UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2024 PDF (Code 801 HE) is available for download here. The Hindi exam was conducted on February 22, 2024 in the Morning Shift from 8:30 AM to 11:45 AM. The total marks for the theory paper are 70. Students reported the paper to be easy to moderate.

UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2024 (Code 801 HE) with Solutions

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UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2024 (Code 801 HE) with Solutions

Question 1:

'रक्षाबन्धन' नाटक के नाटककार हैं

  • (A) उपेन्द्र नाथ 'अश्क'
  • (B) हरिकृष्ण 'प्रेमी'
  • (C) रामकुमार वर्मा
  • (D) चतुरसेन शास्त्री
Correct Answer: (B) हरिकृष्ण 'प्रेमी'
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में 'रक्षाबन्धन' नामक नाटक के लेखक का नाम पूछा गया है।


Step 2: Detailed Explanation

'रक्षाबन्धन' एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक है। इसके नाटककार हरिकृष्ण 'प्रेमी' हैं। इस नाटक में गुजरात के बहादुरशाह द्वारा चित्तौड़ पर आक्रमण करने पर रानी कर्णावती द्वारा मुगल सम्राट हुमायूँ को राखी भेजकर मदद माँगने की ऐतिहासिक घटना का वर्णन है। हरिकृष्ण 'प्रेमी' जी अपने ऐतिहासिक नाटकों के लिए प्रसिद्ध हैं, जिनमें 'शिवा-साधना', 'स्वप्नभंग' आदि भी प्रमुख हैं।


Step 3: Final Answer

अतः, 'रक्षाबन्धन' नाटक के नाटककार हरिकृष्ण 'प्रेमी' हैं। सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: हिन्दी के प्रमुख नाटकों और उनके नाटककारों के नाम याद रखें। ऐतिहासिक नाटकों की श्रेणी में हरिकृष्ण 'प्रेमी' और जयशंकर प्रसाद का नाम महत्वपूर्ण है।


Question 2:

रामधारी सिंह 'दिनकर' की रचना है

  • (A) संस्कृति के चार अध्याय
  • (B) साहित्य और कला
  • (C) अनन्त आकाश
  • (D) इन्द्रजाल
Correct Answer: (A) संस्कृति के चार अध्याय
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में दिए गए विकल्पों में से रामधारी सिंह 'दिनकर' की रचना को पहचानना है।


Step 2: Detailed Explanation


संस्कृति के चार अध्याय: यह रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित एक प्रसिद्ध गद्य कृति है, जिसमें उन्होंने भारत की सांस्कृतिक इतिहास का विश्लेषण किया है। इस कृति के लिए उन्हें 1959 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

साहित्य और कला: यह भगवतशरण उपाध्याय की रचना है।

अनन्त आकाश: यह जयप्रकाश भारती की रचना है।

इन्द्रजाल: यह जयशंकर प्रसाद का कहानी-संग्रह है।




Step 3: Final Answer

अतः, 'संस्कृति के चार अध्याय' रामधारी सिंह 'दिनकर' की रचना है। सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: प्रमुख लेखकों की पुरस्कृत रचनाओं को विशेष रूप से याद रखें। 'संस्कृति के चार अध्याय' (दिनकर) और 'चिदम्बरा' (पन्त) जैसी रचनाएँ अक्सर परीक्षाओं में पूछी जाती हैं।


Question 3:

'राग दरबारी' रचना के उपन्यासकार हैं

  • (A) कमलेश्वर
  • (B) श्रीलाल शुक्ल
  • (C) अज्ञेय
  • (D) नरेश मेहता
Correct Answer: (B) श्रीलाल शुक्ल
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में 'राग दरबारी' नामक उपन्यास के लेखक का नाम पूछा गया है।


Step 2: Detailed Explanation

'राग दरबारी' हिन्दी का एक प्रसिद्ध व्यंग्य उपन्यास है, जिसके लेखक श्रीलाल शुक्ल हैं। यह उपन्यास 1968 में प्रकाशित हुआ था। इसमें स्वतंत्रता के बाद भारत के गाँवों की राजनीति, भ्रष्टाचार और मूल्यहीनता का यथार्थवादी और व्यंग्यात्मक चित्रण किया गया है। इस कृति के लिए श्रीलाल शुक्ल को 1969 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।


Step 3: Final Answer

अतः, 'राग दरबारी' के उपन्यासकार श्रीलाल शुक्ल हैं। सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: हिन्दी के प्रमुख उपन्यासों और उनके लेखकों की एक सूची बनाएँ। 'गोदान' (प्रेमचन्द), 'मैला आँचल' (फणीश्वरनाथ 'रेणु') और 'राग दरबारी' (श्रीलाल शुक्ल) जैसे उपन्यास मील के पत्थर माने जाते हैं।


Question 4:

'शुक्ल युग' के अन्य नाम कौन से हैं ?

  • (A) प्रसाद युग
  • (B) प्रेमचन्द युग
  • (C) छायावाद युग
  • (D) इनमें से सभी
Correct Answer: (D) इनमें से सभी
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में 'शुक्ल युग' के अन्य प्रचलित नामों के बारे में पूछा गया है।


Step 2: Detailed Explanation

हिन्दी साहित्य में सन् 1919 से 1938 तक की कालावधि को 'शुक्ल युग' के नाम से जाना जाता है। इस युग का नामकरण आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के युगांतरकारी योगदान के कारण हुआ। इसी समयावधि में साहित्य की विभिन्न विधाओं में महत्वपूर्ण विकास हुआ, जिसके आधार पर इसे अन्य नामों से भी जाना जाता है:

काव्य के क्षेत्र में: इस युग में जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और महादेवी वर्मा जैसे कवियों ने एक नई काव्यधारा को जन्म दिया, जिसे 'छायावाद युग' कहा गया।

उपन्यास और कहानी के क्षेत्र में: मुंशी प्रेमचन्द ने उपन्यास और कहानी को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं, इसलिए इसे 'प्रेमचन्द युग' भी कहा जाता है।

नाटक के क्षेत्र में: जयशंकर प्रसाद के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नाटकों के कारण इसे 'प्रसाद युग' भी कहा जाता है।


इस प्रकार, शुक्ल युग को प्रसाद युग, प्रेमचन्द युग और छायावाद युग, इन सभी नामों से जाना जाता है।


Step 3: Final Answer

अतः, सही उत्तर (D) इनमें से सभी है।
Quick Tip: एक ही कालखंड को साहित्य की विभिन्न विधाओं में हुए विकास के आधार पर अलग-अलग नामों से जाना जा सकता है। शुक्ल युग इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।


Question 5:

'विष्णु प्रभाकर' किस युग के कहानीकार हैं ?

  • (A) भारतेन्दु युग
  • (B) छायावादी युग
  • (C) द्विवेदी युग
  • (D) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (D) इनमें से कोई नहीं
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में कहानीकार विष्णु प्रभाकर का साहित्यिक युग पूछा गया है।


Step 2: Detailed Explanation

विष्णु प्रभाकर एक प्रसिद्ध हिन्दी लेखक थे, जिन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, जीवनी, और यात्रा-वृत्तांत जैसी अनेक विधाओं में रचना की। उनका लेखन काल मुख्यतः स्वतंत्रता के बाद का है। उन्हें 'स्वातन्त्र्योत्तर युग' या 'आधुनिक काल' के कहानीकार के रूप में जाना जाता है। दिए गए विकल्प - भारतेन्दु युग (1868-1900), द्विवेदी युग (1900-1918), और छायावादी युग (1918-1936) - विष्णु प्रभाकर के लेखन काल से पहले के हैं। उनका सक्रिय लेखन काल इन युगों के बाद प्रारम्भ हुआ।


Step 3: Final Answer

अतः, दिए गए विकल्पों में से कोई भी सही नहीं है। सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: लेखकों का युग निर्धारित करते समय उनके जन्म-मृत्यु के साथ-साथ उनके सक्रिय लेखन काल पर भी ध्यान दें। कुछ लेखक दो युगों की संधि पर भी हो सकते हैं, लेकिन विष्णु प्रभाकर स्पष्ट रूप से छायावादोत्तर युग के लेखक हैं।


Question 6:

'भाव विलास' के रचनाकार हैं

  • (A) केशवदास
  • (B) देव
  • (C) पद्माकर
  • (D) मतिराम
Correct Answer: (B) देव
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में 'भाव विलास' नामक कृति के रचनाकार का नाम पूछा गया है।


Step 2: Detailed Explanation

'भाव विलास' रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि देव की रचना है। देव का पूरा नाम देवदत्त था। वे रीतिकाल की रीतिबद्ध काव्यधारा के प्रमुख कवि थे। 'भाव विलास' उनकी पहली और महत्वपूर्ण रचना मानी जाती है, जिसे उन्होंने 16 वर्ष की आयु में लिखा था। इसमें रस और नायिका-भेद का वर्णन है। 'अष्टयाम', 'सुजान विनोद' और 'काव्य रसायन' उनकी अन्य प्रमुख रचनाएँ हैं।


Step 3: Final Answer

अतः, 'भाव विलास' के रचनाकार देव हैं। सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: रीतिकाल के प्रमुख कवियों (केशव, बिहारी, भूषण, देव, मतिराम, पद्माकर) और उनकी कम से कम एक-एक प्रमुख रचना का नाम अवश्य याद रखें।


Question 7:

प्रयोगवादी काव्य की विशेषता है

  • (A) चित्रमयी कल्पना की प्रधानता
  • (B) रूढ़ियों के प्रति विद्रोह
  • (C) प्राकृतिक वर्णन
  • (D) आश्रयदाताओं की प्रशंसा
Correct Answer: (B) रूढ़ियों के प्रति विद्रोह
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में प्रयोगवादी काव्य की प्रमुख विशेषता पूछी गई है।


Step 2: Detailed Explanation

प्रयोगवादी काव्य का आरम्भ सन् 1943 में अज्ञेय द्वारा संपादित 'तार सप्तक' से माना जाता है। इस काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएँ थीं:

रूढ़ियों के प्रति विद्रोह: प्रयोगवादी कवियों ने काव्य की पुरानी परम्पराओं, मान्यताओं और रूढ़ियों का विरोध किया और नए भावों, नए शिल्पों और नए उपमानों का प्रयोग किया।
अतिशय बौद्धिकता: इसमें भावुकता के स्थान पर बौद्धिकता की प्रधानता है।
अहं की प्रधानता: इसमें व्यक्तिगत अनुभूतियों और अहं को महत्व दिया गया।
नग्न यथार्थवाद: जीवन की कुंठाओं, निराशाओं और वर्जनाओं का खुला चित्रण किया गया।
नए उपमानों का प्रयोग: पुराने उपमानों को 'बासी' कहकर नए और अनगढ़ उपमानों का प्रयोग किया गया।

दिए गए विकल्पों में से 'रूढ़ियों के प्रति विद्रोह' प्रयोगवाद की एक मुख्य विशेषता है। 'आश्रयदाताओं की प्रशंसा' रीतिकाल की, 'प्राकृतिक वर्णन' और 'चित्रमयी कल्पना' छायावाद की प्रमुख विशेषताएँ हैं।


Step 3: Final Answer

अतः, सही उत्तर (B) रूढ़ियों के प्रति विद्रोह है।
Quick Tip: हिन्दी कविता के विभिन्न वादों (छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नई कविता) की प्रमुख विशेषताओं को तुलनात्मक रूप से याद करें। इससे आपको अंतर समझने में आसानी होगी।


Question 8:

काव्य की प्रवृत्ति एवं रचना शैली के आधार पर रीतिकाल की कितनी धाराएँ स्वीकार की गयी हैं ?

