Chhattisgarh Board conducted the Class 12 Hindi (First Language) Board Exam 2026 on March 14, 2026. Class 12 Hindi (First Language) Question Paper with Solution PDF is available here for download.

The Chhattisgarh Board Class 12 Hindi (First Language) paper covered key topics from Hindi literature, poetry, grammar, and composition. Students should focus on understanding literary works, improving grammar and vocabulary, and practicing structured writing. The exam is marked out of 100, with 80 marks for the theory paper and 20 for internal assessment and project work.

Chhattisgarh Board Class 12 2026 Hindi (First Language) Question Paper with Solution PDF

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Chhattisgarh Board Class 12 2026 Hindi (First Language) Question Paper with Solution PDF

Question 1:

अधोलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर, इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

वैज्ञानिक विकास के क्षेत्र में भी हम पतंग के कम श्रेणी नहीं हैं, किन्तु बहुतों को शायद यह मालूम नहीं होगा कि पतंग के आविष्कार ने ही अनेक वैज्ञानिक आविष्कारों को जन्म दिया और बहुत दिनों तक तो ये वायु-विहार कागज के टुकड़े वैज्ञानिक यंत्रों का काम भी देते रहे। सन 1862 में इसी के सहारे विद्युत शक्ति की खोज की गई। पतंग उड़ने की सफलता ने ही बैलून और हवाई जहाज की कल्पनाओं को जन्म दिया। जिन दिनों सूक्ष्म-पर्यवेक्षण यंत्रों का आविष्कार नहीं हुआ था उन दिनों पतंग से ही हवा का दबाव, तापक्रम, हवा की गति आदि का पता लगाया जाता था। महायुद्धों के समय पतंगों ने अपना सैन्य महत्त्व भी सिद्ध कर दिया। सैनिकों ने पतंगों द्वारा दूर से इशारा करने, इशारों से सूचना देने, आदेश देने की स्थिति बतलाने की अहम जिम्मेदारी बखूबी निभाई। कभी-कभी पतंगों के साथ बाँधकर छोटे-छोटे कैमरे भी उड़ाये गये, जिन्होंने युद्ध के महत्वपूर्ण केन्द्रों के चित्र सफलतापूर्वक लिये।

उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: गद्यांश का मुख्य विचार समझना।

दिए गए गद्यांश में पतंग के महत्व और उसके वैज्ञानिक उपयोगों का वर्णन किया गया है। इसमें बताया गया है कि पतंग केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक विकास में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।


Step 2: वैज्ञानिक महत्व का उल्लेख।

गद्यांश में यह बताया गया है कि पतंगों की सहायता से वायु-दाब, तापमान तथा हवा की गति आदि का अध्ययन किया गया। साथ ही पतंगों ने वैज्ञानिक आविष्कारों और वायुयान संबंधी कल्पनाओं को भी प्रेरित किया।


Step 3: अन्य उपयोगों का वर्णन।

गद्यांश में यह भी बताया गया है कि युद्ध के समय पतंगों का उपयोग सैनिकों द्वारा संकेत देने, संदेश पहुँचाने तथा शत्रु के महत्वपूर्ण स्थानों के चित्र लेने के लिए किया जाता था।


Step 4: उपयुक्त शीर्षक निर्धारित करना।

क्योंकि पूरे गद्यांश में पतंग के वैज्ञानिक और व्यावहारिक महत्व का वर्णन किया गया है, इसलिए इसका उपयुक्त शीर्षक “पतंग का वैज्ञानिक महत्व” हो सकता है।


Step 5: निष्कर्ष।

अतः गद्यांश का सबसे उपयुक्त शीर्षक “पतंग का वैज्ञानिक महत्व” है।
Quick Tip: किसी भी गद्यांश का शीर्षक वही होना चाहिए जो उसके मुख्य विचार या विषय को संक्षेप में व्यक्त करे।


Question 2:

हवाई जहाज की कल्पना को किसने जन्म दिया?

Correct Answer:
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Step 1: गद्यांश का संदर्भ समझना।

दिए गए गद्यांश में पतंग के वैज्ञानिक महत्व का वर्णन किया गया है। इसमें बताया गया है कि पतंगों के आविष्कार और उनके प्रयोगों ने कई वैज्ञानिक खोजों को प्रेरणा दी।


Step 2: पतंग और वैज्ञानिक विकास का संबंध।

गद्यांश में स्पष्ट किया गया है कि पतंग उड़ाने की सफलता ने मनुष्य को आकाश में उड़ने की कल्पना करने के लिए प्रेरित किया।


Step 3: कल्पना का विकास।

पतंग के सफल उड़ान अनुभव ने गुब्बारे और हवाई जहाज जैसे आविष्कारों की कल्पना को जन्म दिया। इससे मनुष्य को यह विश्वास हुआ कि हवा में उड़ना संभव है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः कहा जा सकता है कि पतंग की सफलता ने ही गुब्बारे और हवाई जहाज की कल्पना को जन्म दिया।
Quick Tip: पतंग केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि उसने मानव को आकाश में उड़ने की प्रेरणा भी दी।


Question 3:

किन-किन वैज्ञानिक आविष्कारों में पतंग ने प्रेरणा दी है?

Correct Answer:
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Step 1: गद्यांश का मुख्य विचार समझना।

दिए गए गद्यांश में बताया गया है कि पतंग के आविष्कार ने अनेक वैज्ञानिक प्रयोगों और खोजों को प्रेरित किया।


Step 2: वैज्ञानिक प्रयोगों में उपयोग।

पतंगों की सहायता से वैज्ञानिकों ने वायु-दाब, तापमान तथा हवा की गति आदि का अध्ययन किया। इन प्रयोगों से मौसम और वातावरण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।


Step 3: अन्य आविष्कारों पर प्रभाव।

पतंग की सफलता ने बैलून (गुब्बारे) और हवाई जहाज जैसे आविष्कारों की कल्पना को भी जन्म दिया। इससे आकाश में उड़ने के नए साधनों के विकास की प्रेरणा मिली।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः कहा जा सकता है कि पतंग ने वायु-दाब और तापमान के अध्ययन, गुब्बारे तथा हवाई जहाज के आविष्कार जैसे वैज्ञानिक कार्यों में महत्वपूर्ण प्रेरणा दी।
Quick Tip: पतंग के प्रयोगों से वैज्ञानिकों को वायुमंडल के कई रहस्यों को समझने में सहायता मिली।


Question 4:

पतंग का युद्धकालीन महत्व क्या है?

Correct Answer:
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Step 1: गद्यांश का संदर्भ समझना।

दिए गए गद्यांश में पतंग के वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपयोगों का वर्णन किया गया है। इसमें विशेष रूप से युद्ध के समय पतंगों के उपयोग का भी उल्लेख किया गया है।


Step 2: युद्ध के समय पतंग का प्रयोग।

महायुद्धों के समय पतंगों का उपयोग सैनिकों द्वारा महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाता था। सैनिक पतंगों की सहायता से दूर तक संकेत भेजते थे और संदेशों का आदान-प्रदान करते थे।


Step 3: सूचना और संकेत देने में सहायता।

पतंगों के माध्यम से सैनिकों को आदेश देने, महत्वपूर्ण सूचनाएँ पहुँचाने और शत्रु की गतिविधियों के बारे में जानकारी देने का कार्य भी किया जाता था।


Step 4: शत्रु पर निगरानी।

कभी-कभी पतंगों के साथ छोटे-छोटे कैमरे बाँधकर उन्हें उड़ाया जाता था, जिससे शत्रु के महत्वपूर्ण स्थानों और गतिविधियों के चित्र लिए जा सकते थे।


Step 5: निष्कर्ष।

अतः युद्धकाल में पतंग का उपयोग संकेत देने, सूचना पहुँचाने और शत्रु की गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता था, इसलिए इसका विशेष महत्व था।
Quick Tip: युद्ध के समय पतंगों का उपयोग संकेत देने, संदेश पहुँचाने और शत्रु की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए किया जाता था।


Question 5:

उपर्युक्त गद्यांश का सार अपने शब्दों में लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: गद्यांश का मुख्य विचार पहचानना।

दिए गए गद्यांश में पतंग के महत्व और उसके वैज्ञानिक उपयोगों के बारे में बताया गया है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि पतंग केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि विज्ञान और समाज के लिए भी उपयोगी रही है।


Step 2: वैज्ञानिक योगदान।

पतंग के माध्यम से वैज्ञानिकों ने वायु-दाब, तापमान और हवा की गति का अध्ययन किया। इसके अतिरिक्त पतंग की उड़ान ने गुब्बारे और हवाई जहाज जैसे आविष्कारों की कल्पना को भी प्रेरणा दी।


