Bihar Board is conducting the Class 10 Sanskrit Board Exam 2026 on February 19, 2026. Class 10 Sanskrit Question Paper with Solution PDF is available here for download.

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Bihar Board Class 10, 2026 Sanskrit Question Paper with Solution PDF

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Bihar Board Class 10 2026 Sanskrit Question Paper with Solution

Question 1:

'इष्' धातु के लट् लकार, प्रथम पुरूष, एकवचन का रूप कौन-सा है ?

  • (A) इच्छेत्
  • (B) इच्छ
  • (C) इच्छति
  • (D) इच्छन्ति
Correct Answer: (C) इच्छति
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Step 1: धातु की पहचान।

यहाँ मूल धातु 'इष्' (चाहना) है। संस्कृत में कुछ धातुओं के रूप बदलते समय उनके मूल स्वरूप में परिवर्तन आता है, जैसे 'इष्' धातु का रूप 'इच्छ्' आदेश में बदल जाता है।


Step 2: लकार एवं पुरुष निर्धारण।

प्रश्न में 'लट् लकार' (वर्तमान काल), प्रथम पुरुष और एकवचन पूछा गया है। लट् लकार के प्रथम पुरुष एकवचन का प्रत्यय 'ति' होता है।


Step 3: रूप निर्माण।

इच्छ् + ति = इच्छति।
(पूरी तालिका: इच्छति - इच्छतः - इच्छन्ति)।


Step 4: अन्य विकल्पों का विश्लेषण।

(A) इच्छेत्: यह विधिलिङ् लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन) का रूप है।
(B) इच्छ: यह लोट् लकार (मध्यम पुरुष, एकवचन) का रूप है।
(D) इच्छन्ति: यह लट् लकार (प्रथम पुरुष, बहुवचन) का रूप है।


Step 5: निष्कर्ष।

अतः, सही उत्तर विकल्प (C) इच्छति है।
Quick Tip: संस्कृत में 'इष्' के समान ही 'गम्' का 'गच्छ्' और 'पा' का 'पिब्' आदेश हो जाता है, जिससे गच्छति और पिबति जैसे रूप बनते हैं।


Question 2:

'अकरोत्' किस लकार का रूप है ?

  • (A) लट् लकार
  • (B) लोट् लकार
  • (C) लृट् लकार
  • (D) लङ् लकार
Correct Answer: (D) लङ् लकार
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Step 1: धातु की पहचान।

'अकरोत्' शब्द संस्कृत की प्रसिद्ध 'कृ' (करना) धातु से बना है।


Step 2: लकार का निर्धारण।

संस्कृत व्याकरण में भूतकाल को दर्शाने के लिए 'लङ् लकार' का प्रयोग किया जाता है। लङ् लकार की सबसे बड़ी पहचान यह है कि इसमें धातु के पूर्व में 'अ' (अ-आगम) जुड़ा होता है।


Step 3: रूप विश्लेषण।

'कृ' धातु के लङ् लकार (भूतकाल), प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप 'अकरोत्' होता है।
(तालिका: अकरोत् - अकुरुताम् - अकुर्वन्)।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः, 'अकरोत्' शब्द लङ् लकार का रूप है। सही उत्तर विकल्प (D) है।
Quick Tip: याद रखने का आसान तरीका: जिस क्रिया शब्द के शुरू में 'अ' लगा हो और अंत में हलन्त वाला 'त्' हो (जैसे अभवत्, अपठत्, अकरोत्), वह लगभग हमेशा लङ् लकार (भूतकाल) होता है।


Question 3:

स्वर सन्धि के कितने प्रमुख भेद हैं ?