  • (A) 1
  • (B) 5
  • (C) 3
  • (D) 6
Correct Answer: (C) 3
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में पूछा गया है कि रीतिकाल को कितनी काव्य-धाराओं में विभाजित किया गया है।


Step 2: Detailed Explanation

काव्य की प्रवृत्ति और रचना शैली के आधार पर रीतिकाल को मुख्यतः तीन धाराओं में विभाजित किया गया है:

रीतिबद्ध काव्यधारा: इस धारा के कवियों ने संस्कृत काव्यशास्त्र के नियमों (रीति) में बँधकर लक्षण-ग्रंथों की रचना की। केशवदास, मतिराम, पद्माकर आदि इस धारा के प्रमुख कवि हैं।
रीतिसिद्ध काव्यधारा: इस धारा के कवियों ने रीति-ग्रंथ नहीं लिखे, किन्तु अपनी रचनाओं में रीति के नियमों का सफलतापूर्वक निर्वाह किया। बिहारीलाल इस धारा के प्रतिनिधि कवि हैं।
रीतिमुक्त काव्यधारा: इस धारा के कवियों ने रीति के बंधनों को त्यागकर स्वच्छंद प्रेम की कविताएँ लिखीं। घनानन्द, आलम, बोधा आदि इस धारा के प्रमुख कवि हैं।



Step 3: Final Answer

अतः, रीतिकाल की तीन धाराएँ स्वीकार की गयी हैं। सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: रीतिकाल की इन तीनों धाराओं के नाम और उनके एक-एक प्रतिनिधि कवि का नाम याद रखना परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।


Question 9:

'जौहर' काव्य के रचनाकार हैं

  • (A) श्याम नारायण पाण्डे
  • (B) रामनरेश त्रिपाठी
  • (C) सुमित्रानन्दन पन्त
  • (D) धर्मवीर भारती
Correct Answer: (A) श्याम नारायण पाण्डे
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में 'जौहर' नामक काव्य-कृति के लेखक का नाम पूछा गया है।


Step 2: Detailed Explanation

'जौहर' एक प्रसिद्ध खण्डकाव्य है जिसके रचनाकार श्याम नारायण पाण्डेय हैं। यह काव्य 1945 में प्रकाशित हुआ था। इसमें चित्तौड़ की रानी पद्मिनी के जौहर की ऐतिहासिक कथा का ओजस्वी और वीर रसपूर्ण वर्णन है। श्याम नारायण पाण्डेय वीर रस के एक प्रसिद्ध कवि थे। 'हल्दीघाटी' उनका सर्वाधिक प्रसिद्ध महाकाव्य है।


Step 3: Final Answer

अतः, 'जौहर' काव्य के रचनाकार श्याम नारायण पाण्डे हैं। सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: वीर रस के प्रमुख कवियों और उनकी रचनाओं को याद रखें। श्याम नारायण पाण्डेय ('हल्दीघाटी', 'जौहर') और रामधारी सिंह 'दिनकर' ('रश्मिरथी', 'कुरुक्षेत्र') इस श्रेणी के प्रमुख कवि हैं।


Question 10:

'चिदम्बरा' के रचनाकार हैं

  • (A) जयशंकर प्रसाद
  • (B) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
  • (C) सुमित्रानन्दन पन्त
  • (D) महादेवी वर्मा
Correct Answer: (C) सुमित्रानन्दन पन्त
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में 'चिदम्बरा' नामक कृति के रचनाकार का नाम पूछा गया है।


Step 2: Detailed Explanation

'चिदम्बरा' सुमित्रानन्दन पन्त का एक प्रसिद्ध काव्य-संग्रह है। यह उनकी प्रौढ़ावस्था की कविताओं का संकलन है, जिसमें छायावादी, प्रगतिवादी और अरविंद-दर्शन से प्रभावित कविताएँ संगृहीत हैं। हिन्दी साहित्य में इस कृति का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि इसी कृति के लिए सुमित्रानन्दन पन्त को सन् 1968 में हिन्दी साहित्य का प्रथम 'भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार' प्रदान किया गया था।


Step 3: Final Answer

अतः, 'चिदम्बरा' के रचनाकार सुमित्रानन्दन पन्त हैं। सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वाली हिन्दी की प्रथम कृति 'चिदम्बरा' है। इस तथ्य को विशेष रूप से याद रखें, यह सामान्य ज्ञान और हिन्दी साहित्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।


Question 11:

पुनि-पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं ।

देखि दसा हर-गन मुसकाहीं ।।

उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस है -

  • (A) वीर रस
  • (B) हास्य रस
  • (C) करुण रस
  • (D) वात्सल्य रस
Correct Answer: (B) हास्य रस
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Step 1: Understanding the Question

दी गई काव्य पंक्तियों में निहित रस को पहचानना है।


Step 2: Key Concept

हास्य रस का स्थायी भाव 'हास' होता है। जब किसी व्यक्ति की विकृत वेश-भूषा, वाणी, चेष्टाओं आदि को देखकर या सुनकर हृदय में हास का भाव उत्पन्न होता है, तो वहाँ हास्य रस की निष्पत्ति होती है।


Step 3: Detailed Explanation

ये पंक्तियाँ रामचरितमानस के उस प्रसंग से हैं जब नारद मुनि विश्वमोहिनी से विवाह करने के लिए उत्सुक हैं और बार-बार बेचैन होकर उचक रहे हैं। उनकी इस हास्यास्पद दशा को देखकर शिव के गण (हर-गन) मुस्कुरा रहे हैं ('मुसकाहीं')। यहाँ नारद मुनि की चेष्टाएँ आलंबन हैं, उनका उचकना-अकुलाना उद्दीपन है, और शिवगणों का मुस्कुराना अनुभाव है। इन सबसे 'हास' नामक स्थायी भाव पुष्ट होकर हास्य रस में परिणत हो रहा है।


Step 4: Final Answer

अतः, इन पंक्तियों में हास्य रस है। सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: रस पहचानने के लिए पंक्तियों के अर्थ को समझना आवश्यक है। 'मुसकाहीं' (मुस्कुराना) शब्द यहाँ हास्य रस का स्पष्ट संकेत दे रहा है।


Question 12:

“आहुति-सी गिर पड़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी" ।

उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?

  • (A) अनुप्रास अलंकार
  • (B) उपमा अलंकार
  • (C) श्लेष अलंकार
  • (D) रूपक अलंकार
Correct Answer: (B) उपमा अलंकार
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Step 1: Understanding the Question

दी गई काव्य पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार को पहचानना है।


Step 2: Key Concept

उपमा अलंकार में, किसी एक वस्तु की तुलना अत्यंत समानता के कारण किसी दूसरी प्रसिद्ध वस्तु से की जाती है। इसके चार अंग होते हैं: उपमेय, उपमान, वाचक शब्द, और साधारण धर्म। 'सा', 'सी', 'से', 'सम', 'सरिस' आदि इसके वाचक शब्द हैं।


Step 3: Detailed Explanation

इस पंक्ति में दो उपमाएँ हैं:

"आहुति-सी गिर पड़ी": यहाँ गिरने की क्रिया (उपमेय) की तुलना 'आहुति' (उपमान) से की गई है। वाचक शब्द 'सी' है।
"चमक उठी ज्वाला-सी": यहाँ चमकने की क्रिया (उपमेय) की तुलना 'ज्वाला' (उपमान) से की गई है। वाचक शब्द 'सी' है।

चूंकि पंक्ति में 'सी' वाचक शब्द का प्रयोग करके स्पष्ट रूप से तुलना की गई है, इसलिए यहाँ उपमा अलंकार है।


Step 4: Final Answer

अतः, इस पंक्ति में उपमा अलंकार है। सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: अलंकार पहचानने के लिए वाचक शब्दों पर ध्यान दें। यदि पंक्ति में 'सा', 'सी', 'से', 'सम', 'सरिस' जैसे शब्द आते हैं, तो वहाँ प्रायः उपमा अलंकार होता है।


Question 13:

'दोहा' छन्द का ठीक उल्टा छन्द कौन-सा है ?

  • (A) चौपाई
  • (B) रोला
  • (C) सोरठा
  • (D) बरवै
Correct Answer: (C) सोरठा
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में पूछा गया है कि कौन सा छंद 'दोहा' छंद का विपरीत होता है।


Step 2: Key Concept

दोहा और सोरठा दोनों अर्धसम मात्रिक छंद हैं, जिनमें चार चरण होते हैं। इनकी मात्राओं की व्यवस्था एक दूसरे के ठीक विपरीत होती है।

दोहा: इसके विषम चरणों (पहले और तीसरे) में 13-13 मात्राएँ और सम चरणों (दूसरे और चौथे) में 11-11 मात्राएँ होती हैं। (व्यवस्था: 13, 11)
सोरठा: इसके विषम चरणों (पहले और तीसरे) में 11-11 मात्राएँ और सम चरणों (दूसरे और चौथे) में 13-13 मात्राएँ होती हैं। (व्यवस्था: 11, 13)



Step 3: Detailed Explanation

चूंकि सोरठा के चरणों में मात्राओं का क्रम दोहा के चरणों के मात्रा-क्रम का ठीक उल्टा होता है, इसलिए सोरठा को दोहा का उल्टा छंद कहा जाता है।


Step 4: Final Answer

अतः, 'दोहा' छन्द का ठीक उल्टा छन्द 'सोरठा' है। सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य है जिसे हमेशा याद रखना चाहिए। दोहा = 13, 11। सोरठा = 11, 13। बस इतना याद रखने से आप कभी गलती नहीं करेंगे।


Question 14:

'अनुरूप' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है

  • (A) अ
  • (B) अन
  • (C) अनु
  • (D) रूप
Correct Answer: (C) अनु
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में 'अनुरूप' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग को पहचानना है।


Step 2: Key Concept

उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो किसी मूल शब्द के आरम्भ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं।


Step 3: Detailed Explanation

'अनुरूप' शब्द का विच्छेद करने पर: \[ अनुरूप = अनु + रूप \]
यहाँ 'रूप' एक सार्थक मूल शब्द है। इसके आरम्भ में 'अनु' शब्दांश जुड़ा है, जो एक उपसर्ग है। 'अनु' उपसर्ग का अर्थ 'पीछे', 'समान' या 'अनुसार' होता है। इस प्रकार 'अनुरूप' का अर्थ है 'रूप के अनुसार' या 'समान रूप वाला'।


Step 4: Final Answer

अतः, 'अनुरूप' शब्द में 'अनु' उपसर्ग है। सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: उपसर्ग पहचानने का सबसे सरल तरीका है शब्द में से मूल शब्द को अलग करना। जो शब्दांश आगे बचता है, वही उपसर्ग होता है, बशर्ते वह एक ज्ञात उपसर्ग हो।


Question 15:

'राम-कृष्ण' में कौन-सा समास है ?

  • (A) अव्ययीभाव समास
  • (B) द्वन्द्व समास
  • (C) कर्मधारय समास
  • (D) तत्पुरुष समास
Correct Answer: (B) द्वन्द्व समास
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में 'राम-कृष्ण' शब्द में निहित समास का प्रकार पूछा गया है।


Step 2: Key Concept

द्वन्द्व समास वह समास होता है जिसके दोनों पद प्रधान होते हैं और विग्रह करने पर उनके बीच 'और', 'या', 'अथवा', 'एवं' जैसे योजक शब्दों का प्रयोग होता है। सामासिक पद बनाते समय प्रायः योजक चिह्न (-) का प्रयोग किया जाता है।


Step 3: Detailed Explanation

'राम-कृष्ण' शब्द का समास-विग्रह करने पर 'राम और कृष्ण' होता है। यहाँ 'राम' और 'कृष्ण' दोनों ही पद प्रधान हैं और उनके बीच 'और' योजक का लोप हुआ है। इसलिए, यहाँ द्वन्द्व समास है।


Step 4: Final Answer

अतः, 'राम-कृष्ण' में द्वन्द्व समास है। सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: यदि किसी सामासिक पद में दोनों शब्द एक-दूसरे के विलोम हों, पूरक हों या समान महत्व के हों और बीच में योजक चिह्न लगा हो, तो वहाँ प्रायः द्वन्द्व समास होता है। जैसे - माता-पिता, दिन-रात, सुख-दुःख।


Question 16:

वायु, समीर, बयार पर्याय हैं

  • (A) सूर्य के
  • (B) तारों के
  • (C) हवा के
  • (D) बादल के
Correct Answer: (C) हवा के
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में पूछा गया है कि 'वायु', 'समीर', और 'बयार' शब्द किसके पर्यायवाची हैं।


Step 2: Detailed Explanation

'वायु', 'समीर', और 'बयार' ये तीनों शब्द 'हवा' के पर्यायवाची शब्द हैं। हवा के अन्य प्रमुख पर्यायवाची शब्द हैं - पवन, अनिल, वात, मरुत, पवमान।


Step 3: Final Answer

अतः, दिए गए शब्द हवा के पर्याय हैं। सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: समानार्थी या पर्यायवाची शब्दों का अच्छा ज्ञान होना शब्द-भंडार को समृद्ध करता है। 'अनिल' (हवा) और 'अनल' (आग) जैसे समान लगने वाले शब्दों के अर्थ के अंतर को ध्यान में रखें।


Question 17:

'तस्मै' शब्द में विभक्ति एवं वचन है

  • (A) चतुर्थी विभक्ति, एकवचन
  • (B) द्वितीया विभक्ति, बहुवचन
  • (C) पंचमी विभक्ति, एकवचन
  • (D) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (A) चतुर्थी विभक्ति, एकवचन
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में संस्कृत शब्द 'तस्मै' की विभक्ति और वचन पूछा गया है।


Step 2: Key Concept

'तस्मै' शब्द 'तत्' (वह) सर्वनाम के पुल्लिंग रूप का एक पद है। हमें 'तत्' (पुल्लिंग) के शब्द-रूप का ज्ञान होना चाहिए।


Step 3: Detailed Explanation

'तत्' (वह) सर्वनाम के पुल्लिंग, एकवचन के रूप इस प्रकार हैं:

प्रथमा: सः (उसने)