Step 3: अन्य उपयोग।

युद्ध के समय पतंगों का उपयोग संकेत देने, संदेश पहुँचाने तथा शत्रु की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता था। कभी-कभी पतंगों के साथ कैमरे बाँधकर शत्रु के महत्वपूर्ण स्थानों के चित्र भी लिए जाते थे।


Step 4: निष्कर्ष।

इस प्रकार पतंग ने वैज्ञानिक अनुसंधान, आविष्कारों और युद्धकालीन कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
Quick Tip: गद्यांश का सार लिखते समय उसके मुख्य विचार और महत्वपूर्ण बिंदुओं को संक्षेप में प्रस्तुत करना चाहिए।


Question 6:

अधोलिखित अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर, संबंधित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

चलते रहो सदैव जगत में चलते रहो निरन्तर।
सोने वाला ही कलियुग है आँजने वाला द्वापर,
खड़ा हो गया जो उठकर वह त्रेता युग है नरवर,
सत्य कृत युगी है मानव किन्तु चल पड़ा जो पथ पर,
चलते रहो सदैव जगत में चलते रहो निरन्तर।

चलता जो वह मधु पाता है चलता हुआ सफल चलता
सूरज का देखो श्रम अविरल चलता हुआ न वह थकता
चलने में आलस करके वह बैठ नहीं रहता पल भर
चलते रहो सदैव जगत में चलते रहो निरन्तर।


कविता में सतयुगी मानव किसे कहा गया है?

Correct Answer:
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Step 1: कविता का भाव समझना।

कविता में निरंतर आगे बढ़ते रहने और कर्म करते रहने की प्रेरणा दी गई है। कवि के अनुसार जो व्यक्ति निरंतर प्रयास करता है और अपने मार्ग पर आगे बढ़ता रहता है, वही जीवन में सफलता प्राप्त करता है।


Step 2: सतयुगी मानव का अर्थ।

कविता में उस मनुष्य को सतयुगी मानव कहा गया है जो कभी आलस्य नहीं करता और निरंतर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता रहता है। ऐसा व्यक्ति कठिनाइयों से नहीं डरता और निरंतर परिश्रम करता है।


Step 3: कविता की पंक्तियों का संकेत।

कविता की पंक्तियों में कहा गया है कि जो मनुष्य अपने पथ पर लगातार चलता रहता है, वही सच्चे अर्थों में श्रेष्ठ और सतयुगी मानव है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः कविता में निरंतर कर्म और परिश्रम करने वाले मनुष्य को ही सतयुगी मानव कहा गया है।
Quick Tip: कविता का मुख्य संदेश है कि निरंतर प्रयास और कर्म ही मनुष्य को महान बनाते हैं।


Question 7:

सफलता का स्वाद कौन चखता है?

Correct Answer:
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Step 1: कविता का मुख्य भाव समझना।

कविता में निरंतर आगे बढ़ते रहने और कर्म करते रहने का संदेश दिया गया है। कवि के अनुसार जो व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर निरंतर प्रयास करता रहता है, वही जीवन में सफलता प्राप्त करता है।


Step 2: कविता की पंक्ति का अर्थ।

कविता में कहा गया है — “चलता जो वह मधु पाता है”, अर्थात जो मनुष्य लगातार प्रयास करता है और अपने मार्ग पर चलता रहता है, वही सफलता का आनंद प्राप्त करता है।


Step 3: सफलता का संबंध परिश्रम से।

यह पंक्ति इस बात को स्पष्ट करती है कि सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है जो मेहनत और निरंतर प्रयास करते हैं। आलसी और निष्क्रिय व्यक्ति सफलता प्राप्त नहीं कर सकता।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः जो मनुष्य निरंतर प्रयास करता है और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहता है, वही सफलता का स्वाद चखता है।
Quick Tip: निरंतर प्रयास और परिश्रम ही सफलता प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण साधन है।


Question 8:

सूरज से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

Correct Answer:
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Step 1: कविता में सूरज का संदर्भ।

कविता में सूरज को परिश्रम और निरंतर कर्म का प्रतीक बताया गया है। सूरज प्रतिदिन बिना थके और बिना रुके अपने मार्ग पर चलता रहता है।


Step 2: सूरज की विशेषता।

सूरज लगातार प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करता है और अपने कार्य में कभी आलस्य नहीं करता। वह प्रतिदिन उदित होकर संसार को प्रकाश देता है।


Step 3: प्रेरणा का संदेश।

सूरज से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें भी अपने जीवन में निरंतर परिश्रम करना चाहिए और अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः सूरज हमें निरंतर कर्म, परिश्रम और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देता है।
Quick Tip: सूरज की तरह निरंतर कर्म करते रहने से ही जीवन में सफलता प्राप्त होती है।


Question 9:

इस कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

Correct Answer:
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Step 1: कविता का मुख्य संदेश।

इस कविता में कवि ने मनुष्य को निरंतर आगे बढ़ते रहने और परिश्रम करते रहने की प्रेरणा दी है। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करना आवश्यक है।


Step 2: आलस्य से बचने की प्रेरणा।

कविता यह भी बताती है कि आलस्य मनुष्य की प्रगति में बाधा बनता है। जो व्यक्ति आलस्य करता है, वह अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाता।


Step 3: परिश्रम का महत्व।

जो व्यक्ति निरंतर अपने पथ पर चलता रहता है और कठिनाइयों का सामना करते हुए आगे बढ़ता है, वही जीवन में सफलता प्राप्त करता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः इस कविता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें जीवन में हमेशा परिश्रम करते हुए निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए और आलस्य से दूर रहना चाहिए।
Quick Tip: निरंतर प्रयास, परिश्रम और कर्मठता ही जीवन में सफलता का मार्ग है।


Question 10:

कविता किसे कहते हैं? कविता के किन्हीं दो तत्वों के विषय में लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: कविता की परिभाषा।

कविता साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा है, जिसके माध्यम से कवि अपने भावों, विचारों और अनुभवों को सुंदर, प्रभावपूर्ण और कलात्मक भाषा में व्यक्त करता है। कविता में शब्दों का चयन, लय, छंद और अलंकारों का प्रयोग करके भावों को अधिक प्रभावशाली बनाया जाता है।


Step 2: कविता का तत्व – भाव।

भाव कविता का प्रमुख तत्व है। भाव के माध्यम से कवि अपने हृदय की संवेदनाओं, अनुभूतियों और विचारों को व्यक्त करता है। यदि कविता में भावनात्मक गहराई होती है, तो वह पाठक के मन को प्रभावित करती है।


Step 3: कविता का तत्व – भाषा।

भाषा भी कविता का महत्वपूर्ण तत्व है। कविता की भाषा सरल, मधुर और प्रभावशाली होती है। उचित शब्द-चयन और अलंकारों के प्रयोग से कविता की सुंदरता और प्रभाव बढ़ जाता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः कविता भावों की सुंदर और कलात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें भाव और भाषा जैसे तत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Quick Tip: कविता में भाव, भाषा, छंद और अलंकार जैसे तत्व मिलकर उसकी सुंदरता और प्रभाव को बढ़ाते हैं।


Question 11:

नाटक किसे कहते हैं? नाटक लेखन में समय का क्या महत्व है?

Correct Answer:
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Step 1: नाटक की परिभाषा।

नाटक साहित्य की वह विधा है जिसमें कहानी को पात्रों के संवाद और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। नाटक को मंच पर अभिनय के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, इसलिए इसमें संवाद और घटनाओं का विशेष महत्व होता है।


Step 2: नाटक में समय का महत्व।

नाटक लेखन में समय का विशेष महत्व होता है, क्योंकि नाटक सीमित समय में मंचित किया जाता है। इसलिए नाटक की घटनाओं, संवादों और दृश्यों को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि कहानी कम समय में प्रभावी रूप से प्रस्तुत हो सके।


Step 3: कथानक के विकास में समय की भूमिका।

समय के उचित प्रयोग से नाटक का कथानक क्रमबद्ध और रोचक बनता है। इससे दर्शकों की रुचि बनी रहती है और नाटक अधिक प्रभावशाली बन जाता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः नाटक में समय का उचित नियोजन अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इससे नाटक का प्रस्तुतीकरण स्पष्ट, प्रभावशाली और रोचक बनता है।
Quick Tip: नाटक में संवाद, पात्र और समय का संतुलन ही उसे प्रभावशाली और सफल बनाता है।


Question 12:

उभरती ‘प्रौद्योगिकी’ विषय पर आलेख लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: विषय की भूमिका।

आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है। नई-नई प्रौद्योगिकियाँ मानव जीवन को सरल, तेज़ और अधिक प्रभावी बना रही हैं। इंटरनेट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), रोबोटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियाँ समाज के हर क्षेत्र में परिवर्तन ला रही हैं।