  • (A) 4
  • (B) 5
  • (C) 3
  • (D) 2
Correct Answer: (B) 5
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Step 1: सन्धि की परिभाषा।

दो वर्णों के मेल से जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे सन्धि कहते हैं। जब पहले शब्द का अंतिम वर्ण स्वर हो और दूसरे शब्द का प्रथम वर्ण भी स्वर हो, तो उनके मेल को 'स्वर सन्धि' कहा जाता है।


Step 2: भेदों का वर्गीकरण।

संस्कृत और हिन्दी व्याकरण में स्वर सन्धि के मुख्य रूप से पाँच (5) भेद माने जाते हैं:
1. दीर्घ सन्धि: (अ + अ = आ)
2. गुण सन्धि: (अ + इ = ए)
3. वृद्धि सन्धि: (अ + ए = ऐ)
4. यण सन्धि: (इ + अ = य)
5. अयादि सन्धि: (ए + अ = अय)


Step 3: निष्कर्ष।

अतः, स्वर सन्धि के प्रमुख भेदों की संख्या विकल्प (B) के अनुसार 5 है।
Quick Tip: याद रखें: सन्धि के मुख्य तीन प्रकार हैं (स्वर, व्यंजन, विसर्ग), लेकिन स्वर सन्धि के अपने स्वयं के पाँच उप-भेद होते हैं।


Question 4:

'शोभते' किस लकार का रूप है ?

  • (A) लट् लकार
  • (B) लोट् लकार
  • (C) लृट् लकार
  • (D) लङ् लकार
Correct Answer: (A) लट् लकार
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Step 1: धातु की प्रकृति।

'शोभते' शब्द 'शुभ्' (शोभा देना/सुंदर लगना) धातु से बना है। यह एक आत्मनेपदी धातु है।


Step 2: लकार का निर्धारण।

संस्कृत में वर्तमान काल को प्रकट करने के लिए 'लट् लकार' का प्रयोग किया जाता है। आत्मनेपदी धातुओं में लट् लकार के प्रत्यय 'ते, एते, अन्ते' होते हैं।


Step 3: रूप विश्लेषण।

'शुभ्' धातु का लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन में रूप 'शोभते' बनता है।
(तालिका: शोभते - शोभेते - शोभन्ते)।


Step 4: निष्कर्ष।

चूँकि यह वर्तमान काल की क्रिया को दर्शाता है, अतः सही उत्तर विकल्प (A) लट् लकार है।
Quick Tip: पहचान: यदि धातु के अंत में 'ते' (जैसे- लभते, रोचते, शोभते) लगा हो और वह वर्तमान काल का बोध कराए, तो वह आत्मनेपदी लट् लकार का रूप होता है।


Question 5:

जन्मपूर्व संस्कारों की कुल संख्या कितनी है ?

  • (A) 5
  • (B) 6
  • (C) 3
  • (D) 4
Correct Answer: (C) 3
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Step 1: भारतीय संस्कारों का परिचय।

हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में मुख्य रूप से 16 संस्कारों (षोडश संस्कार) का वर्णन मिलता है, जिन्हें जीवन के विभिन्न चरणों में संपन्न किया जाता है।


Step 2: जन्मपूर्व श्रेणी का वर्गीकरण।

इन 16 संस्कारों को अलग-अलग श्रेणियों में बाँटा गया है। जन्म से पूर्व किए जाने वाले संस्कारों की संख्या तीन (3) है।


Step 3: जन्मपूर्व संस्कारों के नाम।

ये तीन संस्कार निम्नलिखित हैं:
1. गर्भाधान: गर्भ धारण के समय।
2. पुंसवन: गर्भस्थ शिशु के मानसिक विकास और पुत्र प्राप्ति की कामना हेतु।
3. सीमन्तोन्नयन: गर्भवती स्त्री की प्रसन्नता और सुरक्षा के लिए।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः, जन्मपूर्व संस्कारों की कुल संख्या विकल्प (C) के अनुसार 3 है।
Quick Tip: भारतीय संस्कारों का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के शरीर और मन का शुद्धिकरण तथा उसे श्रेष्ठ नागरिक बनाना है।


Question 6:

मैत्रेयी कौन थी ?