द्वितीया: तम् (उसको)

तृतीया: तेन (उससे/उसके द्वारा)

चतुर्थी: तस्मै (उसके लिए)

पंचमी: तस्मात् (उससे)

षष्ठी: तस्य (उसका)

सप्तमी: तस्मिन् (उसमें/उस पर)


इस तालिका से स्पष्ट है कि 'तस्मै' 'तत्' शब्द का चतुर्थी विभक्ति, एकवचन का रूप है।


Step 4: Final Answer

अतः, 'तस्मै' में चतुर्थी विभक्ति, एकवचन है। सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: 'तत्' सर्वनाम के रूप तीनों लिंगों (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) में अलग-अलग होते हैं और बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन्हें अच्छी तरह याद कर लेना चाहिए।


Question 18:

संदेहपूर्ण कथन को कहते हैं

  • (A) साधारण वाक्य
  • (B) प्रश्नवाचक वाक्य
  • (C) संदेहात्मक वाक्य
  • (D) नकारात्मक वाक्य
Correct Answer: (C) संदेहात्मक वाक्य
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में उस वाक्य के प्रकार के बारे में पूछा गया है जिसमें संदेह का भाव हो।


Step 2: Key Concept

अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद होते हैं। उनमें से एक भेद 'संदेहवाचक' या 'संदेहात्मक' वाक्य है।


Step 3: Detailed Explanation

जिस वाक्य से किसी कार्य के होने में संदेह या संभावना का बोध होता है, उसे संदेहवाचक या संदेहात्मक वाक्य कहते हैं। इन वाक्यों में अक्सर 'शायद', 'संभवतः', 'होगा' जैसे शब्दों का प्रयोग होता है।

उदाहरण: "शायद आज वर्षा हो।" "वह अब तक पहुँच गया होगा।"

नाम से ही स्पष्ट है कि संदेहपूर्ण कथन को 'संदेहात्मक वाक्य' कहेंगे।


Step 4: Final Answer

अतः, संदेहपूर्ण कथन को संदेहात्मक वाक्य कहते हैं। सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: वाक्य के प्रकार को उसके नाम से जोड़ने का प्रयास करें। 'संदेह' से 'संदेहात्मक', 'प्रश्न' से 'प्रश्नवाचक', 'नकारना' से 'नकारात्मक' या 'निषेधवाचक'। इससे आपको सही उत्तर पहचानने में आसानी होगी।


Question 19:

'मैं पत्र लिखूँगा' वाक्य का कर्मवाच्य में परिवर्तित वाक्य है

  • (A) मेरे द्वारा पत्र लिखा जायेगा ।
  • (B) मुझे पत्र लिखना है ।
  • (C) मैं पत्र लिख रहा हूँ।
  • (D) मुझे पत्र लिखना था ।
Correct Answer: (A) मेरे द्वारा पत्र लिखा जायेगा ।
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में कर्तृवाच्य वाक्य 'मैं पत्र लिखूँगा' को कर्मवाच्य (Passive Voice) में बदलने के लिए कहा गया है।


Step 2: Key Concept

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में बदलने के नियम:

कर्ता के साथ 'से' या 'के द्वारा' जोड़ा जाता है।
क्रिया का रूप कर्म के लिंग और वचन के अनुसार बदल दिया जाता है।
मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल में बदलकर उसके साथ 'जाना' क्रिया का काल के अनुसार उचित रूप जोड़ा जाता है।



Step 3: Detailed Explanation

दिए गए वाक्य 'मैं पत्र लिखूँगा' का विश्लेषण:

कर्ता: मैं
कर्म: पत्र (पुल्लिंग, एकवचन)
क्रिया: लिखूँगा (भविष्यत् काल)

नियमों के अनुसार परिवर्तन:

कर्ता 'मैं' से बनेगा 'मेरे द्वारा'।
कर्म 'पत्र' (पुल्लिंग, एकवचन) है।
मुख्य क्रिया 'लिखना' का सामान्य भूतकाल रूप 'लिखा' होगा। 'जाना' क्रिया का रूप कर्म 'पत्र' (पुल्लिंग, एकवचन) और मूल क्रिया के काल (भविष्यत् काल) के अनुसार 'जायेगा' होगा।

इन सबको मिलाकर वाक्य बनेगा: "मेरे द्वारा पत्र लिखा जायेगा।"


Step 4: Final Answer

अतः, सही परिवर्तित वाक्य है (A) मेरे द्वारा पत्र लिखा जायेगा ।
Quick Tip: कर्मवाच्य में बदलते समय, क्रिया का काल नहीं बदलना चाहिए। मूल वाक्य जिस काल में है, परिवर्तित वाक्य भी उसी काल में होना चाहिए। 'लिखूँगा' (भविष्यत् काल) का परिवर्तित रूप 'लिखा जायेगा' (भविष्यत् काल) ही होगा।


Question 20:

स्थानवाचक क्रिया विशेषण है

  • (A) प्रतिदिन
  • (B) आसपास
  • (C) बहुत
  • (D) स्वयं
Correct Answer: (B) आसपास
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Step 1: Understanding the Question

प्रश्न में दिए गए विकल्पों में से स्थानवाचक क्रिया विशेषण को पहचानना है।


Step 2: Key Concept

क्रिया विशेषण वे शब्द होते हैं जो क्रिया की विशेषता बताते हैं। अर्थ के आधार पर इसके चार मुख्य भेद हैं:

स्थानवाचक: जो क्रिया के होने के स्थान का बोध कराते हैं। (कहाँ?) - यहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे, अंदर, बाहर, आसपास।
कालवाचक: जो क्रिया के होने के समय का बोध कराते हैं। (कब?) - आज, कल, प्रतिदिन, अभी, जब।
परिमाणवाचक: जो क्रिया के परिमाण या मात्रा का बोध कराते हैं। (कितना?) - कम, ज्यादा, बहुत, थोड़ा।
रीतिवाचक: जो क्रिया के होने की रीति या ढंग का बोध कराते हैं। (कैसे?) - धीरे-धीरे, अचानक, तेज।



Step 3: Detailed Explanation

दिए गए विकल्पों का विश्लेषण:

(A) प्रतिदिन: यह समय का बोध कराता है (कब? - प्रतिदिन)। अतः यह कालवाचक क्रिया विशेषण है।
(B) आसपास: यह स्थान का बोध कराता है (कहाँ? - आसपास)। अतः यह स्थानवाचक क्रिया विशेषण है।
(C) बहुत: यह मात्रा का बोध कराता है (कितना? - बहुत)। अतः यह परिमाणवाचक क्रिया विशेषण है।
(D) स्वयं: यह निजवाचक सर्वनाम है, क्रिया विशेषण नहीं।



Step 4: Final Answer

अतः, 'आसपास' स्थानवाचक क्रिया विशेषण है। सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: क्रिया विशेषण का भेद पहचानने के लिए क्रिया से प्रश्न पूछें। 'कहाँ' का उत्तर देने वाला शब्द स्थानवाचक, 'कब' का उत्तर देने वाला कालवाचक, 'कितना' का उत्तर देने वाला परिमाणवाचक और 'कैसे' का उत्तर देने वाला रीतिवाचक होता है।


Question 21:

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

मानव मन सदा से ही अज्ञात के रहस्यों को खोलने और जानने-समझने को उत्सुक रहा है। जहाँ तक वह नहीं पहुँच सकता था, वहाँ वह कल्पना के पंखों पर उड़कर पहुँचा । उसकी अनगढ़ और अविश्वसनीय कथाएँ उसे सत्य के निकट पहुँचाने में प्रेरणा-शक्ति का काम करती रहीं । अन्तरिक्ष युग का सूत्रपात 4 अक्टूबर, 1957 को हुआ था, जब सोवियत रूस ने अपना पहला स्पुतनिक छोड़ा । प्रथम अन्तरिक्ष यात्री बनने का गौरव यूरी गागरिन को प्राप्त हुआ । अन्तरिक्ष युग के आरम्भ के ठीक 11 वर्ष 9 माह 17 दिन बाद चन्द्रतल पर मानव उतर गया ।

(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए ।

Correct Answer:
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प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित 'पानी में चंदा और चाँद पर आदमी' नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक श्री जयप्रकाश भारती हैं।
Quick Tip: संदर्भ लिखते समय पाठ का नाम और लेखक का नाम स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए। यह उत्तर का एक अनिवार्य हिस्सा है और इस पर अलग से अंक निर्धारित होते हैं।


Question 22:

... (उपरोक्त गद्यांश) ...

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।

Correct Answer:
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व्याख्या: लेखक श्री जयप्रकाश भारती जी कहते हैं कि मनुष्य की कल्पनाओं को वास्तविक रूप देने की दिशा में सबसे बड़ी सफलता अंतरिक्ष युग के आरंभ से मिली। इस युग की शुरुआत 4 अक्टूबर, 1957 को उस ऐतिहासिक दिन हुई, जब सोवियत रूस (वर्तमान रूस) ने अपना पहला कृत्रिम उपग्रह 'स्पुतनिक-1' सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा। इस घटना ने मानव के लिए अंतरिक्ष के द्वार खोल दिए। इसके बाद, अंतरिक्ष में जाने वाले पहले मानव बनने का सम्मान भी सोवियत रूस के ही नागरिक यूरी गागरिन को मिला। उन्होंने 1961 में अंतरिक्ष की यात्रा करके इतिहास रच दिया और मानव की सदियों पुरानी कल्पना को साकार कर दिया।
Quick Tip: रेखांकित अंश की व्याख्या करते समय, उसमें दिए गए तथ्यों (जैसे- तारीख, देश का नाम, व्यक्ति का नाम) को अपने शब्दों में पिरोकर स्पष्ट करें। वाक्य को सरल और बोधगम्य बनाएँ।


Question 23:

... (उपरोक्त गद्यांश) ...

(iii) प्रथम अन्तरिक्ष यात्री कौन था ?

Correct Answer:
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गद्यांश के अनुसार, प्रथम अन्तरिक्ष यात्री (सोवियत रूस के) यूरी गागरिन थे।
Quick Tip: गद्यांश पर आधारित तथ्यात्मक प्रश्नों का उत्तर सीधे गद्यांश में से ही मिल जाता है। उत्तर को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप में लिखें।


Question 24:

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

हिन्दी में प्रगतिशील साहित्य का निर्माण हो रहा है । उसके निर्माता यह समझ रहे हैं कि उनके साहित्य में भविष्य का गौरव निहित है । पर कुछ ही समय के बाद उनका यह साहित्य भी अतीत का स्मारक हो जायेगा और आज जो तरुण हैं वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे । उनके स्थान में तरुणों का फिर दूसरा दल आ जायेगा, जो भविष्य का स्वप्न देखेगा । दोनों के ही स्वप्न सुखद होते हैं; क्योंकि दूर के ढोल सुहावने होते हैं ।

(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए ।

Correct Answer:
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प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित 'क्या लिखूँ?' नामक पाठ से उद्धृत है। इसके लेखक श्री पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हैं।
Quick Tip: संदर्भ में पाठ और लेखक का नाम सही-सही लिखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे रेखांकित करने से आपका उत्तर और भी प्रभावशाली लगता है।


Question 25:

... (उपरोक्त गद्यांश) ...

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।

Correct Answer:
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व्याख्या: लेखक श्री पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी कहते हैं कि समय परिवर्तनशील है और यह साहित्य पर भी लागू होता है। आज जो साहित्यकार 'प्रगतिशील' साहित्य की रचना कर रहे हैं और यह मान रहे हैं कि वे भविष्य का निर्माण कर रहे हैं, उनका यह साहित्य भी समय के साथ पुराना पड़ जाएगा और केवल अतीत की एक याद बनकर रह जाएगा। लेखक कहते हैं कि आज की जो युवा (तरुण) पीढ़ी भविष्य के सपने देख रही है, वही पीढ़ी समय के साथ वृद्ध हो जाएगी और तब वे अपने युवावस्था में किए गए कार्यों को, यानी अपने अतीत के गौरव को, याद करके उसके सपने देखेंगे। तब तक उनका स्थान एक नई युवा पीढ़ी ले लेगी, जो अपने समय के अनुसार भविष्य के नए सपने देखेगी। यह क्रम निरंतर चलता रहता है।
Quick Tip: व्याख्या करते समय, लेखक के मूल भाव को समझना और उसे अपने शब्दों में स्पष्ट करना चाहिए। यहाँ लेखक समय के चक्रीय प्रवाह और पीढ़ीगत बदलाव के शाश्वत सत्य को दर्शाना चाहते हैं।


Question 26:

... (उपरोक्त गद्यांश) ...

