The Central Board of Secondary Education (CBSE) successfully conducted the Class 12 Hindi Elective Exam 2026 on March 16, 2026. The CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper with Solution PDF is now available for download.

The question paper included objective questions, short answer questions, and long descriptive questions designed to assess students’ language proficiency and analytical skills.

CBSE Class 12 2026 Hindi Elective Question Paper with Solution PDF

CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper 2026 Download PDF Check Solution

Passage:

इस समूह में
इस अनगिनत अजनबी आवाजों में
कैसा दर्द है
कोई नहीं सुनता।
पर इन आवाजों को
और इन कराहों को
दुनिया सुने मैं ये चाहूँगा।

इस समूह में
इस अनगिनत अजनबी आवाजों में
कैसा दर्द है
कोई नहीं सुनता।
पर इन आवाजों को
और इन कराहों को
दुनिया सुने मैं ये चाहूँगा।

मेरी तो आदत है
रोशनी जहाँ भी हो
उसे खोज लाऊँगा
कातरता, चुप्पी या चीखें,
या हारे हुओं की खीज
जहाँ भी मिलेगी
(उन्हें प्यार के सितार पर बजाऊँगा
...... मैं कल फिर जनम लूँगा
कल फिर आऊँगा।)

Question 1(i):

कविता का वक्ता पुनर्जन्म लेने की बात क्यों कर रहा है ?

  • (A) पूर्व जन्म की इच्छाओं की पूर्ति के लिए
  • (B) महात्मा गांधी का उनका अधिकार दिलाने के लिए
  • (C) मातृभूमि की संतानो की रक्षा करने के लिए
  • (D) देश को पुनरुत्थान करने के लिए
Correct Answer: (4) देश को पुनरुत्थान करने के लिए
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Concept:
कविता में कवि समाज में फैले दुःख, पीड़ा और उपेक्षित लोगों की आवाज़ को सामने लाने की भावना व्यक्त करता है। वह उन लोगों के दर्द को दुनिया तक पहुँचाना चाहता है जिन्हें कोई नहीं सुनता। कवि स्वयं को समाज की चेतना के रूप में प्रस्तुत करता है और यह संकल्प व्यक्त करता है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह फिर से जन्म लेकर भी समाज में आशा, प्रेम और जागरूकता फैलाएगा।

Step 1: कविता में समाज की पीड़ा का चित्रण।
कवि कहता है कि समाज में अनेक अजनबी आवाज़ें और कराहें हैं, जिनमें बहुत दर्द छिपा है, परंतु कोई उन्हें सुनने वाला नहीं है। कवि चाहता है कि इन पीड़ित लोगों की आवाज़ दुनिया तक पहुँचे।

Step 2: कवि का संकल्प।
कवि बताता है कि उसकी आदत है कि जहाँ भी रोशनी (आशा, न्याय और सत्य) होगी, वह उसे खोजकर लाएगा। वह पीड़ा, चुप्पी, चीख और हारे हुए लोगों की निराशा को प्रेम और संवेदना के माध्यम से अभिव्यक्त करेगा।

Step 3: पुनर्जन्म का आशय।
कवि अंत में कहता है कि वह फिर से जन्म लेकर आएगा। इसका आशय यह है कि वह समाज में परिवर्तन, जागृति और पुनरुत्थान के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा।

इस प्रकार कवि का पुनर्जन्म लेने का उद्देश्य समाज में नई चेतना और देश के पुनरुत्थान के लिए कार्य करना है। Quick Tip: कविता आधारित प्रश्नों में कवि के भाव और उद्देश्य को समझना सबसे महत्वपूर्ण होता है। अक्सर सही उत्तर वही होता है जो कविता के मुख्य संदेश या भावना को व्यक्त करता है।


Question 1(ii):

कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कॉलम-I & कॉलम-II

1. कंठ देना & i. दर्द बाँटना

2. पीठ सहलाना & ii. सहारा देना

3. रोशनी में उठाना & iii. अपनाना

 

  • (A) (1-ii), (2-iii), (3-i)
  • (B) (1-iii), (2-i), (3-ii)
  • (C) (1-ii), (2-i), (3-iii)
  • (D) (1-i), (2-iii), (3-ii)
Correct Answer: (3) (1-ii), (2-i), (3-iii)
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Concept:
सुमेलन (Matching) प्रश्नों में दिए गए शब्दों या वाक्यांशों के सही अर्थ अथवा भावार्थ को पहचानकर उन्हें उपयुक्त विकल्प से जोड़ा जाता है। यहाँ प्रत्येक वाक्यांश का भावार्थ समझकर उसका सही मिलान करना आवश्यक है।

Step 1: “कंठ देना” का अर्थ समझना।
“कंठ देना” का अर्थ किसी को सहारा या समर्थन देना होता है।
अतः — \(1 \rightarrow ii\) (सहारा देना)

Step 2: “पीठ सहलाना” का भावार्थ।
“पीठ सहलाना” का अर्थ किसी के दुःख को समझना और उसके दर्द में सहभागी होना होता है।
अतः — \(2 \rightarrow i\) (दर्द बाँटना)

Step 3: “रोशनी में उठाना” का अर्थ।
“रोशनी में उठाना” का अर्थ है किसी को अपनाना, सम्मान देना या आगे बढ़ाना।
अतः — \(3 \rightarrow iii\) (अपनाना)

Step 4: सही सुमेलन लिखना।
\[ 1 \rightarrow ii, \qquad 2 \rightarrow i, \qquad 3 \rightarrow iii \]

अतः सही विकल्प है: (C) (1-ii), (2-i), (3-iii) Quick Tip: सुमेलन प्रश्नों में पहले उन शब्दों का मिलान करें जिनका अर्थ स्पष्ट हो। इससे बाकी विकल्पों का सही मिलान करना आसान हो जाता है।


Question 1(iii):

‘अचीन्ही आवाज़’ किनकी हैं?

  • (A) सर्वहारा वर्ग की
  • (B) स्वतंत्रता सेनानियों की
  • (C) साधारण आदमी की
  • (D) अपरिचित लोगों की
Correct Answer: (1) सर्वहारा वर्ग की
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Concept:
कविता में “अचीन्ही आवाज़” का अर्थ उन आवाज़ों से है जिन्हें समाज पहचान नहीं पाता या जिनकी ओर सामान्यतः ध्यान नहीं दिया जाता। ये आवाज़ें उन लोगों की होती हैं जो समाज में उपेक्षित, पीड़ित और शोषित हैं। ऐसे लोग अपनी पीड़ा व्यक्त तो करते हैं, पर उनकी आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है।

Step 1: कविता की पंक्तियों का आशय समझना।
कवि कहता है कि इस समूह में अनगिनत अजनबी आवाज़ें हैं जिनमें दर्द भरा हुआ है, पर कोई उन्हें सुनने वाला नहीं है। इसका संकेत उन लोगों की ओर है जिनकी समस्याएँ और कष्ट समाज में अनदेखे रह जाते हैं।

Step 2: ‘अचीन्ही आवाज़’ का भावार्थ।
“अचीन्ही” का अर्थ है — जिसे पहचाना न गया हो। यहाँ इसका प्रयोग समाज के उस वर्ग के लिए हुआ है जो उपेक्षित और शोषित है।

Step 3: उचित विकल्प का चयन।
समाज में उपेक्षित और शोषित लोगों को सर्वहारा वर्ग कहा जाता है। कविता में उन्हीं की पीड़ा और आवाज़ का उल्लेख किया गया है।

अतः सही उत्तर है — (A) सर्वहारा वर्ग की Quick Tip: कविता बोध के प्रश्नों में शब्दों का शाब्दिक अर्थ ही नहीं, बल्कि उनका भावार्थ समझना भी आवश्यक होता है। अक्सर कवि प्रतीकों और रूपकों के माध्यम से सामाजिक वर्गों या परिस्थितियों को व्यक्त करता है।


Question 1(iv):

काव्यांश में प्रयुक्त 'रोशनी' से क्या अभिप्राय है?

Correct Answer:
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Concept:
कविता में कई शब्द प्रतीकात्मक रूप में प्रयुक्त होते हैं। “रोशनी” भी ऐसा ही एक प्रतीक है जो केवल प्रकाश को नहीं दर्शाता, बल्कि आशा, जागरूकता, सत्य, न्याय और सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देता है।

Step 1: कविता की पंक्ति का अर्थ समझना।
कवि कहता है —
“मेरी तो आदत है

रोशनी जहाँ भी हो

उसे खोज लाऊँगा।”

इन पंक्तियों में कवि यह बताना चाहता है कि वह जहाँ भी आशा, सत्य और सकारात्मकता दिखाई देगी, उसे खोजकर समाज के सामने लाएगा।

Step 2: ‘रोशनी’ का भावार्थ।
यहाँ “रोशनी” का प्रयोग प्रतीक के रूप में किया गया है। इसका अर्थ है —
सत्य, आशा, जागरूकता और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली शक्ति।

Step 3: अंतिम निष्कर्ष।
अतः काव्यांश में प्रयुक्त “रोशनी” से अभिप्राय आशा, सत्य और समाज में जागरूकता तथा सकारात्मक परिवर्तन से है। Quick Tip: कविता में कई शब्द प्रतीकात्मक होते हैं। जैसे – “रोशनी” आशा और ज्ञान का प्रतीक हो सकती है, जबकि “अंधकार” निराशा या अज्ञान का संकेत देता है। प्रश्न हल करते समय इन प्रतीकों का भावार्थ समझना आवश्यक है।


Question 1(v):

काव्यांश में कौन पुनर्जन्म लेने की बात कर रहा है? उसकी दो विशेषताएँ लिखिए।

Correct Answer:
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Concept:
कविता में वक्ता स्वयं कवि है, जो समाज के दुखी और उपेक्षित लोगों की पीड़ा को समझता है। वह समाज में आशा, प्रेम और जागरूकता फैलाने के लिए कार्य करना चाहता है। इसी उद्देश्य से वह पुनर्जन्म लेने की बात करता है।

Step 1: कविता में पुनर्जन्म का उल्लेख।
कवि कहता है —
“मैं कल फिर जनम लूँगा

कल फिर आऊँगा।”

इससे स्पष्ट होता है कि कवि (वक्ता) ही पुनर्जन्म लेने की बात कर रहा है।

Step 2: कवि की विशेषताएँ।

कवि की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं —


कवि संवेदनशील है और समाज के पीड़ित एवं उपेक्षित लोगों के दुःख को समझता है।
वह समाज में आशा, प्रेम और जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर प्रयास करने वाला है।


अतः काव्यांश में कवि पुनर्जन्म लेने की बात कर रहा है। Quick Tip: कविता बोध के वर्णनात्मक प्रश्नों में उत्तर लिखते समय पहले यह स्पष्ट करें कि वक्ता कौन है, फिर उसके विचार या विशेषताओं को संक्षेप में बिंदुओं में लिखें।


Question 1(vi):

कातरता, चुप्पी या चीखों को प्यार के सितार पर बजाने से क्या अभिप्राय है?

