CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2024 PDF (Set 2- 2/1/2) is available for download here. CBSE conducted the Hindi Core exam on February 19, 2024 from 10:30 AM to 1:30 PM. The total marks for the theory paper are 80. The question paper will contain 20% MCQ-based questions, 40% competency-based questions, and 40% short and long answer type questions.
CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2024 (Set 2- 2/1/2) with Answer Key
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CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper With Answer Key |
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CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper With Solution
खण्ड अ
(बहुविकल्पी/वस्तुपरक प्रश्न)
प्रश्न 1:
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।
सामने कुहरा घना है और मैं सूरज नहीं हूँ
क्या इसी अहसास में जिऊँ या जैसा भी हूँ नन्हा-सा एक दिया तो हूँ
क्यों न उसी की उजास में जिऊँ हर आने वाला क्षण मुझे यही कहता है-
अरे भई, सूरज तो नहीं हो तुम और मैं कहता हूँ -
न सही सूरज, एक नन्हा दिया तो हूँ जितनी भी है लौ मुझमें उसे लेकर जिया तो हूँ।
कम-से-कम मैं उनमें तो नहीं जो चाँद दिल के बुझाए बैठे हैं
रात को अमावस बनाए बैठे हैं
उड़ते फिर रहे थे जो जुगनू आँगन में
उन्हें भी मुट्ठियों में दबाए बैठे हैं।
(i) "सामने कुहरा घना है" पंक्ति में 'कुहरा' किस ओर संकेत करता है?
उत्तर:
'कुहरा' यहाँ जीवन की कठिनाइयों, समस्याओं और अनिश्चितताओं का प्रतीक है। यह संकेत करता है कि व्यक्ति को हताशा और निराशा का सामना करना पड़ता है, लेकिन उसे उम्मीद और आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए।(ii) "जैसा भी हूँ नन्हा-सा एक दिया तो हूँ" कथन में निहित भाव है:
उत्तर:
इस पंक्ति में कवि आत्मविश्वास व्यक्त कर रहे हैं। वे मानते हैं कि भले ही वे सूरज न हों, लेकिन एक छोटे दिए की तरह प्रकाश फैलाने का प्रयास कर सकते हैं। यह सकारात्मक सोच और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।(iii) "जो चाँद दिल के बुझाए बैठे हैं" पंक्ति द्वारा कवि ने किन्हें संबोधित किया है?
उत्तर:
यह पंक्ति उन लोगों की ओर संकेत करती है, जो जीवन में निराश होकर प्रयास करना छोड़ चुके हैं। वे अपने मन की रोशनी को बुझाकर बैठे हैं और जीवन को अमावस्या जैसा बना दिया है।(iv) स्तंभ-1 में दिए गए पदों को स्तंभ-2 में दिए गए प्रतीकार्थों से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।
| स्तंभ-1 | स्तंभ-2 |
|---|---|
| 1. सूरज | (i) सर्वशक्ति संपन्नता |
| 2. अमावस | (ii) घनघोर निराशा |
| 3. जुगनू दबाना | (iii) शक्तियों को नियंत्रण में करना |
उत्तर:
- सूरज → सर्वशक्ति संपन्नता का प्रतीक है।
- अमावस → घनघोर निराशा का प्रतीक है।
- जुगनू दबाना → शक्तियों को नियंत्रण में करना को दर्शाता है।
(v) यह कविता क्या संदेश देती है?