(iii) “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer:
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"दूर के ढोल सुहावने होते हैं" एक लोकोक्ति है, जिसका तात्पर्य है कि जो वस्तुएँ या समय हमसे दूर होता है, वह हमें बहुत आकर्षक और सुखद प्रतीत होता है।

गद्यांश के संदर्भ में इसका तात्पर्य यह है कि:

युवाओं (तरुणों) के लिए: भविष्य अभी दूर है, इसलिए वह उन्हें बहुत उज्ज्वल और सुखद लगता है। वे भविष्य को लेकर सुखद सपने देखते हैं।
वृद्धों के लिए: उनका अतीत अब बीत चुका है और दूर हो गया है, इसलिए उन्हें अपने अतीत की यादें बहुत सुखद लगती हैं। वे अतीत के गौरव के सुखद सपने देखते हैं।

इस प्रकार, जो अप्राप्त है या बीत चुका है, वह मनुष्य को अधिक आकर्षक लगता है, जबकि वर्तमान की कठिनाइयाँ और यथार्थ उसे असंतोषजनक लगते हैं।
Quick Tip: किसी लोकोक्ति या मुहावरे का तात्पर्य स्पष्ट करते समय, पहले उसका सामान्य अर्थ बताएँ और फिर उसे गद्यांश के संदर्भ से जोड़कर समझाएँ। इससे आपका उत्तर पूर्ण और सटीक होगा।


Question 27:

निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

चरन-कमल बंदौं हरि राइ ।

जाकी कृपा पंगु गिरि लंधै, अन्धे को सब कछु दरसाई ।

बहिरौ सुनै गूँग पुनि बोलै, रंक चलै सिर छत्र धराइ ।

सूरदास स्वामी करुनामय, बार-बार बन्दौं तिहि पाइ ।।

(i) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।

Correct Answer:
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प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित भक्तिकाल की कृष्ण-भक्ति शाखा के शिरोमणि कवि सूरदास द्वारा रचित 'पद' शीर्षक से उद्धृत है। यह पद उनके महाकाव्य 'सूरसागर' का एक अंश है। इसमें कवि ने अपने आराध्य श्री कृष्ण के चरणों की महिमा का गुणगान करते हुए उनके प्रति अपनी भक्ति-भावना को व्यक्त किया है।
Quick Tip: संदर्भ लिखते समय कवि का नाम, कविता का शीर्षक और काव्य-ग्रंथ (यदि ज्ञात हो) का उल्लेख अवश्य करें। प्रसंग में पद का केंद्रीय भाव लिखने से उत्तर और भी प्रभावशाली हो जाता है।


Question 28:

... (उपरोक्त पद्यांश) ...


(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।

Correct Answer:
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व्याख्या: महाकवि सूरदास जी अपने आराध्य श्री कृष्ण की कृपा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि जिनकी कृपा से बहरा व्यक्ति सुनने लगता है और गूँगा व्यक्ति फिर से बोलने लगता है। जिनकी कृपा हो जाने पर अत्यन्त निर्धन (रंक) व्यक्ति भी राजा के समान अपने सिर पर छत्र धारण करके चलने लगता है, अर्थात् उसे राजसी वैभव प्राप्त हो जाता है। सूरदास जी कहते हैं कि मेरे स्वामी श्री कृष्ण इतने दयालु हैं कि मैं उनके चरणों की बार-बार वन्दना करता हूँ। उनकी कृपा से असम्भव से असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाता है।
Quick Tip: व्याख्या करते समय, प्रत्येक पंक्ति के भाव को स्पष्ट करें। कवि की भक्ति-भावना और ईश्वर की महिमा के अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन को उजागर करना व्याख्या को और भी सुंदर बना देगा।


Question 29:

... (उपरोक्त पद्यांश) ...

(iii) “बार-बार बन्दौं तिहिं पाइ ।” पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?

Correct Answer:
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"बार-बार बन्दौं तिहिं पाइ" पंक्ति में दो अलंकार हैं:

पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार: जहाँ एक ही शब्द की आवृत्ति एक ही अर्थ में हो, वहाँ पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार होता है। यहाँ 'बार-बार' शब्द की आवृत्ति हुई है और दोनों बार उसका अर्थ 'फिर-फिर' या 'अनेक बार' ही है, अतः यहाँ पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
अनुप्रास अलंकार: 'बन्दौं' और 'बार-बार' में 'ब' वर्ण की आवृत्ति के कारण यहाँ अनुप्रास अलंकार भी है।

मुख्य रूप से इस पंक्ति में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
Quick Tip: जब एक ही शब्द दो या अधिक बार आए और हर बार उसका अर्थ समान हो, तो वह पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार होता है। यदि अर्थ अलग-अलग होता, तो यमक अलंकार होता।


Question 30:

निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

अगर धीरे चलो

वह तुम्हें छू लेगी

दौड़ों तो छूट जाएगी नदी

अगर ले लो साथ

वह चलती चली जाएगी कहीं भी

यहाँ तक कि कबाड़ी की दुकान तक भी ।

(i) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।

Correct Answer:
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प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित आधुनिक कवि केदारनाथ सिंह द्वारा रचित 'नदी' शीर्षक कविता से उद्धृत है। यह पद्यांश उनके काव्य-संग्रह 'यहाँ से देखो' में संकलित है। इस कविता में कवि ने नदी को जीवन के विभिन्न रूपों और समय के प्रवाह के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है।
Quick Tip: आधुनिक कविताओं का संदर्भ लिखते समय, कवि और कविता के शीर्षक के साथ-साथ यदि काव्य-संग्रह का नाम ज्ञात हो, तो उसका उल्लेख अवश्य करें। यह आपके उत्तर को और भी प्रामाणिक बनाता है।


Question 31:

... (उपरोक्त पद्यांश) ...

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।

Correct Answer:
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व्याख्या: कवि केदारनाथ सिंह नदी के प्रतीकात्मक स्वरूप का वर्णन करते हुए कहते हैं कि यदि तुम जीवन में हड़बड़ी और तेज गति से भागोगे तो नदी (अर्थात् जीवन की सहजता, संस्कृति और संवेदना) तुमसे बहुत पीछे छूट जाएगी। तुम उसे पकड़ नहीं पाओगे। लेकिन यदि तुम उसे अपने साथ लेकर चलोगे, अर्थात् जीवन को सहजता, धैर्य और संवेदना के साथ जिओगे, तो वह तुम्हारे साथ कहीं भी और हर परिस्थिति में चलती चली जाएगी। वह इतनी सहज और अपनी है कि तुम्हारे जीवन के सबसे साधारण और उपेक्षित क्षणों में भी, यहाँ तक कि कबाड़ी की दुकान जैसी निरर्थक जगह पर भी, वह तुम्हारा साथ नहीं छोड़ेगी। इसका भाव यह है कि जीवन की सच्ची अनुभूति और संस्कृति, भाग-दौड़ में नहीं, बल्कि उसे धैर्य और अपनत्व के साथ जीने में है।
Quick Tip: आधुनिक कविता की व्याख्या करते समय, उसके प्रतीकात्मक अर्थ को समझना और स्पष्ट करना बहुत महत्वपूर्ण है। यहाँ 'नदी' और 'कबाड़ी की दुकान' केवल भौतिक वस्तुएँ नहीं, बल्कि गहरे जीवन-दर्शन के प्रतीक हैं।


Question 32:

... (उपरोक्त पद्यांश) ...

(iii) उपर्युक्त पद्यांश में 'नदी' किसका प्रतीक है ?

Correct Answer:
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उपर्युक्त पद्यांश में 'नदी' निम्नलिखित का प्रतीक है:

जीवन का सहज प्रवाह: नदी जीवन की सहजता और निरंतरता का प्रतीक है।
संस्कृति और परम्परा: वह हमारी संस्कृति, सभ्यता और परम्पराओं की धारा का प्रतीक है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती है।
संवेदना और मानवीयता: नदी मनुष्य की कोमल भावनाओं, संवेदनाओं और मानवीयता का प्रतीक है, जो भाग-दौड़ भरी जिंदगी में पीछे छूट जाती हैं।
समय: कुछ संदर्भों में इसे समय के सतत प्रवाह का प्रतीक भी माना जा सकता है।

संक्षेप में, नदी जीवन के उन सभी सहज, संवेदनशील और सांस्कृतिक तत्वों का प्रतीक है जिन्हें आधुनिक जीवन की आपाधापी में मनुष्य खोता जा रहा है।
Quick Tip: प्रतीकात्मक अर्थ वाले प्रश्नों का उत्तर देते समय, प्रतीक के विभिन्न संभावित अर्थों को बिंदुवार (bullet points) तरीके से प्रस्तुत करना एक अच्छा तरीका है। यह आपके उत्तर को व्यापक और सुगठित बनाता है।


Question 33:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

वाराणस्यां प्राचीनकालादेव गेहे गेहे विद्यायाः दिव्यं ज्योतिः द्योतते । अधुनाऽपि अत्र संस्कृतवाग्धारा सततं प्रवहति, जनानां ज्ञानञ्च वर्द्धयति । अत्र अनेके आचार्याः मूर्धन्याः विद्वांसः वैदिकवाङ्मयस्य अध्ययने अध्यापने च इदानीं निरताः ।

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के 'संस्कृत खण्ड' में संकलित 'वाराणसी' नामक पाठ से उद्धृत है। इस गद्यांश में वाराणसी की ज्ञान-परम्परा और संस्कृत भाषा के केंद्र के रूप में उसकी महत्ता का वर्णन किया गया है।




हिन्दी में अनुवाद:

वाराणसी में प्राचीन काल से ही घर-घर में विद्या का दिव्य प्रकाश चमकता है। आज भी यहाँ संस्कृत वाणी की धारा निरन्तर बहती है और लोगों का ज्ञान बढ़ाती है। यहाँ अनेक आचार्य, मूर्धन्य (उच्च कोटि के) विद्वान वैदिक साहित्य के अध्ययन और अध्यापन में इस समय लगे हुए हैं।
Quick Tip: संस्कृत से हिन्दी में अनुवाद करते समय, शब्दों के संधि-विच्छेद पर ध्यान दें, जैसे 'अधुनाऽपि' का अर्थ 'अधुना + अपि' (आज भी) है। विभक्ति और वचन के अनुसार शब्दों का सही अर्थ लगाना सटीक अनुवाद के लिए महत्वपूर्ण है।


Question 34:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

अलक्षेन्द्रः – भारतं एकं राष्ट्रम् इति तव वचनं विरुद्धम् । इह तावत् राजानः जनाः च परस्परं द्रुह्यन्ति ।

पुरुराजः - तत् सर्वम् अस्माकम् आन्तरिकः विषयः । बाह्यशक्तेः तत्र हस्तक्षेपः असह्यः यवनराज ! पृथग्धर्माः पृथग्भाषाभूषा अपि वयं सर्वे भारतीयाः । विशालम् अस्माकं राष्ट्रम् ।

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

प्रस्तुत नाट्य-संवाद हमारी पाठ्य-पुस्तक के 'संस्कृत खण्ड' में संकलित 'वीरः वीरेण पूज्यते' (वीर के द्वारा वीर पूजा जाता है) नामक पाठ से उद्धृत है। इसमें सिकन्दर (अलक्षेन्द्र) और पुरुराज (पोरस) के बीच हुए संवाद के माध्यम से पुरुराज की वीरता और देशभक्ति को दर्शाया गया है।




हिन्दी में अनुवाद:

सिकन्दर: – 'भारत एक राष्ट्र है', तुम्हारा यह कथन गलत है। यहाँ तो राजा और प्रजा आपस में द्वेष रखते (लड़ते) हैं।

पुरुराज: – वह सब हमारा आन्तरिक (अंदरूनी) विषय है। हे यवनराज! उसमें बाहरी शक्ति का हस्तक्षेप असहनीय है। हम सब भारतीय अलग-अलग धर्मों वाले, अलग-अलग भाषाओं और वेशभूषा वाले होते हुए भी, हम सब भारतीय हैं। हमारा राष्ट्र विशाल है।
Quick Tip: संवाद का अनुवाद करते समय, प्रत्येक पात्र के कथन को अलग-अलग पंक्तियों में लिखें और पात्र का नाम स्पष्ट रूप से दर्शाएँ। इससे संवाद का स्वरूप बना रहता है और उत्तर स्पष्ट होता है।


Question 35:

दिए गए संस्कृत पद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

नीर-क्षीर-विवेके हंसालस्यं त्वमेव तनुषे चेत् ।

विश्वस्मिन्नधुनान्यः कुलव्रतं पालयिष्यति कः ।।

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक के 'संस्कृत खण्ड' के 'अन्योक्तिविलासः' (अन्योक्तियों का सौन्दर्य) नामक पाठ से उद्धृत है। इस श्लोक में हंस के माध्यम से विवेकशील और गुणी मनुष्यों को सम्बोधित करते हुए उन्हें अपने कर्तव्य से विमुख न होने की प्रेरणा दी गई है।




हिन्दी में अनुवाद:

(कवि हंस को सम्बोधित करते हुए कहता है) हे हंस! यदि तुम ही दूध और पानी को अलग करने में आलस्य करोगे, तो इस संसार में अब दूसरा कौन अपने कुल-व्रत (कर्तव्य) का पालन करेगा?

