीमतों पर माँग अधिक हो जाती है। इसके स्रोत समझें। प्रथम, वित्तीय विस्तार—सरकारी व्यय, सब्सिडी, वेतन‑भत्ते या कर कटौती से प्रयोज्य आय और माँग बढ़ती है। द्वितीय, मौद्रिक विस्तार—निम्न ब्याज दरें, ऋण ढील और उच्च क्रेडिट ग्रोथ निवेश तथा उपभोग को बढ़ाती है। तृतीय, बाह्य माँग जैसे निर्यात उछाल और विनिमय दर प्रभाव। इसके परिणामस्वरूप कीमतों पर उर्ध्व दबाव, आयात में वृद्धि, और उत्पादन क्षमता पर तनाव दिखाई देते हैं। सुधार हेतु सरकार खर्च घटाती या कर बढ़ाती है तथा केंद्रीय बैंक दरें/CRR बढ़ाकर तरलता सिकोड़ता है। Quick Tip: Excess demand के त्वरित संकेत: बढ़ती कीमतें, स्टॉक‑आउट, आयात में उछाल, राजकोषीय/मौद्रिक कसाव की ज़रूरत।


Question 114:

उपभोग एवं आय में क्या सम्बन्ध है?

Correct Answer:
उपभोग फलन से सम्बन्ध व्यक्त होता है: \( C = a + cY \). यहाँ \(a\) स्वायत्त उपभोग और \(c\) सीमांत उपभोग प्रवृत्ति है जहाँ \(0 < c < 1\). आय बढ़ने पर उपभोग बढ़ता है, पर अनुपात सामान्यतः घटता है; इसलिए औसत उपभोग प्रवृत्ति आय बढ़ने के साथ कम होती है।
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Keynes के अनुसार वर्तमान उपभोग मुख्य रूप से वर्तमान प्रयोज्य आय का फल है। रेखीय रूप \( C=a+cY \) में \(a\) वह न्यूनतम व्यय है जो शून्य आय पर भी करना पड़ता है, जबकि \(c=\frac{\Delta C}{\Delta Y}\) बताता है कि आय की अतिरिक्त इकाई से कितना उपभोग बढ़ेगा। चूँकि परिवार कुछ आय बचाते हैं, \(0 < c < 1\).>Quick Tip: याद सूत्र: \(MPC+MPS=1\); छोटी अवधि में \(MPC\) उच्च ⇒ गुणक बड़ा ⇒ आय पर तेज प्रभाव।.


Question 115:

प्रेरित निवेश क्या है?

Correct Answer:
प्रेरित निवेश वह निवेश है जो आय, बिक्री या माँग में परिवर्तन के साथ बदलता है। उत्पादन बढ़ने पर अतिरिक्त क्षमता, मशीनें और भंडार चाहिए, इसलिए निवेश बढ़ता है; मंदी में घटता है। यह स्वायत्त निवेश से अलग है जो आय से स्वतंत्र नीतिगत या तकनीकी कारणों से होता है।
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कंपनियाँ पूँजी स्टॉक का आकार अपेक्षित बिक्री और क्षमता उपयोग के आधार पर तय करती हैं। जब समष्टि माँग और आय बढ़ती है, तो एक्सीलरेटर सिद्धान्त के अनुसार वांछित पूँजी‑उत्पादन अनुपात बरकरार रखने के लिए निवेश में अनुपात से अधिक वृद्धि हो सकती है; यह प्रेरित निवेश कहलाता है। इसके विपरीत, आय घटने पर पूँजी स्टॉक अधिशेष होने से नया निवेश रुक जाता है और केवल प्रतिस्थापन किया जाता है। स्वायत्त निवेश सड़क, बांध, रक्षा, अनुसंधान या नयी तकनीक जैसी योजनाओं से प्रेरित होता है और आय से स्वतंत्र माना जाता है। व्यापार चक्रों में प्रेरित निवेश का चक्रवृद्धि प्रभाव आय को ऊपर‑नीचे करता है, इसलिए स्थिरीकरण नीति निवेश अपेक्षाओं और ऋण‑शर्तों को संतुलित रखने पर जोर देती है। Quick Tip: Accelerator सोच: \(I_t = v\,(Y_t - Y_{t-1})\). आय की वृद्धि ⇒ प्रेरित निवेश में तेज उछाल।


Question 116:

संतुलन कीमत की परिभाषा दीजिए।

Correct Answer:
संतुलन कीमत वह बाजार मूल्य है जिस पर माँग की मात्रा और आपूर्ति की मात्रा बराबर होती हैं। इस स्तर पर न खरीदारों को अधिक खरीदने की, न विक्रेताओं को अधिक बेचने की प्रवृत्ति रहती है। अतः अभाव या अधिशेष नहीं बनता और लेनदेन कीमत स्थिर रहती है।
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माँग वक्र और आपूर्ति वक्र के प्रतिच्छेद पर प्राप्त \(P^*\) को संतुलन कीमत और उससे जुड़ी \(Q^*\) को संतुलन मात्रा कहते हैं। यदि कीमत \(P>P^*\) हो तो बाजार में अधिशेष बनता है; विक्रेता स्टॉक घटाने हेतु कीमत घटाते हैं, जिससे \(P\downarrow\) और बाजार फिर \(P^*\) पर लौटताहै। यदि \(P < p^*\)>Quick Tip: \(P>P^*\Rightarrow\) अधिशेष; \(P < p^*\rightarrow\)