Step 2: प्रौद्योगिकी का महत्व।

उभरती प्रौद्योगिकी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और संचार के क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। आज ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान और स्मार्ट उपकरणों के माध्यम से जीवन पहले से अधिक सुविधाजनक हो गया है। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।


Step 3: समाज पर प्रभाव।

इन नई तकनीकों के कारण समाज में अनेक सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं। लोगों के लिए जानकारी प्राप्त करना और एक-दूसरे से जुड़ना पहले से अधिक आसान हो गया है। साथ ही उद्योग और व्यापार में भी उत्पादन क्षमता और कार्यक्षमता बढ़ी है।


Step 4: चुनौतियाँ और सावधानियाँ।

हालाँकि उभरती प्रौद्योगिकी के कई लाभ हैं, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियाँ भी जुड़ी हुई हैं। साइबर अपराध, डेटा सुरक्षा और तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता जैसी समस्याएँ भी सामने आ रही हैं। इसलिए इन तकनीकों का उपयोग जिम्मेदारी और सावधानी के साथ करना आवश्यक है।


Step 5: निष्कर्ष।

अंततः कहा जा सकता है कि उभरती प्रौद्योगिकी मानव जीवन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यदि इसका सही और संतुलित उपयोग किया जाए, तो यह भविष्य को और अधिक उज्ज्वल और उन्नत बना सकती है।
Quick Tip: आलेख लिखते समय विषय की भूमिका, मुख्य बिंदु, प्रभाव तथा निष्कर्ष को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करना चाहिए।


Question 13:

‘भारतीय कृषि’ विषय पर एक फीचर लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: विषय की भूमिका।

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर करती है। भारतीय कृषि न केवल देश की अर्थव्यवस्था का आधार है, बल्कि यह लोगों के जीवन और संस्कृति से भी गहराई से जुड़ी हुई है।


Step 2: भारतीय कृषि का महत्व।

भारतीय कृषि देश के खाद्य उत्पादन का मुख्य स्रोत है। यह करोड़ों लोगों को रोजगार प्रदान करती है और राष्ट्रीय आय में महत्वपूर्ण योगदान देती है। गेहूँ, चावल, दालें, गन्ना और कपास जैसी फसलें भारत की प्रमुख कृषि उपज हैं।


Step 3: कृषि की चुनौतियाँ।

हालाँकि भारतीय कृषि का महत्व बहुत अधिक है, फिर भी इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मौसम की अनिश्चितता, सिंचाई की कमी, आधुनिक तकनीकों का अभाव और किसानों की आर्थिक समस्याएँ कृषि विकास में बाधा बनती हैं।


Step 4: सुधार के उपाय।

कृषि के विकास के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और किसानों को उचित मूल्य प्रदान करना आवश्यक है। सरकार की विभिन्न योजनाएँ और वैज्ञानिक खेती के तरीके भारतीय कृषि को और अधिक सशक्त बना सकते हैं।


Step 5: निष्कर्ष।

इस प्रकार भारतीय कृषि देश की आर्थिक और सामाजिक संरचना का महत्वपूर्ण आधार है। यदि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और योजनाओं का सही ढंग से उपयोग किया जाए, तो यह देश के विकास में और अधिक योगदान दे सकता है।
Quick Tip: फीचर लेखन में विषय का परिचय, महत्व, समस्याएँ और समाधान को रोचक तथा तथ्यात्मक शैली में प्रस्तुत करना चाहिए।


Question 14:

जन संचार किसे कहते हैं?

Correct Answer:
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Step 1: जन संचार की परिभाषा।

जन संचार वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से सूचनाएँ, विचार, संदेश या समाचार एक साथ बहुत बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचाए जाते हैं।


Step 2: जन संचार के माध्यम।

जन संचार के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जैसे समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट और सोशल मीडिया। ये माध्यम सूचना को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचाने में सहायता करते हैं।


Step 3: जन संचार का महत्व।

जन संचार समाज को जागरूक बनाने, शिक्षा देने और विभिन्न घटनाओं की जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके माध्यम से लोग देश और दुनिया की गतिविधियों से परिचित होते हैं।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः जन संचार वह प्रणाली है जिसके द्वारा सूचना और विचारों का प्रसार बड़े पैमाने पर समाज के लोगों तक किया जाता है।
Quick Tip: जन संचार के मुख्य माध्यम समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविजन और इंटरनेट हैं।


Question 15:

प्रिंट माध्यम क्या है?

Correct Answer:
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Step 1: प्रिंट माध्यम की परिभाषा।

प्रिंट माध्यम वह संचार माध्यम है जिसमें सूचना, समाचार या विचारों को मुद्रित (छापकर) रूप में लोगों तक पहुँचाया जाता है।


Step 2: प्रिंट माध्यम के उदाहरण।

समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकों, जर्नल और पम्फलेट आदि प्रिंट माध्यम के प्रमुख उदाहरण हैं। इन माध्यमों के द्वारा लिखित रूप में जानकारी प्रसारित की जाती है।


Step 3: प्रिंट माध्यम का महत्व।

प्रिंट माध्यम लोगों को विश्वसनीय और विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। यह शिक्षा, ज्ञान और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः वह माध्यम जिसके द्वारा जानकारी मुद्रित रूप में लोगों तक पहुँचाई जाती है, उसे प्रिंट माध्यम कहा जाता है।
Quick Tip: समाचार पत्र और पत्रिकाएँ प्रिंट माध्यम के सबसे सामान्य उदाहरण हैं।


Question 16:

कारोबार और अर्थ जगत से जुड़ी रोजमर्रा की खबरें किस शैली में लिखी जाती हैं?

Correct Answer:
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Step 1: प्रश्न की समझ।

यह प्रश्न व्यवसाय और अर्थव्यवस्था से संबंधित दैनिक समाचारों की लेखन शैली के बारे में पूछता है।


Step 2: शैली का निर्धारण।

कारोबार और अर्थ जगत से जुड़ी रोजमर्रा की खबरें सामान्यतः व्यावसायिक शैली या व्यापारिक शैली में लिखी जाती हैं।


Step 3: शैली की विशेषताएँ।

इस शैली में भाषा सरल, स्पष्ट और तथ्यात्मक होती है। इसमें आँकड़ों, आर्थिक गतिविधियों और बाजार की स्थिति को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया जाता है।


Step 4: निष्कर्ष।

इस प्रकार कारोबार और अर्थ जगत से जुड़ी रोजमर्रा की खबरें व्यावसायिक शैली में लिखी जाती हैं।
Quick Tip: आर्थिक समाचारों में भाषा स्पष्ट, तथ्यात्मक और आँकड़ों पर आधारित होती है।


Question 17:

पत्रकार के कितने प्रकार होते हैं?

Correct Answer:
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Step 1: पत्रकार की परिभाषा।

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचारों को एकत्रित करता है, उनका विश्लेषण करता है और उन्हें जनता तक पहुँचाता है।


Step 2: पत्रकार के प्रकार।

पत्रकार मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं —

(1) समाचार संवाददाता

(2) संपादक


Step 3: प्रकारों का संक्षिप्त विवरण।

समाचार संवाददाता विभिन्न स्थानों से समाचार एकत्रित करता है और उन्हें रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत करता है। दूसरी ओर, संपादक समाचारों को संपादित करता है और उन्हें प्रकाशित करने की अंतिम जिम्मेदारी निभाता है।


Step 4: निष्कर्ष।

इस प्रकार पत्रकार मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं — समाचार संवाददाता और संपादक।
Quick Tip: पत्रकारिता में संवाददाता समाचार एकत्र करता है जबकि संपादक समाचारों का संपादन करता है।


Question 18:

वन संपदा का संरक्षण

Correct Answer:
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Step 1: विषय की भूमिका।

वन प्रकृति की अमूल्य संपदा हैं। वे पृथ्वी के पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वन न केवल हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं बल्कि अनेक जीव-जंतुओं के लिए आश्रय स्थल भी होते हैं। इसलिए वन संपदा का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।


Step 2: वन संपदा का महत्व।

वनों से हमें लकड़ी, औषधियाँ, फल-फूल और अनेक प्रकार के उपयोगी संसाधन प्राप्त होते हैं। इसके अतिरिक्त वन वर्षा चक्र को नियंत्रित करते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और जलवायु संतुलन बनाए रखते हैं।


Step 3: वनों के विनाश की समस्या।

आज के समय में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। इससे पर्यावरण असंतुलन, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है।


Step 4: संरक्षण के उपाय।

वनों के संरक्षण के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए। साथ ही अवैध कटाई पर रोक लगानी चाहिए और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना चाहिए।