  • (A) याज्ञवल्क्य की पुत्री
  • (B) याज्ञवल्क्य की भगिनी
  • (C) याज्ञवल्क्य की पत्नी
  • (D) याज्ञवल्क्य की शिष्या
Correct Answer: (C) याज्ञवल्क्य की पत्नी
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Step 1: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि।

मैत्रेयी प्राचीन भारत की एक अत्यंत विदुषी और दार्शनिक महिला थीं, जिनका उल्लेख बृहदारण्यक उपनिषद में विस्तार से मिलता है।


Step 2: संबंधों का विवरण।

ऐतिहासिक और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मैत्रेयी प्रसिद्ध ऋषि याज्ञवल्क्य की पत्नी थीं। ऋषि याज्ञवल्क्य की दो पत्नियाँ थीं— कात्यायनी और मैत्रेयी।


Step 3: दार्शनिक महत्व।

मैत्रेयी अपनी आध्यात्मिक जिज्ञासा के लिए जानी जाती हैं। जब याज्ञवल्क्य ने अपनी संपत्ति का बँवारा करना चाहा, तब मैत्रेयी ने धन के स्थान पर 'अमृतत्व' (आत्म-ज्ञान) की शिक्षा माँगी थी।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः, मैत्रेयी ऋषि याज्ञवल्क्य की पत्नी थीं। सही उत्तर विकल्प (C) है।
Quick Tip: मैत्रेयी और याज्ञवल्क्य के बीच 'आत्मा' और 'अमृतत्व' पर हुआ संवाद उपनिषदों के सबसे महत्वपूर्ण दार्शनिक अंशों में से एक माना जाता है।


Question 7:

'लेखितुम्' का प्रकृति-प्रत्यय निम्न में कौन-सा है ?

  • (A) लेख् + तुमुन्
  • (B) लिख् + तुमुन्
  • (C) लिख् + तसिल्
  • (D) लिख् + क्तवतु्
Correct Answer: (B) लिख् + तुमुन्
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Step 1: मूल धातु की पहचान।

'लेखितुम्' शब्द में मूल क्रिया या धातु 'लिख्' (लिखना) है। विकल्पों में (A) में 'लेख्' दिया गया है जो धातु का गुण रूप है, मूल रूप नहीं।


Step 2: प्रत्यय का निर्धारण।

जिस संस्कृत शब्द के अंत में 'तुम्' शेष रहता है, वहाँ 'तुमुन्' प्रत्यय का प्रयोग होता है। यह प्रत्यय 'के लिए' (निमित्त) के अर्थ को प्रकट करता है।


Step 3: व्याकरणिक प्रक्रिया।

जब 'लिख्' धातु के साथ 'तुमुन्' प्रत्यय जुड़ता है, तो 'लिख्' की उपधा 'इ' को गुण होकर 'ए' हो जाता है और इट् का आगम होने पर शब्द 'लेखितुम्' बनता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः, सही प्रकृति-प्रत्यय विच्छेद विकल्प (B) है।
Quick Tip: पठितुम् (पढ़ने के लिए), चलितुम् (चलने के लिए), और लेखितुम् (लिखने के लिए) — इन सभी में 'तुमुन्' प्रत्यय का ही चमत्कार है।


Question 8:

'अध्यात्म' में कौन-सा उपसर्ग है ?

  • (A) अभि
  • (B) आङ्
  • (C) अधि
  • (D) अति
Correct Answer: (C) अधि
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Step 1: शब्द का विच्छेद।

'अध्यात्म' शब्द का संधि विच्छेद करने पर हमें 'अधि + आत्म' प्राप्त होता है।


Step 2: उपसर्ग की पहचान।

उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो किसी शब्द के पूर्व में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन लाते हैं। यहाँ 'आत्म' शब्द के पूर्व में 'अधि' जुड़ा है।


Step 3: संधि नियम।

यहाँ यण संधि का नियम लागू होता है: \(i + a = ya\)। जब 'अधि' का 'इ' और 'आत्म' का 'आ' मिलते हैं, तो 'य' बनता है, जिससे शब्द 'अध्यात्म' सिद्ध होता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः, 'अध्यात्म' शब्द में सही उपसर्ग विकल्प (C) अधि है।
Quick Tip: अधि उपसर्ग का प्रयोग प्रायः 'ऊपर', 'श्रेष्ठ' या 'अंदर' (जैसे: अधिकार, अधिपति, अध्ययन) के अर्थ में किया जाता है।


Question 9:

'निर्बन्ध:' में कौन-सा उपसर्ग है ?