Question 117:

पूर्ण प्रतिस्पर्धिता की विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
पूर्ण प्रतिस्पर्धा में अनेक खरीदार‑विक्रेता, समरूप उत्पाद, मुक्त प्रवेश‑निर्गम, पूर्ण जानकारी, परिवहन लागत व विज्ञापन का नगण्य प्रभाव तथा संसाधनों की स्वतंत्र गतिशीलता मानी जाती है। फर्म मूल्य‑स्वीकारी होती है; अल्पकाल में असामान्य लाभ संभव, पर दीर्घकाल में केवल सामान्य लाभ रहता है।
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इस बाजार संरचना में किसी एक विक्रेता का उत्पादन इतना छोटा होता है कि वह कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता; इसलिए फर्म का AR और MR क्षैतिज रहते हैं और वह \(MR=MC\) पर उत्पादन चुनती है। समरूपता के कारण ब्रांड‑भेद नहीं होता, खरीदार केवल कीमत देखते हैं। मुक्त प्रवेश‑निर्गम दीर्घकालीन लाभ को शून्य कर देता है, क्योंकि असामान्य लाभ नए प्रवेश को आकर्षित करता है और आपूर्ति बढ़ने से कीमत घटकर \(AC_{\min}\) के आसपास टिक जाती है। जानकारी की पूर्णता और संसाधनों की गतिशीलता कीमत‑दूध‑समानता सुनिश्चित करती है। यह संरचना दक्षता का मानक देती है: \(P=MC\) और \(Q\) अधिकतम, इसलिए मृतभार हानि शून्य मानी जाती है। वास्तविक दुनिया में यह आदर्श है, पर कृषि‑उत्पादों और वित्तीय बाज़ारों में इसका सन्निकटन मिलता है। Quick Tip: चार शब्द याद रखें: \(\textbf{Many, Homogeneous, Free Entry, Price‑taker}\).


Question 118:

व्यक्तिगत पूर्ति तथा बाजार पूर्ति में अंतर स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
व्यक्तिगत पूर्ति किसी एक फर्म द्वारा अलग‑अलग कीमतों पर उपलब्ध कराई जाने वाली मात्रा का संबंध है। बाजार पूर्ति समस्त फर्मों की व्यक्तिगत पूर्तियों का क्षैतिज योग है। इसलिए किसी भी कीमत पर बाजार पूर्ति = प्रत्येक फर्म की उस कीमत पर दी जाने वाली मात्राओं का कुल।
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पूर्ति फलन \(q_s=f(P,\,cost,\,T)\) को एक फर्म के लिए लिखें तो वह व्यक्तिगत पूर्ति है। एक उद्योग में \(n\) फर्में हों तो बाजार पूर्ति \(Q_s(P)=\sum_{i=1}^n q_{si}(P)\) होगी; ग्राफ पर यह क्षैतिज जोड़ से बनता है। नई फर्म का प्रवेश, पुरानी का निकास, तकनीक और लागत में बदलाव बाजार पूर्ति वक्र को दाएँ‑बाएँ खिसकाते हैं। व्यक्तिगत वक्र का ढाल प्रायः धनात्मक है क्योंकि कीमत बढ़ने पर लाभ‑प्रेरणा से उत्पादन बढ़ता है। नीतिगत कर‑सब्सिडी जैसी चीजें भी लागत बदलकर दोनों वक्रों को प्रभावित करती हैं। इसलिए उद्योग‑स्तर के विश्लेषण में हमेशा क्षैतिज योग का सिद्धान्त लागू करें। Quick Tip: Market supply = horizontal summation of all firms’ supplies at each price.


Question 119:

अवसर लागत क्या है?

Correct Answer:
अवसर लागत वह त्याग है जो किसी विकल्प को चुनते समय सर्वश्रेष्ठ वैकल्पिक उपयोग का छोड़ा हुआ लाभ दर्शाता है। यह संसाधनों की दुर्लभता के कारण उत्पन्न होती है और निर्णय का वास्तविक खर्च बताती है; उत्पादन संभावना वक्र पर इसका मापन स्पष्ट दिखता है।
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हर निर्णय में सीमित संसाधनों को एक उपयोग से दूसरे में लगाना पड़ता है। यदि 1 एकड़ भूमि पर गेहूँ बोया तो मक्का का जो सर्वश्रेष्ठ सम्भव उत्पादन छोड़ दिया गया, वही अवसर लागत है। यही तर्क समय, पूँजी और श्रम पर भी लागू होता है। PPC पर X वस्तु की अतिरिक्त इकाई पाने के लिए Y की जितनी मात्रा छोड़नी पड़े, उतनी \( \Delta Y/\Delta X \) सीमान्त अवसर लागत है; संसाधनों की असमान दक्षता के कारण यह सामान्यतः बढ़ती है जिससे वक्र उद्गम की ओर उत्तल बनता है। नीति में भी अवसर लागत महत्व रखती है: सार्वजनिक परियोजना पर खर्च का अवसर लागत वह निजी निवेश है जो रुक गया। यह अवधारणा हमें नकद खर्च से आगे बढ़कर वास्तविक त्याग देखने की दृष्टि देती है। Quick Tip: Decision rule: किसी भी विकल्प का मूल्य = अगला सर्वश्रेष्ठ छोड़ा गया लाभ।


Question 120:

माँग की लोच कब इकाई होती है?