Step 5: निष्कर्ष।

इस प्रकार वन संपदा का संरक्षण हमारे वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि हम वनों की रक्षा करेंगे तो पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित रहेगा।
Quick Tip: वन पृथ्वी के “फेफड़े” माने जाते हैं क्योंकि वे ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं।


Question 19:

युवा चेतना और समाज

Correct Answer:
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Step 1: विषय की भूमिका।

युवा किसी भी राष्ट्र की शक्ति और भविष्य होते हैं। उनकी ऊर्जा, उत्साह और जागरूकता समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए युवा चेतना का जागृत होना समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है।


Step 2: युवा शक्ति का महत्व।

युवाओं में नई सोच, रचनात्मकता और परिवर्तन की क्षमता होती है। वे समाज की समस्याओं को समझकर उनके समाधान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। शिक्षा, तकनीक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से युवा समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं।


Step 3: समाज में युवाओं की भूमिका।

युवा समाज में जागरूकता फैलाने, सामाजिक सुधार लाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। वे पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और सामाजिक समानता जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।


Step 4: चुनौतियाँ और समाधान।

आज के समय में युवाओं के सामने बेरोजगारी, नशाखोरी और भटकाव जैसी समस्याएँ भी हैं। इन चुनौतियों से बचने के लिए उन्हें सही मार्गदर्शन, शिक्षा और सकारात्मक सोच की आवश्यकता होती है।


Step 5: निष्कर्ष।

यदि युवा अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का सही उपयोग करें, तो वे समाज को प्रगति और विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकते हैं। इसलिए युवा चेतना समाज के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
Quick Tip: युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होती है और वही देश के भविष्य का निर्माण करती है।


Question 20:

अंतरिक्ष विज्ञान और भारत

Correct Answer:
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Step 1: विषय की भूमिका।

अंतरिक्ष विज्ञान आधुनिक विज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा है। इसके माध्यम से मानव ने अंतरिक्ष के रहस्यों को जानने और नई तकनीकों का विकास करने में सफलता प्राप्त की है। भारत भी इस क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है।


Step 2: भारत की उपलब्धियाँ।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। चंद्रयान और मंगलयान जैसे मिशनों ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत स्थान दिलाया है।


Step 3: अंतरिक्ष विज्ञान का महत्व।

अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग संचार, मौसम पूर्वानुमान, कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। इससे देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।


Step 4: भविष्य की संभावनाएँ।

भारत भविष्य में भी अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। नए उपग्रहों और अंतरिक्ष मिशनों के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान को और आगे बढ़ाया जा रहा है।


Step 5: निष्कर्ष।

इस प्रकार अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की प्रगति देश के वैज्ञानिक विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
Quick Tip: ISRO भारत की प्रमुख अंतरिक्ष संस्था है जिसने चंद्रयान और मंगलयान जैसे ऐतिहासिक मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।


Question 21:

छत्तीसगढ़ की लोककला का विकास

Correct Answer:
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Step 1: विषय की भूमिका।

छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की लोककला राज्य की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक शिल्पकला यहाँ की विशेषता हैं।


Step 2: लोककला की विशेषताएँ।

छत्तीसगढ़ की लोककला में पंथी नृत्य, राउत नाचा और करमा नृत्य प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ की मिट्टी की कला, बांस की कारीगरी और हस्तशिल्प भी अत्यंत प्रसिद्ध हैं।


Step 3: लोककला का महत्व।

लोककला समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखने का माध्यम है। यह लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़कर रखती है और नई पीढ़ी को अपनी विरासत से परिचित कराती है।


Step 4: विकास के प्रयास।

सरकार और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा लोककलाओं को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कलाकारों को प्रोत्साहन और प्रशिक्षण देकर इन कलाओं को संरक्षित और विकसित किया जा रहा है।


Step 5: निष्कर्ष।

इस प्रकार छत्तीसगढ़ की लोककला राज्य की सांस्कृतिक धरोहर है। इसके संरक्षण और विकास से न केवल संस्कृति सुरक्षित रहती है बल्कि कलाकारों को भी नई पहचान मिलती है।
Quick Tip: लोककला किसी क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और जीवन शैली को दर्शाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है।


Question 22:

निम्नलिखित काव्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में लिखिए :

सारी मुश्किल को धैर्य से समझे बिना 
मैं पेच को खोलने के बजाय \\
उसे बेवजह कसता चला जा रहा था
क्योंकि इस करतब पर मुझे
साफ सुनाई दे रही थीं
तमाशबीनों की शाबाशी और वाह-वाह।

पेंच को खोलने से कवि का क्या आशय है?

Correct Answer:
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Step 1: काव्यांश का संदर्भ समझना।

काव्यांश में कवि जीवन की समस्याओं और परिस्थितियों को समझने की बात कर रहा है। वह बताता है कि किसी भी समस्या को धैर्य और समझदारी से सुलझाना चाहिए।


Step 2: “पेंच खोलने” का अर्थ।

यहाँ “पेंच खोलने” का अर्थ किसी कठिनाई या समस्या को शांतिपूर्वक समझकर उसका समाधान निकालना है। यह प्रतीकात्मक रूप से जटिल परिस्थितियों को समझने की प्रक्रिया को दर्शाता है।


Step 3: कवि का आशय।

कवि का आशय यह है कि उसे समस्या को धैर्यपूर्वक समझकर हल करना चाहिए था, लेकिन उसने ऐसा न करके जल्दबाजी में कार्य किया।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः “पेंच खोलने” से कवि का आशय समस्या को समझदारी और धैर्य के साथ हल करना है।
Quick Tip: काव्य में कई शब्द प्रतीकात्मक अर्थ में प्रयुक्त होते हैं, जैसे “पेंच खोलना” यहाँ समस्या को सुलझाने का संकेत देता है।


Question 23:

तमाशबीन का क्या अर्थ है और वह क्या प्रतिक्रिया दे रहा था?

Correct Answer:
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Step 1: ‘तमाशबीन’ का अर्थ।

‘तमाशबीन’ का अर्थ होता है वह व्यक्ति जो केवल किसी घटना को देखने वाला हो और उसमें सक्रिय भाग न ले, बल्कि दर्शक के रूप में उसे देखता रहे।


Step 2: काव्यांश में संदर्भ।

काव्यांश में तमाशबीन वे लोग हैं जो कवि की हरकतों को देख रहे थे और उसकी गतिविधियों पर ध्यान दे रहे थे।


Step 3: उनकी प्रतिक्रिया।

वे तमाशबीन कवि की हरकतों पर प्रसन्न होकर उसकी प्रशंसा कर रहे थे और उसे शाबाशी दे रहे थे। उनकी प्रतिक्रिया “वाह-वाह” और प्रशंसा के रूप में व्यक्त हो रही थी।


Step 4: निष्कर्ष।

इस प्रकार तमाशबीन दर्शक थे जो कवि के कार्य को देखकर उसकी प्रशंसा और सराहना कर रहे थे।
Quick Tip: ‘तमाशबीन’ शब्द का प्रयोग अक्सर उन लोगों के लिए किया जाता है जो किसी घटना को केवल देखते हैं और उसकी प्रतिक्रिया दर्शक के रूप में देते हैं।


Question 24:

निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर, इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

मुझसे मिलने को कौन विकल?
मैं होऊँ किसके हित चंचल?
यह प्रश्न शिथिल करता पद को,
भरता उर में विह्वलता है!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

काव्यांश में प्रयुक्त प्रश्नालंकार के प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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Step 1: प्रश्नालंकार की परिभाषा।

जब काव्य में किसी भाव को प्रभावशाली बनाने के लिए प्रश्न के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है, तो उसे प्रश्नालंकार कहा जाता है। इसमें प्रश्न पूछे जाते हैं, परंतु उनका उत्तर स्वयं ही भाव के माध्यम से स्पष्ट हो जाता है।


Step 2: काव्यांश में प्रयोग।

दिए गए काव्यांश में कवि बार-बार प्रश्न करता है — “मुझसे मिलने को कौन विकल?” और “मैं होऊँ किसके हित चंचल?”। इन प्रश्नों के माध्यम से कवि अपने मन की व्याकुलता और आत्मचिंतन को व्यक्त करता है।


Step 3: प्रभाव का विश्लेषण।

प्रश्नालंकार के प्रयोग से काव्य में भावनात्मक गहराई और प्रभावशीलता बढ़ जाती है। यह पाठक के मन में जिज्ञासा उत्पन्न करता है और कवि की मानसिक स्थिति को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः इस काव्यांश में प्रश्नालंकार के प्रयोग से कवि की व्याकुलता, चिंतन और भावनात्मक स्थिति अत्यंत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त हुई है।
Quick Tip: प्रश्नालंकार में प्रश्न पूछकर भावों को अधिक प्रभावशाली और रोचक बनाया जाता है।


Question 25:

काव्यांश के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।

Correct Answer:
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Step 1: काव्य के शिल्प का अर्थ।

काव्य का शिल्प-सौंदर्य उसकी भाषा, शैली, अलंकार और भावों की प्रस्तुति से संबंधित होता है। इससे कविता की प्रभावशीलता और सौंदर्य बढ़ता है।


Step 2: भाषा और शैली।

इस काव्यांश की भाषा सरल, स्पष्ट और भावपूर्ण है। कवि ने अपने विचारों को सहज और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।


Step 3: अलंकार और भाव।

काव्यांश में प्रश्नालंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है, जिससे कविता में गहराई और प्रभाव उत्पन्न हुआ है। इसके साथ ही भावात्मकता और आत्मचिंतन की प्रवृत्ति भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।


Step 4: लय और प्रभाव।

कविता में लयात्मकता और प्रवाह है, जिससे पाठक को पढ़ते समय सहजता का अनुभव होता है। भावों की अभिव्यक्ति प्रभावशाली और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से गहरी है।


Step 5: निष्कर्ष।

इस प्रकार इस काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य उसकी सरल भाषा, प्रभावशाली शैली, अलंकारों के प्रयोग और गहन भावों के कारण अत्यंत आकर्षक और प्रभावपूर्ण बन गया है।
Quick Tip: काव्य के शिल्प-सौंदर्य में भाषा, शैली, अलंकार, लय और भावों की प्रस्तुति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


Question 26:

पतंग के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं—बच्चों का उड़ान से कैसा संबंध है?

Correct Answer:
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Step 1: काव्यांश का संदर्भ।

कवि बच्चों की कल्पनाशीलता और उनके उत्साह को पतंग के माध्यम से व्यक्त करता है। जब बच्चे पतंग उड़ाते हैं, तो वे स्वयं भी अपने मन और कल्पनाओं में आकाश की ऊँचाइयों तक पहुँच जाते हैं।


Step 2: बच्चों और उड़ान का संबंध।

बच्चों का पतंग की उड़ान से गहरा भावनात्मक और कल्पनात्मक संबंध होता है। पतंग के साथ-साथ उनका मन भी आकाश में उड़ता है और वे स्वतंत्रता तथा आनंद का अनुभव करते हैं।


Step 3: प्रतीकात्मक अर्थ।

यहाँ पतंग की उड़ान बच्चों के सपनों, उत्साह और स्वतंत्रता का प्रतीक है। बच्चे पतंग के माध्यम से अपने मन की उड़ान और कल्पनाओं को व्यक्त करते हैं।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः बच्चों का उड़ान से संबंध उनके सपनों, उत्साह और स्वतंत्रता की भावना से है, जो पतंग के साथ आकाश में उड़ते हुए प्रतीकात्मक रूप से प्रकट होता है।
Quick Tip: कविता में कई बार वस्तुएँ प्रतीक के रूप में प्रयुक्त होती हैं। यहाँ पतंग बच्चों के सपनों और स्वतंत्रता का प्रतीक है।


Question 27:

‘कैमरे में बंद अपाहिज’ इस कविता के द्वारा कवि समाज को क्या संदेश देना चाहता है?

Correct Answer:
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Step 1: कविता का संदर्भ।

‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता में कवि समाज के उस दृष्टिकोण की आलोचना करता है जिसमें मीडिया और लोग किसी अपाहिज व्यक्ति की पीड़ा को संवेदनशीलता से समझने के बजाय उसे केवल प्रदर्शन का विषय बना देते हैं।


Step 2: समाज की प्रवृत्ति।

कविता में दिखाया गया है कि कई बार समाज और मीडिया किसी व्यक्ति की वास्तविक समस्याओं को समझने के बजाय केवल उसकी स्थिति को कैमरे में कैद करके सहानुभूति का दिखावा करते हैं।


Step 3: कवि का संदेश।

कवि समाज को यह संदेश देना चाहता है कि हमें अपाहिज या पीड़ित व्यक्तियों के प्रति सच्ची सहानुभूति और संवेदनशीलता रखनी चाहिए। उनकी पीड़ा को केवल दिखावे या मनोरंजन का साधन नहीं बनाना चाहिए।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः इस कविता के माध्यम से कवि समाज को मानवता, संवेदनशीलता और वास्तविक सहायता की भावना अपनाने का संदेश देता है।
Quick Tip: कविता का मुख्य उद्देश्य समाज में संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है।


Question 28:

बहलाती सहलाती आत्मीयता बरदाश्त नहीं होती है—और कविता के शीर्षक ‘सहर्ष स्वीकारा है’ में अंतर्विरोध को स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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Step 1: कथन का अर्थ।

“बहलाती सहलाती आत्मीयता बरदाश्त नहीं होती है” इस पंक्ति में कवि यह बताता है कि उसे बनावटी या कृत्रिम सहानुभूति पसंद नहीं है। वह दिखावटी प्रेम और दया को स्वीकार नहीं करना चाहता।


Step 2: शीर्षक का अर्थ।

कविता का शीर्षक “सहर्ष स्वीकारा है” यह दर्शाता है कि कवि ने जीवन की कठिनाइयों, संघर्षों और सच्चाइयों को खुशी-खुशी स्वीकार किया है।


Step 3: अंतर्विरोध की व्याख्या।

यहाँ अंतर्विरोध इसलिए दिखाई देता है क्योंकि एक ओर कवि बनावटी आत्मीयता को अस्वीकार करता है, जबकि दूसरी ओर वह जीवन की वास्तविकताओं और संघर्षों को सहर्ष स्वीकार करता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः इस कविता में अंतर्विरोध इस बात को दर्शाता है कि कवि कृत्रिम सहानुभूति को नहीं चाहता, लेकिन जीवन की सच्चाइयों और संघर्षों को वह खुशी-खुशी स्वीकार करता है।
Quick Tip: कविता में अंतर्विरोध तब उत्पन्न होता है जब दो विपरीत भाव या विचार एक साथ व्यक्त किए जाते हैं।


Question 29:

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर संबंधित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

एक-एक बार मुझे मालूम होता है कि यह शिरीष एक अद्भुत अवधूत है। दुःख हो या सुख, वह हार नहीं मानता। न कभी का लेना न माधो का देना। जब धरती और आसमान जलते रहते हैं, तब भी यह हजरत न जाने कहाँ से अपना रस खींचते रहते हैं। मौज में आठों याम मस्त रहते हैं। एक वनस्पतिशास्त्री ने मुझे बताया है कि यह उस श्रेणी का पेड़ है जो वायुमण्डल से अपना रस खींचता है। जड़ खींचता होगा। नहीं तो भयंकर लू के समय इतने कोमल तंतुजाल और ऐसे सुकुमार केसर को कैसे उगा सकता था?

अवधूत का क्या अर्थ है? शिरीष को अवधूत क्यों कहा गया है?

Correct Answer:
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Step 1: ‘अवधूत’ शब्द का अर्थ समझना।

‘अवधूत’ शब्द का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जो सुख-दुःख, लाभ-हानि और जीवन की कठिन परिस्थितियों से प्रभावित न होकर हमेशा समान भाव में रहता है। वह किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानता और धैर्य बनाए रखता है।


Step 2: गद्यांश का संदर्भ।

गद्यांश में शिरीष के पेड़ का वर्णन किया गया है। लेखक बताता है कि यह पेड़ अत्यंत कठोर परिस्थितियों में भी हरा-भरा और जीवंत बना रहता है। तेज गर्मी, धूप और कठिन मौसम में भी यह अपने जीवन का रस खींचता रहता है।


Step 3: शिरीष को अवधूत कहने का कारण।

शिरीष का पेड़ सुख-दुःख या कठिन परिस्थितियों से घबराता नहीं है और निरंतर जीवित तथा प्रसन्न रहता है। यही कारण है कि लेखक ने उसकी तुलना ऐसे संत से की है जो हर परिस्थिति में शांत और स्थिर रहता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः ‘अवधूत’ का अर्थ है कठिन परिस्थितियों से अप्रभावित रहने वाला व्यक्ति, और शिरीष के पेड़ को उसकी धैर्यशीलता तथा विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रहने की क्षमता के कारण अवधूत कहा गया है।
Quick Tip: अवधूत वह होता है जो सुख-दुःख और कठिन परिस्थितियों से विचलित हुए बिना अपने स्वभाव में स्थिर रहता है।


Question 30:

शिरीष के जिजीविषा से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

Correct Answer:
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Step 1: जिजीविषा का अर्थ समझना।

‘जिजीविषा’ का अर्थ है जीवित रहने की प्रबल इच्छा और कठिन परिस्थितियों में भी जीवन के प्रति उत्साह बनाए रखना।


Step 2: गद्यांश में शिरीष का उदाहरण।

गद्यांश में शिरीष के पेड़ को ऐसी वनस्पति के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो अत्यंत कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रहता है। भीषण गर्मी और कठिन वातावरण में भी यह अपना जीवन बनाए रखता है।


Step 3: प्रेरणा का संदेश।

शिरीष के पेड़ की जिजीविषा हमें यह प्रेरणा देती है कि हमें भी जीवन की कठिनाइयों और समस्याओं से घबराना नहीं चाहिए। हमें धैर्य, साहस और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः शिरीष की जिजीविषा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस बनाए रखते हुए जीवन में निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।
Quick Tip: जीवन में कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय धैर्य और साहस के साथ आगे बढ़ना ही सफलता का मार्ग है।


Question 31:

अवधूत का क्या अर्थ है? शिरीष को अवधूत क्यों कहा गया है?