Correct Answer:
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Concept:
कविता में “प्यार के सितार पर बजाना” एक रूपक (metaphor) है। इसके माध्यम से कवि यह व्यक्त करता है कि वह लोगों के दुःख और पीड़ा को प्रेम, संवेदना और सहानुभूति के साथ व्यक्त करेगा।

Step 1: कविता की पंक्ति का अर्थ समझना।
कवि कहता है कि जहाँ भी कातरता, चुप्पी या चीखें मिलेंगी, वह उन्हें प्यार के सितार पर बजाएगा। इसका अर्थ है कि वह पीड़ित और दुःखी लोगों की भावनाओं को समझकर उन्हें प्रेम और संवेदना के माध्यम से व्यक्त करेगा।

Step 2: भावार्थ।
यहाँ कवि का आशय है कि वह समाज में फैले दुःख, पीड़ा और निराशा को प्रेम, करुणा और सहानुभूति के साथ प्रकट करेगा तथा लोगों तक पहुँचाएगा।

Step 3: निष्कर्ष।
अतः “कातरता, चुप्पी या चीखों को प्यार के सितार पर बजाने” का अर्थ है पीड़ित और दुखी लोगों की भावनाओं को प्रेम और सहानुभूति के साथ व्यक्त करना तथा उनकी आवाज़ दुनिया तक पहुँचाना। Quick Tip: कविता में रूपक या प्रतीकात्मक अभिव्यक्तियों को समझते समय यह देखना चाहिए कि कवि किस भावना या संदेश को व्यक्त करना चाहता है।


Passage:

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

जल ही जीवन है, जल को बचा लेना जैसे भावी जीवन को बचा लेना है। गर्मी बढ़ने के साथ ही जल की जरूरत और अधिक महसूस की जाती है। जल-संकट के मौजूदा हालात को देखते हुए जल आपूर्ति के विकल्प के रूप में तरण-तारिणी तालाब के महत्त्व को आज समझने की ज़रूरत है। जब देश में बड़े-बड़े बाँध अस्तित्व में नहीं थे, तब तालाब ही हमारे सिंचाई का एकमात्र साधन थे। वायु प्रवाह एवम् पर्यावरण के संतुलन की भूमिका में तालाब सहायक रहे हैं। आज जल-प्रबंधन और जल संचयन के हार्वेस्टिंग सिस्टम की जो दलीलें दी जाती हैं वह तालाब की संरचना है। तालाब हमारे जल सरोकार के परंपरागत साधन रहे हैं, उसे और अधिक वृहत् और विकसित रूप देकर इस साधन का अधिकाधिक लाभ ले सकते हैं।

बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए यदि जल आपूर्ति का वास्तविक चिंतन करें तो तालाब को सुविधा के सागर के रूप में देख सकते हैं। लोक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तालाबों के संरक्षण एवं संवर्धन को प्राथमिकता मिले यह समय की ज़रूरत है। भोपाल का रानी सरोवर हो, या पाण्डु महल को आकार देता विशाल सरोवर अथवा रायपुर को दर्शनीय बनाता बूढ़ा तालाब, सौंदर्यीकरण का इससे बेहतर मिसाल वह भी इसके नैसर्गिक रूप में और क्या हो सकता है। नदी, तालाब एवम् सागर से होकर गुजरने वाली हवाएँ बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी होती हैं।

तालाब में सिर्फ जल ही नहीं होता बल्कि इसमें लोक दर्शन के तत्त्व भी मौजूद होते हैं। ग्राम्य संस्कृति में लोक आस्था के दो मुख्य केंद्र हैं - पहला चौपाल, दूसरा तालाब। मंगल उत्सव हो या दारुण-गाथा, चर्चा में तल्लीनता देखी व सुनी जा सकती है। हमारे तालाब की लोक-संस्कृति का ही कमाल है कि हम बिना किसी शुल्क के सूर्य दर्शन व प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ उठा लेते हैं।

तालाब हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। हमें इसकी वर्तमान दशा को सुधारना होगा तभी भविष्य में उसकी मौजूदगी का लाभ हम ले सकेंगे।

Question 2(i):

वर्षा जल संचयन के किस पारंपरिक रूप का वर्णन गद्यांश में किया गया है ?

  • (A) नदी
  • (B) तालाब
  • (C) कुआँ
  • (D) बावड़ी
Correct Answer: (2) तालाब
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Concept:
गद्यांश में जल संरक्षण के पारंपरिक साधनों का महत्व बताया गया है। विशेष रूप से तालाबों को वर्षा जल संचयन, सिंचाई तथा पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत उपयोगी बताया गया है।

Step 1: गद्यांश के मुख्य विचार को समझना।
गद्यांश में बताया गया है कि पहले जब बड़े-बड़े बाँध नहीं थे, तब तालाब ही सिंचाई और जल संचयन का प्रमुख साधन थे।

Step 2: वर्षा जल संचयन से संबंध।
तालाब वर्षा के जल को एकत्रित करके उसे भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखते हैं। इस कारण यह वर्षा जल संचयन का पारंपरिक और प्रभावी माध्यम रहे हैं।

Step 3: उचित विकल्प का चयन।
गद्यांश में बार-बार तालाबों के महत्व और उपयोगिता का वर्णन किया गया है।

अतः सही उत्तर है — (B) तालाब Quick Tip: पैसेज आधारित प्रश्नों में उत्तर प्रायः उसी अनुच्छेद में मिलता है। पहले गद्यांश के मुख्य विचार को समझें और फिर उसी से संबंधित विकल्प चुनें।


Question 2(ii):

गद्यांश में तालाबों के लिए 'तरण-तारिणी' विशेषण का प्रयोग उसकी किस विशेषता को दर्शाने के लिए किया गया है?

  • (A) बच्चों-बड़ों के तैरने के काम आने की
  • (B) बड़े-बूढ़ों की बातचीत का आधार स्थल होने की
  • (C) जल-आपूर्ति का प्रमुख स्रोत होने की
  • (D) धार्मिक रीति-रिवाजों का आधार स्थल होने की
Correct Answer: (3) जल-आपूर्ति का प्रमुख स्रोत होने की
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Concept:
“तरण-तारिणी” शब्द का सामान्य अर्थ है — संकट से पार लगाने वाला या जीवन को बचाने वाला। गद्यांश में इस विशेषण का प्रयोग तालाबों के उस महत्त्व को दर्शाने के लिए किया गया है, जिसके माध्यम से जल की आवश्यकता पूरी होती है और जीवन सुरक्षित रहता है।

Step 1: गद्यांश के कथन को समझना।
गद्यांश में कहा गया है कि जल-संकट की स्थिति में तालाब जल आपूर्ति के एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में कार्य करते हैं।

Step 2: ‘तरण-तारिणी’ शब्द का भावार्थ।
यह शब्द संकेत करता है कि तालाब लोगों को जल संकट से बचाते हैं और जीवन को बनाए रखने में सहायता करते हैं।

Step 3: उचित विकल्प का चयन।
तालाबों को “तरण-तारिणी” इसलिए कहा गया है क्योंकि वे जल-आपूर्ति का प्रमुख स्रोत हैं।

अतः सही उत्तर है — (C) जल-आपूर्ति का प्रमुख स्रोत होने की Quick Tip: गद्यांश में प्रयुक्त विशेषणों या रूपकों का अर्थ समझने के लिए उस शब्द के आसपास लिखे वाक्यों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। वहीं से उसका सही भावार्थ स्पष्ट हो जाता है।


Question 2(iii):

गद्यांश में रानी सागर, बूढ़ा तालाब और विशाल सागर का उदाहरण किस उद्देश्य से दिया गया है?

  • (A) इन तालाबों के रूपाकार से परिचित कराने के लिए
  • (B) भारतीय संस्कृति में तालाबों की महत्ता दर्शाने के लिए
  • (C) तालाबों की भव्यता का उल्लेख करने के लिए
  • (D) मध्य भारत की वास्तुकला से परिचित कराने के लिए
Correct Answer: (2) भारतीय संस्कृति में तालाबों की महत्ता दर्शाने के लिए
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Concept:
गद्यांश में लेखक तालाबों के सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व को स्पष्ट करना चाहता है। विभिन्न प्रसिद्ध तालाबों के उदाहरण देकर यह बताया गया है कि तालाब केवल जल का स्रोत ही नहीं बल्कि संस्कृति और सौंदर्य का भी प्रतीक हैं।

Step 1: गद्यांश के संदर्भ को समझना।
गद्यांश में भोपाल का रानी सरोवर, रायपुर का बूढ़ा तालाब तथा अन्य विशाल सरोवरों का उल्लेख किया गया है। इन उदाहरणों के माध्यम से तालाबों की उपयोगिता और सांस्कृतिक महत्ता को बताया गया है।

Step 2: उदाहरण देने का उद्देश्य।
लेखक इन तालाबों का उल्लेख इसलिए करता है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भारत में तालाब केवल जल संचयन का साधन ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और सौंदर्य का भी प्रतीक हैं।

Step 3: सही विकल्प का चयन।
इन उदाहरणों का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति में तालाबों की महत्ता को दर्शाना है।

अतः सही उत्तर है — (B) भारतीय संस्कृति में तालाबों की महत्ता दर्शाने के लिए Quick Tip: गद्यांश में दिए गए उदाहरण सामान्यतः किसी विचार को स्पष्ट करने या उसके महत्व को दर्शाने के लिए होते हैं। इसलिए उदाहरण से पहले और बाद के वाक्यों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।


Question 2(iv):

पर्यावरण-संतुलन बनाए रखने में तालाबों की क्या भूमिका है?