  • (A) निर्
  • (B) निर
  • (C) नि
  • (D) निः
Correct Answer: (A) निर्
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Step 1: उपसर्ग की परिभाषा।

उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो किसी मूल शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में विशेषता या परिवर्तन ला देते हैं। संस्कृत में कुल 22 मुख्य उपसर्ग माने गए हैं।


Step 2: शब्द विच्छेद।

'निर्बन्ध:' शब्द का विश्लेषण करने पर हमें 'निर् + बन्ध:' प्राप्त होता है। यहाँ 'बन्ध' मूल शब्द है और 'निर्' उपसर्ग है।


Step 3: व्याकरणिक शुद्धता।

विकल्प (A) और (B) में अंतर 'र्' के नीचे लगे हलन्त का है। संस्कृत व्याकरण में शुद्ध उपसर्ग 'निर्' (हलन्त युक्त) होता है। विकल्प (D) 'निः' विसर्ग संधि के बाद का रूप हो सकता है, लेकिन मूल उपसर्ग 'निर्' ही माना जाता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः, 'निर्बन्ध:' में सही उपसर्ग विकल्प (A) निर् है।
Quick Tip: निर्, दुर्, निस्, और दुस्—इन चारों उपसर्गों में हमेशा हलन्त (्) का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि यही इनकी मानक व्याकरणिक अवस्था है।


Question 10:

'करणे तृतीया' सूत्र से किस वाक्य में तृतीया विभक्ति हुई है ?

  • (A) श्याम: कलमेन लिखति ।
  • (B) विप्रेण वेद: पठ्यते ।
  • (C) पिता पुत्रेण सह गच्छति ।
  • (D) गोपाल: पादेन खञ्ज: अस्ति ।
Correct Answer: (A) श्याम: कलमेन लिखति ।
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Step 1: सूत्र की व्याख्या।

संस्कृत व्याकरण के अनुसार 'करणे तृतीया' सूत्र का अर्थ है कि क्रिया की सिद्धि में जो सबसे अधिक सहायक हो (करण कारक), उसमें तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।


Step 2: विकल्पों का विश्लेषण।

(A) कलमेन लिखति: यहाँ लिखने की क्रिया में 'कलम' सबसे प्रधान साधन (करण) है, इसलिए इसमें 'कलमेन' पद में 'करणे तृतीया' से विभक्ति हुई है।

(B) विप्रेण वेद: पठ्यते: यहाँ कर्मवाच्य होने के कारण कर्ता (विप्र) में तृतीया हुई है (कर्तरि तृतीया)।

(C) पुत्रेण सह: यहाँ 'सहयुक्तेऽप्रधाने' सूत्र से 'सह' के योग में तृतीया हुई है।

(D) पादेन खञ्ज:: यहाँ 'येनाङ्गविकार:' सूत्र से शरीर के विकृत अंग में तृतीया हुई है।


Step 3: निष्कर्ष।

शुद्ध रूप से करण कारक के अर्थ में तृतीया विभक्ति का प्रयोग विकल्प (A) में हुआ है।
Quick Tip: जब भी किसी यंत्र या साधन (जैसे हाथ, पेन, कुल्हाड़ी) से कोई कार्य किया जाए, तो वह 'करणे तृतीया' का सबसे सटीक उदाहरण होता है।


Question 11:

'एतत्' शब्द का रूप निम्न में कौन-सा है ?

  • (A) सा
  • (B) इयम्
  • (C) असौ
  • (D) एष:
Correct Answer: (D) एष:
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Step 1: सर्वनाम शब्द की पहचान।

'एतत्' (यह) संस्कृत का एक सर्वनाम शब्द है जिसका प्रयोग समीपवर्ती वस्तु या व्यक्ति के लिए किया जाता है।


Step 2: रूप विश्लेषण।

'एतत्' शब्द के पुल्लिंग, प्रथमा विभक्ति, एकवचन में रूप 'एष:' बनता है।
(तालिका: एष: - एतौ - एते)।


Step 3: अन्य विकल्पों का विश्लेषण।

(A) सा: यह 'तत्' (वह) शब्द का स्त्रीलिंग रूप है।
(B) इयम्: यह 'इदम्' (यह) शब्द का स्त्रीलिंग रूप है।
(C) असौ: यह 'अदस्' (वह) शब्द का रूप है।


Step 4: निष्कर्ष।

चूँकि केवल 'एष:' ही 'एतत्' का रूप है, अतः सही उत्तर विकल्प (D) है।
Quick Tip: संस्कृत में 'एतत्' और 'इदम्' दोनों का अर्थ 'यह' होता है, लेकिन 'एतत्' का प्रयोग अत्यधिक निकटता दर्शाने के लिए किया जाता है।


Question 12:

भीखनटोला गाँव को देखने कौन आये ?