भावार्थ: यदि विद्वान और गुणी व्यक्ति ही अपने विवेक का प्रयोग करके उचित-अनुचित का निर्णय करने में आलस्य करेंगे, तो संसार में अन्य साधारण व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन कैसे करेंगे?
Quick Tip: 'अन्योक्ति' का अर्थ है किसी और के माध्यम से अपनी बात कहना। ऐसे श्लोकों का अनुवाद करते समय शाब्दिक अर्थ के साथ-साथ उसका प्रतीकात्मक भावार्थ भी स्पष्ट करना चाहिए। यहाँ हंस विवेकशील व्यक्ति का प्रतीक है और नीर-क्षीर-विवेक न्याय-अन्याय के निर्णय का प्रतीक है।


Question 36:

दिए गए संस्कृत पद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

सार्थः प्रवसतो मित्रं भार्या मित्रं गृहे सतः ।

आतुरस्य भिषक् मित्रं दानं मित्रं मरिष्यतः ।।

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक के 'संस्कृत खण्ड' में संकलित 'जीवन सूत्रानि' (जीवन के सूत्र) नामक पाठ से लिया गया है। यह श्लोक महाभारत के यक्ष-युधिष्ठिर संवाद का एक अंश है, जिसमें यक्ष के प्रश्न का युधिष्ठिर उत्तर दे रहे हैं।




हिन्दी में अनुवाद:

(युधिष्ठिर उत्तर देते हैं कि) प्रवास (यात्रा) में रहने वाले का मित्र धन (या ज्ञान) है, घर पर रहने वाले व्यक्ति की मित्र पत्नी है, रोगी का मित्र वैद्य (चिकित्सक) है और मरने वाले व्यक्ति का मित्र दान है।
Quick Tip: इस प्रकार के सूक्तिपरक श्लोकों का अनुवाद करते समय प्रत्येक शब्द के सही अर्थ को समझना आवश्यक है। 'सार्थः' का अर्थ यहाँ धन या ज्ञान दोनों हो सकता है, 'आतुरस्य' का अर्थ रोगी है, और 'भिषक्' का अर्थ वैद्य है।


Question 37:

'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के आधार पर अंग्रेजी शासन के बर्बर अत्याचारों के विरोध में महात्मा गाँधी द्वारा किये गये जन आन्दोलनों का वर्णन कीजिए ।

Correct Answer:
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'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य में महात्मा गाँधी द्वारा अंग्रेजी शासन के अत्याचारों के विरुद्ध चलाए गए प्रमुख जन आंदोलनों का वर्णन इस प्रकार है:

नमक सत्याग्रह (दांडी मार्च): गाँधीजी ने अंग्रेजों द्वारा नमक पर लगाए गए कर के विरोध में साबरमती आश्रम से दांडी तक की ऐतिहासिक पदयात्रा की। उन्होंने समुद्र तट पर स्वयं नमक बनाकर इस अन्यायपूर्ण कानून को तोड़ा। इस आंदोलन ने पूरे देश में स्वतंत्रता की ज्वाला को और तीव्र कर दिया।
असहयोग आन्दोलन: गाँधीजी ने देशवासियों से अंग्रेजी सरकार के साथ किसी भी प्रकार का सहयोग न करने का आह्वान किया। लोगों ने सरकारी नौकरियों, उपाधियों, स्कूलों और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया। यह अंग्रेजों के विरुद्ध एक व्यापक अहिंसक विद्रोह था।
भारत छोड़ो आन्दोलन: 1942 में गाँधीजी ने 'करो या मरो' का नारा देते हुए अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए अंतिम चेतावनी दी। यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा और निर्णायक आंदोलन साबित हुआ, जिसने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी।

इन सभी आंदोलनों की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि ये पूर्णतः सत्य और अहिंसा पर आधारित थे।
Quick Tip: आंदोलनों का वर्णन करते समय, प्रत्येक आंदोलन का मुख्य उद्देश्य (जैसे- नमक कानून तोड़ना) और उसके स्वरूप (जैसे- पदयात्रा, बहिष्कार) का उल्लेख अवश्य करें। यह आपके उत्तर को तथ्यात्मक और प्रभावशाली बनाता है।


Question 38:

'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के किसी एक सर्ग का सारांश लिखिए ।

Correct Answer:
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तृतीय सर्ग का सारांश ('नमक सत्याग्रह')

'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के तृतीय सर्ग में गाँधीजी के प्रसिद्ध 'नमक सत्याग्रह' या 'दांडी यात्रा' का वर्णन है।

अंग्रेज सरकार ने नमक जैसी आवश्यक वस्तु पर कर लगा दिया, जिससे आम जनता, विशेषकर गरीब, बहुत परेशान थे।
इस अन्यायपूर्ण कानून का विरोध करने के लिए गाँधीजी ने साबरमती आश्रम से दांडी नामक समुद्र तटीय गाँव तक की पदयात्रा करने का निश्चय किया।
12 मार्च, 1930 को गाँधीजी अपने 78 अनुयायियों के साथ इस ऐतिहासिक यात्रा पर निकले। रास्ते में हजारों लोग उनके साथ जुड़ते गए, जिससे यह एक विशाल जन-सैलाब बन गया।
लगभग 24 दिनों की यात्रा के बाद 6 अप्रैल, 1930 को वे दांडी पहुँचे। वहाँ उन्होंने समुद्र के पानी से नमक बनाकर अंग्रेजी कानून को तोड़ा।
इस घटना ने पूरे देश में सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत कर दी और स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की। यह सर्ग गाँधीजी के दृढ़ निश्चय और अहिंसक प्रतिरोध की शक्ति को दर्शाता है।

Quick Tip: किसी सर्ग का सारांश लिखते समय, उस सर्ग की मुख्य घटना को केंद्र में रखें। दांडी यात्रा की महत्वपूर्ण तिथियों (12 मार्च, 6 अप्रैल) और स्थानों (साबरमती, दांडी) का उल्लेख आपके उत्तर को अधिक प्रामाणिक बनाता है।


Question 39:

'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य का कथानक संक्षेप में लिखिए ।

Correct Answer:
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'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य का कथानक घटना-प्रधान न होकर भाव-प्रधान और चरित्र-प्रधान है। इसमें किसी एक कहानी का वर्णन नहीं है, बल्कि नायक जवाहरलाल नेहरू के विराट व्यक्तित्व का काव्यात्मक चित्रण है।

काव्य का आरम्भ स्वतंत्र भारत के नवनिर्माण के प्रश्न से होता है, जिसका नेतृत्व नेहरू जी कर रहे हैं।
कवि कल्पना करता है कि नेहरू रूपी 'लोकनायक' का निर्माण सम्पूर्ण भारत के योगदान से हुआ है। भारत के विभिन्न प्रदेशों, नदियों, पर्वतों और महापुरुषों ने अपने-अपने श्रेष्ठ गुण उन्हें प्रदान किए हैं।
इसमें नेहरू जी के स्वतंत्रता-संग्राम में योगदान, उनके जेल-जीवन और भारत की गौरवशाली संस्कृति की खोज का वर्णन है।
कवि ने उनकी राष्ट्रीय नीतियों (पंचवर्षीय योजनाएँ) और अंतर्राष्ट्रीय नीतियों (पंचशील, गुटनिरपेक्षता) का भी उल्लेख किया है, जो उनके दूरदर्शी व्यक्तित्व को दर्शाती हैं।
अंत में, कवि नेहरू जी को एक ऐसे 'ज्योति पुंज' के रूप में स्थापित करता है जो भारत के गौरवशाली अतीत को वर्तमान से जोड़कर उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। वे ही भारत के 'जवाहर' (रत्न) हैं और 'ज्योति' (प्रकाश) भी।

Quick Tip: सारांश लिखते समय यह स्पष्ट करें कि यह काव्य एक पारंपरिक कथा नहीं है, बल्कि नायक के गुणों और भारत की आत्मा के साथ उनके संबंध का एक प्रतीकात्मक चित्रण है।


Question 40:

'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य में कवि ने सम्राट अशोक के किन-किन गुणों का वर्णन किया है ?

Correct Answer:
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'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य में कवि देवीप्रसाद शुक्ल 'राही' ने पं. नेहरू के व्यक्तित्व के निर्माण में भारत के विभिन्न महापुरुषों के गुणों का योगदान बताया है। इसी क्रम में उन्होंने सम्राट अशोक के निम्नलिखित गुणों का वर्णन किया है, जो नेहरू जी के चरित्र में भी परिलक्षित होते हैं:

मानव-प्रेम: कलिंग युद्ध की विभीषिका देखने के बाद सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तित हो गया और उन्होंने युद्ध का त्याग कर मानव-प्रेम और अहिंसा का मार्ग अपना लिया। नेहरू जी भी विश्व-शांति और मानव-प्रेम के प्रबल समर्थक थे।
विश्व-शांति का संदेश: अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाकर विश्व में शांति, करुणा और मैत्री का संदेश फैलाया। नेहरू जी ने भी 'पंचशील' और 'गुटनिरपेक्षता' के सिद्धांतों के माध्यम से विश्व-शांति की स्थापना का प्रयास किया।
लोक-कल्याण की भावना: अशोक ने अपनी प्रजा के कल्याण के लिए सड़कें बनवाईं, कुएँ खुदवाए और सराय स्थापित किए। नेहरू जी ने भी पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से भारत के जन-कल्याण और नवनिर्माण का कार्य किया।

इस प्रकार कवि ने अशोक के मानव-प्रेम, विश्व-शांति और लोक-कल्याण जैसे गुणों को नेहरू के व्यक्तित्व का अंग बताया है।
Quick Tip: उत्तर लिखते समय, अशोक के गुणों का उल्लेख करने के साथ-साथ यह भी बताएँ कि कवि ने उन गुणों को नेहरू के व्यक्तित्व से किस प्रकार जोड़ा है। इससे आपका उत्तर खण्डकाव्य के संदर्भ में अधिक सटीक होगा।


Question 41:

'मेवाड़ मुकुट' खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग 'दौलत' की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।

Correct Answer:
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'मेवाड़ मुकुट' खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग का शीर्षक 'लक्ष्मी' है, जिसे प्रश्न में 'दौलत' कहा गया है। इस सर्ग में महाराणा प्रताप की पत्नी महारानी लक्ष्मी की चिंताओं और त्याग का मार्मिक चित्रण है। इसकी कथावस्तु इस प्रकार है:

अरावली के जंगल में महाराणा प्रताप अपनी राजधानी बनाकर रह रहे हैं। उनकी पत्नी महारानी लक्ष्मी (चिंता) अपने बच्चों की दयनीय दशा को देखकर अत्यंत दुखी हैं।
वे अपने अतीत के राजसी वैभव को याद करती हैं, जब उनके बच्चे सोने के पालने में झूलते थे और आज वे जंगल में धरती पर सो रहे हैं।
वे सोचती हैं कि उनके पति ने मेवाड़ की स्वतंत्रता के लिए राज-सुखों का त्याग कर दिया, किन्तु इस कठोर संघर्ष का कोई अंत दिखाई नहीं दे रहा है।
उनकी पुत्री दौलत घास की रोटी खाकर अपना जीवन बिता रही है। यह सब देखकर उनका मातृ-हृदय व्याकुल हो उठता है।
इसी बीच, दौलत अपनी माता के पास आती है और मेवाड़ की दुर्दशा पर एक मार्मिक गीत सुनाती है, जिसे सुनकर लक्ष्मी की आँखों से आँसू बहने लगते हैं।
इस सर्ग में कवि ने एक माँ और पत्नी के हृदय की पीड़ा, बच्चों के प्रति चिंता और देश के लिए किए गए त्याग का सजीव चित्रण किया है।

Quick Tip: इस सर्ग का कथानक लिखते समय, महारानी लक्ष्मी (चिंता) के अंतर्द्वंद्व को प्रमुखता दें। एक ओर देश-प्रेम है और दूसरी ओर बच्चों की दुर्दशा से उत्पन्न मातृ-हृदय की पीड़ा। सर्ग का शीर्षक 'लक्ष्मी' है, 'दौलत' उनकी पुत्री का नाम है, इस तथ्य को ध्यान में रखें।


Question 42:

'मेवाड़ मुकुट' खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'मेवाड़ मुकुट' खण्डकाव्य के नायक महाराणा प्रताप हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