Correct Answer:
जब कीमत में प्रतिशत परिवर्तन के बराबर ही मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन हो, तब माँग की लोच एक होती है। इस स्थिति में कुल व्यय \(P\times Q\) स्थिर रहता है; रैखिक माँग पर यह मध्यबिंदु पर, और आयताकार अतिपरवलय माँग पर हर बिंदु पर मिलता है।
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लोच \(\varepsilon=\frac{%\Delta Q}{%\Delta P}\). \(\varepsilon=1\) होने का अर्थ है कीमत बदलने से खरीदी गई राशि \(P\times Q\) अपरिवर्तित रहती है; इसलिए इसे यूनिटरी लोच कहते हैं। रैखिक माँग \(Q=a-bP\) में ऊपर का भाग अधिक लोचदार (\(\varepsilon>1\)), नीचे का भाग अलोचदार (\(\varepsilon<1\)) और मध्य पर \(\varepsilon=1\) होता है; इसी बिंदु पर सीमांत राजस्व शून्य और कुल राजस्व अधिकतम होता है। आयताकार अतिपरवलय (rectangular hyperbola) पर \(PQ\) स्थिर रहने से हर बिंदु पर \(\varepsilon=1\) रहता है। व्यावसायिक निर्णय में यह जानकारी महत्वपूर्ण है: यदि सामान यूनिटरी क्षेत्र में बिक रहा हो तो कीमत परिवर्तन से कुल बिक्री राशि नहीं बदलेगी। Quick Tip: याद रखें: \(\varepsilon=1 \Rightarrow TR\) अधिकतम और \(MR=0\) (रैखिक माँग पर मध्यबिंदु)।


Question 121:

माँग फलन क्या है?

Correct Answer:
माँग फलन वह औपचारिक संबंध है जो किसी वस्तु की माँगित मात्रा \(Q_d\) को उसके निर्धारकों से जोड़ता है। सामान्यतः \[ Q_d=f\!\left(P_x,\;Y,\;P_r,\;T,\;A,\;E,\;N\right), \] जहाँ \(P_x\) वस्तु‑कीमत, \(Y\) आय, \(P_r\) संबंधित वस्तुओं की कीमतें, \(T\) रुचि, \(A\) विज्ञापन, \(E\) अपेक्षा और \(N\) जनसंख्या है।
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फलन माँग का संक्षिप्त गणितीय रूप है। एकल‑चर विश्लेषण में हम अन्य निर्धारकों को स्थिर मानते हैं और \(Q_d=f(P_x)\) से माँग वक्र बनाते हैं। पर नीति और पूर्वानुमान में आय, क्रॉस‑कीमतें, विज्ञापन, ऋतुएँ, वितरण और अपेक्षाएँ महत्वपूर्ण होते हैं। उदाहरणतः चाय की माँग \(Q_d=f(P_{tea},\,Y,\,P_{coffee},\,A)\) लिखी जा सकती है; \(P_{coffee}\) बढ़े तो \(Q_{tea}\) दाएँ शिफ्ट करता है क्योंकि दोनों स्थानापन्न हैं। प्रतिगमन तकनीकों से इन कारकों के गुणांकों का अनुमान कर सकते हैं। यही फलन लोच, बाजार पूर्वानुमान, और कर/सब्सिडी के प्रभाव का आधार देता है। फलन का रूप रैखिक, घातीय, लॉग‑रैखिक आदि लिया जा सकता है। Quick Tip: सिंगल‑वेरिएबल वक्र = \(Q_d=f(P)\); मल्टी‑वेरिएबल पूर्वानुमान में आय, क्रॉस‑प्राइस, विज्ञापन जोड़ें।


Question 122:

सम‑विच्छेद बिन्दु (Break‑Even Point) क्या है?

Correct Answer:
सम‑विच्छेद बिन्दु वह उत्पादन या बिक्री स्तर है जहाँ कुल राजस्व और कुल लागत बराबर होते हैं तथा लाभ शून्य होता है। इकाइयों में \( \text{BEP}=\dfrac{\text{Fixed Cost}}{\text{Price}-\text{AVC}} \); धनराशि में \( \text{BEP Sales}=\dfrac{\text{Fixed Cost}}{\text{Contribution Ratio}} \).
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लागत‑मात्रा‑लाभ विश्लेषण में BEP जोखिम और योजना का मूल सूचक है। कुल लागत \(TC=FC+VC\) तथा कुल राजस्व \(TR=P\times Q\). जब \(TR=TC\) तब न लाभ न हानि; इसके दाईं ओर लाभ और बाईं ओर हानि होती है। योगदान \(P-AVC\) प्रति इकाई वह राशि है जो स्थिर लागत ढकने और फिर लाभ देने में सहायक बनती है। ग्राफ में \(TR\) और \(TC\) की रेखाओं का प्रतिच्छेद BEP देता है; इसके बाद \(Margin of Safety = Actual Sales - BEP Sales\) जितनी अधिक हो, जोखिम कम होता है। उत्पाद‑मिश्रण, कीमत, विज्ञापन या लागत संरचना में बदलाव से BEP बदलता है; प्रबंधक इसे घटाने हेतु कीमत‑रणनीति, दक्षता और स्थिर लागत नियंत्रण पर काम करते हैं। Quick Tip: \( BEP (units) = \dfrac{FC}{P-AVC}\); \(\; MOS = Actual - BEP\).


