The Central Board of Secondary Education (CBSE) successfully conducted the Class 12 Hindi Core Exam 2026 on March 16, 2026. The CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper with Solution PDF is now available for download.
The CBSE Class 12 Hindi Core paper included important sections from reading comprehension, creative writing, Hindi literature (poetry and prose), and grammar. Students were required to demonstrate language proficiency, literary interpretation, analytical thinking, and effective writing skills in Hindi. The exam generally consists of objective questions, short answer questions, and long descriptive answers to evaluate students’ understanding of Hindi language and literature.
CBSE Class 12 2026 Hindi Core Question Paper with Solution PDF
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Question 1:
मैं फिर जनम लूँगा
फिर मैं
इसी जगह आऊँगा
उचटती निगाहों की भीड़ में
अभावों के बीच
लोगों की क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा
लंगड़ाकर चलते हुए पाँवों को
कंधा दूँगा
गिरी हुई पद-मर्दित पराजित विवशता को
बाँहों में उठाऊँगा।
इस समूह में
इस अनगिनत अचीन्ही आवाज़ों में
कैसा दर्द है
कोई नहीं सुनता !
पर इन आवाज़ों को
और इन कराहों को
दुनिया सुने मैं ये चाहूँगा ।
मेरी तो आदत है
रोशनी जहाँ भी हो
उसे खोज लाऊँगा
कातरता, चुप्पी या चीखें,
या हारे हुओं की खीज
जहाँ भी मिलेगी
उन्हें प्यार के सितार पर बजाऊँगा
...... मैं कल फिर जनम लूँगा
कल फिर आऊँगा ।
1(i).
कविता का वक्ता पुनर्जन्म लेने की बात क्यों कर रहा है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न कविता के केंद्रीय भाव और कवि के संकल्प पर आधारित है।
कविता में 'वक्ता' समाज के उन वर्गों की सहायता करना चाहता है जो उपेक्षित हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश की पंक्तियाँ "अभावों के बीच लोगों की क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा" और "पराजित विवशता को बाहों में उठाऊँगा" स्पष्ट करती हैं कि वक्ता का उद्देश्य शोषित और वंचित लोगों की सेवा करना है।
'सर्वहारा वर्ग' वह समूह है जिसके पास जीवन की मूलभूत सुविधाओं का अभाव होता है और जो प्रायः समाज में दबाया जाता है।
वक्ता पुनर्जन्म लेकर इसी स्थान पर आकर उनकी पीड़ा को दुनिया के सामने लाना चाहता है और उन्हें सहारा देना चाहता है।
Step 3: Final Answer:
अतः, सही विकल्प (B) है क्योंकि वक्ता का संकल्प शोषित (सर्वहारा) वर्ग के उत्थान और उनके अधिकारों के लिए समर्पित है।
Quick Tip: हिंदी साहित्य में 'सर्वहारा' शब्द का प्रयोग समाज के सबसे निचले और शोषित वर्ग के लिए किया जाता है। कविता में 'अभाव' और 'पराजित विवशता' जैसे शब्द इसी वर्ग की ओर संकेत करते हैं।
1(ii).
कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए:
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुहावरों और वाक्यांशों के प्रतीकात्मक अर्थों की समझ पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
1. कंधा देना: इसका अर्थ है किसी को मुसीबत के समय सहायता या सहारा देना। अतः (1) का मेल (ii) 'सहारा देना' से होगा।
2. पीठ सहलाना: इसका अर्थ है किसी को सांत्वना देना या उसके दुख में हमदर्दी दिखाना। अतः (2) का मेल (i) 'दर्द बाँटना' से होगा।
3. बाहों में उठाना: इसका अर्थ है किसी को सम्मान के साथ स्वीकार करना या अपनाना। अतः (3) का मेल (iii) 'अपनाना' से होगा।
इस प्रकार सही क्रम (1-ii), (2-i), (3-iii) है।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में (C) ही सही मिलान प्रस्तुत करता है।
Quick Tip: मिलान वाले प्रश्नों में सबसे पहले उस विकल्प को चुनें जिसके बारे में आप 100% निश्चित हों। इससे बाकी विकल्पों को एलिमिनेट करना आसान हो जाता है।
1(iii).
'अचीन्ही आवाज़ें' किनकी हैं?
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Step 1: Understanding the Concept:
'अचीन्ही' का शाब्दिक अर्थ है - जिसे पहचाना न गया हो या जो अनजान हो।
Step 2: Detailed Explanation:
कविता में "अनगिनत अचीन्ही आवाज़ों" का संदर्भ उन लोगों से है जिनकी कराहों और दर्द को दुनिया अनसुना कर देती है।
यह वर्ग समाज का वह हिस्सा है जिसे कोई महत्व नहीं देता और जो अभावों में गुमनाम जिंदगी जीता है।
कविता के समग्र संदर्भ (अभाव, विवशता, पराजय) को देखते हुए ये आवाज़ें 'सर्वहारा वर्ग' की ही हैं।
Step 3: Final Answer:
सही विकल्प (A) है।
Quick Tip: जब कविता में 'भीड़' और 'अनसुने दर्द' की बात हो, तो वह अक्सर समाज के उपेक्षित या शोषित वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है।
1(iv).
काव्यांश में प्रयुक्त 'रोशनी' से क्या अभिप्राय है?
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Step 1: Understanding the Concept:
साहित्य में 'रोशनी' अंधकार के विपरीत एक सकारात्मक प्रतीक के रूप में उपयोग की जाती है।
Step 2: Detailed Explanation:
कविता में वक्ता कहता है, "रोशनी जहाँ भी हो, उसे खोज लाऊँगा।"
यहाँ रोशनी का अर्थ समाज में व्याप्त दुखों और अभावों के बीच उम्मीद की किरण है।
यह मानवीय मूल्यों, न्याय और पीड़ित मानवता के लिए बेहतर भविष्य की संभावना का प्रतीक है।
Step 3: Final Answer:
'रोशनी' का अभिप्राय जीवन में व्याप्त निराशा के बीच आशा और सुधार के मार्ग को खोजना है।
Quick Tip: रूपक अलंकारों में 'प्रकाश' या 'रोशनी' हमेशा प्रगति, ज्ञान और उम्मीद के लिए प्रयुक्त होते हैं।
1(v).
काव्यांश में कौन पुनर्जन्म लेने की बात कर रहा है? उसकी दो विशेषताएँ लिखिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
वक्ता के गुणों का विश्लेषण उनकी कही गई बातों और संकल्पों के आधार पर किया जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
पुनर्जन्म लेने की बात कविता का 'वक्ता' या 'नायक' कर रहा है, जो संभवतः कवि का अपना व्यक्तित्व है।
उसकी दो प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. अत्यंत संवेदनशील: वह दूसरों के अनसुने दर्द और कराहों को महसूस करता है और उन्हें दुनिया को सुनाना चाहता है।
2. अटूट सेवा-भाव: वह पराजित और विवश लोगों को सहारा देने के लिए बार-बार जन्म लेने का संकल्प रखता है, जो उसके त्यागपूर्ण स्वभाव को दर्शाता है।
Step 3: Final Answer:
वक्ता एक मानवतावादी व्यक्ति है जिसकी विशेषताएँ उसकी परोपकारिता और दृढ़ इच्छाशक्ति हैं।
Quick Tip: चरित्र चित्रण के लिए उन क्रियाओं पर ध्यान दें जो पात्र करना चाहता है (जैसे - सहारा देना, पीठ सहलाना)।
1(vi).