Correct Answer:
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Concept:
गद्यांश में तालाबों को पर्यावरण संतुलन बनाए रखने वाला महत्वपूर्ण प्राकृतिक साधन बताया गया है। तालाब जल का संचयन करते हैं और आसपास के वातावरण को संतुलित बनाए रखने में सहायक होते हैं।

Step 1: गद्यांश के कथन को समझना।
गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तालाब वायु प्रवाह और पर्यावरण के संतुलन में सहायक होते हैं।

Step 2: तालाबों की पर्यावरणीय भूमिका।
तालाबों में संचित जल आसपास के वातावरण को शीतल बनाए रखता है तथा जल स्रोतों के कारण क्षेत्र में नमी बनी रहती है। इससे वायु प्रवाह और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।

Step 3: निष्कर्ष।
अतः तालाब जल संचयन, वायु प्रवाह तथा वातावरण को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। Quick Tip: गद्यांश आधारित वर्णनात्मक प्रश्नों में उत्तर देते समय उसी अनुच्छेद के मुख्य वाक्यों को संक्षेप में अपने शब्दों में लिखना चाहिए।


Question 2(v):

ग्रामीण संस्कृति में तालाबों का क्या महत्त्व है?

Correct Answer:
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Concept:
गद्यांश में बताया गया है कि तालाब केवल जल स्रोत ही नहीं बल्कि ग्रामीण जीवन और लोक-संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं। गाँवों में सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ तालाब के आसपास ही संपन्न होती रही हैं।

Step 1: गद्यांश का संदर्भ।
गद्यांश में कहा गया है कि ग्राम्य संस्कृति में दो प्रमुख लोक आस्था केंद्र होते हैं — चौपाल और तालाब।

Step 2: तालाब का सामाजिक महत्व।
गाँव के लोग मंगल उत्सव, चर्चा और सामाजिक गतिविधियों के लिए तालाब के पास एकत्रित होते हैं। तालाब ग्रामीण जीवन में मेल-मिलाप और सामूहिकता का केंद्र होता है।

Step 3: निष्कर्ष।
अतः ग्रामीण संस्कृति में तालाब सामाजिक, सांस्कृतिक और लोक-आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र हैं। Quick Tip: गद्यांश में जब किसी स्थान को सांस्कृतिक केंद्र बताया जाता है, तो इसका अर्थ होता है कि वहाँ सामाजिक गतिविधियाँ, उत्सव और लोगों का मेल-जोल होता है।


Question 2(vi):

जल-संचयन एवं जल-संरक्षण के बीच का अंतर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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Concept:
जल-संचयन और जल-संरक्षण दोनों ही जल प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ हैं। जल-संचयन का अर्थ है जल को एकत्रित करना, जबकि जल-संरक्षण का अर्थ है जल का सोच-समझकर और सीमित उपयोग करना।

Step 1: जल-संचयन का अर्थ।
जल-संचयन का तात्पर्य वर्षा के जल या अन्य स्रोतों से प्राप्त जल को एकत्रित करके भविष्य के उपयोग के लिए सुरक्षित रखना है।
उदाहरण: वर्षा के जल को तालाब, कुएँ या टैंकों में एकत्रित करना।

Step 2: जल-संरक्षण का अर्थ।
जल-संरक्षण का अर्थ है जल का अनावश्यक उपयोग रोकना तथा उसका सही और सीमित उपयोग करना।

उदाहरण: नल को खुला न छोड़ना, सिंचाई में टपक (ड्रिप) प्रणाली का उपयोग करना आदि।

Step 3: अंतर स्पष्ट करना।


जल-संचयन में जल को एकत्रित किया जाता है।
जल-संरक्षण में जल का सही और सीमित उपयोग किया जाता है।


अतः जल-संचयन जल को इकट्ठा करने की प्रक्रिया है, जबकि जल-संरक्षण जल के उचित उपयोग से उसे बचाने की प्रक्रिया है। Quick Tip: परीक्षा में अंतर बताने वाले प्रश्नों में दोनों अवधारणाओं की परिभाषा लिखकर उनके उदाहरण देने से उत्तर अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनता है।


Question 2(vii):

हमारे पूर्वज जल-संचयन और संरक्षण के मामले में हमसे अधिक समझदार थे, कैसे? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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Concept:
प्राचीन समय में लोग प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग बहुत सोच-समझकर करते थे। हमारे पूर्वज जल के महत्व को भली-भाँति समझते थे, इसलिए उन्होंने जल-संचयन और संरक्षण के कई पारंपरिक उपाय विकसित किए थे।

Step 1: पारंपरिक जल-संचयन के साधन।
हमारे पूर्वज वर्षा जल को संग्रहित करने के लिए तालाब, कुएँ, बावड़ियाँ और सरोवर बनाते थे, जिससे वर्षा का जल व्यर्थ न जाए।

Step 2: जल का संतुलित उपयोग।
वे जल का उपयोग बहुत सावधानी और आवश्यकता के अनुसार करते थे, जिससे जल की बर्बादी नहीं होती थी।

Step 3: पर्यावरण के प्रति जागरूकता।
तालाब और अन्य जल स्रोत पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होते थे। इससे प्रकृति और मानव जीवन दोनों को लाभ मिलता था।

Step 4: निष्कर्ष।
अतः हमारे पूर्वज जल के महत्व को समझते थे और जल-संचयन तथा संरक्षण के प्रभावी उपाय अपनाते थे, इसलिए वे इस मामले में हमसे अधिक समझदार थे। Quick Tip: वर्णनात्मक प्रश्नों में उत्तर लिखते समय कारणों को क्रमबद्ध बिंदुओं में लिखने से उत्तर अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनता है।


Question 3(i):

टी.वी. के संदर्भ में नैट या नैट-साउंड से क्या अभिप्राय है? इनकी क्या उपयोगिता है?

(शब्द सीमा — लगभग 20 शब्द)

Correct Answer:
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Concept:
टी.वी. पत्रकारिता में ध्वनि का महत्वपूर्ण स्थान होता है। कार्यक्रम या समाचार को अधिक वास्तविक और प्रभावशाली बनाने के लिए प्राकृतिक ध्वनियों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें नैट-साउंड कहा जाता है।

Step 1: नैट-साउंड का अर्थ।
नैट-साउंड (Natural Sound) से अभिप्राय किसी घटना या दृश्य के साथ स्वाभाविक रूप से आने वाली ध्वनियों से है, जैसे भीड़ का शोर, तालियाँ, या वातावरण की आवाज़ें।

Step 2: नैट-साउंड की उपयोगिता।
नैट-साउंड से कार्यक्रम अधिक यथार्थपूर्ण, प्रभावशाली और जीवंत बन जाता है तथा दर्शकों को घटना का वास्तविक अनुभव होता है। Quick Tip: मीडिया अध्ययन में तकनीकी शब्दों के उत्तर संक्षिप्त, स्पष्ट और उदाहरण सहित लिखना चाहिए ताकि अवधारणा आसानी से समझाई जा सके।


Question 3(ii):

भारत में इंटरनेट पत्रकारिता की स्थिति स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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Concept:
इंटरनेट पत्रकारिता वह पत्रकारिता है जिसमें समाचार और सूचनाएँ इंटरनेट के माध्यम से वेबसाइट, पोर्टल और सोशल मीडिया पर प्रकाशित की जाती हैं। भारत में इंटरनेट के प्रसार के साथ इसका महत्व तेजी से बढ़ा है।

Step 1: भारत में इंटरनेट पत्रकारिता का विकास।
भारत में इंटरनेट पत्रकारिता का आरंभ 1990 के दशक के अंत में हुआ। धीरे-धीरे प्रमुख समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों ने अपने ऑनलाइन संस्करण शुरू किए।

Step 2: वर्तमान स्थिति।
आज भारत में इंटरनेट पत्रकारिता बहुत तेजी से विकसित हो रही है। समाचार वेबसाइट, मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया के माध्यम से लोग तुरंत समाचार प्राप्त कर सकते हैं।

Step 3: महत्त्व।
इंटरनेट पत्रकारिता ने समाचारों को अधिक तेज़, सुलभ और व्यापक बना दिया है, जिससे लोग किसी भी समय और स्थान पर समाचार प्राप्त कर सकते हैं। Quick Tip: मीडिया अध्ययन के वर्णनात्मक प्रश्नों में विकास, वर्तमान स्थिति और महत्व — इन तीन बिंदुओं में उत्तर लिखने से उत्तर अधिक व्यवस्थित बनता है।


Question 3(iii):

खोजी रिपोर्ट और विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के बीच का अंतर स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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Concept:
पत्रकारिता में विभिन्न प्रकार की रिपोर्ट लिखी जाती हैं। खोजी रिपोर्ट और विश्लेषणात्मक रिपोर्ट दोनों महत्वपूर्ण हैं, परंतु इनके उद्देश्य और शैली में अंतर होता है।

Step 1: खोजी रिपोर्ट (Investigative Report)।
खोजी रिपोर्ट में पत्रकार किसी छिपे हुए तथ्य, भ्रष्टाचार या अनियमितता का गहराई से पता लगाकर उसे सामने लाता है। इसमें गुप्त जानकारी और प्रमाणों की खोज की जाती है।

Step 2: विश्लेषणात्मक रिपोर्ट (Analytical Report)।
विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में किसी घटना, समस्या या विषय का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है तथा उसके कारणों और प्रभावों को समझाया जाता है।

Step 3: मुख्य अंतर।


खोजी रिपोर्ट का उद्देश्य छिपे हुए तथ्यों को उजागर करना होता है।
विश्लेषणात्मक रिपोर्ट का उद्देश्य किसी घटना या विषय का विश्लेषण करना होता है।


अतः खोजी रिपोर्ट तथ्य खोजने पर आधारित होती है, जबकि विश्लेषणात्मक रिपोर्ट किसी विषय की गहराई से व्याख्या और विश्लेषण प्रस्तुत करती है। Quick Tip: अंतर बताने वाले प्रश्नों में दोनों विषयों की परिभाषा लिखकर उनके उद्देश्य या विशेषताओं की तुलना करने से उत्तर स्पष्ट हो जाता है।


Question 4(i):

प्राकृतिक आपदाओं का विकराल रूप

Correct Answer:
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Concept:
प्राकृतिक आपदाएँ वे घटनाएँ हैं जो प्रकृति के कारण उत्पन्न होती हैं और मानव जीवन, पर्यावरण तथा संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाती हैं। जब इन आपदाओं का प्रभाव अत्यधिक विनाशकारी हो जाता है, तब वे विकराल रूप धारण कर लेती हैं।

Step 1: प्राकृतिक आपदाओं का स्वरूप।
भूकंप, बाढ़, चक्रवात, सूखा, भूस्खलन और सुनामी जैसी घटनाएँ प्राकृतिक आपदाओं के प्रमुख उदाहरण हैं। इनसे जन-धन की भारी हानि होती है तथा सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।