Question 123:

कुल आय कब घटना प्रारम्भ कर देती है?

Correct Answer:
कुल आय \(TR=P\times Q\) तब घटने लगती है जब माँग की मूल्य‑लोच एक से कम हो जाती है। इस अलोचदार क्षेत्र में अतिरिक्त बिक्री के लिए कीमत घटाने पर मात्रा में वृद्धि पर्याप्त नहीं होती, परिणामस्वरूप \(TR\downarrow\); इसी क्षेत्र में सीमांत आय ऋणात्मक हो जाती है।
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रैखिक माँग पर \(TR\) पहले बढ़ता है, मध्यबिंदु पर अधिकतम होता है और उसके बाद घटता है। कारण समझें: \(MR= \frac{dTR}{dQ} = AR\left(1-\frac{1}{\varepsilon}\right)\). जब \(\varepsilon>1\) (लोचदार) तो \(MR>0\) और \(TR\uparrow\); \(\varepsilon=1\) पर \(MR=0\) और \(TR\) अधिकतम; \(\varepsilon<1\) पर \(MR<0\) और \(TR\downarrow\). इसलिए किसी फर्म को कुल आय घटने से बचना हो तो उसे अपनी कीमत उस सीमा से नीचे नहीं घटानी चाहिए जहाँ माँग अलोचदार हो जाती है। व्यावहारिक रूप में बिक्री आँकड़ों से कुल व्यय विधि का उपयोग कर क्षेत्र पहचाना जा सकता है: यदि कीमत घटाने पर कुल व्यय बढ़ता है तो लोचदार; यदि घटता है तो अलोचदार। Quick Tip: याद रखें: \(TR\) अधिकतम ↔ \(\varepsilon=1\), \(TR\downarrow\) ↔ \(\varepsilon<1\) ↔ \(MR<0\).


Question 124:

उत्पादन फलन को परिभाषित कीजिए।

Correct Answer:
उत्पादन फलन वह संबंध है जो दी गई तकनीक पर निर्धारित इनपुट मात्राओं से अधिकतम प्राप्त होने वाले उत्पादन को दर्शाता है। सामान्य रूप \( Q=f(L,K,N,\ldots) \). अल्पकाल में कुछ कारक स्थिर रहते हैं; दीर्घकाल में सभी परिवर्ती माने जाते हैं।
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यह फलन तकनीकी दक्षता का मानचित्र है: किसी भी इनपुट‑समुच्चय के लिए यह अधिकतम सम्भव आउटपुट बताता है। अल्पकाल में \(Q=f(L;K)\) जैसा रूप लेते हैं जहाँ \(K\) स्थिर है; यहाँ चर के प्रतिफल का नियम लागू होता है और सीमांत उत्पाद पहले बढ़ता फिर घटता है। दीर्घकाल में \(Q=f(L,K)\) में सभी कारक परिवर्ती होते हैं, और पैमाने के प्रतिफल—बढ़ते, स्थिर, घटते—देखे जाते हैं। सम इसो क्वांट और सम लागत रेखा के स्पर्श से लागत‑न्यूनतम संयोजन मिलता है। यह फलन फर्म के लागत फलन का मूल स्रोत है क्योंकि लागत = इनपुट की कीमतें × उनकी मात्राएँ। Quick Tip: Short run: variable proportions; Long run: returns to scale. \(Q=f(inputs|technology)\).


Question 125:

‘बजट रेखा’ क्या है?

Correct Answer:
बजट रेखा वह रेखा है जो दिए गए धन‑आय \(M\) और वस्तुओं की कीमतें \(P_x, P_y\) होने पर उपभोक्ता द्वारा खरीदे जा सकने वाले दो वस्तुओं के सभी संयोजनों को दर्शाती है। ढाल \(-\frac{P_x}{P_y}\) तथा अवरोध \(M/P_y\) और \(M/P_x\) होते हैं।
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बजट रेखा व्यय‑बाधा का ज्यामितीय निरूपण है। समीकरण \(P_x X + P_y Y = M\) से स्पष्ट है कि रेखा की ढाल सापेक्ष कीमत \(-P_x/P_y\) है और यह उपभोक्ता के विनिमय दर को बताती है। उपभोक्ता संतुलन वहाँ बनता है जहाँ बजट रेखा किसी उदासीनता वक्र को स्पर्श करे, अर्थात \(MRS_{XY}=P_x/P_y\). आय बढ़ने या घटने पर रेखा समांतर खिसकती है; एक वस्तु की कीमत बदलने पर रेखा घूमती है। यह उपकरण उपभोक्ता कल्याण में आय‑और‑कीमत परिवर्तनों के प्रभाव, कर‑सब्सिडी नीतियों और वास्तविक आय के आकलन को समझने में अत्यंत उपयोगी है। Quick Tip: Equation: \(P_xX+P_yY=M\); slope \(=-P_x/P_y\); IC–BL स्पर्श ⇒ उपभोक्ता संतुलन।


Question 126:

GST क्या है?