कातरता, चुप्पी या चीखों को प्यार के सितार पर बजाने से क्या अभिप्राय है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह पंक्ति एक काव्यात्मक बिंब (Image) है जहाँ पीड़ा को संगीत में बदलने की बात की गई है।
Step 2: Detailed Explanation:
'कातरता' (डर), 'चुप्पी' (विवशता) और 'चीखें' (तीव्र वेदना) अत्यंत कष्टकारी स्थितियाँ हैं।
'प्यार के सितार पर बजाने' का अर्थ है इन नकारात्मक अनुभूतियों को सहानुभूति और करुणा के माध्यम से एक सुंदर और प्रभावशाली अभिव्यक्ति देना।
वक्ता चाहता है कि समाज की यह पीड़ा केवल शोर न रहे, बल्कि प्रेम और सद्भावना के माध्यम से इसे एक सार्थक संवाद में बदला जाए ताकि लोग इसे सुन सकें और समझ सकें।
Step 3: Final Answer:
इसका अर्थ है कि वक्ता लोगों के मौन और मुखर दुखों को अपनी सहानुभूति और प्रेममयी रचनाशीलता से एक नया रूप देना चाहता है।
Quick Tip: जब किसी कष्ट को 'सितार' या 'वाद्य यंत्र' से जोड़ा जाता है, तो उसका तात्पर्य उस कष्ट को रचनात्मक तरीके से समाज के सामने लाने से होता है।
वर्षा जल संचयन के किस पारंपरिक रूप का वर्णन गद्यांश में किया गया है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गद्यांश के मुख्य विषय वस्तु की पहचान करने पर आधारित है।
गद्यांश की शुरुआत से अंत तक जल संचयन के एक विशिष्ट माध्यम पर चर्चा की गई है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के प्रथम अनुच्छेद में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि "जल आपूर्ति के विकल्प के रूप में तरण-तारिणी तालाब के महत्त्व को आज समझने की ज़रूरत है।"
पूरे पाठ में तालाबों को सिंचाई का साधन, जल संचयन की संरचना और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में वर्णित किया गया है।
नदी, कुआँ और बावड़ी भी जल के स्रोत हैं, परंतु इस विशिष्ट गद्यांश का केंद्र बिंदु केवल 'तालाब' है।
Step 3: Final Answer:
अतः, गद्यांश के अनुसार जल संचयन का पारंपरिक रूप (B) तालाब है।
Quick Tip: अपठित गद्यांश में अक्सर पहली कुछ पंक्तियाँ ही मुख्य विषय (Central Theme) को स्पष्ट कर देती हैं। यहाँ 'तालाब' शब्द का बार-बार प्रयोग इसका उत्तर सुनिश्चित करता है।
गद्यांश में तालाबों के लिए 'तरण-तारिणी' विशेषण का प्रयोग उसकी किस विशेषता को दर्शाने के लिए किया गया है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
'तरण-तारिणी' शब्द का अर्थ है संकट से उबारने वाली या जीवन प्रदान करने वाली।
गद्यांश में इसका प्रयोग तालाब की उपयोगिता के संदर्भ में किया गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक ने जल-संकट के मौजूदा हालात का उल्लेख करते हुए तालाब को 'तरण-तारिणी' कहा है।
गद्यांश के अनुसार, जब बड़े बाँध नहीं थे, तब तालाब ही सिंचाई और जल आपूर्ति का एकमात्र साधन थे।
यह विशेषण तालाब की उस क्षमता को दर्शाता है जिसके द्वारा वह समाज की जल संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर उसे संकट से 'तार' (बचा) देता है।
Step 3: Final Answer:
सही विकल्प (C) है क्योंकि यह तालाब की जल आपूर्ति संबंधी महत्ता को इंगित करता है।
Quick Tip: विशेषणों का अर्थ हमेशा संदर्भ के अनुसार निकालना चाहिए। यहाँ 'तरण-तारिणी' का आध्यात्मिक अर्थ न लेकर व्यावहारिक (जल आपूर्ति) अर्थ लिया गया है।
गद्यांश में रानी सागर, बूढ़ा तालाब और विशाल सागर का उदाहरण किस उद्देश्य से दिया गया है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
गद्यांश में विशिष्ट उदाहरणों का प्रयोग किसी विशेष गुण को प्रमाणित करने के लिए किया जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के दूसरे अनुच्छेद में रानी सागर (भोपाल), विशाल सरोवर (पाण्डु महल) और बूढ़ा तालाब (रायपुर) का उल्लेख किया गया है।
इन उदाहरणों के तुरंत बाद लेखक कहता है, "सौन्दर्यीकरण का इससे बेहतर मिसाल वह भी नैसर्गिक रूप में और क्या हो सकता है।"
यह वाक्य स्पष्ट करता है कि इन बड़े जलाशयों का नाम उनके विशाल स्वरूप, सुंदरता और भव्यता को प्रदर्शित करने के लिए लिया गया है।
Step 3: Final Answer:
दिए गए उदाहरणों का उद्देश्य (C) तालाबों की भव्यता और उनके सौंदर्य का उल्लेख करना है।
Quick Tip: जब किसी प्रसिद्ध स्थान का नाम लिया जाता है, तो वह अक्सर उस श्रेणी की सर्वोत्तम विशेषताओं (जैसे भव्यता या सुंदरता) को दिखाने के लिए होता है।
पर्यावरण-संतुलन बनाए रखने में तालाबों की क्या भूमिका है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न तालाबों के पारिस्थितिक (Ecological) लाभों पर केंद्रित है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के अनुसार, तालाब वायु प्रवाह एवं पर्यावरण के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
तालाबों से होकर गुजरने वाली हवाएँ ठंडी और शुद्ध होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक मानी जाती हैं।
साथ ही, ये जल संचयन के माध्यम से भूजल स्तर को बनाए रखते हैं और स्थानीय जैव विविधता को संरक्षण प्रदान करते हैं।
Step 3: Final Answer:
तालाब वायु के प्रवाह को संतुलित करते हैं और पर्यावरण को नैसर्गिक सुंदरता व स्वास्थ्य प्रदान करने में सहायक होते हैं।
Quick Tip: पर्यावरण संबंधी प्रश्नों के उत्तर में अक्सर 'वायु', 'जल' और 'संतुलन' जैसे कीवर्ड्स का प्रयोग गद्यांश से ढूँढना चाहिए।
ग्रामीण संस्कृति में तालाबों का क्या महत्त्व है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
ग्रामीण जीवन में तालाब केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि एक सामाजिक संस्था है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक के अनुसार, ग्राम्य संस्कृति में सूचना के दो प्रमुख केंद्र हैं - चौपाल और तालाब।
लोग यहाँ एकत्र होकर मंगल उत्सवों या दुख की गाथाओं पर चर्चा करते हैं।
यह स्थान लोक-संस्कृति, सूर्य दर्शन और प्राकृतिक चिकित्सा (बिना किसी शुल्क के) का भी आधार है।
Step 3: Final Answer:
तालाब ग्रामीण समाज के मेल-मिलाप, सूचना साझा करने और सांस्कृतिक गतिविधियों का मुख्य आधार स्तंभ है।
Quick Tip: ग्रामीण परिवेश में 'चौपाल' और 'तालाब' को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है।
जल-संचयन एवं जल-संरक्षण के बीच का अंतर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
संचयन (Harvesting) और संरक्षण (Conservation) दो अलग-अलग क्रियाएँ हैं जो जल प्रबंधन का हिस्सा हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
जल-संचयन: वर्षा के जल को भविष्य के उपयोग के लिए एकत्र करना 'संचयन' कहलाता है।
उदाहरण: वर्षा जल को छत से टैंकों में जमा करना या तालाबों में वर्षा का पानी रोकना।
जल-संरक्षण: जल के स्रोतों की रक्षा करना और पानी की बर्बादी को रोकना 'संरक्षण' है।
उदाहरण: प्रदूषित तालाबों की सफाई करना या सिंचाई में ड्रिप सिस्टम का उपयोग करना ताकि पानी कम खर्च हो।
Step 3: Final Answer:
संचयन 'एकत्रण' की प्रक्रिया है, जबकि संरक्षण 'बचाव और प्रबंधन' की प्रक्रिया है।
Quick Tip: संचयन का अर्थ है 'जमा करना' (Saving like a bank deposit) और संरक्षण का अर्थ है 'सुरक्षित रखना' (Protection).