अद्वितीय देशभक्त: प्रताप अपनी मातृभूमि मेवाड़ से असीम प्रेम करते थे। उन्होंने मेवाड़ की स्वतंत्रता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
स्वाभिमानी: वे एक महान स्वाभिमानी पुरुष थे। उन्होंने अकबर की अधीनता स्वीकार करने की अपेक्षा जंगलों में भटकना, घास की रोटियाँ खाना स्वीकार किया, परन्तु अपना मस्तक नहीं झुकाया।
वीर और साहसी: वे एक अतुलनीय वीर और साहसी योद्धा थे। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध में विशाल मुगल सेना का डटकर मुकाबला किया।
दृढ़-प्रतिज्ञ: वे अपनी प्रतिज्ञा के धनी थे। उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि जब तक चित्तौड़ को मुक्त नहीं करा लेंगे, तब तक वे राजसी सुखों का भोग नहीं करेंगे। उन्होंने आजीवन अपनी इस कठोर प्रतिज्ञा का पालन किया।
त्याग और कष्ट-सहिष्णुता की प्रतिमूर्ति: उनका जीवन त्याग और कष्टों को सहने का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने देश के लिए राजमहलों के सुखों को त्यागकर अपने परिवार के साथ वनों में घोर कष्ट सहे।

Quick Tip: महाराणा प्रताप का चरित्र-चित्रण करते समय उनके 'स्वाभिमान' और 'देशभक्ति' जैसे गुणों पर विशेष बल दें। उनकी प्रतिज्ञाओं और कष्टपूर्ण जीवन का उल्लेख आपके उत्तर को अधिक प्रभावशाली बना देगा।


Question 43:

'अग्रपूजा' खण्डकाव्य के 'आयोजन' सर्ग का कथानक का सारांश अपने शब्दों में लिखिए ।

Correct Answer:
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'अग्रपूजा' खण्डकाव्य का 'आयोजन' सर्ग (द्वितीय सर्ग) युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में 'अग्रपूजा' के प्रसंग पर आधारित है। इसका सारांश इस प्रकार है:

श्रीकृष्ण की प्रेरणा से युधिष्ठिर राजसूय यज्ञ का आयोजन करते हैं। यज्ञ में देश-विदेश के सभी राजाओं, ऋषि-मुनियों और विद्वानों को आमंत्रित किया जाता है।
यज्ञ के आरंभ में यह प्रश्न उठता है कि सभा में उपस्थित सभी महानुभावों में से सबसे पहले किसकी पूजा (अग्रपूजा) की जाए।
धर्मराज युधिष्ठिर इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए पितामह भीष्म से अनुरोध करते हैं।
पितामह भीष्म सभा में उपस्थित सभी लोगों के गुणों का विश्लेषण करते हुए भगवान श्रीकृष्ण को ही अग्रपूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ और सर्वयोग्य पात्र घोषित करते हैं। वे श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान करते हैं।
सहदेव इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं और श्रीकृष्ण की अग्रपूजा का विधान प्रारम्भ होता है।
अधिकांश राजा इस निर्णय से प्रसन्न होते हैं, किन्तु चेदि देश का राजा शिशुपाल इसका घोर विरोध करता है। वह क्रोध में आकर भीष्म और श्रीकृष्ण का अपमान करने लगता है। यहीं से महाभारत के युद्ध का बीजारोपण हो जाता है।

Quick Tip: सारांश लिखते समय, सर्ग की मुख्य घटना - अग्रपूजा के लिए श्रीकृष्ण का चयन और शिशुपाल द्वारा उसका विरोध - को केंद्र में रखें। यह घटना ही सर्ग का सार है।


Question 44:

'अग्रपूजा' खण्डकाव्य के आधार पर श्रीकृष्ण का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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'अग्रपूजा' खण्डकाव्य के नायक भगवान श्रीकृष्ण हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

लोक-रक्षक और धर्म-संस्थापक: श्रीकृष्ण का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी पर धर्म की स्थापना करना और अधर्म का नाश करना है। वे दुष्टों का दमन करके सज्जनों की रक्षा करते हैं। शिशुपाल का वध उनके इसी रूप को प्रकट करता है।
महान राजनीतिज्ञ एवं कूटनीतिज्ञ: वे एक कुशल राजनीतिज्ञ हैं। वे युधिष्ठिर को राजसूय यज्ञ करने की प्रेरणा देते हैं ताकि भारत के सभी राजा एक छत्र के नीचे आ सकें और एक अखण्ड राष्ट्र का निर्माण हो।
विनयशील और निरभिमानी: अलौकिक शक्तियों के स्वामी होते हुए भी वे अत्यंत विनम्र हैं। वे युधिष्ठिर के यज्ञ में ब्राह्मणों के पैर धोने और जूठी पत्तलें उठाने जैसा सेवा-कार्य भी सहजता से करते हैं।
अपार शक्ति के स्वामी: वे अलौकिक शक्तियों से सम्पन्न हैं। उनके सुदर्शन चक्र के तेज से सभी परिचित हैं। अग्रपूजा के समय वे अपने विराट रूप का प्रदर्शन करते हैं।
पाण्डवों के हितैषी: वे पाण्डवों के परम हितैषी और सच्चे पथ-प्रदर्शक हैं। वे हर संकट में उनकी सहायता करते हैं और उन्हें धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

Quick Tip: श्रीकृष्ण का चरित्र-चित्रण करते समय उनके विभिन्न रूपों (जैसे- दैवीय, मानवीय, राजनीतिक) का उल्लेख करें। राजसूय यज्ञ में उनके सेवा-भाव और शिशुपाल-वध के समय उनके रौद्र-रूप, दोनों का वर्णन उत्तर को संतुलित बनाता है।


Question 45:

'जय सुभाष' खण्डकाव्य में वर्णित 'आजाद हिन्द सेना' के गठन की घटना का वर्णन कीजिए ।

Correct Answer:
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'जय सुभाष' खण्डकाव्य में 'आजाद हिन्द सेना' के गठन की घटना का वर्णन अत्यंत प्रेरणादायी है:

अंग्रेजों की नजरबंदी से निकलकर सुभाष चन्द्र बोस जर्मनी पहुँचते हैं। वहाँ से वे जापान जाते हैं।
उस समय जापान में महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस ने 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' की स्थापना की थी और मलाया तथा बर्मा में अंग्रेजों की ओर से लड़ रहे भारतीय युद्धबंदियों को मिलाकर एक सेना का गठन किया था, जिसका नाम 'आजाद हिन्द फ़ौज' रखा गया था।
रासबिहारी बोस वृद्ध हो चुके थे। जब सुभाष चन्द्र बोस सिंगापुर पहुँचे, तो रासबिहारी बोस ने आजाद हिन्द फ़ौज का नेतृत्व उन्हें सौंप दिया।
सुभाष चन्द्र बोस ने इस सेना को पुनर्गठित किया। उन्होंने सैनिकों में एक नया जोश और अनुशासन भरा। उन्होंने 'रानी झाँसी रेजिमेंट' के नाम से एक महिला सैन्य दल का भी गठन किया।
उन्होंने सैनिकों को "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा" और "दिल्ली चलो" जैसे ओजस्वी नारे दिए।
इस प्रकार, सुभाष के कुशल नेतृत्व में आजाद हिन्द फ़ौज भारत को स्वतंत्र कराने के लिए एक शक्तिशाली और अनुशासित सेना बन गई।

Quick Tip: उत्तर में रासबिहारी बोस के योगदान का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने ही सेना की नींव रखी थी। सुभाष चन्द्र बोस ने उसे पुनर्गठित कर एक शक्तिशाली स्वरूप प्रदान किया।


Question 46:

'जय सुभाष' खण्डकाव्य के नायक 'सुभाष चन्द्र बोस' के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।

Correct Answer:
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'जय सुभाष' खण्डकाव्य के नायक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

महान देशभक्त: सुभाष बाबू एक प्रखर देशभक्त थे। उन्होंने भारत माता को स्वतंत्र कराने के लिए आई.सी.एस. जैसे प्रतिष्ठित पद को भी त्याग दिया और अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।
कुशल संगठनकर्ता: उनमें संगठन की अद्भुत क्षमता थी। उन्होंने भारत में 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की स्थापना की और विदेश जाकर 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' का गठन किया, जिसमें सभी धर्मों और जातियों के सैनिक शामिल थे।
अदम्य साहसी और वीर: वे एक महान वीर और साहसी पुरुष थे। अंग्रेजों की नजरबंदी से निकल भागना और विदेश में एक पूरी सेना का गठन करना उनके अदम्य साहस का परिचायक है।
महान त्यागी: उनका जीवन त्याग का प्रतीक था। उन्होंने देश के लिए घर-परिवार, पद, प्रतिष्ठा और समस्त सुखों का त्याग कर दिया।
युवाओं के प्रेरणास्रोत: उनका ओजस्वी व्यक्तित्व और संघर्षपूर्ण जीवन आज भी भारत के करोड़ों युवाओं को देश-सेवा और आत्म-बलिदान के लिए प्रेरित करता है।

Quick Tip: एक ऐतिहासिक नायक का चरित्र-चित्रण करते समय, उनके जीवन की वास्तविक घटनाओं (जैसे- आई.सी.एस. का त्याग, आज़ाद हिन्द फ़ौज का गठन) का उल्लेख करना उत्तर को अधिक प्रामाणिक बनाता है।


Question 47:

'मातृभूमि के लिए' खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग 'संघर्ष' का सारांश लिखिए ।

Correct Answer:
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'मातृभूमि के लिए' खण्डकाव्य का द्वितीय सर्ग 'संघर्ष' है। इसमें चन्द्रशेखर आज़ाद के क्रांतिकारी जीवन की प्रमुख संघर्षपूर्ण घटनाओं का वर्णन है।

असहयोग आंदोलन के स्थगित होने से निराश होकर आज़ाद जैसे युवा क्रांतिकारी सशस्त्र क्रांति के मार्ग पर चल पड़ते हैं।
वे अपने दल के लिए धन एकत्र करने के उद्देश्य से 9 अगस्त, 1925 को 'काकोरी' में सरकारी खजाना ले जा रही ट्रेन को लूट लेते हैं। इस घटना से अंग्रेजी सरकार में हड़कंप मच जाता है।
सरकार क्रांतिकारियों की बड़े पैमाने पर धर-पकड़ करती है। रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, रोशन सिंह और राजेन्द्र اللاهड़ी को फाँसी दे दी जाती है।
आज़ाद पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाते हैं। वे दुखी और अकेले रह जाते हैं, पर हिम्मत नहीं हारते।
वे पुनः अपने दल को संगठित करते हैं और लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए लाहौर में पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या कर देते हैं।
इसके बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर दिल्ली की असेंबली में बम फेंकने की योजना बनाते हैं ताकि सोई हुई अंग्रेजी सरकार को जगाया जा सके।

यह सर्ग आज़ाद के निरंतर संघर्ष, त्याग, संगठन क्षमता और साहस को दर्शाता है।
Quick Tip: 'संघर्ष' सर्ग का सारांश लिखते समय, काकोरी कांड, सांडर्स-हत्या और असेंबली बम कांड जैसी प्रमुख क्रांतिकारी घटनाओं का क्रमबद्ध रूप से उल्लेख करें।


Question 48:

'मातृभूमि के लिए' खण्डकाव्य के आधार पर 'चन्द्रशेखर आजाद' का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'मातृभूमि के लिए' खण्डकाव्य के नायक अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

महान देशभक्त: आज़ाद का सम्पूर्ण जीवन भारत माता को स्वाधीन कराने के लिए समर्पित था। वे बचपन से ही देश की दुर्दशा से दुखी थे और उन्होंने अपना सर्वस्व मातृभूमि के लिए न्योछावर कर दिया।
वीर और साहसी: आज़ाद अद्भुत वीर और साहसी थे। वे काकोरी काण्ड, साण्डर्स-वध आदि अनेक क्रांतिकारी घटनाओं में सम्मिलित रहे। वे अकेले ही अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेज पुलिस दल का सामना करते रहे।
दृढ़-प्रतिज्ञ: आज़ाद अपने निश्चय के बहुत पक्के थे। उन्होंने जीवित रहते अंग्रेजों के हाथ न आने की प्रतिज्ञा की थी और अन्तिम गोली शेष रहने पर स्वयं को गोली मारकर अपनी प्रतिज्ञा का पालन किया।
कुशल संगठनकर्ता: उनमें संगठन करने की अद्भुत क्षमता थी। उन्होंने देश के सभी क्रांतिकारियों को एक सूत्र में पिरोकर एक शक्तिशाली दल का गठन किया।
अमर शहीद: चन्द्रशेखर आज़ाद ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका यह बलिदान उन्हें अमर बना गया और वे आज भी भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।

Quick Tip: चरित्र-चित्रण करते समय, विभिन्न विशेषताओं को शीर्षकों में विभाजित करें। प्रत्येक विशेषता को प्रमाणित करने के लिए खण्डकाव्य की किसी घटना (जैसे- अल्फ्रेड पार्क का संघर्ष) का उल्लेख अवश्य करें।


Question 49:

'कर्ण' खण्डकाव्य के चतुर्थ सर्ग में वर्णित श्रीकृष्ण और कर्ण के संवाद की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।