Correct Answer:
GST वस्तु एवं सेवा कर है—गंतव्य‑आधारित, मूल्य‑वर्धित अप्रत्यक्ष कर जो उत्पादन‑वितरण की हर अवस्था में लगता है पर \(\textbf{इनपुट टैक्स क्रेडिट}\) से दोहरा कर हटाता है। भारत में द्वैत ढाँचा है: CGST, SGST/UTGST और अंतरराज्यीय IGST; कई केंद्र‑राज्य कर इसमें समाहित हैं।
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GST का उद्देश्य कर तंत्र सरल बनाकर एक समान राष्ट्रीय बाजार बनाना है। वैट सिद्धान्त पर आधारित होने से हर चरण में केवल मूल्य‑वर्धन करयोग्य होता है; आपूर्ति श्रृंखला में दिए गए कर को ITC के रूप में घटा लिया जाता है। भारत में वस्तु‑सेवा की आपूर्ति पर राज्य के भीतर लेनदेन में CGST+SGST लगते हैं, जबकि राज्य‑के‑पार आपूर्ति पर IGST लगता है जो क्रेडिट योग्य है। पंजीकरण, रिटर्न, ई‑वे बिल और मिलान प्रणाली अनुपालन को डिजिटल बनाते हैं। लाभ: करों का समेकन, कास्केडिंग में कमी, प्रतिस्पर्धा और लॉजिस्टिक दक्षता में सुधार। चुनौतियाँ: दर संरचना, रिफंड समय, छोटे व्यापारों की अनुपालन लागत। परीक्षा में लिखें—destination‑based, dual, value‑added, ITC। Quick Tip: कुंजी शब्द: \(\textbf{Dual structure (CGST/SGST/IGST)}\), \(\textbf{Input Tax Credit}\), \(\textbf{destination based}\).


Question 127:

राजकोषीय नीति के उपकरणों का उल्लेख करें।

Correct Answer:
मुख्य उपकरण हैं: सरकारी व्यय, कराधान, सार्वजनिक ऋण/उधारी, घाटा वित्त, हस्तांतरण भुगतान और सब्सिडी। इनका उपयोग चक्रीय उतार‑चढ़ाव समतल करने, आय‑वितरण सुधारने और विकास हेतु किया जाता है; स्वचालित स्थिरीकारक जैसे प्रगतिशील कर व बेरोजगारी भत्ता भी महत्त्वपूर्ण हैं।
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राजकोषीय नीति सरकार के आय‑व्यय द्वारा सामूहिक माँग को प्रभावित करती है। मंदी में वह विस्तारवादी नीति अपनाती है—व्यय बढ़ाती, कर घटाती, घाटा वित्त से निवेश को प्रोत्साहित करती है; इससे गुणक प्रभाव से आय‑रोजगार बढ़ते हैं। मुद्रास्फीति के समय संकीर्ण नीति अपनाई जाती है—कर बढ़ते, गैर‑आवश्यक व्यय घटते और उधारी कम की जाती है। हस्तांतरण/सब्सिडी आय वितरण और प्राथमिकताओं को प्रभावित करते हैं। लोकऋण प्रबंधन उधारी की लागत और परिपक्वता संरचना पर ध्यान देता है। स्वचालित स्थिरीकारक बिना नयी नीति की घोषणा के स्वयं काम करते हैं, जैसे प्रगतिशील आयकर मंदी में संग्रह घटाकर आय को सहारा देता है। समन्वित रूप से यह नीति मौद्रिक नीति के साथ मिलकर स्थिरता और विकास का लक्ष्य साधती है। Quick Tip: तिगड्डा याद रखें: \(\textbf{G, T, Borrowing}\). मंदी ⇒ \(G\uparrow, T\downarrow\); स्फीति ⇒ \(G\downarrow, T\uparrow\).


Question 128:

भुगतान शेष की परिभाषा दीजिए।

Correct Answer:
भुगतान शेष एक देश के निवासियों और विश्व के शेष हिस्से के बीच एक निश्चित अवधि में हुई सभी आर्थिक लेन‑देनों का क्रमबद्ध लेखा‑विवरण है। इसमें चालू खाता, पूँजी/वित्तीय खाता और त्रुटि‑उपेक्षा अनुभाग शामिल होते हैं; प्रविष्टियाँ क्रेडिट और डेबिट रूप में दर्ज होती हैं।
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BoP में वस्तुओं‑सेवाओं का व्यापार, आय एवं हस्तांतरणों का चालू खाता और प्रत्यक्ष‑पोर्टफोलियो निवेश, ऋण, आरक्षित परिसंपत्तियों का पूँजी/वित्तीय खाता समाहित रहते हैं। किसी लेन‑देन से यदि विदेशी मुद्रा देश में आती है तो क्रेडिट और यदि बाहर जाती है तो डेबिट दर्शाया जाता है। लेखांकन पहचान के कारण कुल क्रेडिट = कुल डेबिट होता है; किंतु नीतिगत अर्थ में चालू खाते का घाटा या समेकित असंतुलन चिंतनीय हो सकता है, जिसे विनिमय दर समायोजन, व्यापार नीति, पूँजी प्रवाह प्रबंधन से सुधारा जाता है। यह दस्तावेज नीति‑निर्माताओं को बाह्य स्थिरता, आयात‑निर्यात प्रतिस्पर्धा और विनिमय भंडार की स्थिति समझने में मदद करता है। Quick Tip: BoP = Current + Capital/Financial \(+\) Errors & Omissions; Credit = inflow, Debit = outflow.