हमारे पूर्वज जल-संचयन और संरक्षण के मामले में हमसे अधिक समझदार थे, कैसे ? स्पष्ट कीजिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्राचीन प्रणालियों की वर्तमान की तुलना में श्रेष्ठता पर विचार करने को कहता है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के अनुसार, हमारे पूर्वजों ने उस समय तालाब बनाए थे जब कोई आधुनिक 'हार्वेस्टिंग सिस्टम' या बड़े बाँध नहीं थे।
उन्होंने तालाबों को केवल गड्ढे नहीं, बल्कि एक 'संरचना' के रूप में विकसित किया जो पर्यावरण संतुलन और सिंचाई दोनों में सक्षम थे।
आज हम जिन 'हार्वेस्टिंग सिस्टम' की दलीलें देते हैं, वे वास्तव में उन्हीं तालाबों की प्राचीन संरचनाओं का आधुनिक नाम मात्र हैं।
पूर्वजों ने इन्हें अपनी 'सांस्कृतिक धरोहर' मानकर संरक्षित किया था, जबकि आज हम इनकी अनदेखी कर रहे हैं।
Step 3: Final Answer:
पूर्वजों की दूरदर्शिता उनकी निर्मित तालाबों की नैसर्गिक और बहुउद्देशीय संरचना में दिखाई देती है, जो सदियों से समाज की सेवा कर रही है।
Quick Tip: प्राचीन ज्ञान अक्सर प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने पर आधारित होता था, जो आज के कृत्रिम साधनों से अधिक प्रभावी और स्थायी था।
खोजी रिपोर्ट और विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के बीच का अंतर स्पष्ट कीजिए।
Correct Answer: खोजी रिपोर्ट छिपे हुए तथ्यों को उजागर करती है, जबकि विश्लेषणात्मक रिपोर्ट ज्ञात तथ्यों का गहरा विश्लेषण करती है।
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Step 1: Understanding the Concept:
पत्रकारिता में रिपोर्ट लेखन के अलग-अलग प्रकार होते हैं जो सूचना की प्रकृति पर निर्भर करते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
खोजी रिपोर्ट (Investigative Report):
- इसमें रिपोर्टर उन सूचनाओं और तथ्यों को गहराई से छानबीन करके बाहर लाता है जिन्हें दबाने या छिपाने की कोशिश की गई हो।
- इसका उपयोग भ्रष्टाचार, घोटालों या किसी बड़ी गड़बड़ी का पर्दाफाश करने के लिए किया जाता है।
विश्लेषणात्मक रिपोर्ट (Analytical Report):
- इसमें तथ्य पहले से ही सार्वजनिक होते हैं।
- रिपोर्टर उन तथ्यों की व्याख्या करता है, उनके पीछे के कारणों और परिणामों का विश्लेषण करता है।
Step 3: Final Answer:
मुख्य अंतर यह है कि खोजी रिपोर्ट 'नया सत्य' खोजती है, जबकि विश्लेषणात्मक रिपोर्ट 'उपलब्ध सत्य' का विश्लेषण करती है।
Quick Tip: 'स्टिंग ऑपरेशन' खोजी रिपोर्ट का एक आधुनिक रूप है, जबकि संपादकीय पृष्ठ पर छपने वाले लेख अक्सर विश्लेषणात्मक प्रकृति के होते हैं।
निम्नलिखित विषय पर लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए: 'प्राकृतिक आपदाओं का विकराल रूप'
Correct Answer: रचनात्मक लेख (विषय - प्राकृतिक आपदाएँ)
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Step 1: Understanding the Concept:
रचनात्मक लेख में विषय के विभिन्न पहलुओं को कल्पनाशीलता और तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्राकृतिक आपदाओं का विकराल रूप
प्रकृति जब अपनी लय खोती है, तब वह रौद्र रूप धारण कर लेती है। हाल के वर्षों में हमने बढ़ते भूस्खलन, भीषण बाढ़, और बेमौसम चक्रवातों के रूप में प्रकृति का विकराल रूप देखा है। बादल फटना या भूकंप जैसी आपदाएँ पल भर में हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ देती हैं।
इसका मुख्य कारण मनुष्य का प्रकृति के साथ बढ़ता हस्तक्षेप है। पहाड़ों को काटकर बनाई जा रही सड़कें और नदियों के बहाव क्षेत्र में किए गए निर्माण ने आपदाओं की तीव्रता बढ़ा दी है। जब हम जंगलों को नष्ट करते हैं, तो हम केवल पेड़ों को ही नहीं, बल्कि पृथ्वी की सुरक्षा ढाल को भी खत्म कर देते हैं।
इन आपदाओं का प्रभाव केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गहरा मानसिक आघात भी पहुँचाती हैं। समय की माँग है कि हम संधारणीय विकास (Sustainable Development) को अपनाएँ और प्रकृति का सम्मान करना सीखें, अन्यथा भविष्य की आपदाएँ और भी विनाशकारी होंगी।
Step 3: Final Answer:
प्रकृति का संरक्षण ही मानव जाति की इन आपदाओं से सुरक्षा का एकमात्र उपाय है।
Quick Tip: रचनात्मक लेख लिखते समय अपनी भाषा को प्रवाहमयी रखें और विषय के 'कारण', 'प्रभाव' तथा 'सुझाव' को शामिल करें।
निम्नलिखित विषय पर लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए: 'जब मैंने अध्यापक/अध्यापिका की भूमिका निभाई'
Correct Answer: रचनात्मक लेख (विषय - शिक्षक की भूमिका)
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Step 1: Understanding the Concept:
यह एक संस्मरणात्मक या कल्पनाशील रचनात्मक लेख है।
Step 2: Detailed Explanation:
जब मैंने अध्यापक की भूमिका निभाई
शिक्षक दिवस के अवसर पर हमारे विद्यालय में एक अनोखी परंपरा है, जिसमें वरिष्ठ छात्र एक दिन के लिए शिक्षक बनते हैं। मुझे कक्षा 10 को हिंदी पढ़ाने का अवसर मिला। उस दिन जब मैंने हाथ में चाक और रजिस्टर लिया, तो एक अजीब सी जिम्मेदारी का अनुभव हुआ।
कक्षा में कदम रखते ही 'गुड मॉर्निंग सर' की आवाज़ ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया। मैंने कबीर के दोहे पढ़ाने शुरू किए। शुरू में बच्चे शरारत कर रहे थे, लेकिन जब मैंने उन्हें सरल उदाहरणों से समझाना शुरू किया, तो वे शांत होकर सुनने लगे। मुझे अहसास हुआ कि पढ़ाना केवल जानकारी देना नहीं है, बल्कि सामने वाले की रुचि जगाना भी है।
उस एक घंटे ने मुझे सिखाया कि एक शिक्षक को कितनी तैयारी करनी पड़ती है और धैर्य कितना ज़रूरी है। जब बच्चों ने अंत में तालियाँ बजाईं, तो मुझे वह संतुष्टि मिली जो शब्दों में बयान नहीं की जा सकती। वह दिन मेरे जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक बन गया।
Step 3: Final Answer:
शिक्षण केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक साधना है जिसे मैंने उस दिन स्वयं अनुभव किया।
Quick Tip: स्वयं के अनुभव पर आधारित लेख में 'मैं' शैली (First person) का प्रयोग करें, इससे लेख अधिक सजीव लगता है।
निम्नलिखित विषय पर लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए: 'जब पिताजी का स्थानांतरण दुर्गम स्थान में हुआ'
Correct Answer: रचनात्मक लेख (विषय - स्थानांतरण का अनुभव)
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Step 1: Understanding the Concept:
यह लेख परिवर्तन और चुनौतियों के प्रति मानवीय प्रतिक्रिया पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
जब पिताजी का स्थानांतरण दुर्गम स्थान में हुआ
पिताजी सरकारी सेवा में हैं, इसलिए स्थानांतरण हमारे लिए कोई नई बात नहीं थी। लेकिन इस बार उनका तबादला लद्दाख के एक अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में हुआ था। घर में सन्नाटा पसर गया। उस ठंडे और कम ऑक्सीजन वाले स्थान की कल्पना मात्र से हम सिहर उठे।
सामान पैक करते समय पुरानी यादें आँखों के सामने तैर रही थीं। नए स्कूल, नए दोस्त और बिल्कुल अलग वातावरण का डर मन में था। जब हम वहाँ पहुँचे, तो शुरू के दिन बहुत कठिन थे। कड़ाके की ठंड और सीमित सुविधाओं ने हमें परेशान किया। लेकिन धीरे-धीरे प्रकृति के उस शांत और भव्य रूप ने हमें मोहित कर लिया। वहाँ के स्थानीय लोगों की सादगी और कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराने की कला ने हमारा नज़रिया बदल दिया।
इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि मनुष्य की अनुकूलन क्षमता असीम है। दुर्गम स्थान ने हमें आत्मनिर्भर बनना और छोटी-छोटी सुविधाओं की कद्र करना सिखाया।
Step 3: Final Answer:
चुनौतियाँ ही हमें मज़बूत बनाती हैं, यह सीख मुझे उस दुर्गम स्थान पर जाकर मिली।
Quick Tip: लेख का अंत हमेशा एक सकारात्मक सीख या निष्कर्ष के साथ करें।
चित्रकला, संगीतकला, नृत्यकला की तरह कविता लेखन की कला सिखाई क्यों नहीं जा सकती ?