  • (A) नेता
  • (B) मंत्री
  • (C) शिक्षक
  • (D) महात्मा
Correct Answer: (C) शिक्षक
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Step 1: पाठ का संदर्भ।

यह प्रश्न संस्कृत पाठ्यपुस्तक की प्रसिद्ध कहानी 'कर्मवीर कथा' से लिया गया है। यह कहानी एक दलित बालक (रामप्रवेश राम) के संघर्ष और उसकी सफलता की प्रेरणादायक यात्रा का वर्णन करती है।


Step 2: कहानी का सारांश।

भीखनटोला बिहार प्रान्त के एक दुर्गम क्षेत्र में स्थित एक निर्धन गाँव था। वहाँ के लोगों का जीवन अत्यंत कष्टमय था। एक बार उस गाँव की स्थिति का जायजा लेने और उसे देखने के लिए एक नवीन दृष्टि संपन्न, सामाजिक समरसता के पक्षधर शिक्षक आए।


Step 3: प्रभाव।

उस शिक्षक ने गाँव के एक प्रतिभाशाली बालक को खेलते हुए देखा और उसकी प्रतिभा को पहचानकर उसे पढ़ाना शुरू किया, जिससे बालक आगे चलकर उच्च पद पर आसीन हुआ।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः, भीखनटोला गाँव को देखने विकल्प (C) शिक्षक आए थे।
Quick Tip: 'कर्मवीर कथा' हमें सिखाती है कि कठिन परिश्रम और सही मार्गदर्शन (शिक्षक) के माध्यम से कोई भी व्यक्ति विषम परिस्थितियों में भी महानता प्राप्त कर सकता है।


Question 13:

'मन्दाकिनीवर्णनम्' पाठ रामायण के किस सर्ग से संकलित है ?

  • (A) 91 वें सर्ग से
  • (B) 92 वें सर्ग से
  • (C) 93 वें सर्ग से
  • (D) 95 वें सर्ग से
Correct Answer: (D) 95 वें सर्ग से
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Step 1: पाठ का स्रोत।

'मन्दाकिनीवर्णनम्' पाठ महर्षि वाल्मीकि रचित प्रसिद्ध महाकाव्य 'रामायण' के अयोध्याकाण्ड से लिया गया है।


Step 2: सर्ग की पहचान।

अयोध्याकाण्ड के अन्तर्गत यह पाठ विशेष रूप से 95 वें सर्ग (सर्ग संख्या 95) से संकलित है। इसमें भगवान राम द्वारा माता सीता को मन्दाकिनी नदी की सुंदरता का वर्णन करते हुए दिखाया गया है।


Step 3: काव्य सौंदर्य।

इस सर्ग में चित्रकूट स्थित मन्दाकिनी नदी के प्राकृतिक सौंदर्य, वहाँ के पक्षियों, वृक्षों और ऋषियों के स्नान आदि का अत्यंत मनोरम वर्णन अनुष्टुप छंद में किया गया है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः, सही उत्तर विकल्प (D) 95 वें सर्ग से है।
Quick Tip: याद रखने के लिए: मन्दाकिनी का वर्णन अयोध्याकाण्ड में है और इसकी सर्ग संख्या '95' है। यह प्रश्न बिहार बोर्ड की संस्कृत परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।


Question 14:

'विशालाक्षि' किसका सम्बोधन है ?