Step 2: विकराल रूप के कारण।
प्राकृतिक आपदाओं का विकराल रूप कई कारणों से बढ़ जाता है, जैसे — पर्यावरण का असंतुलन, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और अनियोजित विकास।

Step 3: प्रभाव।
इन आपदाओं से हजारों लोगों की जान चली जाती है, घर और फसलें नष्ट हो जाती हैं तथा आर्थिक और सामाजिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

Step 4: निष्कर्ष।
अतः प्राकृतिक आपदाओं के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। Quick Tip: रचनात्मक लेखन के प्रश्नों में विषय का परिचय, कारण, प्रभाव और समाधान — इन चार भागों में उत्तर लिखने से लेख अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनता है।


Question 4(ii):

जब मैंने अध्यापक/अध्यापिका की भूमिका निभाई

Correct Answer:
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Concept:
अध्यापक की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने वाला और उनके व्यक्तित्व के विकास में सहायक होता है। जब किसी छात्र को अध्यापक की भूमिका निभाने का अवसर मिलता है, तो उसे जिम्मेदारी और नेतृत्व का अनुभव होता है।

Step 1: अनुभव का प्रारंभ।
एक दिन हमारे विद्यालय में शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को अध्यापक की भूमिका निभाने का अवसर दिया गया। मुझे भी एक कक्षा को पढ़ाने का अवसर मिला।

Step 2: अध्यापक की जिम्मेदारी का अनुभव।
जब मैं कक्षा में गया और विद्यार्थियों को पढ़ाना शुरू किया, तब मुझे समझ में आया कि अध्यापक बनना कितना जिम्मेदारी भरा कार्य है। विद्यार्थियों का ध्यान बनाए रखना और विषय को सरल ढंग से समझाना आसान नहीं था।

Step 3: सीख और प्रेरणा।
इस अनुभव से मुझे यह समझ में आया कि अध्यापक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने हमें शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन और जीवन के मूल्य भी सिखाए।

Step 4: निष्कर्ष।
इस अनुभव ने मुझे अध्यापकों के प्रति और अधिक सम्मान से भर दिया। मैंने यह महसूस किया कि अध्यापक वास्तव में समाज के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं। Quick Tip: आत्मकथात्मक रचनात्मक लेखन में अपने अनुभव को क्रमबद्ध तरीके से लिखें — प्रारंभ, अनुभव का वर्णन और अंत में उससे मिली सीख अवश्य लिखें।


Question 4(iii):

जब पिताजी का स्थानांतरण दुर्गम स्थान में हुआ

Correct Answer:
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Concept:
स्थानांतरण जीवन का एक सामान्य हिस्सा है, विशेषकर उन परिवारों के लिए जिनके सदस्य सरकारी सेवाओं में कार्यरत होते हैं। जब किसी दुर्गम स्थान पर स्थानांतरण होता है, तो नई परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बैठाना चुनौतीपूर्ण होता है।

Step 1: स्थानांतरण की सूचना।
एक दिन पिताजी को सूचना मिली कि उनका स्थानांतरण एक दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में हो गया है। यह स्थान शहर से दूर था और वहाँ सुविधाएँ भी बहुत कम थीं। यह समाचार सुनकर परिवार के सभी सदस्य थोड़े चिंतित हो गए।

Step 2: नई परिस्थितियों का सामना।
जब हम उस स्थान पर पहुँचे, तो देखा कि वहाँ का वातावरण शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर था, परंतु यातायात, विद्यालय और चिकित्सा जैसी सुविधाएँ सीमित थीं। शुरुआत में हमें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

Step 3: अनुभव और सीख।
धीरे-धीरे हमने वहाँ की परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठा लिया। इस अनुभव ने हमें सादगी, धैर्य और प्रकृति के निकट रहने का महत्व सिखाया।

Step 4: निष्कर्ष।
पिताजी का यह स्थानांतरण हमारे लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ सीख देने वाला अनुभव भी साबित हुआ। इससे हमें जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक बने रहने की प्रेरणा मिली। Quick Tip: रचनात्मक लेखन में घटना को क्रमबद्ध ढंग से लिखें—पहले घटना का परिचय, फिर अनुभव का वर्णन और अंत में उससे मिली सीख लिखना उत्तर को प्रभावी बनाता है।


Question 5(i):

चित्रकला, संगीतकला, नृत्यकला की तरह कविता लेखन की कला सिखाई क्यों नहीं जा सकती?

Correct Answer:
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Concept:
कविता लेखन एक सृजनात्मक कला है, जो मुख्यतः कवि की संवेदनशीलता, कल्पनाशक्ति और अनुभूति पर आधारित होती है। इसे केवल नियमों या अभ्यास से पूरी तरह नहीं सिखाया जा सकता।

Step 1: कविता का स्वभाव।
कविता मनुष्य की भावनाओं, अनुभूतियों और कल्पनाओं की स्वाभाविक अभिव्यक्ति होती है। यह कवि के आंतरिक अनुभवों से उत्पन्न होती है।

Step 2: अन्य कलाओं से अंतर।
चित्रकला, संगीतकला और नृत्यकला में तकनीक, अभ्यास और नियमों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा सकता है, जबकि कविता में मुख्य भूमिका रचनात्मक प्रतिभा और संवेदनशीलता की होती है।

Step 3: निष्कर्ष।
अतः कविता लेखन की कला पूरी तरह सिखाई नहीं जा सकती, क्योंकि यह कवि की जन्मजात प्रतिभा, अनुभव और कल्पनाशक्ति पर निर्भर करती है। Quick Tip: साहित्य सिद्धांत के प्रश्नों में उत्तर लिखते समय विषय की अवधारणा, उसका कारण और संक्षिप्त निष्कर्ष अवश्य लिखना चाहिए।


Question 5(ii):

नाटक के मंच निर्देश हमेशा वर्तमान काल में ही क्यों संयोजित किए जाते हैं? उदाहरण सहित लिखिए।

Correct Answer:
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Concept:
नाटक एक दृश्य कला है, जिसमें घटनाएँ मंच पर उसी समय घटित होती हुई दिखाई जाती हैं। इसलिए नाटक के मंच निर्देश वर्तमान समय में होने वाली क्रियाओं को दर्शाने के लिए प्रायः वर्तमान काल में लिखे जाते हैं।

Step 1: मंच निर्देश का अर्थ।
मंच निर्देश वे निर्देश होते हैं जो नाटक में पात्रों की गतिविधियों, भाव-भंगिमाओं, प्रवेश, निकास और मंच की स्थिति को स्पष्ट करते हैं।

Step 2: वर्तमान काल का प्रयोग।
मंच पर घटनाएँ उसी समय घटित होती हुई दिखाई देती हैं, इसलिए निर्देश भी वर्तमान काल में लिखे जाते हैं ताकि अभिनेता उसी क्षण उन क्रियाओं को मंच पर प्रस्तुत कर सकें।

Step 3: उदाहरण।
जैसे —
“राम मंच पर प्रवेश करता है और सीता की ओर देखता है।”

यहाँ “प्रवेश करता है” और “देखता है” वर्तमान काल में हैं, जो मंच पर उसी समय होने वाली क्रिया को दर्शाते हैं।

Step 4: निष्कर्ष।
अतः नाटक के मंच निर्देश वर्तमान काल में लिखे जाते हैं ताकि मंच पर घटित हो रही क्रियाओं को स्पष्ट और जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा सके। Quick Tip: नाटक से जुड़े प्रश्नों में मंच निर्देश, संवाद और अभिनय की भूमिका को समझकर उदाहरण सहित उत्तर लिखने से उत्तर अधिक प्रभावी बनता है।


Question 5(iii):

कहानी किसे कहते हैं? इसके तत्वों की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।

Correct Answer:
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Concept:
कहानी साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा है, जिसमें किसी घटना, अनुभव या कल्पना को रोचक और क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। इसका उद्देश्य पाठक का मनोरंजन करने के साथ-साथ किसी विचार या संदेश को प्रस्तुत करना होता है।

Step 1: कहानी की परिभाषा।
कहानी वह गद्य रचना है जिसमें किसी घटना, पात्र या अनुभव को संक्षिप्त, रोचक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।

Step 2: कहानी के मुख्य तत्व।


कथानक: कहानी की मुख्य घटना या घटनाओं का क्रम।
पात्र: वे व्यक्ति या चरित्र जो कहानी की घटनाओं में भाग लेते हैं।
संवाद: पात्रों के बीच होने वाली बातचीत।
देश-काल और वातावरण: वह स्थान, समय और परिस्थितियाँ जिनमें कहानी घटित होती है।
उद्देश्य या संदेश: कहानी के माध्यम से दिया जाने वाला मुख्य विचार या शिक्षा।


Step 3: निष्कर्ष।
इन सभी तत्वों के समन्वय से कहानी रोचक, प्रभावशाली और अर्थपूर्ण बनती है। Quick Tip: कहानी के तत्व याद रखने के लिए “कथानक, पात्र, संवाद, देश-काल और उद्देश्य” — इन पाँच मुख्य बिंदुओं को क्रम से लिखना सबसे प्रभावी तरीका होता है।


Passage:

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प का चयन कर लिखिए:

बड़ी हवेली की बड़ी बहुरिया ने हरगोबिन को पीढ़ी दी और आँख के इशारे से कुछ देर चुपचाप बैठने को कहा। बड़ी हवेली नाममात्र की ही बड़ी हवेली है। ........ बड़े भैया के मरने के बाद ही जैसे सब खेल खत्म हो गया। तीनों भाइयों ने आपस में लड़ाई-झगड़ा शुरू किया। रैयतों ने जमीन पर दावे करके दखल किया, फिर तीनों भाई गाँव छोड़कर शहर में जा बसे, रह गई बड़ी बहुरिया-कहाँ जाती बेचारी। भगवान भले आदमी को ही कष्ट देते हैं। नहीं तो एक घंटे की बीमारी में बड़े भैया क्यों मरते? ....... बड़ी बहुरिया की देह से जेवर खींच-खींचकर बँटवारे की लीला हुई थी। हरगोबिन ने देखी है अपनी आँखों से द्रौपदी चीर-हरण लीला। बनारसी साड़ी को तीन टुकड़े करके बँटवारा किया था, निर्दयी भाइयों ने। बेचारी बड़ी बहुरिया।

Question 8(i):

गद्यांश में किस खेल के खत्म होने की बात हो रही है?