Correct Answer: क्योंकि कविता का मूल स्रोत मानवीय संवेदना और प्रतिभा है, जो केवल तकनीकी शिक्षण से प्राप्त नहीं की जा सकती।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न कविता की प्रकृति और अन्य ललित कलाओं के साथ उसके अंतर पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
कविता लेखन के बारे में विद्वानों के दो मत हैं, लेकिन अधिकांश मानते हैं कि इसे अन्य कलाओं की तरह पूरी तरह नहीं सिखाया जा सकता क्योंकि:
1. संवेदना और भाव: चित्रकला या संगीत के उपकरणों (ब्रश, वाद्य यंत्र) को चलाना सिखाया जा सकता है, लेकिन शब्दों के माध्यम से उमड़ने वाले हृदय के भाव 'सिखाए' नहीं जा सकते।
2. जन्मजात प्रतिभा: कविता लेखन के लिए 'प्रतिभा' का होना आवश्यक है, जो ईश्वरप्रदत्त होती है। बाह्य प्रशिक्षण से केवल छंद, लय या व्याकरण का ज्ञान दिया जा सकता है, संवेदना का नहीं।
3. स्वानुभव: कविता कवि के निजी अनुभवों की अभिव्यक्ति होती है।
Step 3: Final Answer:
अतः, तकनीक सिखाई जा सकती है, पर कविता के पीछे का 'भाव' और 'आत्मा' व्यक्ति के भीतर से ही उत्पन्न होती है।
Quick Tip: याद रखें कि शिक्षण से एक अच्छा 'तुकांतकार' (Rhymer) तो बना जा सकता है, पर एक अच्छा 'कवि' बनने के लिए संवेदनशीलता अनिवार्य है।
नाटक के मंच निर्देश हमेशा वर्तमान काल में ही क्यों संयोजित किए जाते हैं ? उदाहरण सहित लिखिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
नाटक एक दृश्य विधा है जिसका समय हमेशा वर्तमान होता है, चाहे वह कहानी ऐतिहासिक ही क्यों न हो।
Step 2: Detailed Explanation:
नाटक को 'वर्तमान काल' में लिखे जाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. जीवंतता: नाटक जब रंगमंच पर खेला जाता है, तो वह क्रिया उसी क्षण घटित हो रही होती है।
2. दर्शक का जुड़ाव: दर्शक उसे अपनी आँखों के सामने होते हुए देखता है, इसलिए निर्देश वर्तमान में होते हैं।
उदाहरण:
यदि निर्देश में लिखा है - "राम प्रवेश करता है" (वर्तमान काल), तो अभिनेता उसी समय मंच पर आएगा। यदि लिखा हो "राम ने प्रवेश किया" (भूतकाल), तो वह अभिनय के अनुकूल नहीं होगा।
Step 3: Final Answer:
नाटक 'वर्तमान काल का साहित्य' है क्योंकि इसकी प्रभावोत्पादकता वर्तमान में ही निहित है।
Quick Tip: नाटक और कहानी में मुख्य अंतर यही है कि कहानी पढ़ी या सुनी जाती है (जो बीत चुकी है), पर नाटक घटित होता है।
कहानी किसे कहते हैं ? इसके तत्वों की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
कहानी एक कलात्मक गद्य विधा है जिसमें किसी घटना, पात्र या स्थिति का वर्णन रोचकता के साथ किया जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
मुंशी प्रेमचंद के अनुसार, "कहानी वह रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का मुख्य उद्देश्य होता है।"
कहानी के तत्व:
1. कथानक (Plot): कहानी का ढांचा या घटनाओं का क्रम।
2. पात्र और चरित्र चित्रण: कहानी के नायक और अन्य पात्र।
3. संवाद (Dialogue): पात्रों के बीच की बातचीत।
4. देश-काल और वातावरण: समय और स्थान का वर्णन।
5. भाषा-शैली: कहानी सुनाने का ढंग।
6. उद्देश्य: कहानी से मिलने वाली सीख या संदेश।
Step 3: Final Answer:
अतः, कहानी इन छह तत्वों के मेल से बनी एक रोचक और प्रभावशाली रचना है।
Quick Tip: कहानी का सबसे महत्वपूर्ण तत्व 'कथानक' होता है, जो पाठकों की जिज्ञासा को अंत तक बनाए रखता है।
वर्तमान समय में भारत में हिंदी नेट पत्रकारिता की स्थिति स्पष्ट कीजिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न डिजिटल माध्यमों में हिंदी भाषा की पहुँच और विकास पर केंद्रित है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत में हिंदी नेट पत्रकारिता की वर्तमान स्थिति:
1. यूनिकोड का आगमन: पहले फोंट की समस्या थी, लेकिन यूनिकोड आने के बाद हिंदी सामग्री को दुनिया के किसी भी कोने में पढ़ा जा सकता है।
2. प्रमुख पोर्टल्स: 'वेबदुनिया' से शुरू होकर आज जागरण, अमर उजाला, नवभारत टाइम्स जैसे सभी अखबारों के डिजिटल संस्करण लाखों लोगों द्वारा पढ़े जा रहे हैं।
3. सोशल मीडिया: फेसबुक, ट्विटर (X) और यूट्यूब पर हिंदी में समाचार देने वाले स्वतंत्र पत्रकारों की संख्या बढ़ी है।
4. चुनौती: हालांकि विज्ञापन और राजस्व के मामले में यह अंग्रेजी से पीछे है, पर पाठकों की संख्या के मामले में हिंदी शीर्ष पर है।
Step 3: Final Answer:
आज हिंदी नेट पत्रकारिता एक विशाल बाज़ार बन चुकी है और सूचना प्राप्ति का सबसे सस्ता व सुलभ माध्यम है।
Quick Tip: हिंदी के लिए 'मंगल' फोंट और 'यूनिकोड' का विकास हिंदी नेट पत्रकारिता के लिए वरदान साबित हुआ।
आप जया/जयेश हैं। आपके विद्यालय में 7 सितंबर से 14 सितंबर तक 'हिंदी सप्ताह' मनाया गया। स्थानीय समाचार-पत्र में प्रकाशित कराने हेतु इसकी एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार कीजिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
रिपोर्ट में किसी घटना का तथ्यपरक और संक्षिप्त विवरण दिया जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
ए.बी.सी. पब्लिक स्कूल में 'हिंदी सप्ताह' का भव्य समापन
नई दिल्ली, 15 सितंबर: स्थानीय ए.बी.सी. पब्लिक स्कूल में 7 सितंबर से 14 सितंबर तक 'हिंदी सप्ताह' का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों में अपनी राजभाषा के प्रति गौरव जगाने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