Correct Answer:
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'कर्ण' खण्डकाव्य के चतुर्थ सर्ग में महाभारत युद्ध से पूर्व श्रीकृष्ण और कर्ण के बीच हुए महत्वपूर्ण संवाद का वर्णन है। इसकी कथावस्तु इस प्रकार है:

महाभारत युद्ध को टालने के अंतिम प्रयास के रूप में, श्रीकृष्ण कर्ण से मिलने आते हैं।
श्रीकृष्ण कर्ण को उसके जन्म का रहस्य बताते हैं कि वह कुन्ती का पुत्र है और पाण्डव उसके भाई हैं।
श्रीकृष्ण कर्ण से कहते हैं कि वह अधर्म का साथ छोड़कर धर्म (पाण्डवों) के पक्ष में आ जाए। वे उसे पाण्डवों का ज्येष्ठ भाई होने के नाते राज्य का सिंहासन दिलाने का भी प्रलोभन देते हैं।
कर्ण श्रीकृष्ण की सभी बातें ध्यान से सुनता है। वह अपने जन्म के रहस्य को जानकर दुखी होता है, पर विचलित नहीं होता।
कर्ण श्रीकृष्ण के प्रस्ताव को विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर देता है। वह कहता है कि दुर्योधन ने संकट के समय उसे सम्मान और मित्रता दी, इसलिए वह मित्र-धर्म से बँधा हुआ है और किसी भी कीमत पर दुर्योधन का साथ नहीं छोड़ सकता।
वह कहता है कि उसे राज्य का कोई लोभ नहीं है, उसके लिए मित्रता का धर्म सर्वोपरि है। वह जानता है कि इस युद्ध में उसकी मृत्यु निश्चित है, फिर भी वह मित्र के प्रति अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगा।

यह संवाद कर्ण के मित्र-धर्म के प्रति निष्ठा और उसके चरित्र की महानता को उजागर करता है।
Quick Tip: इस संवाद का सार लिखते समय, श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए प्रलोभन और कर्ण द्वारा मित्र-धर्म को सर्वोपरि बताते हुए दिए गए उत्तर, इन दो बिंदुओं को प्रमुखता दें। यह कर्ण के चरित्र का एक निर्णायक क्षण है।


Question 50:

'कर्ण' खण्डकाव्य के नायक 'कर्ण' का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'कर्ण' खण्डकाव्य के नायक दानवीर कर्ण हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

महान दानवीर: दानवीरता कर्ण के चरित्र का सर्वप्रमुख गुण है। वे प्रतिदिन याचकों को दान देते थे। उन्होंने अपने प्राणों की परवाह न करते हुए अपने जन्मजात कवच-कुण्डल भी इन्द्र को दान में दे दिए।
सच्चा मित्र: कर्ण एक आदर्श और सच्चे मित्र थे। उन्होंने दुर्योधन के उपकारों को सदा याद रखा और उसके लिए अपने प्राणों की भी आहुति दे दी, यद्यपि वे जानते थे कि दुर्योधन अधर्म के मार्ग पर है।
अद्वितीय योद्धा: वे अपने समय के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धरों में से एक थे। उनकी वीरता की प्रशंसा स्वयं श्रीकृष्ण भी करते थे।
गुरुभक्त: वे एक महान गुरुभक्त थे। उन्होंने परशुराम से शस्त्र-विद्या सीखने के लिए अनेक कष्ट सहे और उनका श्राप भी चुपचाप स्वीकार कर लिया।
जाति-प्रथा का शिकार: कर्ण का चरित्र सामाजिक अन्याय और जाति-प्रथा की विडंबना को भी दर्शाता है। सूत-पुत्र होने के कारण उन्हें जीवन भर अपमान सहना पड़ा, जिससे उनका चरित्र और भी अधिक त्रासद और महान बन जाता है।

Quick Tip: कर्ण का चरित्र-चित्रण करते समय उनकी 'दानवीरता' और 'मित्र-धर्म' इन दो गुणों पर विशेष बल दें। कवच-कुण्डल दान की घटना का उल्लेख अनिवार्य है।


Question 51:

'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के किसी एक सर्ग का सारांश लिखिए ।

Correct Answer:
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'राम-भरत-मिलन' सर्ग का सारांश

'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य का 'राम-भरत-मिलन' सर्ग भ्रातृ-प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाने वाला एक अत्यंत मार्मिक प्रसंग है। इसका सारांश इस प्रकार है:

जब भरत ननिहाल से लौटकर अयोध्या आते हैं, तो उन्हें माता कैकेयी के षड्यंत्र, पिता दशरथ की मृत्यु और भाई राम के वन-गमन का समाचार मिलता है। वे अत्यंत दुखी और क्रोधित होते हैं।
वे अपनी माता कैकेयी को धिक्कारते हैं और अयोध्या का राज्य स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं।
भरत निश्चय करते हैं कि वे वन जाकर श्रीराम को मनाकर वापस लाएंगे और उन्हें ही राजसिंहासन सौंपेंगे।
वे तीनों माताओं, गुरु वशिष्ठ और अयोध्या की प्रजा के साथ चित्रकूट के लिए प्रस्थान करते हैं, जहाँ श्रीराम निवास कर रहे थे।
चित्रकूट में राम और भरत का भाव-विभोर करने वाला मिलन होता है। भरत श्रीराम से अयोध्या लौटकर राज करने का आग्रह करते हैं।
श्रीराम भरत को धैर्य बँधाते हैं और पिता के वचन की रक्षा के लिए वन में ही रहने का अपना दृढ़ निश्चय दोहराते हैं।
अंत में, भरत श्रीराम की चरण-पादुकाओं (खड़ाऊँ) को लेकर अयोध्या लौटते हैं और उन्हें सिंहासन पर रखकर एक सेवक की भाँति चौदह वर्षों तक राज्य का संचालन करते हैं।

Quick Tip: किसी एक सर्ग का सारांश पूछा गया है, इसलिए आप किसी भी सर्ग का वर्णन कर सकते हैं। 'राम-भरत-मिलन' सर्ग खण्डकाव्य के केंद्रीय भाव (भरत का भ्रातृ-प्रेम) को व्यक्त करता है, इसलिए इसका वर्णन करना श्रेयस्कर है।


Question 52:

'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के आधार पर 'भरत' का चरित्र-चित्रण कीजिए ।

Correct Answer:
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'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के नायक भरत हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

आदर्श भ्राता: भरत का भ्रातृ-प्रेम विश्व-साहित्य में अद्वितीय है। वे अपने बड़े भाई श्रीराम से अगाध स्नेह रखते हैं। उन्हें मिला हुआ राज्य भी वे श्रीराम के चरणों में अर्पित कर देना चाहते हैं।
महान त्यागी: भरत एक महान त्यागी हैं। वे सहज ही प्राप्त अयोध्या के विशाल साम्राज्य को काँटों के समान त्याग देते हैं। वे श्रीराम की अनुपस्थिति में एक तपस्वी की भाँति नंदीग्राम में रहकर राज-काज चलाते हैं।
निर्लोभी और निस्वार्थ: उनके मन में राज्य का कोई लोभ नहीं है। वे स्वयं को अपनी माता के किए गए षड्यंत्र का कारण मानकर ग्लानि से भरे रहते हैं।
मातृभक्त: अपनी माता कैकेयी द्वारा इतना बड़ा अनर्थ किए जाने पर भी वे उनके प्रति अपने पुत्र-धर्म का पालन करते हैं और उन्हें सम्मान देते हैं।
आदर्श शासक: वे श्रीराम की खड़ाऊँ को सिंहासन पर रखकर एक सेवक के रूप में चौदह वर्षों तक अयोध्या का शासन इतनी कुशलता से चलाते हैं कि राज्य में 'राम-राज्य' जैसा सुख बना रहता है।

Quick Tip: भरत का चरित्र-चित्रण करते समय उनके 'भ्रातृ-प्रेम' और 'त्याग' इन दो गुणों को प्रमुखता दें। 'खड़ाऊँ' को सिंहासन पर रखकर राज्य करने का प्रसंग उनके चरित्र का सबसे उज्ज्वल पक्ष है, इसका उल्लेख अवश्य करें।


Question 53:

'तुमुल' खण्डकाव्य के आधार पर 'लक्ष्मण' की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।

Correct Answer:
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'तुमुल' खण्डकाव्य के नायक लक्ष्मण हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

आदर्श भ्राता: लक्ष्मण में भ्रातृ-प्रेम अपने चरम पर है। वे अपने बड़े भाई श्रीराम की सेवा के लिए सभी राज-सुखों को त्यागकर चौदह वर्षों के लिए वन चले जाते हैं। राम की सेवा ही उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य है।
अद्वितीय वीर और साहसी योद्धा: लक्ष्मण अतुलनीय वीर हैं। वे अकेले ही शूर्पणखा का मान-मर्दन करते हैं और खर-दूषण की सेना से लोहा लेते हैं। युद्ध में वे रावण के पुत्र मेघनाद जैसे अजेय योद्धा का वध करते हैं।
उग्र एवं ओजस्वी स्वभाव: लक्ष्मण का स्वभाव अत्यंत उग्र और स्वाभिमानी है। वे अपने भाई श्रीराम या भाभी सीता का कोई भी अपमान सहन नहीं कर सकते और तुरंत क्रोधित हो जाते हैं।
निःस्वार्थ सेवक: वनवास के दौरान वे एक क्षण के लिए भी विश्राम नहीं करते और रात-दिन जागकर राम-सीता की रक्षा और सेवा करते हैं। उनका जीवन निःस्वार्थ सेवा का अनुपम उदाहरण है।
विवेकशील: यद्यपि वे स्वभाव से उग्र हैं, किन्तु वे विवेकशील भी हैं और सदैव श्रीराम की आज्ञा का पालन करते हैं।

Quick Tip: लक्ष्मण का चरित्र-चित्रण करते समय उनके 'भ्रातृ-प्रेम' और 'वीरता' इन दो गुणों को प्रमुखता दें। मेघनाद-वध जैसी घटनाओं का उल्लेख उनकी वीरता को प्रमाणित करने के लिए अवश्य करें।


Question 54:

'तुमुल' खण्डकाव्य के किसी एक सर्ग की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।

Correct Answer:
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'मेघनाद-वध' सर्ग की कथावस्तु

यह 'तुमुल' खण्डकाव्य का एक महत्वपूर्ण सर्ग है, जिसमें लक्ष्मण द्वारा मेघनाद के वध का वर्णन है।

लक्ष्मण द्वारा शक्ति-प्रहार से मूर्च्छित होने के बाद हनुमान जी द्वारा लाई गई संजीवनी बूटी से लक्ष्मण के प्राण बच जाते हैं।
स्वस्थ होने पर लक्ष्मण के मन में मेघनाद से प्रतिशोध की ज्वाला धधक उठती है। वे पुनः युद्ध के लिए तैयार हो जाते हैं।
विभीषण लक्ष्मण को बताते हैं कि मेघनाद अपनी कुलदेवी की यज्ञशाला में अजेय होने के लिए एक तांत्रिक यज्ञ कर रहा है। यदि यज्ञ पूरा हो गया तो उसे पराजित करना असम्भव हो जाएगा।
विभीषण के मार्गदर्शन में लक्ष्मण, हनुमान और वानर सेना के साथ उस गुप्त यज्ञशाला पर आक्रमण कर देते हैं।
वे मेघनाद का यज्ञ भंग कर देते हैं। क्रोधित मेघनाद युद्ध के लिए बाहर आता है।
लक्ष्मण और मेघनाद के बीच एक बार फिर अत्यंत भयंकर और निर्णायक युद्ध होता है। दोनों अपनी समस्त शक्तियों और दिव्यास्त्रों का प्रयोग करते हैं।
अंत में, लक्ष्मण एक अमोघ बाण से मेघनाद का सिर काट देते हैं। मेघनाद के वध से राक्षस सेना में हाहाकार मच जाता है और वानर सेना में जय-जयकार होने लगती है।

Quick Tip: किसी एक सर्ग का कथानक पूछा गया है। आप 'लक्ष्मण-मूर्च्छा' या 'मेघनाद-वध' जैसे किसी भी प्रमुख सर्ग का वर्णन कर सकते हैं। कथा को क्रमबद्ध और रोचक ढंग से प्रस्तुत करें।


Question 55:

दिए गए लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए :

(i) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी \quad (ii) रामधारी सिंह 'दिनकर' \quad (iii) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद

Correct Answer:
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(iii) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद


जीवन-परिचय: भारत के प्रथम राष्ट्रपति, देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म सन् 1884 ई. में बिहार राज्य के छपरा जिले के जीरादेई नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम महादेव सहाय था। इन्होंने कलकत्ता (अब कोलकाता) विश्वविद्यालय से एम.ए. और कानून की डिग्री प्राप्त की। ये अपनी सभी परीक्षाओं में सदैव प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होते थे। मुजफ्फरपुर के एक कॉलेज में कुछ दिन अध्यापन कार्य करने के पश्चात् इन्होंने पटना और कलकत्ता में वकालत की। गाँधीजी के आदर्शों और सिद्धांतों से प्रभावित होकर इन्होंने वकालत छोड़ दी और स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। इन्हें तीन बार भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। सन् 1952 से 1962 तक ये भारत के राष्ट्रपति रहे। सन् 1962 में इन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से अलंकृत किया गया। सन् 1963 ई. में इनका निधन हो गया।

साहित्यिक योगदान: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद एक कुशल राजनेता होने के साथ-साथ एक उच्च कोटि के विचारक और साहित्यकार भी थे। उन्होंने सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक विषयों पर अनेक महत्वपूर्ण लेख लिखे। उनकी भाषा सरल, सुबोध और व्यावहारिक है।

प्रमुख रचना: मेरी आत्मकथा। यह उनकी प्रसिद्ध आत्मकथा है। इसके अतिरिक्त 'बापू के कदमों में', 'भारतीय शिक्षा', 'गाँधीजी की देन', 'शिक्षा और संस्कृति' आदि इनकी अन्य उल्लेखनीय कृतियाँ हैं।

Quick Tip: जीवन-परिचय में जन्म-मृत्यु की तिथियाँ, स्थान, शिक्षा, राष्ट्रीय योगदान (जैसे- राष्ट्रपति बनना), प्राप्त सम्मान (जैसे- भारत रत्न) और साहित्यिक विशेषताओं का उल्लेख करना चाहिए। एक प्रमुख रचना का नाम स्पष्ट रूप से अलग से लिखें।


Question 56:

निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए :

(i) मैथिलीशरण गुप्त \quad (ii) रसखान \quad (iii) महादेवी वर्मा \quad (iv) अशोक वाजपेयी

Correct Answer:
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(iii) महादेवी वर्मा


जीवन-परिचय: आधुनिक युग की मीरा' के नाम से प्रसिद्ध महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 ई. में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद नगर में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री गोविन्द सहाय वर्मा तथा माता का नाम हेमरानी देवी था। इनकी माता एक धर्मपरायण महिला थीं। इन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। कुछ समय तक ये 'चाँद' पत्रिका की संपादिका रहीं। ये प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या भी रहीं। भारत सरकार ने इन्हें 'पद्मभूषण' से अलंकृत किया। 'यामा' नामक काव्य-संग्रह के लिए इन्हें भारतीय 'ज्ञानपीठ' पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सन् 1987 ई. में प्रयाग में इनका निधन हो गया।

साहित्यिक योगदान: महादेवी जी छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। इनके काव्य में विरह-वेदना और रहस्यवाद की प्रधानता है। गीतों की कोमलता और भावुकता इनके काव्य की विशेषता है। काव्य के अतिरिक्त इन्होंने उत्कृष्ट गद्य-रचनाएँ भी की हैं, जिनमें 'अतीत के चलचित्र' और 'स्मृति की रेखाएँ' जैसे रेखाचित्र प्रमुख हैं।

प्रमुख रचना: यामा (काव्य-संग्रह)। यह इनकी सबसे प्रसिद्ध कृति है, जिसमें इनके चार प्रमुख काव्य-संग्रहों (नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत) के महत्वपूर्ण गीतों का संकलन है।

Quick Tip: जीवन-परिचय में कवि की उपाधियों (जैसे- आधुनिक युग की मीरा) और महत्वपूर्ण पुरस्कारों (जैसे- ज्ञानपीठ पुरस्कार) का उल्लेख अवश्य करें। यह आपके उत्तर को प्रभावशाली बनाता है।


Question 57:

अपनी पाठ्यपुस्तक में से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए, जो इस प्रश्नपत्र में न आया हो ।

Correct Answer:
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सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत् ।।
Quick Tip: श्लोक लिखते समय शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। हलन्त, विसर्ग और मात्राओं की गलती से अंक कट सकते हैं। ऐसा श्लोक चुनें जो सरल हो और जिसे आपने अच्छी तरह याद किया हो। यह भी सुनिश्चित कर लें कि वह श्लोक प्रश्न-पत्र में कहीं और न आया हो।


Question 58:

'वाद-विवाद' प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अपने चचेरे भाई को बधाई देते हुए पत्र लिखिए ।

Correct Answer:
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52, अशोक नगर,

कानपुर।
[0.5em]
दिनांक: [परीक्षा की तिथि]
[1em]

प्रिय भाई सुमित,

सस्नेह नमस्ते।
[1em]

मैं यहाँ सकुशल हूँ और आशा करता हूँ कि तुम भी वहाँ स्वस्थ और प्रसन्न होगे।

आज ही पिताजी का पत्र मिला, जिससे यह सुखद समाचार ज्ञात हुआ कि तुमने अन्तर्विद्यालयी 'वाद-विवाद' प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह पढ़कर मेरा हृदय गर्व और आनंद से भर गया। इस शानदार सफलता के लिए मेरी ओर से तुम्हें हार्दिक बधाई।

मुझे हमेशा से तुम्हारी वाक्-पटुता और तर्क-क्षमता पर विश्वास था। तुमने अपनी लगन और परिश्रम से यह सिद्ध कर दिया है कि तुम किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हो। तुम्हारी यह उपलब्धि न केवल तुम्हारे लिए, बल्कि पूरे परिवार के लिए गौरव का विषय है।

भविष्य में भी इसी प्रकार सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करते रहो, यही मेरी कामना है। घर आने पर तुमसे विस्तार से बात होगी। चाचा जी और चाची जी को मेरा प्रणाम कहना।
[1em]

तुम्हारा भाई,

क.ख.ग.
Quick Tip: अनौपचारिक पत्र में भाषा आत्मीय और सरल होनी चाहिए। पत्र की शुरुआत में अपना पता और दिनांक, फिर संबोधन, अभिवादन, मुख्य विषय-वस्तु, और अंत में संबंध और अपना नाम लिखें।


Question 59:

अपनी गली / मोहल्ले की नालियों की समुचित सफाई के लिए नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखिए ।

Correct Answer:
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सेवा में,

श्रीमान् स्वास्थ्य अधिकारी,

नगर निगम,

प्रयागराज (उ.प्र.)।
[1em]

विषय: मोहल्ले की नालियों की समुचित सफाई के सम्बन्ध में।
[1em]

महोदय,

सविनय निवेदन है कि हम सिविल लाइन्स मोहल्ले के निवासी हैं। हम आपका ध्यान अपने मोहल्ले में व्याप्त गंदगी और नालियों की दुर्दशा की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

हमारे मोहल्ले में सफाई कर्मचारी नियमित रूप से नहीं आते हैं, जिसके कारण नालियाँ कूड़े-कचरे और प्लास्टिक से अटी पड़ी हैं। नालियों में पानी का बहाव पूरी तरह रुक गया है, जिससे गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है। इस गंदगी के कारण पूरे मोहल्ले में असहनीय दुर्गंध फैल गई है और मच्छरों का प्रकोप बहुत बढ़ गया है। इससे मलेरिया, डेंगू जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हमारे मोहल्ले की नालियों की तत्काल और समुचित सफाई करवाने की व्यवस्था करें ताकि मोहल्लेवासियों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।

आपकी इस कृपा के लिए हम सभी मोहल्लेवासी आपके आभारी रहेंगे।
[1em]

सधन्यवाद !
[1em]

भवदीय,

समस्त निवासीगण,

सिविल लाइन्स,

प्रयागराज।
[1em]

दिनांक: [परीक्षा की तिथि]
Quick Tip: औपचारिक पत्र लिखते समय प्रारूप (format) का विशेष ध्यान रखें। विषय को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप में लिखें। पत्र की भाषा विनम्र और शिष्ट होनी चाहिए। समस्या का स्पष्ट वर्णन करें और अंत में अनुरोध के साथ पत्र समाप्त करें।


Question 60:

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में लिखिए :

(i) सुवर्णस्य किं मुख्य दुःखम् ?

(ii) कीर्तिः केन वर्धते ?

(iii) वाराणसी नगरी कुत्र स्थिता ?

(iv) आरुणिः कः आसीत् ?

(v) चन्द्रशेखरः स्वगृहं किम् अवदत् ?

Correct Answer:
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(iii) वाराणसी नगरी कुत्र स्थिता ?

उत्तर: वाराणसी नगरी गङ्गायाः कूले (तटे) स्थिता अस्ति।




(v) चन्द्रशेखरः स्वगृहं किम् अवदत् ?

उत्तर: चन्द्रशेखरः कारागारः एव स्वगृहम् इति अवदत्।
Quick Tip: संस्कृत प्रश्नों का उत्तर देते समय, प्रश्नवाचक शब्द (किम्, केन, कुत्र, कः) को पहचानें और उसके स्थान पर सही उत्तर शब्द रखकर वाक्य को पूरा करें। उत्तर संक्षिप्त और सटीक होना चाहिए।


Question 61:

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए :

(i) किसी यात्रा का वर्णन \quad (ii) नई शिक्षा नीति \quad (iii) इन्टरनेट \quad (iv) आत्मनिर्भर भारत \quad (v) पुस्तकालय से लाभ

Correct Answer:
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(iii) इन्टरनेट


प्रस्तावना (परिचय): आज का युग विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी का युग है। इस युग की सबसे बड़ी देन 'इन्टरनेट' है। इन्टरनेट दुनिया भर में फैले कम्प्यूटरों का एक विशाल नेटवर्क है, जो सूचनाओं के आदान-प्रदान को संभव बनाता है। इसने हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है और आज यह हमारी दिनचर्या का एक अभिन्न अंग बन गया है।

इन्टरनेट: एक वरदान (लाभ):

ज्ञान का भंडार: इन्टरनेट ज्ञान और सूचना का असीमित भंडार है। हम किसी भी विषय पर कुछ ही क्षणों में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए एक वरदान है।
संचार में क्रांति: ईमेल, सोशल मीडिया (फेसबुक, व्हाट्सएप) और वीडियो कॉलिंग के माध्यम से हम दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से तुरंत संपर्क कर सकते हैं। इसने दूरियों को समाप्त कर दिया है।
मनोरंजन का साधन: इन्टरनेट पर हम फिल्में देख सकते हैं, संगीत सुन सकते हैं, और ऑनलाइन गेम खेल सकते हैं। यह मनोरंजन का एक सुलभ और लोकप्रिय माध्यम है।
ऑनलाइन सेवाएँ: आज हम घर बैठे ऑनलाइन शॉपिंग, बैंकिंग, बिल भुगतान, टिकट बुकिंग जैसे अनेक कार्य इन्टरनेट के माध्यम से कर सकते हैं, जिससे हमारे समय और श्रम की बचत होती है।
व्यापार और रोजगार: ई-कॉमर्स और ऑनलाइन विज्ञापनों ने व्यापार को नई दिशा दी है। साथ ही, यह फ्रीलांसिंग और वर्क-फ्रॉम-होम जैसे रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करता है।


इन्टरनेट: एक अभिशाप (हानियाँ):

समय का दुरुपयोग: सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण, विशेषकर युवा पीढ़ी अपने बहुमूल्य समय का दुरुपयोग करती है, जिससे उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
साइबर अपराध: इन्टरनेट के माध्यम से हैकिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, और व्यक्तिगत जानकारी की चोरी जैसे अपराध बढ़ गए हैं, जिन्हें साइबर अपराध कहा जाता है।
स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव: कम्प्यूटर या मोबाइल पर घंटों तक लगे रहने से आँखों पर, शारीरिक स्वास्थ्य पर और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
सामाजिक अलगाव: लोग आभासी दुनिया में इतने खो जाते हैं कि वे अपने परिवार और समाज से कटने लगते हैं, जिससे सामाजिक अलगाव बढ़ता है।


उपसंहार (निष्कर्ष): निस्संदेह, इन्टरनेट आधुनिक युग का एक अद्भुत आविष्कार है। यह एक शक्तिशाली साधन है, जिसका उपयोग वरदान और अभिशाप दोनों रूपों में हो सकता है। यह पूरी तरह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग कैसे करते हैं। यदि हम इसका प्रयोग विवेकपूर्ण और संतुलित तरीके से करें, तो यह हमारे और समाज के विकास में बहुत सहायक सिद्ध हो सकता है। हमें इसके दुष्प्रभावों से बचते हुए इसके लाभों का उपयोग करना चाहिए।

Quick Tip: निबंध को हमेशा रूपरेखा (प्रस्तावना, विषय-विस्तार, उपसंहार) बनाकर लिखें। विषय-विस्तार में विभिन्न पहलुओं (जैसे- लाभ, हानि) के लिए अलग-अलग अनुच्छेद बनाएँ। अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए तथ्य और उदाहरण दें।



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