  • (A) लोगों की लगने वाली भीड़ के
  • (B) भाइयों के बीच बैर-भाव के
  • (C) हवेली में लगने वाले तमाशों के
  • (D) बड़ी हवेली की सुख-समृद्धि के
Correct Answer: (2) भाइयों के बीच बैर-भाव के
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Concept:
गद्यांश में “खेल” शब्द का प्रयोग वास्तविक खेल के अर्थ में नहीं बल्कि रूपक के रूप में किया गया है। यहाँ इसका आशय भाइयों के बीच चल रहे झगड़े और आपसी बैर-भाव से है।

Step 1: ‘खेल’ शब्द का भावार्थ समझना।
गद्यांश में “खेल खत्म होना” यह दर्शाता है कि भाइयों के बीच जो आपसी विवाद या बैर-भाव चल रहा था, वह समाप्त हो रहा है।

Step 2: संदर्भ का विश्लेषण।
लेखक ने “खेल” शब्द का प्रयोग प्रतीकात्मक रूप में किया है, जिससे भाइयों के बीच के झगड़े और तनाव को दर्शाया गया है।

Step 3: उचित विकल्प का चयन।
अतः यहाँ “खेल के खत्म होने” का आशय भाइयों के बीच बैर-भाव के समाप्त होने से है।

इसलिए सही उत्तर है — (B) भाइयों के बीच बैर-भाव के Quick Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में कई शब्द प्रतीकात्मक रूप में प्रयुक्त होते हैं। ऐसे शब्दों का सही अर्थ समझने के लिए पूरे संदर्भ को ध्यान से पढ़ना आवश्यक होता है।


Question 8(ii):

'भगवान भले आदमी को ही कष्ट देते हैं' — कथन के समर्थन में विकल्प है —

  • (A) बड़ी हवेली का नाममात्र का ही बड़ी रहना
  • (B) कठिन घड़ी में नौकर-चाकरों का चले जाना
  • (C) बड़े भैया का अचानक मृत्यु को प्राप्त हो जाना
  • (D) बड़ी बहुरिया से साड़ी और जेवर छीन लेना
Correct Answer: (3) बड़े भैया का अचानक मृत्यु को प्राप्त हो जाना
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Concept:
“भगवान भले आदमी को ही कष्ट देते हैं” यह कथन उस स्थिति को दर्शाता है जब कोई अच्छा या सज्जन व्यक्ति अचानक किसी बड़े दुख या विपत्ति का सामना करता है।

Step 1: कथन का भावार्थ समझना।
इस कथन का अर्थ है कि कई बार अच्छे और सज्जन लोगों के जीवन में भी गंभीर दुखद घटनाएँ घट जाती हैं।

Step 2: गद्यांश का संदर्भ।
गद्यांश में बड़े भैया की अचानक मृत्यु का उल्लेख है, जो परिवार के लिए बहुत बड़ा दुखद और अप्रत्याशित कष्ट है।

Step 3: उचित विकल्प का चयन।
बड़े भैया की अचानक मृत्यु इस कथन को स्पष्ट रूप से सिद्ध करती है कि भले व्यक्ति को भी कष्ट सहना पड़ता है।

अतः सही उत्तर है — (C) बड़े भैया का अचानक मृत्यु को प्राप्त हो जाना Quick Tip: कथन आधारित प्रश्नों में उस विकल्प को चुनना चाहिए जो कथन के अर्थ या भाव को सबसे स्पष्ट रूप से सिद्ध करता हो।


Question 8(iii):

'रैयतों ने जमीन पर दावे करके दखल किया' — वाक्य में प्रयुक्त 'रैयत' शब्द का अर्थ है —

  • (A) प्रजा
  • (B) राजा
  • (C) जमींदार
  • (D) महाजन
Correct Answer: (1) प्रजा
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Concept:
“रैयत” शब्द का प्रयोग प्रायः जमींदारी व्यवस्था के संदर्भ में किया जाता है। इसका अर्थ उन किसानों या सामान्य लोगों से होता है जो जमींदार की भूमि पर खेती करते थे।

Step 1: ‘रैयत’ शब्द का अर्थ समझना।
रैयत का अर्थ है — सामान्य जनता या प्रजा, विशेषकर वे किसान जो किसी जमींदार की भूमि पर खेती करते हैं।

Step 2: वाक्य का अर्थ।
“रैयतों ने जमीन पर दावे करके दखल किया” का अर्थ है कि प्रजा या किसानों ने उस भूमि पर अपना अधिकार जताया।

Step 3: उचित विकल्प का चयन।
अतः यहाँ “रैयत” शब्द का अर्थ प्रजा है।

इसलिए सही उत्तर है — (A) प्रजा Quick Tip: शब्दार्थ आधारित प्रश्नों में उस शब्द का ऐतिहासिक या सामाजिक संदर्भ समझना महत्वपूर्ण होता है, तभी सही अर्थ का चयन किया जा सकता है।


Question 8(iv):

'नाममात्र की ही बड़ी हवेली है' – से अभिप्राय है –

  • (A) बड़ी हवेली की अवस्था जर्जर हो गई है ।
  • (B) बड़ी हवेली में अब कोई नहीं रहता ।
  • (C) बड़ी हवेली की देखभाल करने वाला कोई नहीं है ।
  • (D) बड़ी हवेली की शानो-शौकत खत्म हो गई है ।
Correct Answer: (4) बड़ी हवेली की शानो-शौकत खत्म हो गई है ।
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Concept:
“नाममात्र” शब्द का अर्थ होता है — केवल नाम के लिए रह जाना। इसका प्रयोग तब किया जाता है जब किसी वस्तु या स्थिति की वास्तविक महत्ता या वैभव समाप्त हो चुका हो।

Step 1: वाक्य का भावार्थ समझना।
“नाममात्र की ही बड़ी हवेली है” का अर्थ है कि हवेली केवल नाम से बड़ी रह गई है, लेकिन उसका वैभव और समृद्धि पहले जैसी नहीं रही।

Step 2: संदर्भ का विश्लेषण।
यह वाक्य इस बात को दर्शाता है कि पहले हवेली बहुत समृद्ध और भव्य थी, पर अब उसकी शानो-शौकत समाप्त हो चुकी है।

Step 3: सही विकल्प का चयन।
अतः इस वाक्य का सही अर्थ है कि हवेली की शानो-शौकत खत्म हो गई है।

इसलिए सही उत्तर है — (D) बड़ी हवेली की शानो-शौकत खत्म हो गई है Quick Tip: “नाममात्र” जैसे शब्दों का अर्थ समझने के लिए उसके भावार्थ पर ध्यान दें। इसका अर्थ सामान्यतः “केवल नाम के लिए रह जाना” होता है।


Question 8(v):

गद्यांश में 'द्रौपदी - चीर-हरण' प्रसंग का उल्लेख क्यों किया गया है?

  • (A) महाभारत के प्रसंग से अवगत कराने हेतु
  • (B) बड़ी बहुरिया की दीन-हीन स्थिति से अवगत कराने हेतु
  • (C) संपत्ति बँटवारे के दौरान बड़ी बहुरिया के साथ हुए अन्याय को दर्शाने हेतु
  • (D) संपत्ति बँटवारे के दौरान बड़ी बहुरिया के देवरों की निर्दयता को दर्शाने हेतु
Correct Answer: (3) संपत्ति बँटवारे के दौरान बड़ी बहुरिया के साथ हुए अन्याय को दर्शाने हेतु
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Concept:
साहित्य में किसी प्रसिद्ध पौराणिक प्रसंग का उल्लेख अक्सर किसी घटना की गंभीरता या अन्याय को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है। “द्रौपदी चीर-हरण” महाभारत का एक अत्यंत अपमानजनक और अन्यायपूर्ण प्रसंग है।

Step 1: प्रसंग का अर्थ समझना।
महाभारत में द्रौपदी के चीर-हरण का प्रसंग स्त्री के साथ किए गए घोर अपमान और अन्याय का प्रतीक माना जाता है।

Step 2: गद्यांश का संदर्भ।
गद्यांश में इस प्रसंग का उल्लेख यह दिखाने के लिए किया गया है कि संपत्ति के बँटवारे के समय बड़ी बहुरिया के साथ अत्यंत अन्यायपूर्ण व्यवहार किया गया।

Step 3: सही विकल्प का चयन।
अतः “द्रौपदी-चीर-हरण” का उल्लेख बड़ी बहुरिया के साथ हुए अन्याय को स्पष्ट करने के लिए किया गया है।

इसलिए सही उत्तर है — (C) संपत्ति बँटवारे के दौरान बड़ी बहुरिया के साथ हुए अन्याय को दर्शाने हेतु Quick Tip: साहित्य में पौराणिक प्रसंगों का उपयोग अक्सर किसी घटना की गंभीरता, अन्याय या अपमान को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने के लिए किया जाता है।


Passage:

निम्नलिखित पठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्पों का चयन कर लिखिए :

फागुन पवन झकोरा बहा । चौगुन सीउ जाइ किमि सहा ।।  
तन जस पियर पात भा मोरा । बिरह न रहै पवन होइ झोरा ।।  
तरिवर झरें झरें बन ढाँखा । भइ अनपत फूल फर साखा ।।  
करिहूँ बनाकति कीन्ह हुलासू । मो कहूँ भा जग दून उदासू ।।  
फागु करहिं सब चाँचरि जोरी । मोहिं जिय लाइ दीन्हि जसि होरी ।।  
जौं पै पिउहि जरत अस भावा । जरत मरत मोहि रोस न आवा ।।  
रातिहु देवस इहै मन मोरें । लागौ कंत छार जेहि तौरें ।।  
यह तन जारौं छार कै, कहौ कि पवन उड़ाउ ।  
मकु तेहि मारग होइ परौं कंत धरे जहँ पाउ ।।

Question 9(i):

फागुन मास की शीत को चौगुना कौन बढ़ा रहा है?

  • (A) वृक्षों से झड़ने वाले पत्ते
  • (B) पवन के झकोरे
  • (C) वनों की ढाँखें
  • (D) होली का पर्व
Correct Answer: (2) पवन के झकोरे
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Concept:
काव्यांश में फागुन मास के वातावरण का वर्णन किया गया है। इस समय हल्की ठंड बनी रहती है और चलने वाली ठंडी हवा उस शीत को और अधिक बढ़ा देती है।

Step 1: काव्यांश का भावार्थ समझना।
कवि फागुन के समय चलने वाली ठंडी हवाओं का वर्णन करता है, जो वातावरण की ठंडक को और अधिक महसूस कराती हैं।

Step 2: ‘शीत को चौगुना बढ़ाना’ का अर्थ।
यहाँ कवि यह बताना चाहता है कि तेज हवा के झोंके ठंड के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं।

Step 3: सही विकल्प का चयन।
अतः फागुन मास की शीत को चौगुना बढ़ाने का कारण पवन के झकोरे हैं।

इसलिए सही उत्तर है — (B) पवन के झकोरे Quick Tip: काव्यांश आधारित प्रश्नों में प्रकृति से संबंधित वर्णन को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि कवि अक्सर हवा, ऋतु और वातावरण के माध्यम से भाव व्यक्त करता है।


Question 9(ii):

वृक्षों से झड़ने वाली बन ढाँखों से विरहिणी नायिका का क्या संबंध है?