सप्ताह का शुभारंभ प्रधानाचार्य द्वारा माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन से हुआ। प्राथमिक वर्ग के लिए सुलेख और कविता पाठ प्रतियोगिता रखी गई, जबकि माध्यमिक व उच्च माध्यमिक वर्ग के लिए वाद-विवाद, निबंध लेखन और स्वरचित काव्य पाठ प्रतियोगिता आयोजित हुई।
अंतिम दिन 'हिंदी दिवस' (14 सितंबर) पर एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें हिंदी नाटकों का मंचन किया गया। विजेता छात्रों को प्रमाण पत्र और हिंदी की प्रसिद्ध पुस्तकें भेंट की गईं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
रिपोर्टर: जयेश/जया
Step 3: Final Answer:
उपरोक्त रिपोर्ट समाचार पत्र के लिए एक आदर्श प्रारूप है जो सभी महत्वपूर्ण सूचनाओं को समेटे हुए है।
Quick Tip: रिपोर्ट लिखते समय 'कहाँ', 'कब', 'किसके द्वारा' और 'क्या हुआ' इन चार सवालों के जवाब ज़रूर दें।
आर्थिक पत्रकार को समाचार लेखन करते समय विशेष सावधानी क्यों बरतनी पड़ती है ? स्पष्ट कीजिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
आर्थिक पत्रकारिता (Business Journalism) एक विशेष क्षेत्र है जहाँ आँकड़ों और तकनीकी शब्दों का बहुत महत्व है।
Step 2: Detailed Explanation:
आर्थिक पत्रकार के लिए सावधानियाँ निम्न कारणों से आवश्यक हैं:
1. जटिल शब्दावली: आर्थिक समाचारों में जीडीपी, सेंसेक्स, रेपो रेट जैसे कठिन शब्द होते हैं। पत्रकार को इन्हें सरल भाषा में समझाना पड़ता है ताकि आम आदमी समझ सके।
2. तथ्यों की सटीकता: एक गलत आँकड़ा या गलत 'डेसिमल' का प्रयोग शेयर बाज़ार में हड़कंप मचा सकता है या निवेशकों का भारी नुकसान कर सकता है।
3. अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: आर्थिक खबरें सीधे देश की साख और बाज़ार की स्थिरता से जुड़ी होती हैं, इसलिए इनमें सनसनी फैलाने से बचना चाहिए।
Step 3: Final Answer:
सटीकता, सरलता और जिम्मेदारी आर्थिक पत्रकारिता के तीन मुख्य स्तंभ हैं।
Quick Tip: आर्थिक पत्रकारिता में 'व्यावसायिक तटस्थता' बहुत ज़रूरी है ताकि पाठकों को निष्पक्ष वित्तीय जानकारी मिल सके।
निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए :
यह मधु है - स्वयं काल की मौना का युग संचय,
यह गोरस - जीवन - कामधेनु का अमृत - पूत - पय,
यह अंकुर - फोड़ धरा को रवि को तकता निर्भय,
यह प्रकृत, स्वयंभू, ब्रह्म, अयुत : इसको भी शक्ति दे दो।
यह दीप, अकेला, स्नेह भरा
है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह काव्यांश सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' द्वारा रचित 'यह दीप अकेला' कविता से लिया गया है।
यहाँ 'दीप' व्यक्ति का प्रतीक है और 'पंक्ति' समाज का।
कवि बताते हैं कि व्यक्ति गुणवान और प्रतिभावान होते हुए भी तब तक पूर्ण नहीं है जब तक वह समाज से न जुड़ जाए।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रसंग: कवि ने व्यक्ति की अद्वितीयता और उसकी सामाजिक उपयोगिता के अंतर्संबंधों को विभिन्न प्रतीकों के माध्यम से स्पष्ट किया है।
व्याख्या:
1. कवि दीप (व्यक्ति) की तुलना 'मधु' (शहद) से करते हैं, जो समय रूपी पिटारे में युगों से संचित ज्ञान और अनुभव का मधुर रस है।
2. इसे 'गोरस' (दूध/दही) कहा गया है जो जीवन रूपी कामधेनु का पवित्र अमृत के समान सार तत्व है।
3. यह उस 'अंकुर' के समान है जो धरती का सीना चीरकर निडर होकर सूर्य (रवि) की ओर देखता है, अर्थात व्यक्ति के भीतर अटूट साहस और सृजन की शक्ति है।
4. यह 'स्वयंभू' और 'ब्रह्म' के समान दिव्य है।
मुख्य भाव: यद्यपि यह दीप (व्यक्ति) स्नेह और गर्व से भरा हुआ है, परंतु इसकी वास्तविक शक्ति और सार्थकता तभी है जब इसे 'पंक्ति' (समाज) को समर्पित कर दिया जाए। समाज का अंग बनकर ही इसकी व्यक्तिगत प्रतिभा व्यापक हित में काम आ सकती है।
Step 3: Final Answer:
कवि का संदेश है कि व्यक्तिगत सत्ता का सामाजिक सत्ता में विलय ही व्यक्ति को पूर्णता और शक्ति प्रदान करता है।
Quick Tip: अज्ञेय की कविताओं में व्यक्तिवाद (Individualism) और समाज के बीच के संतुलन को समझना मुख्य कुंजी है। यहाँ दीप = व्यक्ति और पंक्ति = समाज याद रखें।
निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए :
बिधि न सकेउ सहि मोर दुलारा। नीच बीच जननी मिस पारा ।।
यहउ कहत मोहि आजु न सोभा। अपनी समुझि साधु सुचि को भा ।।
मातु मंदि मैं साधु सुचाली। उर अस आनत कोटि कुचाली ।।
फरइ कि कोदव बालि सुसाली। मुकता प्रसब कि संबुक काली ।।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह काव्यांश भरत के पश्चाताप और राम के प्रति उनके अगाध प्रेम को दर्शाता है।
चित्रकूट की सभा में भरत अपनी माता कैकेयी के कृत्य पर दुखी होकर स्वयं को अपराधी जैसा महसूस करते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रसंग: राम के वनवास के बाद जब भरत उनसे मिलने चित्रकूट पहुँचते हैं, तब वे मुनि वशिष्ठ और सभा के समक्ष अपने हृदय की पीड़ा व्यक्त करते हैं।
व्याख्या:
1. भरत कहते हैं कि विधाता (भाग्य) को मेरा और राम का प्रेम सहा नहीं गया, इसलिए उसने नीच माता (कैकेयी) के बहाने हमारे बीच बाधा डाल दी।
2. वे आगे कहते हैं कि अपनी माता को बुरा कहना मुझे शोभा नहीं देता, क्योंकि अपनी समझ में भला कौन स्वयं को साधु या पवित्र नहीं मानता?