Correct Answer:
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Step 1: ‘अवधूत’ शब्द का अर्थ समझना।

‘अवधूत’ शब्द का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जो सुख-दुःख, लाभ-हानि और जीवन की कठिन परिस्थितियों से प्रभावित न होकर हमेशा समान भाव में रहता है। वह किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानता और धैर्य बनाए रखता है।


Step 2: गद्यांश का संदर्भ।

गद्यांश में शिरीष के पेड़ का वर्णन किया गया है। लेखक बताता है कि यह पेड़ अत्यंत कठोर परिस्थितियों में भी हरा-भरा और जीवंत बना रहता है। तेज गर्मी, धूप और कठिन मौसम में भी यह अपने जीवन का रस खींचता रहता है।


Step 3: शिरीष को अवधूत कहने का कारण।

शिरीष का पेड़ सुख-दुःख या कठिन परिस्थितियों से घबराता नहीं है और निरंतर जीवित तथा प्रसन्न रहता है। यही कारण है कि लेखक ने उसकी तुलना ऐसे संत से की है जो हर परिस्थिति में शांत और स्थिर रहता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः ‘अवधूत’ का अर्थ है कठिन परिस्थितियों से अप्रभावित रहने वाला व्यक्ति, और शिरीष के पेड़ को उसकी धैर्यशीलता तथा विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रहने की क्षमता के कारण अवधूत कहा गया है।
Quick Tip: अवधूत वह होता है जो सुख-दुःख और कठिन परिस्थितियों से विचलित हुए बिना अपने स्वभाव में स्थिर रहता है।


Question 32:

शिरीष के जिजीविषा से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

Correct Answer:
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Step 1: जिजीविषा का अर्थ समझना।

‘जिजीविषा’ का अर्थ है जीवित रहने की प्रबल इच्छा और कठिन परिस्थितियों में भी जीवन के प्रति उत्साह बनाए रखना।


Step 2: गद्यांश में शिरीष का उदाहरण।

गद्यांश में शिरीष के पेड़ को ऐसी वनस्पति के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो अत्यंत कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रहता है। भीषण गर्मी और कठिन वातावरण में भी यह अपना जीवन बनाए रखता है।


Step 3: प्रेरणा का संदेश।

शिरीष के पेड़ की जिजीविषा हमें यह प्रेरणा देती है कि हमें भी जीवन की कठिनाइयों और समस्याओं से घबराना नहीं चाहिए। हमें धैर्य, साहस और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः शिरीष की जिजीविषा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस बनाए रखते हुए जीवन में निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।
Quick Tip: जीवन में कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय धैर्य और साहस के साथ आगे बढ़ना ही सफलता का मार्ग है।


Question 33:

पंचिंग पावर किसे कहते हैं?

Correct Answer:
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Step 1: शब्द का अर्थ समझना।

‘पंचिंग पावर’ शब्द का प्रयोग सामान्यतः मुक्केबाजी (बॉक्सिंग) या कुश्ती के संदर्भ में किया जाता है। इसका संबंध खिलाड़ी की शारीरिक शक्ति और उसके प्रहार की क्षमता से होता है।


Step 2: पंचिंग पावर की व्याख्या।

जब कोई खिलाड़ी अपने मुक्के से प्रतिद्वंद्वी को जोरदार और प्रभावशाली प्रहार करता है, जिससे सामने वाले पर स्पष्ट प्रभाव पड़ता है, तो उस शक्ति को पंचिंग पावर कहा जाता है।


Step 3: खेलों में महत्व।

मुक्केबाजी जैसे खेलों में पंचिंग पावर बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इससे खिलाड़ी अपने प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त बना सकता है और मुकाबले में सफलता प्राप्त कर सकता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः मुक्के के प्रहार में निहित शक्ति और प्रभाव को पंचिंग पावर कहा जाता है।
Quick Tip: मुक्केबाजी में खिलाड़ी की ताकत और प्रहार की प्रभावशीलता को पंचिंग पावर कहा जाता है।


Question 34:

‘क्या लिखूँ?’ नामक गद्य पाठ के लेखक का नाम बताइए।

Correct Answer:
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Step 1: प्रश्न की समझ।

यह प्रश्न ‘क्या लिखूँ?’ नामक गद्य पाठ के लेखक के बारे में जानकारी पूछता है।


Step 2: लेखक की पहचान।

‘क्या लिखूँ?’ नामक गद्य पाठ के लेखक प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हरिशंकर परसाई हैं।


Step 3: लेखक का परिचय।

हरिशंकर परसाई हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध व्यंग्यकार थे। उन्होंने समाज की विसंगतियों और समस्याओं को व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया। उनकी रचनाएँ सरल, प्रभावशाली और विचारोत्तेजक होती हैं।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः ‘क्या लिखूँ?’ गद्य पाठ के लेखक हरिशंकर परसाई हैं।
Quick Tip: हरिशंकर परसाई हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध व्यंग्यकार थे, जिन्होंने कई महत्वपूर्ण व्यंग्यात्मक रचनाएँ लिखीं।


Question 35:

‘गरीबी फटी बैल पियासा’ से लेखक का क्या आशय है?

Correct Answer:
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Step 1: कथन का संदर्भ।

इस कथन में लेखक ने गरीबी की स्थिति को एक प्रतीकात्मक रूप में व्यक्त किया है।


Step 2: प्रतीकात्मक अर्थ।

‘गरीबी फटी बैल पियासा’ का अर्थ यह है कि गरीबी एक ऐसी स्थिति है जिसमें मनुष्य अनेक प्रकार की कठिनाइयों और अभावों से घिरा रहता है। यह स्थिति फटे हुए और प्यासे बैल की तरह दयनीय और कष्टदायक होती है।


Step 3: लेखक का आशय।

लेखक का आशय यह बताना है कि गरीबी मनुष्य के जीवन को अत्यंत कठिन और दुखद बना देती है, जिससे उसे अनेक प्रकार के कष्ट सहने पड़ते हैं।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः इस कथन के माध्यम से लेखक ने गरीबी की दयनीय और कष्टपूर्ण स्थिति को स्पष्ट किया है।
Quick Tip: कई साहित्यिक अभिव्यक्तियों में लेखक प्रतीकों और रूपकों के माध्यम से गहरे भाव व्यक्त करता है।


Question 36:

लुटन पहलवान ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है?

Correct Answer:
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Step 1: प्रसंग को समझना।

यह कथन उस प्रसंग से संबंधित है जहाँ लुटन पहलवान अपनी कला और कौशल के स्रोत के बारे में बताता है।


Step 2: कथन का अर्थ।

लुटन पहलवान का कहना है कि उसने किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि ढोल की ध्वनि और ताल से प्रेरणा लेकर अपनी कला को विकसित किया है।


Step 3: भावार्थ।

यह कथन यह दर्शाता है कि लुटन पहलवान की सफलता का स्रोत उसका अभ्यास, लगन और संगीत की ताल से मिली प्रेरणा है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः लुटन पहलवान ने यह बताने के लिए ऐसा कहा कि उसकी कला का वास्तविक गुरु ढोल की ताल और उसका निरंतर अभ्यास है।
Quick Tip: साहित्य में कई बार वस्तुओं को भी गुरु या प्रेरणा के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।


Question 37:

डॉ. अम्बेडकर के मत से ‘दारता’ की व्यापक परिभाषा क्या है? लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: प्रश्न की समझ।

यह प्रश्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों के आधार पर ‘दारता’ की व्यापक परिभाषा के बारे में पूछता है।


Step 2: दारता का अर्थ।

डॉ. अम्बेडकर के अनुसार ‘दारता’ का अर्थ केवल आर्थिक गरीबी नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक पिछड़ापन भी शामिल होता है।


Step 3: व्यापक दृष्टिकोण।

उनके मत में जब किसी व्यक्ति या समाज को शिक्षा, समान अवसर और सामाजिक सम्मान प्राप्त नहीं होता, तब वह भी एक प्रकार की दारता की स्थिति होती है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः डॉ. अम्बेडकर के अनुसार ‘दारता’ केवल धन की कमी नहीं, बल्कि सामाजिक, शैक्षिक और अवसरों की कमी को भी दर्शाती है।
Quick Tip: डॉ. अम्बेडकर ने गरीबी को केवल आर्थिक समस्या नहीं माना, बल्कि सामाजिक और शैक्षिक असमानता से भी जोड़ा।


Question 38:

सोरठा छंद का उल्टा कौन-सा छंद है?