  • (A) विरहिणी की विरह-वेदना को बढ़ा रही हैं।
  • (B) राजा रत्नसेन की याद दिला रही हैं।
  • (C) प्रिय मिलन की धूमिल आशाओं को दर्शा रही हैं।
  • (D) उसे अतीत की स्मृतियों में ले जा रही हैं।
Correct Answer: (1) विरहिणी की विरह-वेदना को बढ़ा रही हैं।
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Concept:
काव्य में प्रकृति के विभिन्न रूपों का उपयोग अक्सर भावनाओं को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। विरहिणी नायिका के मन की पीड़ा को दर्शाने के लिए कवि प्रकृति के दृश्य जैसे झड़ते पत्तों और ढाँखों का सहारा लेता है।

Step 1: काव्यांश का भाव समझना।
वृक्षों से झड़ने वाली ढाँखें और सूखे पत्ते विरह की स्थिति को दर्शाते हैं, जहाँ सब कुछ सूना और उदास प्रतीत होता है।

Step 2: विरहिणी नायिका की मनोदशा।
विरहिणी अपने प्रिय से बिछड़ने के कारण पहले से ही दुखी है। ऐसे में प्रकृति के उदास दृश्य उसकी पीड़ा को और अधिक बढ़ा देते हैं।

Step 3: सही विकल्प का चयन।
अतः वृक्षों से झड़ने वाली बन ढाँखें विरहिणी की विरह-वेदना को बढ़ा रही हैं।

इसलिए सही उत्तर है — (A) विरहिणी की विरह-वेदना को बढ़ा रही हैं Quick Tip: काव्य में प्रकृति के दृश्य अक्सर पात्रों की भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम बनते हैं। इसलिए प्रकृति के वर्णन को पात्र की मनोदशा से जोड़कर समझना चाहिए।


Question 9(iii):

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : नागमती अपने शरीर को जलाकर राख कर देना चाहती है ।

कारण : राख के रूप में प्रिय के चरण स्पर्श करने का सौभाग्य प्राप्त करना चाहती है ।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं ।
  • (B) कारण सही है, लेकिन कथन गलत है ।
  • (C) कथन सही है, लेकिन कारण कथन की गलत व्याख्या करता है ।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है ।
Correct Answer: (4) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है ।
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Concept:
काव्य में विरहिणी नायिका अपने प्रिय से बिछड़ने के कारण अत्यंत दुखी होती है। इस विरह-वेदना को व्यक्त करने के लिए कवि अनेक प्रतीकों और भावपूर्ण कल्पनाओं का प्रयोग करता है।

Step 1: कथन का विश्लेषण।
नागमती अपने प्रिय से वियोग के कारण अत्यधिक पीड़ा में है। वह अपने शरीर को जलाकर राख कर देने की कल्पना करती है। यह उसके गहरे विरह-दुःख को व्यक्त करता है। इसलिए कथन सही है।

Step 2: कारण का विश्लेषण।
नागमती चाहती है कि यदि उसका शरीर राख बन जाए तो वह प्रिय के चरणों में पहुँच सके और उनके चरणों का स्पर्श कर सके। यह उसकी गहन प्रेम भावना को दर्शाता है। इसलिए कारण भी सही है।

Step 3: कथन और कारण का संबंध।
कारण कथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि नागमती के शरीर को राख बनाने की इच्छा का उद्देश्य अपने प्रिय के चरण स्पर्श का सौभाग्य प्राप्त करना है।

अतः सही उत्तर है — (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है Quick Tip: कथन-कारण आधारित प्रश्नों में पहले दोनों कथनों की सत्यता जाँचें और फिर यह देखें कि कारण वास्तव में कथन की व्याख्या करता है या नहीं।


Question 9(iv):

कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कॉलम-I \hspace{5cm} कॉलम-II

1. शरीर को जलाकर राख कर देना \hspace{2.5cm i. रानी नागमती का गतिहीन शरीर

2. दुःख से झरे पीले पत्ते \hspace{3.1cm ii. होली के अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करना

3. सबका चाँचरि जोर कर खेलना \hspace{1.6cm iii. सर्वस्व त्याग और समर्पण की भावना

  • (A) (1-i), (2-iii), (3-ii)
  • (B) (1-iii), (2-i), (3-ii)
  • (C) (1-iii), (2-ii), (3-i)
  • (D) (1-ii), (2-i), (3-iii)
Correct Answer: (2) (1-iii), (2-i), (3-ii)
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Concept:
सुमेलन प्रश्नों में दिए गए वाक्यांशों के भावार्थ को समझकर उन्हें उपयुक्त अर्थ से मिलाया जाता है। काव्य में प्रयुक्त प्रतीक और भावात्मक अभिव्यक्तियों को समझना आवश्यक होता है।

Step 1: “शरीर को जलाकर राख कर देना” का भावार्थ।
यह वाक्य सर्वस्व त्याग और पूर्ण समर्पण की भावना को दर्शाता है।
अतः — \(1 \rightarrow iii\)

Step 2: “दुःख से झरे पीले पत्ते” का अर्थ।
यह रानी नागमती की विरह-वेदना और उसके कमजोर तथा गतिहीन शरीर की स्थिति को दर्शाता है।
अतः — \(2 \rightarrow i\)

Step 3: “सबका चाँचरि जोर कर खेलना” का अर्थ।
यह होली के अवसर पर लोगों द्वारा मिलकर आनंद और प्रसन्नता व्यक्त करने को दर्शाता है।
अतः — \(3 \rightarrow ii\)

Step 4: सही सुमेलन।
\[ 1 \rightarrow iii, \qquad 2 \rightarrow i, \qquad 3 \rightarrow ii \]

अतः सही विकल्प है — (B) (1-iii), (2-i), (3-ii) Quick Tip: काव्य के सुमेलन प्रश्नों में पहले उन वाक्यांशों का मिलान करें जिनका भावार्थ स्पष्ट हो, इससे बाकी विकल्पों का सही मिलान करना आसान हो जाता है।


Question 9(v):

काव्यांश के मूल भाव को व्यक्त करने वाला कथन नहीं है —

  • (A) फागुन आते ही सब रंगीन वस्त्र धारण कर श्रृंगार करने लगते हैं।
  • (B) फागुन का पवन शीत (ठंड) को चौगुना कर रहा है।
  • (C) होली का पर्व नागमती की विरह-अग्नि को बढ़ा रहा है।
  • (D) नागमती दिन-रात राजा रत्नसेन से मिलन की कामना करती है।
Correct Answer: (1) फागुन आते ही सब रंगीन वस्त्र धारण कर श्रृंगार करने लगते हैं।
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Concept:
काव्यांश का मुख्य भाव विरह-वेदना है। इसमें नागमती के मन की पीड़ा और प्रिय से बिछुड़ने का दुख व्यक्त किया गया है। फागुन और होली जैसे आनंद के अवसर भी उसके विरह को और अधिक बढ़ा देते हैं।

Step 1: काव्यांश का मूल भाव समझना।
कवि ने नागमती के विरह-दुःख को चित्रित किया है। फागुन का मौसम, होली का उत्सव और प्रकृति के दृश्य उसकी पीड़ा को और बढ़ाते हैं।

Step 2: विकल्पों का विश्लेषण।


(B) फागुन का पवन शीत को बढ़ा रहा है — यह काव्यांश में वर्णित है।
(C) होली का पर्व नागमती की विरह-अग्नि को बढ़ा रहा है — यह भी काव्यांश के भाव से जुड़ा है।
(D) नागमती का प्रिय मिलन की कामना करना — यह भी काव्यांश के भाव के अनुरूप है।


Step 3: अनुपयुक्त कथन की पहचान।
विकल्प (A) में फागुन में लोगों के श्रृंगार करने की बात कही गई है, जो काव्यांश के मुख्य भाव से संबंधित नहीं है।

अतः सही उत्तर है — (A) फागुन आते ही सब रंगीन वस्त्र धारण कर श्रृंगार करने लगते हैं। Quick Tip: काव्यांश आधारित प्रश्नों में “मूल भाव” समझना सबसे महत्वपूर्ण होता है। जो विकल्प उस मुख्य भावना से मेल नहीं खाता, वही सही उत्तर होता है।


Question 10(i):

आचार्य शुक्ल की बाल बुद्धि भारतेंदु हरिश्चंद्र और राजा हरिश्चंद्र नाटक के नायक हरिश्चंद्र में अंतर क्यों नहीं कर पाती थी? पाठ के आधार पर लिखिए।

Correct Answer:
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Concept:
बाल्यावस्था में बच्चों की समझ सरल और सीधी होती है। वे वास्तविक जीवन और नाटक या कहानी के पात्रों के बीच स्पष्ट अंतर नहीं कर पाते। इसी कारण आचार्य शुक्ल की बाल बुद्धि भी भारतेंदु हरिश्चंद्र और नाटक के पात्र राजा हरिश्चंद्र में भेद नहीं कर पाती थी।

Step 1: पाठ का संदर्भ।
आचार्य शुक्ल ने बचपन में भारतेंदु हरिश्चंद्र का नाटक \textit{राजा हरिश्चंद्र देखा था। उस समय उनकी समझ इतनी विकसित नहीं थी कि वे लेखक और नाटक के पात्र के बीच अंतर समझ सकें।

Step 2: बाल बुद्धि की सरलता।
उनकी बाल बुद्धि यह मान बैठी थी कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ही वही राजा हरिश्चंद्र हैं, जिनकी कहानी नाटक में दिखाई जा रही है।

Step 3: निष्कर्ष।
अतः बाल्यावस्था की सरलता और अनुभवहीनता के कारण आचार्य शुक्ल की बाल बुद्धि भारतेंदु हरिश्चंद्र और नाटक के नायक राजा हरिश्चंद्र में अंतर नहीं कर पाती थी। Quick Tip: गद्य आधारित प्रश्नों में उत्तर लिखते समय पाठ की घटना, कारण और निष्कर्ष को क्रमबद्ध रूप में लिखना उत्तर को स्पष्ट और प्रभावी बनाता है।


Question 10(ii):

"मेरे सिर पर सींग निकल रहे थे" - 'शेर' कहानी से उद्धृत इस कथन का क्या आशय है? लेखक शहर से जंगल की ओर क्यों भागा था?