3. भरत स्वयं को धिक्कारते हुए कहते हैं कि यदि मैं यह सोचूँ कि माता नीच है और मैं साधु हूँ, तो यह हृदय में आने वाली करोड़ों दुष्टताओं के समान है।
4. अंत में वे तर्क देते हैं कि क्या कभी 'कोदव' (मोटा अनाज) की बाली से श्रेष्ठ 'साली' (उत्तम चावल) पैदा हो सकता है? या काली घोंघी से कभी मोती उत्पन्न हो सकते हैं? अर्थात कैकेयी जैसी माता का पुत्र होने के नाते वे स्वयं को दोषयुक्त मानते हैं।
Step 3: Final Answer:
भरत का यह कथन उनके विनम्र स्वभाव, आत्मग्लानि और राम के प्रति उनके निस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा को सिद्ध करता है।
Quick Tip: तुलसीदास की भाषा अवधी है। यहाँ 'कोदव' और 'मुकता' जैसे दृष्टांतों (Metaphors) का प्रयोग भरत की मानसिक पीड़ा को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने के लिए किया गया है।
गद्यांश में किस खेल के खत्म होने की बात हो रही है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गद्यांश के सांकेतिक अर्थ को समझने पर आधारित है।
लेखक ने 'खेल खत्म होना' मुहावरे का प्रयोग हवेली की बदली हुई परिस्थितियों के लिए किया है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश में बताया गया है कि बड़े भाई की मृत्यु से पहले हवेली में रौनक और संपन्नता थी।
जैसे ही उनकी मृत्यु हुई, भाइयों के आपसी कलह और बँटवारे के कारण हवेली की आर्थिक और सामाजिक प्रतिष्ठा गिर गई।
अतः 'खेल खत्म होने' का तात्पर्य हवेली के उस वैभव, सुख और समृद्धि के अंत से है जो कभी उसका गौरव हुआ करती थी।
Step 3: Final Answer:
सही विकल्प (D) है।
Quick Tip: कहानी 'संवदिया' में बड़ी हवेली सामंती व्यवस्था के पतन और उसके बाद उपजी मानवीय त्रासदी का प्रतीक है।
'भगवान भले आदमी को ही कष्ट देते हैं' - कथन के समर्थन में विकल्प है -
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गद्यांश में दी गई तर्कसंगत व्याख्या पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश की पंक्ति "भगवान भले आदमी को ही कष्ट देते हैं। नहीं तो एक घंटे की बीमारी में बड़े भैया क्यों मरते ?" स्पष्ट रूप से बड़े भैया की अकाल मृत्यु की ओर संकेत करती है।
बड़े भैया एक सज्जन व्यक्ति थे जिनकी अचानक मृत्यु ने परिवार को संकट में डाल दिया।
समाज में अक्सर यह धारणा व्यक्त की जाती है कि सज्जन व्यक्तियों के साथ ही अनहोनी घटती है।
Step 3: Final Answer:
सही विकल्प (C) है।
Quick Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में हमेशा उत्तर की पुष्टि दी गई पंक्तियों से करें। यहाँ 'नहीं तो...' के बाद का हिस्सा सीधे उत्तर देता है।
'रैयतों ने ज़मीन पर दावे करके दखल किया' - वाक्य में प्रयुक्त 'रैयत' शब्द का अर्थ है -
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Step 1: Understanding the Concept:
'रैयत' एक अरबी शब्द है जिसका प्रयोग भारतीय ग्रामीण और राजस्व व्यवस्था में ऐतिहासिक रूप से किया जाता रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
पुराने समय में ज़मींदारी प्रथा के दौरान, ज़मींदार की ज़मीन पर खेती करने वाले किसानों या उसके अधीन रहने वाली जनता को 'रैयत' कहा जाता था।
गद्यांश के संदर्भ में, जब हवेली का मालिक (बड़ा भैया) मर गया और व्यवस्था डगमगाई, तो वहाँ के किसानों (प्रजा/रैयतों) ने ज़मीन पर अपना अधिकार जताना शुरू कर दिया।
Step 3: Final Answer:
सही विकल्प (A) है।
Quick Tip: राजस्व और ग्रामीण कहानियों (जैसे फणीश्वरनाथ रेणु की रचनाएँ) में 'रैयत' का सीधा अर्थ किसान या प्रजा से होता है।
'नाममात्र की ही बड़ी हवेली है' - से अभिप्राय है -
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Step 1: Understanding the Concept:
'नाममात्र का होना' एक मुहावरा है जिसका अर्थ है केवल नाम के लिए अस्तित्व में रहना, गुणों या वैभव का न होना।
Step 2: Detailed Explanation:
हवेली को 'बड़ी' इसलिए कहा जाता था क्योंकि वहाँ धन, वैभव और नौकर-चाकर थे।
बँटवारे के बाद जब तीनों भाई शहर चले गए और हवेली खाली हो गई, तो वहाँ की पुरानी रौनक खत्म हो गई।
अब वह केवल एक विशाल ढाँचा रह गई है, लेकिन उसकी वह पुरानी रईसी और वैभव (शानो-शौकत) लुप्त हो चुकी है।
Step 3: Final Answer:
सही विकल्प (D) है।
Quick Tip: 'नाममात्र' शब्द का प्रयोग अक्सर पतन (Decline) की स्थिति को दर्शाने के लिए किया जाता है।
गद्यांश में 'द्रौपदी - चीर-हरण' प्रसंग का उल्लेख क्यों किया गया है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
लेखक ने पौराणिक प्रसंग 'द्रौपदी चीर-हरण' का प्रयोग एक रूपक (Metaphor) के रूप में किया है ताकि बड़ी बहुरिया के अपमान और बेबसी को प्रभावशाली ढंग से दिखाया जा सके।
Step 2: Detailed Explanation:
1. गद्यांश में वर्णन है कि देवरों ने बड़ी बहुरिया के शरीर से ज़ेवर छीन लिए।
2. यहाँ तक कि एक कीमती बनारसी साड़ी को भी तीन हिस्सों में फाड़कर बाँट लिया गया।
3. किसी स्त्री के निजी वस्त्र और आभूषणों को इस तरह बलपूर्वक छीनना उसके मान-मर्यादा पर प्रहार है।
4. यह कृत्य महाभारत में द्रौपदी के चीर-हरण जैसा ही क्रूर और अन्यायपूर्ण था, जहाँ स्त्री की गरिमा को तार-तार किया गया था।
Step 3: Final Answer:
अतः, सही विकल्प (C) है क्योंकि यह प्रसंग संपत्ति बँटवारे की आड़ में एक विधवा स्त्री के साथ हुई अमानवीयता और अन्याय को रेखांकित करता है।
Quick Tip: साहित्य में पौराणिक संदर्भों का प्रयोग वर्तमान घटनाओं की गंभीरता और भावुकता को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
9(i).
फागुन मास की शीत को चौगुना कौन बढ़ा रहा है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह काव्यांश मलिक मोहम्मद जायसी के 'पद्मावत' के 'नागमती वियोग खंड' से लिया गया है।
इसमें बारहमासा वर्णन के अंतर्गत फागुन मास की प्राकृतिक स्थितियों का विरहिणी पर प्रभाव दिखाया गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश की पहली पंक्ति "फागुन पवन झकोरे बहा। चौगुन सीउ जाइ किमि सहा।।" स्पष्ट करती है कि फागुन के महीने में हवा के तेज़ झोंके (झकोरे) चल रहे हैं।
ये झोंके पहले से ही व्याप्त ठंड (सीउ) को चार गुना बढ़ा देते हैं।
विरहिणी नागमती के लिए यह बढ़ी हुई ठंड असहनीय हो गई है क्योंकि उनके प्रिय रत्नसेन उनके साथ नहीं हैं।
Step 3: Final Answer:
अतः, सही उत्तर (B) है क्योंकि पवन के झकोरे ही शीतलता की तीव्रता को बढ़ा रहे हैं।
Quick Tip: पद्य में 'सीउ' का अर्थ 'शीत' या 'सर्दी' है। फागुन के महीने में चलने वाली हवा विरह की स्थिति में कष्टदायक प्रतीत होती है।
9(ii).
वृक्षों से झरने वाली बन ढाँखों से विरहिणी नायिका का क्या संबंध है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यहाँ प्रकृति का 'उद्दीपन' रूप चित्रित है, जहाँ बाहरी वातावरण विरही की पीड़ा को और तेज़ कर देता है।
Step 2: Detailed Explanation:
पंक्ति "तरिवर झरें झरें बन ढाँखा" के अनुसार पतझड़ के कारण वनस्पति निष्प्राण हो रही है।
नागमती अपना तुलना उन झड़ते हुए पत्तों से करती है क्योंकि उसका शरीर भी विरह में पीला पड़कर झड़ने जैसा हो गया है।
जहाँ पूरी प्रकृति वसंत के उल्लास की तैयारी कर रही है, वहीँ पत्तों का गिरना नागमती की आंतरिक निराशा और पीड़ा को और बढ़ा देता है।
Step 3: Final Answer:
सही विकल्प (A) है क्योंकि प्रकृति का यह परिवर्तन नागमती के लिए कष्टकारी है।
Quick Tip: विरह काव्य में जब प्रकृति अपना रूप बदलती है, तो वह नायिका के दुख को बढ़ाने का ही काम करती है।
9(iii).