Correct Answer:
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Step 1: छंद की समझ।

हिंदी काव्य में छंद कविता की लय और संरचना को निर्धारित करता है। विभिन्न छंदों के अपने निश्चित मात्रिक नियम होते हैं।


Step 2: सोरठा छंद का परिचय।

सोरठा छंद हिंदी साहित्य का एक प्रसिद्ध मात्रिक छंद है, जिसमें दोहा छंद की मात्राओं का क्रम उलट जाता है।


Step 3: उल्टा छंद।

दोहा छंद में मात्राओं का क्रम 13–11 होता है, जबकि सोरठा छंद में यह क्रम 11–13 हो जाता है। इसलिए सोरठा छंद को दोहा का उल्टा कहा जाता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः सोरठा छंद का उल्टा दोहा छंद होता है।
Quick Tip: दोहा छंद में मात्रा क्रम 13–11 और सोरठा छंद में 11–13 होता है।


Question 39:

‘कैमरे में बंद अपाहिज’ पाठ किस छंद में लिखा गया है?

Correct Answer:
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Step 1: पाठ की प्रकृति।

‘कैमरे में बंद अपाहिज’ एक आधुनिक कविता है जिसमें कवि ने समाज की संवेदनहीनता को उजागर किया है।


Step 2: आधुनिक काव्य की विशेषता।

आधुनिक हिंदी कविता में प्रायः पारंपरिक छंदों का पालन नहीं किया जाता। इसमें कवि अपने भावों को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करता है।


Step 3: प्रयुक्त छंद।

इस कविता में किसी निश्चित मात्रिक या वर्णिक छंद का पालन नहीं किया गया है। इसलिए यह मुक्त छंद में लिखी गई है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता मुक्त छंद में लिखी गई है।
Quick Tip: मुक्त छंद में कविता लिखते समय निश्चित मात्रा या वर्ण की बाध्यता नहीं होती।


Question 40:

कविता में बिंब विधान किसे कहते हैं?

Correct Answer:
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Step 1: बिंब का अर्थ।

कविता में बिंब का अर्थ होता है किसी वस्तु, घटना या भावना को इस प्रकार प्रस्तुत करना कि पाठक के मन में उसका स्पष्ट चित्र बन जाए।


Step 2: बिंब विधान की व्याख्या।

जब कवि अपनी कल्पना और शब्दों के माध्यम से ऐसे चित्रात्मक वर्णन करता है जिससे पाठक के मन में दृश्य या भाव स्पष्ट रूप से उभरने लगते हैं, तो उसे बिंब विधान कहा जाता है।


Step 3: महत्व।

बिंब विधान कविता को अधिक प्रभावशाली और सौंदर्यपूर्ण बनाता है। इससे कविता में भावों की अभिव्यक्ति अधिक सजीव हो जाती है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः कविता में कल्पनात्मक और चित्रात्मक वर्णन के माध्यम से भावों को प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को बिंब विधान कहते हैं।
Quick Tip: बिंब विधान से कविता में दृश्यात्मकता और भावात्मक प्रभाव बढ़ जाता है।


Question 41:

मानवीकरण अलंकार किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

Correct Answer:
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Step 1: अलंकार की समझ।

अलंकार कविता की शोभा बढ़ाने वाले साहित्यिक उपकरण होते हैं, जिनके माध्यम से भाषा को अधिक प्रभावशाली बनाया जाता है।


Step 2: मानवीकरण अलंकार की परिभाषा।

जब किसी निर्जीव वस्तु, प्रकृति या पशु-पक्षी को मनुष्य के गुण, भाव या क्रियाएँ प्रदान की जाती हैं, तो उसे मानवीकरण अलंकार कहते हैं।


Step 3: उदाहरण।

जैसे— “हवा गा रही है।” यहाँ हवा को मनुष्य की तरह गाने की क्रिया दी गई है, इसलिए यह मानवीकरण अलंकार का उदाहरण है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः जब निर्जीव वस्तुओं को मानवीय गुण देकर प्रस्तुत किया जाता है, तो उसे मानवीकरण अलंकार कहते हैं।
Quick Tip: मानवीकरण अलंकार में निर्जीव वस्तुओं को मनुष्य के गुण प्रदान किए जाते हैं।


Question 42:

दक्षिण ध्रुवी अंधकार अमावस्या में संज्ञा और विशेषण छाँटिए।

Correct Answer:
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Step 1: वाक्य को समझना।

दिए गए वाक्यांश “दक्षिण ध्रुवी अंधकार अमावस्या” में शब्दों के प्रकार पहचानने हैं।


Step 2: संज्ञा की पहचान।

संज्ञा वह शब्द होता है जो किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु या भाव का बोध कराता है। यहाँ अंधकार और अमावस्या संज्ञा शब्द हैं।


Step 3: विशेषण की पहचान।

विशेषण वह शब्द होता है जो संज्ञा की विशेषता बताता है। यहाँ दक्षिण और ध्रुवी संज्ञा की विशेषता बता रहे हैं, इसलिए ये विशेषण हैं।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः दिए गए वाक्यांश में संज्ञा और विशेषण इस प्रकार हैं—

संज्ञा: अंधकार, अमावस्या

विशेषण: दक्षिण, ध्रुवी
Quick Tip: संज्ञा किसी वस्तु या भाव का नाम बताती है, जबकि विशेषण संज्ञा की विशेषता बताता है।


Question 43:

‘जूझ’ कहानी के नायक का नाम लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: कहानी का परिचय।

‘जूझ’ एक प्रेरणादायक कहानी है जिसमें लेखक ने संघर्ष और शिक्षा के महत्व को दर्शाया है। इस कहानी में एक ऐसे बालक की कथा प्रस्तुत की गई है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई जारी रखने का प्रयास करता है।


Step 2: नायक की पहचान।

कहानी का मुख्य पात्र ही उसका नायक होता है। ‘जूझ’ कहानी में यह पात्र लेखक स्वयं है, जो अपने जीवन के संघर्षों का वर्णन करता है।


Step 3: नायक का नाम।

इस कहानी के नायक का नाम आनंद यादव है, जो अपने जीवन की कठिनाइयों से संघर्ष करते हुए शिक्षा प्राप्त करने का प्रयास करता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः ‘जूझ’ कहानी के नायक का नाम आनंद यादव है।
Quick Tip: ‘जूझ’ कहानी आत्मकथात्मक शैली में लिखी गई है, जिसमें लेखक ने अपने जीवन के संघर्षों का वर्णन किया है।


Question 44:

‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के लेखक का क्या नाम है?

Correct Answer:
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Step 1: पाठ का परिचय।

‘अतीत में दबे पाँव’ एक प्रसिद्ध गद्य पाठ है जिसमें लेखक ने इतिहास और संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है।


Step 2: लेखक की पहचान।

इस पाठ के लेखक प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक ओम थानवी हैं।


Step 3: लेखक का योगदान।

ओम थानवी ने इतिहास, संस्कृति और समाज से जुड़े विषयों पर अनेक महत्वपूर्ण लेख और रचनाएँ लिखी हैं। उनकी लेखन शैली सरल और प्रभावशाली है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के लेखक ओम थानवी हैं।
Quick Tip: ओम थानवी एक प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक हैं जिन्होंने इतिहास और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन किया है।


Question 45:

‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के लेखक का क्या नाम है?

Correct Answer:
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Step 1: पाठ का परिचय।

‘अतीत में दबे पाँव’ एक प्रसिद्ध गद्य पाठ है जिसमें लेखक ने इतिहास और संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है।


Step 2: लेखक की पहचान।

इस पाठ के लेखक प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक ओम थानवी हैं।


Step 3: लेखक का योगदान।

ओम थानवी ने इतिहास, संस्कृति और समाज से जुड़े विषयों पर अनेक महत्वपूर्ण लेख और रचनाएँ लिखी हैं। उनकी लेखन शैली सरल और प्रभावशाली है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के लेखक ओम थानवी हैं।
Quick Tip: ओम थानवी एक प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक हैं जिन्होंने इतिहास और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन किया है।


Question 46:

‘समहाऊ इंप्रॉपर’ वाक्यांश का प्रयोग यशोधर बाबू हमेशा करते रहे हैं। इस वाक्यांश का उसके व्यक्तित्व और कहानी के कथ्य से क्या संबंध बनता है?