Correct Answer:
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Concept:
कहानी में कई बार लेखक अपने अनुभवों को व्यक्त करने के लिए रूपकात्मक भाषा का प्रयोग करता है। “मेरे सिर पर सींग निकल रहे थे” कथन भी एक रूपक है, जो लेखक की मानसिक स्थिति और असहजता को व्यक्त करता है।

Step 1: कथन का आशय।
“मेरे सिर पर सींग निकल रहे थे” का आशय यह है कि लेखक अपने आपको शहर के वातावरण में बहुत असहज और अजनबी महसूस कर रहा था। उसे ऐसा लग रहा था मानो वह वहाँ के लोगों से बिल्कुल अलग हो।

Step 2: शहर से जंगल की ओर भागने का कारण।
लेखक शहर की कृत्रिमता, भीड़-भाड़ और शोरगुल से परेशान हो गया था। उसे शहर का वातावरण स्वाभाविक नहीं लगता था।

Step 3: जंगल की ओर जाने का उद्देश्य।
लेखक को प्रकृति का शांत और प्राकृतिक वातावरण अधिक प्रिय था, इसलिए वह शहर की कृत्रिम दुनिया से दूर होकर जंगल की ओर चला गया।

Step 4: निष्कर्ष।
अतः इस कथन से लेखक की असहजता और शहर के वातावरण से ऊब व्यक्त होती है, जिसके कारण वह शांति और प्राकृतिक वातावरण की तलाश में जंगल की ओर भाग गया। Quick Tip: रूपकात्मक कथनों का अर्थ समझने के लिए उनके शाब्दिक अर्थ के बजाय उनके भावार्थ और संदर्भ पर ध्यान देना चाहिए।


Question 10(iii):

अतुलित प्राकृतिक सौंदर्य के बावजूद सिंगरौली 'कालापानी' के नाम से क्यों जाना जाता है? पाठ के संदर्भ में लिखिए।

Correct Answer:
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Concept:
सिंगरौली क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, परंतु लंबे समय तक यह क्षेत्र विकास और सुविधाओं से वंचित रहा। इसी कारण इसे रूपक के रूप में “कालापानी” कहा गया है।

Step 1: सिंगरौली का प्राकृतिक सौंदर्य।
सिंगरौली क्षेत्र जंगलों, पहाड़ों और प्राकृतिक संपदा से समृद्ध है। यहाँ का वातावरण अत्यंत सुंदर और आकर्षक है।

Step 2: ‘कालापानी’ कहे जाने का कारण।
अत्यधिक प्राकृतिक सौंदर्य होने के बावजूद यह क्षेत्र लंबे समय तक दूरस्थ और अविकसित रहा। यहाँ परिवहन, शिक्षा, चिकित्सा और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।

Step 3: अलग-थलग स्थिति।
सुविधाओं की कमी और बाहरी दुनिया से कटे होने के कारण लोगों को यहाँ रहना कठिन लगता था। इसलिए इसे प्रतीकात्मक रूप से “कालापानी” कहा जाने लगा।

Step 4: निष्कर्ष।
अतः प्राकृतिक सौंदर्य होने के बावजूद विकास और सुविधाओं की कमी तथा बाहरी दुनिया से अलग-थलग रहने के कारण सिंगरौली को “कालापानी” कहा जाता है। Quick Tip: गद्य आधारित प्रश्नों में किसी शब्द के रूपकात्मक प्रयोग को समझने के लिए उसके संदर्भ और कारणों को स्पष्ट करना आवश्यक होता है।


Question 11(i):

'बहुत दिनान को' — कवित्त के आधार पर घनानंद की स्थिति का वर्णन कीजिए।

Correct Answer:
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Concept:
घनानंद रीतिकाल के प्रमुख कवि थे, जिनकी कविताओं में प्रेम और विरह की भावनाएँ अत्यंत मार्मिक रूप में व्यक्त हुई हैं। उनके कवित्तों में विरह-वेदना और प्रिय के प्रति गहन प्रेम का चित्रण मिलता है।

Step 1: कवित्त का भाव।
‘बहुत दिनान को’ कवित्त में घनानंद अपने प्रिय से लंबे समय से बिछड़े होने की पीड़ा व्यक्त करते हैं। प्रिय के वियोग में उनका हृदय अत्यंत व्याकुल हो उठा है।

Step 2: कवि की मनोदशा।
प्रिय से लंबे समय तक न मिलने के कारण कवि बेचैन और दुखी हैं। उनका मन निरंतर प्रिय के दर्शन की आकांक्षा करता है।

Step 3: विरह की अनुभूति।
कवि के हृदय में विरह की वेदना इतनी गहरी है कि वे अपने जीवन को निरर्थक और उदास अनुभव करते हैं।

Step 4: निष्कर्ष।
अतः ‘बहुत दिनान को’ कवित्त में घनानंद की विरह-वेदना, व्याकुलता और प्रिय के मिलन की तीव्र आकांक्षा का मार्मिक चित्रण मिलता है। Quick Tip: काव्य आधारित प्रश्नों में कवि की भावनाओं और मनोदशा को पहचानकर उत्तर लिखना चाहिए। इससे काव्य का मुख्य भाव स्पष्ट रूप से व्यक्त होता है।


Question 11(ii):

'यह लता वहीं की, जहाँ कली तू खिली' — पंक्ति में प्रयुक्त 'लता और कली' की प्रतीकात्मकता स्पष्ट करते हुए पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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Concept:
कविता में कई शब्द प्रतीकात्मक रूप में प्रयुक्त होते हैं। इनके माध्यम से कवि किसी भाव, संबंध या स्थिति को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करता है।

Step 1: प्रतीकों का अर्थ समझना।
इस पंक्ति में “लता” माता या जन्मभूमि का प्रतीक है और “कली” संतान या बालक का प्रतीक है।

Step 2: पंक्ति का भावार्थ।
कवि कहना चाहता है कि जिस प्रकार कली उसी लता पर खिलती है, उसी प्रकार संतान का जन्म और विकास भी अपने मूल स्थान या माता से जुड़ा होता है।

Step 3: निष्कर्ष।
अतः इस पंक्ति का आशय यह है कि संतान अपने मूल स्थान, माता या जन्मभूमि से गहराई से जुड़ी होती है और उसका अस्तित्व उसी पर आधारित होता है। Quick Tip: काव्य में प्रयुक्त प्रतीकों को समझने के लिए उनके भावार्थ और संदर्भ पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि कवि अक्सर प्रकृति के माध्यम से गहरे संबंधों और भावनाओं को व्यक्त करता है।


Question 11(iii):

वसंत आगमन पर बनारस शहर की जागृति और चेतना का वर्णन कविता के आधार पर कीजिए।

Correct Answer:
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Concept:
वसंत ऋतु को प्रकृति में नवजीवन और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। कविता में वसंत के आगमन के साथ बनारस शहर में नई ऊर्जा, उत्साह और चेतना का वातावरण दिखाई देता है।

Step 1: वसंत ऋतु का प्रभाव।
वसंत के आगमन के साथ वातावरण में आनंद, उल्लास और ताजगी भर जाती है। पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं और चारों ओर प्रकृति का सौंदर्य बढ़ जाता है।

Step 2: बनारस शहर की जागृति।
कविता में बताया गया है कि वसंत के आगमन पर बनारस शहर में नई हलचल दिखाई देती है। लोग प्रसन्नता से भर जाते हैं और चारों ओर उत्सव जैसा वातावरण बन जाता है।

Step 3: चेतना और उत्साह।
घाटों, गलियों और मंदिरों में लोगों की गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं। पूरा शहर जीवंत और उल्लासपूर्ण प्रतीत होता है।

Step 4: निष्कर्ष।
अतः वसंत के आगमन पर बनारस शहर में नई चेतना, ऊर्जा और आनंद का संचार हो जाता है, जिससे पूरा वातावरण जीवंत और उत्साहपूर्ण बन जाता है। Quick Tip: काव्य आधारित वर्णनात्मक प्रश्नों में ऋतु, वातावरण और भावनात्मक परिवर्तन को जोड़कर उत्तर लिखने से उत्तर अधिक प्रभावी बनता है।


Question 12(i):

कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, 'लड्डू'। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि यह 'लड्डू' की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।

Correct Answer:
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संदर्भ :
यह गद्यांश उस प्रसंग से लिया गया है जिसमें बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों और उसकी सहज अभिव्यक्ति को दिखाया गया है। लेखक यह बताना चाहता है कि बच्चों की प्राकृतिक इच्छाएँ और भावनाएँ दमन से नहीं दबाई जानी चाहिए।

व्याख्या :
इस गद्यांश में लेखक बताता है कि बालक ने संकोच के बाद धीरे से “लड्डू” कहा। यह सुनकर पिता और अध्यापक निराश हो गए, क्योंकि वे बालक को अपनी इच्छा के अनुसार व्यवहार करने के लिए बाध्य कर रहे थे।

लेखक को ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों को दबाया जा रहा है और उसका स्वाभाविक विकास रुक रहा है। लेकिन जब बालक ने “लड्डू” कहा, तब लेखक को राहत महसूस हुई।

लेखक के अनुसार बालक की यह पुकार उसकी जीवंत और स्वाभाविक प्रवृत्ति का प्रतीक है। इसे लेखक ने जीवित वृक्ष के हरे पत्तों की मधुर सरसराहट से तुलना की है, जबकि बनावटी व्यवहार को मृत लकड़ी की खड़खड़ाहट के समान बताया है।

भावार्थ :
इस गद्यांश का मुख्य भाव यह है कि बच्चों की स्वाभाविक इच्छाओं और प्रवृत्तियों को दबाना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें स्वतंत्र रूप से विकसित होने देना चाहिए। Quick Tip: गद्य व्याख्या लिखते समय तीन भागों में उत्तर लिखें—संदर्भ, व्याख्या और भावार्थ। इससे उत्तर अधिक व्यवस्थित और स्पष्ट बनता है।


Question 12(ii):