  • (A) उर्मिला का
  • (B) सीता का
  • (C) रमा का
  • (D) लक्ष्मी का
Correct Answer: (B) सीता का
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Step 1: शब्द का अर्थ।

'विशालाक्षि' शब्द दो शब्दों के मेल से बना है: विशाल + अक्षि। इसका अर्थ होता है "बड़ी-बड़ी आँखों वाली"।


Step 2: पाठ का संदर्भ।

यह प्रश्न 'मन्दाकिनीवर्णनम्' पाठ से लिया गया है, जो वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकाण्ड का हिस्सा है। इस पाठ में भगवान राम वनवास के दौरान चित्रकूट में मन्दाकिनी नदी की शोभा का वर्णन कर रहे हैं।


Step 3: सम्बोधन की पहचान।

नदी की सुंदरता दिखाते समय श्री राम अपनी पत्नी सीता को सम्बोधित करने के लिए 'विशालाक्षि', 'सीते', 'प्रिये' और 'तनुमध्यमे' जैसे विशेषणों का प्रयोग करते हैं।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः, 'विशालाक्षि' सम्बोधन सीता जी के लिए प्रयुक्त हुआ है। सही उत्तर विकल्प (B) है।
Quick Tip: मन्दाकिनीवर्णनम् पाठ में प्रकृति चित्रण के साथ-साथ श्री राम के अपनी पत्नी के प्रति प्रेमपूर्ण सम्बोधन भी साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।


Question 15:

दुराचारी कौन था ?

  • (A) पथिक
  • (B) बाघ
  • (C) पण्डित
  • (D) दानव
Correct Answer: (B) बाघ
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Step 1: पाठ का संदर्भ।

यह प्रश्न नारायण पंडित रचित 'हितोपदेश' के 'व्याघ्रपथिककथा' (बाघ और राही की कहानी) शीर्षक पाठ से लिया गया है।


Step 2: पात्र का परिचय।

कहानी में एक बूढ़ा बाघ है जो तालाब के किनारे हाथ में सोने का कंगन लेकर बैठा है। वह स्वयं को सुधारने का ढोंग करता है ताकि वह राही (पथिक) को जाल में फँसा सके।


Step 3: दुराचारी की पहचान।

बाघ स्वीकार करता है कि वह अपनी युवावस्था में अत्यंत दुराचारी था, जिसने अनेक गायों और मनुष्यों का वध किया था, जिसके कारण वह वंशहीन हो गया था। यह स्वीकारोक्ति वह पथिक का विश्वास जीतने के लिए करता है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः, इस कथा के संदर्भ में 'दुराचारी' शब्द का प्रयोग विकल्प (B) बाघ के लिए किया गया है।
Quick Tip: लोभ के कारण पथिक उस दुराचारी बाघ की बातों में आ गया और अंततः कीचड़ में फँसकर अपनी जान गँवा बैठा। यह कहानी लोभ के दुष्परिणामों को दर्शाती है।


Question 16:

'नदी' शब्द के तृतीया विभक्ति, एकवचन का रूप निम्न में कौन है ?

  • (A) नद्या
  • (B) नद्या:
  • (C) नद्य:
  • (D) नद्याम्
Correct Answer: (A) नद्या
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Step 1: शब्द रूप की पहचान।

'नदी' एक ईकारान्त स्त्रीलिंग शब्द है। संस्कृत व्याकरण में ईकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के रूप एक निश्चित पद्धति पर चलते हैं।


Step 2: विभक्ति विश्लेषण।

'नदी' शब्द के प्रथमा से तृतीया विभक्ति के एकवचन रूप इस प्रकार हैं:
प्रथमा एकवचन: नदी
द्वितीया एकवचन: नदीम्
तृतीया एकवचन: नद्या


Step 3: अन्य विकल्पों का स्पष्टीकरण।

(B) नद्या: – यह पञ्चमी और षष्ठी विभक्ति का एकवचन रूप है।
(C) नद्य: – यह प्रथमा विभक्ति का बहुवचन रूप है।
(D) नद्याम् – यह सप्तमी विभक्ति का एकवचन रूप है।


Step 4: निष्कर्ष।

अतः, तृतीया विभक्ति एकवचन का सही रूप विकल्प (A) नद्या है।
Quick Tip: ईकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों (जैसे जननी, देवी, नदी) के तृतीया एकवचन में अंत में 'या' जुड़ता है। उदाहरण: जनन्या, देव्या, नद्या।


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