Correct Answer:
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Step 1: वाक्यांश का अर्थ।

‘समहाऊ इंप्रॉपर’ अंग्रेज़ी के शब्दों से बना वाक्यांश है जिसका अर्थ है — “किसी भी तरह यह अनुचित है” या “यह ठीक नहीं है।”


Step 2: यशोधर बाबू का व्यक्तित्व।

यशोधर बाबू एक अनुशासनप्रिय और पारंपरिक विचारों वाले व्यक्ति हैं। वे जीवन में नियमों और सामाजिक मर्यादाओं को बहुत महत्व देते हैं। इसलिए वे किसी भी अनुचित कार्य या व्यवहार को देखकर “समहाऊ इंप्रॉपर” कहकर अपनी असहमति व्यक्त करते हैं।


Step 3: कहानी के कथ्य से संबंध।

यह वाक्यांश उनके व्यक्तित्व की विशेषता को दर्शाता है और कहानी के कथ्य को भी स्पष्ट करता है। इसके माध्यम से लेखक ने पारंपरिक सोच और बदलते सामाजिक मूल्यों के बीच के अंतर को उजागर किया है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः “समहाऊ इंप्रॉपर” वाक्यांश यशोधर बाबू के अनुशासनप्रिय और पारंपरिक व्यक्तित्व को प्रकट करता है तथा कहानी के मुख्य विचार को स्पष्ट करता है।
Quick Tip: कहानी में किसी पात्र की बार-बार कही जाने वाली पंक्ति उसके स्वभाव और व्यक्तित्व को स्पष्ट करने का माध्यम बनती है।


Question 47:

‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी के आधार पर पीढ़ियों के अंतराल के कारणों को लिखकर, अंतराल को कैसे पाटा जा सकता है? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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Step 1: पीढ़ियों के अंतराल का अर्थ।

पीढ़ियों का अंतराल (Generation Gap) उस स्थिति को कहा जाता है जब पुरानी और नई पीढ़ी के विचारों, जीवन शैली, आदतों और दृष्टिकोण में अंतर दिखाई देता है। ‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी में यह अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जहाँ पुरानी पीढ़ी पारंपरिक मूल्यों को महत्व देती है, जबकि नई पीढ़ी आधुनिक विचारों को अपनाती है।


Step 2: अंतराल के प्रमुख कारण।

इस अंतराल का मुख्य कारण बदलती जीवन शैली, शिक्षा, तकनीक और सामाजिक परिस्थितियाँ हैं। पुरानी पीढ़ी परंपराओं और अनुशासन को महत्व देती है, जबकि नई पीढ़ी स्वतंत्रता और आधुनिकता को अधिक महत्व देती है। इसी कारण दोनों के विचारों में टकराव उत्पन्न होता है।


Step 3: कहानी में इसका चित्रण।

‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी में यशोधर बाबू का व्यक्तित्व पुरानी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। वे अपने पारंपरिक मूल्यों और नियमों को बहुत महत्व देते हैं, जबकि उनके बच्चे आधुनिक सोच और नई जीवन शैली को अपनाते हैं। इससे दोनों पीढ़ियों के बीच मतभेद उत्पन्न हो जाते हैं।


Step 4: अंतराल को पाटने के उपाय।

पीढ़ियों के इस अंतराल को आपसी समझ, संवाद और सहनशीलता के माध्यम से कम किया जा सकता है। यदि पुरानी पीढ़ी नई पीढ़ी के विचारों को समझने का प्रयास करे और नई पीढ़ी भी परंपराओं और मूल्यों का सम्मान करे, तो दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित हो सकता है।


Step 5: निष्कर्ष।

अतः पीढ़ियों का अंतराल समाज में स्वाभाविक है, लेकिन आपसी समझ, सम्मान और संवाद के माध्यम से इसे कम किया जा सकता है। इससे परिवार और समाज में सौहार्द बना रहता है।
Quick Tip: पीढ़ियों के अंतराल को दूर करने का सबसे प्रभावी तरीका संवाद, आपसी सम्मान और समझ है।


Question 48:

‘जूझ’ का नायक किशोर छात्रों के लिए एक आदर्श प्रेरणा-स्रोत है, कहानी के आधार पर लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: कहानी का परिचय।

‘जूझ’ कहानी में लेखक ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन का वर्णन किया है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार कठिन परिस्थितियों के बावजूद नायक ने शिक्षा प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास किया।


Step 2: नायक का संघर्ष।

कहानी का नायक आर्थिक और पारिवारिक कठिनाइयों के बावजूद पढ़ाई जारी रखता है। उसे कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन वह हार नहीं मानता और निरंतर मेहनत करता रहता है।


Step 3: छात्रों के लिए प्रेरणा।

नायक का संघर्ष, धैर्य और दृढ़ निश्चय किशोर छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह कहानी विद्यार्थियों को यह संदेश देती है कि यदि मन में लगन और परिश्रम हो, तो किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है।


Step 4: शिक्षा का महत्व।

कहानी यह भी बताती है कि शिक्षा जीवन को बदलने की शक्ति रखती है। नायक अपने कठिन जीवन से निकलकर शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को बेहतर बनाने का प्रयास करता है।


Step 5: निष्कर्ष।

अतः ‘जूझ’ का नायक अपने संघर्ष, परिश्रम और दृढ़ निश्चय के कारण किशोर छात्रों के लिए एक आदर्श प्रेरणा-स्रोत बन जाता है।
Quick Tip: जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम, धैर्य और दृढ़ संकल्प आवश्यक होते हैं।


Question 49:

“सिंधु सभ्यता की खूबी उसका सौंदर्य-बोध है, जो राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था।” ऐसा क्यों कहा गया है? लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: सिंधु सभ्यता का परिचय।

सिंधु सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है, जो अपने सुव्यवस्थित नगरों, उत्कृष्ट स्थापत्य कला और विकसित जीवन शैली के लिए प्रसिद्ध थी। इस सभ्यता के लोगों में सौंदर्य-बोध और कलात्मकता का विशेष महत्व था।


Step 2: सौंदर्य-बोध की विशेषता।

सिंधु सभ्यता में घरों, सड़कों, भवनों और वस्तुओं के निर्माण में सौंदर्य और उपयोगिता का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। यह सौंदर्य केवल राजाओं या धार्मिक संस्थाओं के कारण नहीं था, बल्कि सामान्य समाज के लोगों की जीवन शैली का हिस्सा था।


Step 3: समाज-पोषित सौंदर्य का अर्थ।

यहाँ समाज-पोषित का अर्थ है कि उस समय की कला, संस्कृति और सौंदर्य-बोध पूरे समाज के सहयोग और सहभागिता से विकसित हुआ था। यह केवल शासकों या धार्मिक वर्ग तक सीमित नहीं था, बल्कि आम लोगों के जीवन में भी समाहित था।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः यह कहा गया है कि सिंधु सभ्यता का सौंदर्य-बोध राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था, क्योंकि उस समय की कला और संस्कृति पूरे समाज की सामूहिक चेतना और सहभागिता का परिणाम थी।
Quick Tip: सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता उसका सुव्यवस्थित नगर-नियोजन और समाज द्वारा विकसित सौंदर्य-बोध था।


Question 50:

“टूटे-फूटे खंडहर, सभ्यता और संस्कृति के इतिहास के साथ-साथ धड़कती ज़िंदगियों के अनछुए समयों का भी दस्तावेज़ होते हैं।” इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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Step 1: कथन का अर्थ समझना।

इस कथन में लेखक यह बताना चाहता है कि पुराने खंडहर केवल टूटे हुए भवन या अवशेष नहीं होते, बल्कि वे अतीत के जीवन, संस्कृति और इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी भी देते हैं।


Step 2: इतिहास से संबंध।

खंडहरों के माध्यम से हमें यह पता चलता है कि उस समय के लोग कैसे रहते थे, उनकी जीवन शैली कैसी थी और उनकी सभ्यता तथा संस्कृति का स्तर क्या था।


Step 3: धड़कती ज़िंदगियों का संकेत।

इन खंडहरों में उस समय के लोगों के जीवन के अनेक अनछुए पहलू छिपे होते हैं। वे उस युग की गतिविधियों, संघर्षों और जीवन के अनुभवों के साक्ष्य होते हैं।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः यह कथन यह स्पष्ट करता है कि खंडहर केवल पुराने अवशेष नहीं हैं, बल्कि वे इतिहास, संस्कृति और मानव जीवन की अनगिनत कहानियों के जीवंत दस्तावेज़ भी हैं।
Quick Tip: पुरातात्विक अवशेष और खंडहर हमें अतीत की सभ्यता, संस्कृति और जीवन शैली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।

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