पहचानता हूँ उजाड़ के साथी, तुम्हें अच्छी तरह पहचानता हूँ। नाम भूल रहा हूँ। प्राय: भूल जाता हूँ। रूप देखकर प्राय: पहचान जाता हूँ, नाम नहीं याद आता। पर नाम ऐसा है कि जब तक रूप के पहले ही हाज़िर न हो जाए तब तक रूप की पहचान अधूरी रह जाती है। ........ सैकड़ों बार का कचारा-निचोड़ा प्रश्न सामने आ गया — रूप मुख्य है या नाम? नाम बड़ा है या रूप? पद पहले है या पदार्थ? पदार्थ सामने है, पद नहीं सूझ रहा है। मन व्याकुल हो गया। स्मृतियों के पंख फैलाकर सुदूर अतीत के कोनों में झाँकता रहा।

Correct Answer:
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संदर्भ :
यह गद्यांश उस प्रसंग से लिया गया है जिसमें लेखक किसी परिचित वस्तु या व्यक्ति को देखकर पहचान तो लेता है, पर उसका नाम याद नहीं कर पाता। इस स्थिति के माध्यम से लेखक नाम और रूप के संबंध पर विचार करता है।

व्याख्या :
लेखक कहता है कि वह सामने उपस्थित वस्तु या व्यक्ति को देखकर पहचान तो लेता है, पर उसका नाम स्मरण नहीं हो पाता। वह मानता है कि केवल रूप देखकर पहचान अधूरी रह जाती है, क्योंकि नाम उस पहचान को पूर्ण करता है।

इस स्थिति में लेखक के मन में एक दार्शनिक प्रश्न उठता है कि वास्तव में अधिक महत्वपूर्ण क्या है — नाम या रूप? इसी प्रकार वह यह भी सोचता है कि पद (शब्द) पहले है या पदार्थ (वस्तु)।

लेखक को वस्तु तो सामने दिखाई दे रही है, पर उसका नाम याद नहीं आ रहा है। इसलिए वह स्मृतियों में झाँककर उस नाम को याद करने का प्रयास करता है और मन ही मन व्याकुल हो जाता है।

भावार्थ :
इस गद्यांश का मुख्य भाव यह है कि किसी वस्तु की पहचान केवल उसके रूप से नहीं, बल्कि उसके नाम से भी पूर्ण होती है। नाम और रूप दोनों मिलकर ही किसी वस्तु की संपूर्ण पहचान बनाते हैं। Quick Tip: गद्य व्याख्या लिखते समय संदर्भ, व्याख्या और भावार्थ को स्पष्ट रूप से अलग-अलग लिखना चाहिए। इससे उत्तर अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनता है।


Question 13(i):

दिया, लालटेन, चिराग और मोम के अलावा हम में भरे दाँत सूरदास का पेशा कौन सा था? भला फिर कौन-सी ऊँचाई हो कि दिन-नयन की तरह न चमके के दोनों हाथों में उठा लूँ? 'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ के आधार पर लिखिए।

Correct Answer:
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संदर्भ :
यह कथन ‘सूरदास की झोंपड़ी’ पाठ से लिया गया है। इस पाठ में लेखक ने सूरदास के व्यक्तित्व, उनके आत्मसम्मान, सादगी और जीवन-दर्शन का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है। सूरदास भले ही शारीरिक रूप से अंधे थे, परंतु उनके भीतर आत्मगौरव, स्वतंत्रता और स्वाभिमान की अद्भुत ज्योति थी।

व्याख्या :
इस गद्यांश में लेखक सूरदास के जीवन और उनके व्यक्तित्व की महानता को उजागर करता है। यहाँ यह बताया गया है कि सूरदास का पेशा भीख माँगना था। वे गाँव में घूम-घूमकर भिक्षा माँगते थे और उसी से अपना जीवन-निर्वाह करते थे।

हालाँकि उनका जीवन अत्यंत साधारण और गरीबी से भरा हुआ था, फिर भी उनके भीतर आत्मसम्मान और स्वाभिमान की भावना प्रबल थी। लेखक यह कहना चाहता है कि भले ही सूरदास के पास दिया, लालटेन, चिराग या मोमबत्ती जैसी बाहरी रोशनी के साधन नहीं थे, परंतु उनके भीतर आत्मगौरव और आत्मविश्वास की ऐसी आंतरिक ज्योति थी जो उन्हें ऊँचा और महान बनाती थी।

लेखक सूरदास के व्यक्तित्व से इतना प्रभावित है कि वह उनके गुणों और महानता को अपने जीवन में अपनाना चाहता है। इसलिए वह कहता है कि वह ऐसी ऊँचाई और महानता को दोनों हाथों से उठाकर ग्रहण करना चाहता है, जो दिन के उजाले की तरह चमकती हो।

भावार्थ :
इस गद्यांश का मुख्य भाव यह है कि व्यक्ति की महानता उसके बाहरी साधनों या परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके आत्मसम्मान, स्वाभिमान और आंतरिक गुणों से निर्धारित होती है। सूरदास भले ही गरीब और अंधे थे, लेकिन उनके आत्मगौरव और आत्मनिर्भरता ने उन्हें महान बना दिया। Quick Tip: पाठ आधारित प्रश्नों में उत्तर लिखते समय पहले प्रसंग (संदर्भ) लिखें, फिर घटना या विचार की विस्तृत व्याख्या करें और अंत में मुख्य भाव या संदेश स्पष्ट करें। इससे उत्तर अधिक पूर्ण और प्रभावी बनता है।


Question 13(ii):

'विकास की गंगा' पाठ में वर्णित यक्ष्मा की दुखद व्यथा को स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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संदर्भ :
यह प्रश्न ‘विकास की गंगा’ पाठ से संबंधित है। इस पाठ में लेखक ने विकास की प्रक्रिया के साथ उत्पन्न सामाजिक और मानवीय समस्याओं का चित्रण किया है। विशेष रूप से सिंगरौली क्षेत्र के लोगों के जीवन, उनकी कठिनाइयों और यक्ष्मा (टीबी) जैसी गंभीर बीमारी की दुखद स्थिति का उल्लेख किया गया है।

व्याख्या :
‘विकास की गंगा’ पाठ में लेखक बताता है कि सिंगरौली क्षेत्र में औद्योगिक विकास के साथ-साथ कई सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भी उत्पन्न हो गईं। यहाँ रहने वाले लोगों का जीवन अत्यंत कठिन और अभावग्रस्त था।

गरीबी, कुपोषण, अस्वच्छ वातावरण और चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण यक्ष्मा (टीबी) जैसी घातक बीमारी वहाँ बहुत तेजी से फैल गई। इस बीमारी से पीड़ित लोग शारीरिक रूप से अत्यंत कमजोर हो जाते थे। उनके शरीर का वजन घट जाता था, लगातार खाँसी रहती थी और धीरे-धीरे उनका जीवन समाप्त हो जाता था।

लेखक ने इस बीमारी की पीड़ा को अत्यंत मार्मिक रूप में प्रस्तुत किया है। अनेक लोग इस रोग से पीड़ित होकर असमय मृत्यु का शिकार हो जाते थे। उचित उपचार और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में उनका जीवन निरंतर कष्टमय बना रहता था।

भावार्थ :
इस प्रकार ‘विकास की गंगा’ पाठ में यक्ष्मा की दुखद व्यथा के माध्यम से यह बताया गया है कि विकास केवल उद्योगों और परियोजनाओं से नहीं मापा जाना चाहिए। यदि विकास के साथ लोगों के स्वास्थ्य, जीवन-स्तर और मानवीय समस्याओं पर ध्यान न दिया जाए, तो वह विकास अधूरा और पीड़ादायक बन जाता है। Quick Tip: पाठ आधारित प्रश्नों में उत्तर लिखते समय पहले प्रसंग स्पष्ट करें, फिर पाठ में वर्णित स्थिति का विस्तार से वर्णन करें और अंत में उसके मुख्य संदेश या निष्कर्ष को अवश्य लिखें।


Question 13(iii):

विकास की औद्योगिक सभ्यता के विरुद्ध जो असमंजस बढ़ने के क्या कारण हैं? पर्यावरणीय बदलाव तथा चरागाह के उपायों का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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संदर्भ :
यह प्रश्न ‘विकास की गंगा’ पाठ से संबंधित है। इस पाठ में लेखक ने औद्योगिक विकास के प्रभावों पर विचार करते हुए यह बताया है कि आधुनिक विकास ने जहाँ सुविधाएँ बढ़ाई हैं, वहीं इसके कारण कई सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याएँ भी उत्पन्न हुई हैं।

व्याख्या :

1. औद्योगिक सभ्यता के विरुद्ध बढ़ते असमंजस के कारण :
लेखक के अनुसार आधुनिक औद्योगिक विकास के कारण प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बिगड़ने लगा है। उद्योगों और परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई की गई, जिससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हुआ।

इसके साथ ही अनेक गाँव उजड़ गए और लोगों को अपने पारंपरिक जीवन से विस्थापित होना पड़ा। जल, वायु और भूमि प्रदूषण बढ़ने से लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इस प्रकार विकास के नाम पर उत्पन्न समस्याओं ने लोगों के मन में औद्योगिक सभ्यता के प्रति असमंजस और चिंता पैदा कर दी।

2. पर्यावरणीय बदलाव :
औद्योगिक विकास के कारण पर्यावरण में कई प्रकार के परिवर्तन दिखाई देने लगे। जंगलों की कटाई से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया, नदियाँ और जल स्रोत प्रदूषित होने लगे तथा वन्यजीवों का जीवन भी संकट में पड़ गया।

इसके अलावा खनन और कारखानों के कारण भूमि की उर्वरता कम होने लगी और प्राकृतिक सौंदर्य नष्ट होने लगा।

3. चरागाह के उपाय :
इस स्थिति को सुधारने के लिए लेखक ने चरागाहों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर बल दिया है। इसके लिए निम्न उपाय आवश्यक हैं —


जंगलों और प्राकृतिक वनस्पतियों का संरक्षण किया जाए।
पशुओं के लिए पर्याप्त चरागाह भूमि सुरक्षित रखी जाए।
पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाए।
विकास योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया जाए।


भावार्थ :
इस प्रकार लेखक यह स्पष्ट करना चाहता है कि औद्योगिक विकास तभी सार्थक होगा जब वह पर्यावरण और मानव जीवन के संतुलन को बनाए रखते हुए किया जाए। प्रकृति के संरक्षण और चरागाहों की सुरक्षा से ही सतत विकास संभव है। Quick Tip: लंबे पाठ आधारित प्रश्नों में उत्तर को उपशीर्षकों या बिंदुओं में लिखने से उत्तर अधिक स्पष्ट, व्यवस्थित और प्रभावी बन जाता है।

CBSE 2026 Class 12 Preparation