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए:
कथन : नागमती अपने शरीर को जलाकर राख कर देना चाहती है।
कारण : राख के रूप में प्रिय के चरण स्पर्श करने का सौभाग्य प्राप्त करना चाहती है।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न काव्यांश के अंतिम दोहे के भावार्थ पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश की अंतिम पंक्तियाँ "यह तन जारौं छार कै, कहौ कि पवन उड़ाउ। मकु तेहि मारग होइ परौं, कंत धरें जहँ पाउ।।" इस बात की पुष्टि करती हैं।
नागमती का संकल्प है कि वह विरह की अग्नि में जलकर राख हो जाए और वह राख उड़कर उस मार्ग पर गिर जाए जहाँ उसके पति (कंत) कदम रखेंगे।
यह उनके अनन्य प्रेम और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।
Step 3: Final Answer:
कथन और कारण दोनों सत्य हैं, इसलिए विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: सूफी काव्य परंपरा में मृत्यु के उपरांत भी प्रिय का सान्निध्य पाने की इच्छा 'इश्क-ए-हकीकी' के करीब ले जाती है।
9(iv).
कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न काव्यांश में प्रयुक्त प्रतीकों और उनके अर्थों के मिलान पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
1. राख कर देना: यह मृत्यु के बाद भी प्रिय की सेवा की इच्छा को दिखाता है, जो 'सर्वस्व त्याग' (iii) है।
2. पीले पत्ते: "तन जस पियर पात भा मोरा" के अनुसार यह नागमती के 'दुर्बल और कांतिहीन शरीर' (i) का प्रतीक है।
3. चाँचरि खेलना: यह फागुन के महीने में 'होली के उल्लास' (ii) को दर्शाता है।
अतः सही क्रम 1-iii, 2-i, 3-ii है।
Step 3: Final Answer:
सही विकल्प (B) है।
Quick Tip: 'पियर पात' (पीला पत्ता) उपमा अलंकार का प्रसिद्ध उदाहरण है जो विरह की अवस्था में नायिका की शारीरिक स्थिति को दर्शाता है।
9(v).
काव्यांश के मूल भाव को व्यक्त करने वाला कथन नहीं है –
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न काव्यांश के विरह-प्रधान वातावरण में अप्रासंगिक तथ्य को चुनने के लिए है।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश में नागमती के दुख का वर्णन है।
विकल्प (B), (C) और (D) सीधे तौर पर विरह की तीव्रता और उसकी इच्छाओं को दर्शाते हैं।
विकल्प (A) श्रृंगार और वैभव की बात करता है, जबकि नागमती विरह में मलिन और कांतिहीन है। काव्यांश में कहीं भी रेशमी वस्त्रों या श्रृंगार का उल्लेख सुखद रूप में नहीं है।
Step 3: Final Answer:
अतः, विकल्प (A) काव्यांश के मूल भाव के विपरीत है।
Quick Tip: विरह वर्णन में नायिका सुख-सुविधाओं और श्रृंगार का त्याग कर देती है, इसलिए 'रेशमी वस्त्र' जैसे शब्द यहाँ असंगत हैं।
10(i).
आचार्य शुक्ल की बाल बुद्धि भारतेंदु हरिश्चंद्र और राजा हरिश्चंद्र नाटक के नायक हरिश्चंद्र में अंतर क्यों नहीं कर पाती थी ? पाठ के आधार पर लिखिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 'प्रेमधन की छाया स्मृति' पाठ से लिया गया है, जो आचार्य रामचंद्र शुक्ल के संस्मरणों पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
बचपन में शुक्ल जी के मन में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के प्रति गहरी श्रद्धा थी।
जब उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र का नाम सुना, तो उनके बाल-मन ने दोनों को एक ही समझ लिया।
उन्हें लगता था कि राजा हरिश्चंद्र और कवि भारतेंदु एक ही दिव्य शक्ति के रूप हैं।
नाम की समानता और दोनों के प्रति व्याप्त सम्मान ने उनकी बुद्धि में यह भ्रम पैदा कर दिया था कि वे अलग-अलग व्यक्ति नहीं हैं।
Step 3: Final Answer:
अतः, श्रद्धा और नाम की समानता के कारण उनकी बाल-बुद्धि इन दोनों में भेद नहीं कर पाती थी।
Quick Tip: बचपन में प्रतीकों और महापुरुषों के प्रति अगाध श्रद्धा अक्सर ऐतिहासिक और वर्तमान व्यक्तित्वों के बीच की रेखा को धुंधला कर देती है।
10(ii).
'मेरे सिर पर सींग निकल रहे थे' – 'शेर' कहानी से उद्धृत इस कथन का क्या आशय है ? लेखक शहर से जंगल की ओर क्यों भागा था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
असगर वजाहत की कहानी 'शेर' एक व्यंग्यात्मक रचना है जो सत्ता और व्यवस्था के क्रूर तंत्र को दर्शाती है।
Step 2: Detailed Explanation:
'सिर पर सींग निकलना' यहाँ 'असामान्य' होने का प्रतीक है। व्यवस्था चाहती है कि सभी लोग भेड़-बकरियों की तरह आज्ञाकारी बनें और शेर (सत्ता) के मुँह में समा जाएँ।
लेखक का सींग निकलना यह दर्शाता है कि वह व्यवस्था के ढाँचे में फिट नहीं बैठ रहा है, वह अलग सोच रहा है।
लेखक शहर के भ्रष्टाचार और बनावटीपन से परेशान होकर सत्य और शांति की तलाश में जंगल की ओर भागा था, जहाँ उसे उम्मीद थी कि जीवन सरल होगा।
Step 3: Final Answer:
यह कथन व्यवस्था के प्रति प्रतिरोध को व्यक्त करता है।
Quick Tip: 'शेर' कहानी में शेर 'सत्ता' का प्रतीक है और जंगल 'निरंकुश व्यवस्था' का, जहाँ सब कुछ लील लिया जाता है।
10(iii).
अतुलित प्राकृतिक सौंदर्य के बावजूद सिंगरौली 'कालापानी' के नाम से क्यों जाना जाता है ? पाठ के संदर्भ में लिखिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 'जहाँ कोई वापसी नहीं' पाठ से है, जो औद्योगिक विकास के कारण हुए मानवीय नुकसान को दर्शाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
सिंगरौली अपने घने जंगलों और पर्वतों के कारण पहुँच से बाहर (दुर्गम) था। पुराने समय में यहाँ पहुँचना किसी सज़ा से कम नहीं था, इसलिए इसे 'कालापानी' कहा जाता था।
आधुनिक संदर्भ में, विकास के नाम पर यहाँ के हज़ारों लोगों को उनकी अपनी ज़मीन से बेदखल कर दिया गया।
यह विस्थापन उनके लिए 'कालापानी' जैसी सज़ा बन गया है, क्योंकि वे अपने मूल निवास पर कभी वापस नहीं लौट सकते।
Step 3: Final Answer:
प्राकृतिक सुंदरता के बाद भी, मानवीय पीड़ा और अलगाव ने इसे 'कालापानी' बना दिया है।
Quick Tip: 'कालापानी' यहाँ केवल एक स्थान नहीं बल्कि एक ऐसी स्थिति का प्रतीक है जहाँ से वापसी असंभव हो।
11(i).