Question 129:

प्रत्यक्ष कर की परिभाषा दीजिए।

Correct Answer:
प्रत्यक्ष कर वह कर है जिसका भार वही व्यक्ति वहन करता है जिस पर कानूनी रूप से कर लगाया जाता है; इसे दूसरे पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। आयकर, निगम कर, संपत्ति कर, पूँजी लाभ कर इसके उदाहरण हैं; ये प्रायः प्रगतिशील दरों पर लगाए जाते हैं।
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प्रत्यक्ष करों में कर‑जिम्मेदारी और वास्तविक भार एक ही इकाई पर पड़ता है, अतः वे आय और संपदा वितरण को प्रभावित करने के प्रभावी साधन हैं। सरकार इन्हें प्रगतिशील बना कर उच्च आय वर्ग से अधिक अनुपात में कर ले सकती है, जिससे असमानता कम होती है। इनके लाभ हैं—न्याय, लोचशीलता और राजस्व स्थिरता; किंतु अनुपालन लागत, चोरी की संभावना और प्रशासनिक जटिलताएँ चुनौतियाँ हैं। अप्रत्यक्ष करों के विपरीत प्रत्यक्ष कर कीमतों में तुरंत नहीं जोड़ते, इसलिए मुद्रास्फीति दबाव कम होता है। आधुनिक कर‑संरचना में दोनों प्रकार के करों का संतुलित मिश्रण आवश्यक है ताकि दक्षता और समानता के लक्ष्यों का समन्वय हो सके। Quick Tip: Direct = non‑shiftable (income/corporate/wealth); Indirect = shiftable (GST/Excise/VAT).


Question 130:

मौद्रिक नीति क्या है?

Correct Answer:
मौद्रिक नीति वह नीति है जिसके माध्यम से केंद्रीय बैंक मुद्रा‑आपूर्ति, ऋण तथा ब्याज दरों को नियंत्रित करता है ताकि मूल्य‑स्थिरता, वित्तीय स्थिरता और सतत विकास के लक्ष्य हासिल हों। प्रमुख साधन हैं: रेपो‑रिवर्स रेपो, CRR, SLR, खुले बाजार क्रय‑विक्रय और संप्रेषण मार्गदर्शन।
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केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में कुल तरलता और क्रेडिट स्थितियों को साधनों के संयोजन से संचालित करता है। अल्पावधि नीति दरें (रेपो, रिवर्स‑रेपो) बैंकों की धन‑लागत बदलती हैं; CRR/SLR से जमा‑सृजन क्षमता पर सीधा असर पड़ता है; खुले बाजार परिचालन सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद‑बिक्री द्वारा प्रणाली की नकदी को जोड़ते‑घटाते हैं। विनियामक उपाय, दर‑मार्गदर्शन और अपेक्षा प्रबंधन से प्रसारण तंत्र सुदृढ़ होता है। मुद्रास्फीति बढ़ने पर नीति सख्त की जाती है, जिससे मांग‑दबाव कम होते हैं; मंदी में ढील दी जाती है ताकि ऋण सस्ता होकर निवेश‑खपत बढ़े। वित्तीय स्थिरता हेतु मैक्रो‑प्रुडेंशियल मानदंड भी मौद्रिक नीति के साथ चलते हैं। यह नीति राजकोषीय नीति के साथ तालमेल में सर्वोत्तम प्रभाव देती है। Quick Tip: कुंजी: \(\textbf{Rates (repo)}\), \(\textbf{Reserves (CRR/SLR)}\), \(\textbf{OMOs}\). स्फीति ⇒ कसाव; मंदी ⇒ विस्तार।


Question 131:

व्यक्ति अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र में क्या अंतर है?

Correct Answer:
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व्यक्ति अर्थशास्त्र (माइक्रो) अर्थव्यवस्था की इकाइयों—उपभोक्ता, फर्म, उद्योग—का अध्ययन करता है: किसी वस्तु की कीमत/मात्रा कैसे तय होती है, फर्म का संतुलन, कारक‑मूल्य, कल्याण आदि। इसका उपकरण आंशिक संतुलन, माँग‑आपूर्ति, लोच, लागत तथा मूल्य सिद्धान्त है। समष्टि अर्थशास्त्र (मैक्रो) समग्र चर—राष्ट्रीय आय, समग्र माँग‑आपूर्ति, बेरोज़गारी, मुद्रास्फीति, वृद्धि, भुगतान‑शेष, विनिमय दर—का अध्ययन करता है और सामान्य संतुलन, गुणक, त्वरक, IS–LM, AD–AS जैसे ढाँचों से नीति‑निर्णय निर्देशित करता है। माइक्रो संसाधनों के विभाजन एवं कुशलता पर बल देता है; मैक्रो स्थिरता व विकास पर। दोनों परस्पर पूरक हैं: माइक्रो के बिना मैक्रो की नींव और मैक्रो के बिना माइक्रो का संदर्भ अधूरा रहता है।
Quick Tip: Micro = इकाइयाँ (उपभोक्ता/फर्म), आंशिक संतुलन, कीमत व संसाधन विभाजन। Macro = समग्र चर (आय, बेरोज़गारी, मुद्रास्फीति), AD–AS/IS–LM, स्थिरीकरण व वृद्धि। दोनों पूरक: माइक्रो के सूक्ष्म नियमों पर मैक्रो की नीतियाँ टिकती हैं।


Question 132:

कुल आय, औसत आय और सीमांत आय की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
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कुल आय \(TR\) वह राजस्व है जो फर्म को \(Q\) इकाइयाँ बेचने पर मिलता है: \(TR=P\times Q\) (यदि \(P\) स्थिर हो) अथवा \(TR=P(Q)\cdot Q\)। औसत आय \(AR=\dfrac{TR}{Q}\) प्रति इकाई राजस्व है; यह बाज़ार मूल्य के बराबर होता है। सीमांत आय \(MR=\dfrac{dTR}{dQ}\) वह अतिरिक्त राजस्व है जो एक और इकाई बेचने से प्राप्त होता है। पूर्ण प्रतिस्पर्धा में \(P\) स्थिर, इसलिए \(AR=MR=P\)। अपूर्ण प्रतिस्पर्धा में \(AR\) नीचे ढलान वाला, \(MR < ar\) > 1\) पर \(MR>0\), \(\varepsilon=1\) पर \(MR=0\), \(\varepsilon<1\) पर \(MR<0\) होता है। Quick Tip: सूत्र: \(TR=P\cdot Q\), \(AR=TR/Q\), \(MR=d(TR)/dQ\). पूर्ण प्रतिस्पर्धा में \(AR=MR=P\). रिश्ता: \(MR=AR\!\left(1-\frac{1}{\varepsilon}\right)\); \(TR\) अधिकतम जब \(MR=0\) (रैखिक माँग पर मध्य‑बिंदु)।>


Question 133:

माँग क्या है? माँग के निर्धारक तत्वों को समझाइए।

Correct Answer:
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माँग वह मात्रा है जिसे उपभोक्ता किसी निर्धारित समय व निर्धारित मूल्य पर क्रय‑शक्ति सहित खरीदने को तैयार हो। इसके प्रमुख निर्धारक हैं: (1) वस्तु का मूल्य \(P_x\); (2) आय \(Y\) और उसका वितरण; (3) संबंधित वस्तुओं के मूल्य \(P_r\) (स्थानापन्न/पूरक); (4) रुचि, फैशन, आदतें; (5) अपेक्षाएँ (भविष्य की कीमत/आय); (6) जनसंख्या का आकार व संरचना; (7) विज्ञापन व ब्रांड निष्ठा; (8) ऋण‑उपलब्धता और मौसमी/भौगोलिक कारक। सामान्य वस्तुओं में \(Y\uparrow \Rightarrow Q_d\uparrow\), हीन वस्तुओं में उलटा। स्थानापन्न की कीमत बढ़ने पर माँग बढ़ती, पूरक की कीमत बढ़ने पर घटती है। विश्लेषण में अन्य बातें समान रहने की धारणा अपनाई जाती है। Quick Tip: माँग फलन: \(Q_d=f(P_x,\,Y,\,P_r,\,T,\,A,\,N,\,E)\). स्थानापन्न की कीमत \(\uparrow \Rightarrow\) माँग \(\uparrow\); पूरक की कीमत \(\uparrow \Rightarrow\) माँग \(\downarrow\). सामान्य वस्तु: \(Y\uparrow \Rightarrow Q_d\uparrow\); हीन वस्तु: विपरीत।


Question 134:

एक द्वि‑क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में आय का चक्रीय प्रवाह समझाइए।

Correct Answer:
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द्वि‑क्षेत्रीय मॉडल में दो इकाइयाँ हैं—परिवार और फर्में। परिवार कारक सेवाएँ (श्रम, भूमि, पूँजी) फर्मों को देते हैं; बदले में वेतन, किराया, ब्याज, लाभ के रूप में आय प्राप्त करते हैं। यही आय परिवार वस्तु‑बाज़ार में उपभोग व्यय के रूप में फर्मों को लौटाते हैं। इस प्रकार वास्तविक प्रवाह (कारक व वस्तुएँ) और मौद्रिक प्रवाह (आय व व्यय) विपरीत दिशाओं में निरंतर वृत्त बनाते हैं। यदि बचत/निवेश को शामिल करें तो परिवार बचत वित्तीय क्षेत्र को देते हैं और फर्में निवेश उधार लेती हैं; संतुलन की शर्त \(S=I\) से \(Y=C+I\) बनती है। किसी भी असमानता पर आय समायोजित होकर नया संतुलन बनाती है। Quick Tip: दो प्रवाह: \(\textbf{वास्तविक}\) (कारक/वस्तुएँ) और \(\textbf{मौद्रिक}\) (आय/व्यय) विपरीत दिशाओं में। संतुलन पहचान: \(Y=C+I\) तथा वित्त क्षेत्र जोड़ें तो \(S=I\). लीकेज–इंजेक्शन सोच से आय समायोजन समझिए।


Question 135:

पूर्ण प्रतिस्पर्धिता क्या है? पूर्ण प्रतिस्पर्धिता की विशेषताएँ बताइए।

Correct Answer:
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पूर्ण प्रतिस्पर्धिता वह बाजार है जहाँ अनेकों विक्रेता‑खरीदार हों, समरूप उत्पाद बिके, प्रवेश‑निर्गम स्वतंत्र हो, सभी को पूर्ण जानकारी हो और संसाधन गतिशील हों। बिक्री‑व्यय व परिवहन लागत नगण्य मानी जाती है और कोई फर्म कीमत को प्रभावित नहीं कर सकती; फर्म मूल्य‑स्वीकारी होती है। अल्पकाल में \(MR=MC\) पर संतुलन तथा असामान्य लाभ सम्भव; दीर्घकाल में नए प्रवेश से कीमत \(AC_{\min}\) के बराबर होकर केवल सामान्य लाभ बचता है। इस रूप में सामाजिक कुशलता उच्चतम मानी जाती है क्योंकि \(P=MC\) और मृतभार हानि नहीं रहती। Quick Tip: चार की‑वर्ड: Many sellers, Homogeneous product, Free entry/exit, Perfect information. फर्म मूल्य‑स्वीकारी; दीर्घकाल में \(P=MC=AC_{\min}\) ⇒ केवल सामान्य लाभ, अधिकतम दक्षता।


Question 136:

अतिरेक माँग क्या है? उत्पादन और कीमतों पर इसका क्या प्रभाव होता है?

Correct Answer:
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अतिरेक माँग वह स्थिति है जब पूर्ण‑रोज़गार के निकट समग्र माँग \((AD)\) संभाव्य उत्पादन से ऊपर चली जाती है; इसे स्फीतिक अंतराल भी कहते हैं। अल्पावधि में फर्में ओवरटाइम, स्टॉक‑घटाने और उच्च क्षमता उपयोग से उत्पादन कुछ बढ़ाती हैं, किंतु आपूर्ति लोच सीमित होने से कीमतों में तेज वृद्धि होती है। परिणाम: माँग‑खींच मुद्रास्फीति, संसाधनों पर दबाव, आयात में बढ़ोतरी, वितरण में विकृति। सुधार हेतु सरकार व्यय घटाती/कर बढ़ाती, केंद्रीय बैंक रेपो/CRR बढ़ाकर तरलता सिकोड़ता और क्रेडिट नियंत्रित करता है। दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था संभाव्य उत्पादन पर लौटती है, पर उच्च मूल्य‑स्तर स्थायी रह सकता है। Quick Tip: अधिशेष माँग = स्फीतिक अंतराल; AD वक्र दाएँ शिफ्ट। उपाय: राजकोषीय संकुचन (G\(\downarrow\), T\(\uparrow\)) और मौद्रिक कसाव (रेपो/CRR \(\uparrow\), OMO बिक्री)। अल्पकाल में कीमतें \(\uparrow\) अधिक; उत्पादन क्षमता से बँधा रहता है।


Question 137:

भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति के कौन‑कौन से उपकरण हैं?

Correct Answer:
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सामान्य मात्रात्मक उपकरण: नीति दरें—रेपो, रिवर्स‑रेपो, बैंक रेट; तरलता साधन—CRR, SLR; खुले बाजार परिचालन और तरलता समायोजन सुविधा/मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी। चयनात्मक उपकरण: ऋण सीमांकन, मार्जिन आवश्यकताएँ, उपभोक्ता ऋण विनियम, प्राथमिकता क्षेत्र निर्देश, नैतिक अनुनय और प्रत्यक्ष निर्देश। इनके द्वारा RBI मुद्रा‑आपूर्ति, क्रेडिट लागत व उपलब्धता, यील्ड कर्व और अपेक्षाओं पर प्रभाव डालता है। स्फीति पर नीति सख्त, मंदी में ढीली रखी जाती है; विदेशी मुद्रा प्रबंधन और भुगतान प्रणाली के माध्यम से संप्रेषण मजबूत किया जाता है। Quick Tip: मात्रात्मक: रेपो/रिवर्स‑रेपो, CRR, SLR, OMO, LAF/MSF. चयनात्मक: मार्जिन, ऋण सीमा, नैतिक अनुनय, प्राथमिकता‑क्षेत्र निर्देश। विस्तार = दरें \(\downarrow\), CRR/SLR \(\downarrow\); संकुचन = उलटा।


Question 138:

लोचशील विनिमय दर प्रणाली के गुण तथा दोषों का वर्णन करें।

Correct Answer:
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गुण: भुगतान‑शेष का स्वतः समायोजन—घाटा हो तो मुद्रा अवमूल्यित होकर निर्यात बढ़ाती, अधिशेष में मूल्यवृद्धि होती है; बड़े विदेशी भंडार की आवश्यकता घटती; देश को स्वतंत्र मौद्रिक नीति का अवसर मिलता; बाहरी झटकों का बफर बनता और अवैध मुद्रा बाजार घटते हैं। दोष: विनिमय दर में अस्थिरता से व्यापार‑निवेश में अनिश्चितता; आयातित मुद्रास्फीति की आशंका; अटकलबाज़ी और झुंड व्यवहार से अतिशय अवमूल्यन/मूल्यवृद्धि (ओवरशूटिंग) का जोखिम; कमजोर ढांचागत अर्थव्यवस्थाएँ अस्थिर पूँजी प्रवाह से अधिक प्रभावित होती हैं। इसलिए अनेक देश प्रबंधित तरल पद्धति अपनाते हैं—बाजार‑निर्धारण के साथ विवेकपूर्ण हस्तक्षेप। Quick Tip: गुण: स्वतः BoP समायोजन, मौद्रिक नीति की स्वतन्त्रता, बड़े भंडार की जरूरत कम। दोष: दरों में अस्थिरता, आयातित मुद्रास्फीति, अटकलबाज़ी जोखिम। कई देश व्यावहारिक रूप से \(\textbf{managed float}\) अपनाते हैं।