'बहुत दिनान को' – कविता के आधार पर घनानंद की स्थिति का वर्णन कीजिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
रीतिमुक्त कवि घनानंद के काव्य में विरह की व्याकुलता का सजीव चित्रण मिलता है।
Step 2: Detailed Explanation:
घनानंद अपनी प्रिय 'सुजान' के विरह में तड़प रहे हैं।
वे कहते हैं कि बहुत दिनों से वे प्रिय की राह देख रहे हैं। उनकी दशा ऐसी है कि उनके प्राण शरीर छोड़ने को तैयार हैं लेकिन प्रिय के दर्शन या संदेश की उम्मीद में वे कंठ में ही अटके हुए हैं।
उनका मन विचलित है और वे निरंतर प्रिय की स्मृतियों में खोए रहते हैं। यह स्थिति उनके अगाध और निस्वार्थ प्रेम को प्रकट करती है।
Step 3: Final Answer:
घनानंद की स्थिति एक ऐसे विरही की है जो मृत्यु के द्वार पर खड़ा होकर भी केवल प्रिय के लिए जीवित है।
Quick Tip: घनानंद का प्रेम 'पीर' का काव्य है, जहाँ पीड़ा ही आनंद का स्रोत बन जाती है।
11(ii).
'वह लता वहीं की, जहाँ कली तू खिली' – पंक्ति में प्रयुक्त 'लता और कली' की प्रतीकात्मकता स्पष्ट करते हुए पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह पंक्ति निराला की शोक-गीत 'सरोज स्मृति' से उद्धृत है।
Step 2: Detailed Explanation:
यहाँ 'लता' निराला की दिवंगत पत्नी (सरोज की माँ) को कहा गया है और 'कली' उनकी पुत्री सरोज को।
आशय यह है कि सरोज अपनी माँ की ही प्रतिच्छाया थी। जिस ननिहाल में उसकी माँ (लता) पली-बढ़ी थी, उसी वातावरण में सरोज (कली) का भी लालन-पालन हुआ और वह विकसित हुई।
कवि अपनी पुत्री के रूप-रंग और संस्कारों में अपनी पत्नी की झलक देख रहे हैं।
Step 3: Final Answer:
यह पंक्ति पुत्री और माता के गहराते संबंधों तथा सरोज के बचपन के परिवेश को रेखांकित करती है।
Quick Tip: 'सरोज स्मृति' को हिंदी का प्रथम और सर्वश्रेष्ठ 'शोक-गीत' माना जाता है, जिसमें निराला ने अपनी पुत्री के प्रति वात्सल्य और करुणा को व्यक्त किया है।
11(iii).
वसंत आगमन पर बनारस शहर की जागृति और चेतना का वर्णन कविता के आधार पर कीजिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
केदारनाथ सिंह की कविता 'बनारस' इस शहर की आध्यात्मिकता और उसके जीवंत स्वरूप का वर्णन करती है।
Step 2: Detailed Explanation:
वसंत के आने पर बनारस में चारों ओर धूल उड़ने लगती है, जो इस शहर की जागृति का प्रतीक है।
गंगा के घाटों पर भीड़ बढ़ जाती है, भिखारी के खाली कटोरों में भी चमक आ जाती है क्योंकि दान-पुण्य बढ़ जाता है।
शहर की जड़ता टूटती है और जो कुछ भी सुस्त था, वह गतिशील हो उठता है। बंदरों की आँखों में भी एक नई नमी आ जाती है।
Step 3: Final Answer:
बनारस का वसंत केवल प्रकृति का बदलाव नहीं बल्कि शहर के सामूहिक उल्लास और श्रद्धा की अभिव्यक्ति है।
Quick Tip: बनारस में वसंत का आगमन 'अचानक' होता है, जो शहर की सदियों पुरानी जड़ता को एक झटके में जीवंत बना देता है।
12(i).
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए :
कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, 'लड्डू' । पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह 'लड्डू' की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह गद्यांश 'सुमिरिनी के मनके' पाठ के 'बालक बच गया' अंश से लिया गया है। यह रटंत शिक्षा प्रणाली पर एक गंभीर प्रहार है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रसंग: एक छोटे बालक से जब उसकी योग्यता से ऊपर के प्रश्न पूछे गए, तो उसने मशीनी उत्तर दिए। अंत में इनाम माँगने पर उसका असली 'बचपन' जाग उठा।
व्याख्या:
बालक का 'लड्डू' माँगना यह सिद्ध करता है कि ज्ञान के भारी बोझ के नीचे भी उसका मासूम बचपन मरा नहीं था।
पिता और शिक्षक उसे एक 'विद्वान यंत्र' बनाना चाहते थे, इसलिए वे निराश हुए।
लेखक ने इसे 'जीवित वृक्ष के मर्मर' से तुलना की है क्योंकि लड्डू की मांग एक स्वाभाविक मानवीय इच्छा थी, जबकि किताबी ज्ञान एक 'मरे काठ' की तरह निर्जीव था।
Step 3: Final Answer:
लेखक का मानना है कि बालक अपनी नैसर्गिक प्रवृत्तियों के कारण शिक्षा के अनावश्यक बोझ से 'बच' गया।
Quick Tip: इस पाठ का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार स्वाभाविक रूप से विकसित होने देना चाहिए, उसे 'ज्ञानी' बनाने की होड़ में उसका बचपन नहीं छीनना चाहिए।
13(i).
निराशा, ग्लानि, चिंता और क्षोभ के अपार जल में गोते खाते सूरदास को ऐसा कौन सा मंत्र मिला कि रोते-रोते उठ खड़ा हो वह विजय-गर्व की तरंग में राख के ढेर को दोनों हाथों से उड़ाने लगा ? 'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ के आधार पर लिखिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
प्रेमचंद की कहानी 'सूरदास की झोंपड़ी' संघर्ष और कभी न हार मानने वाले मानवीय स्वभाव की कथा है।
Step 2: Detailed Explanation:
सूरदास की झोंपड़ी और जमा-पूँजी जल जाने के बाद वह बहुत निराश था।
तभी उसने बच्चों के खेल में घिसु द्वारा मीठुआ से कहे गए शब्द सुने - "तुम खेल में रोते हो?"
ये शब्द सूरदास के लिए एक जीवन-मंत्र बन गए। उसे समझ आया कि जीवन एक खेल है और एक सच्चा खिलाड़ी हारने या नुकसान होने पर रोता नहीं है, बल्कि फिर से जीतने की कोशिश करता है।
इसी बोध ने उसके दुख को विजय के गर्व में बदल दिया और वह अपनी जली हुई झोंपड़ी की राख को उड़ाकर पुनः निर्माण का संकल्प करने लगा।
Step 3: Final Answer:
सूरदास के लिए खेल की भावना ही वह शक्ति बनी जिसने उसे राख से दोबारा उठने का साहस दिया।
Quick Tip: सूरदास का चरित्र यह सिखाता है कि भौतिक वस्तुएँ नष्ट हो सकती हैं, पर व्यक्ति का आत्मबल और संकल्प कभी नष्ट नहीं होना चाहिए।
13(iii).
विकास की औद्योगिक सभ्यता के विनाश की अपसभ्यता बनने के क्या कारण हैं ? पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के उपायों का उल्लेख कीजिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न आधुनिक विकास की विनाशकारी प्रकृति और उसके समाधान पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
अपसभ्यता बनने के कारण:
1. उद्योगों के लिए वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन।
2. नदियों का मार्ग रोकना और जल स्रोतों को प्रदूषित करना।
3. विकास के नाम पर मूल निवासियों को उजाड़ना, जिससे सांस्कृतिक और प्राकृतिक विच्छेद होता है।
संतुलन बनाए रखने के उपाय:
1. संधारणीय विकास (Sustainable Development) को अपनाना ताकि भावी पीढ़ी के लिए संसाधन बचे रहें।
2. सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ विकल्पों का उपयोग।
3. व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण और जल संचयन की तकनीकों को बढ़ावा देना।
Step 3: Final Answer:
जब विकास प्रकृति का सम्मान नहीं करता, तो वह विनाश की अपसभ्यता बन जाता है। इसे रोकने के लिए प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाना अनिवार्य है।
Quick Tip: पर्यावरण संतुलन के लिए 'प्रकृति की ओर वापसी' और आधुनिक तकनीक का संतुलित उपयोग ही भविष्य की सुरक्षा है।







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