उत्तर:
इस कविता का मुख्य संदेश यह है कि हमें अपनी शक्ति के अनुसार जीवन जीना चाहिए। भले ही हम सूरज की तरह प्रकाश फैलाने में सक्षम न हों, लेकिन एक छोटे दिए की तरह अपनी पूरी क्षमता से जीवन जी सकते हैं। यह संदेश हमें आत्मनिर्भरता और आत्मसंतोष का महत्व समझाता है।निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।
अक्सर हम अपनी बातों में अपने परिवार, समाज और देश की बात करते हैं कि यह मेरा परिवार है, यह मेरा शहर है और यह मेरा देश है परंतु एक विचारधारा ऐसी भी है जिसके अंतर्गत पूरी दुनिया एक ही परिवार है, सब एक दूसरे से जुड़े रहते हैं, जिसे 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की संज्ञा से अभिहित किया गया। 'वसुधैव कुटुम्बकम्' सदियों से भारतीय दर्शन और अध्यात्म का हिस्सा है। यह सार्वभौमिक भाई-चारे और समस्त प्राणियों के अंतर्संबंध के विचार को पोषित करता है। समय के साथ-साथ 'वसुधैव कुटुम्बकम्' को भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में देखा जाने लगा जो करुणा के मूल्यों, विविधता के प्रति सम्मान और दुनिया में एकता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वर्तमान में इसको अधिक मान्यता और लोकप्रियता प्राप्त हुई है। देखा जाए तो यह सूत्र वैश्विक सहयोग और समझ को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम है। इस दर्शन को व्यवहार में लाने से वैश्विक स्तर पर शांति और सहयोग को बढ़ाया जा सकता है जो स्वयं के साथ-साथ दूसरों को भी लाभान्वित कर सके, आपसी सम्मान और समझ के माध्यम से संघर्षों को कम करके सद्भाव को बढ़ावा देने में सहायक हो सके । इस पावन धरा पर रहने वाले लोग एक ही परिवार के सदस्य हैं, इस अवधारणा का पल्लवन ही युद्ध और वैमनस्य की विभीषिका को दूर करने में सहायक हो सकता है। साहित्य, संगीत और कला की त्रिवेणी में इस अवधारणा के उपयोग के कारण यह वाक्यांश आधुनिक युग में अधिक व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ है। आज 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की बढ़ती प्रासंगिकता और आवश्यकता ने भारतीय संस्कृति और साहित्य की ओर भी विश्व का ध्यान आकृष्ट करने का काम किया है क्योंकि यह विचार भारतीय दर्शन को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने के साथ विश्व को भी बंधुत्व की भावना से ओतप्रोत कर रहा है और यही नूतन रूप में वैश्वीकरण है। जिस दिन पृथ्वी के सभी लोग समस्त भेदभाव भुलाकर एक परिवार की तरह आचरण करने लगेंगे उसी दिन सच्ची मानवता का उदय होगा ।
(i) केवल अपने परिवार, समाज और देश की बातें करना किस विचारधारा का द्योतक है?
उत्तर:
गद्यांश में 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के व्यापक दृष्टिकोण की बात की गई है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखा जाता है। केवल अपने परिवार, समाज और देश की बात करना एक संकुचित विचारधारा को दर्शाता है क्योंकि यह वैश्विक भाईचारे की भावना को सीमित कर देता है।(ii) संदर्भ के अनुसार गद्यांश में 'सार्वभौमिक' शब्द का सटीक अर्थ क्या हो सकता है?
उत्तर:
गद्यांश में 'वसुधैव कुटुम्बकम्' को सार्वभौमिक भाई-चारे और समस्त प्राणियों के अंतर्संबंध के विचार को पोषित करने वाला बताया गया है। यहाँ 'सार्वभौमिक' का अर्थ 'व्यापक दृष्टिकोण' से है, जो संपूर्ण विश्व को एकता के सूत्र में बांधने का प्रतीक है।(iii) निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर:
गद्यांश में 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के अनुसार पूरा विश्व एक परिवार के समान बताया गया है। इसके साथ ही मानव-मूल्यों के संवर्धन की बात भी की गई है।(iv) गद्यांश के अनुसार भारतीय दर्शन और अध्यात्म का हिस्सा है:
उत्तर:
गद्यांश में 'वसुधैव कुटुम्बकम्' को भारतीय दर्शन और अध्यात्म का हिस्सा बताया गया है।(v) वर्तमान समय में 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की प्रासंगिकता क्यों बढ़ रही है?
उत्तर:
गद्यांश में बताया गया है कि 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का विचार आपसी भेदभाव और संघर्षों को कम करने में सहायक है।(vi) गद्यांश में 'विविधता के प्रति सम्मान' कथन किस बात की ओर संकेत करता है?
उत्तर:
'वसुधैव कुटुम्बकम्' करुणा के मूल्यों, विविधता के प्रति सम्मान और दुनिया में एकता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।(vii) इस पावन धरा पर रहने वाले लोग एक ही परिवार के सदस्य हैं, इस अवधारणा का पल्लवन ही:
उत्तर:
गद्यांश में बताया गया है कि 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की अवधारणा अपनाने से वैश्विक स्तर पर शांति और सहयोग बढ़ सकता है।(viii) साहित्य, संगीत और कला की त्रिवेणी 'वसुधैव कुटुम्बकम्' को किस प्रकार चरितार्थ करती है?
उत्तर:
साहित्य, संगीत और कला किसी भी समाज की आत्मा होते हैं और इनका प्रभाव सीमाओं से परे होता है। गद्यांश में उल्लेख किया गया है कि 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की अवधारणा साहित्य, संगीत और कला के माध्यम से व्यापक रूप से लोकप्रिय हुई है। ये माध्यम केवल एक देश तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरी दुनिया को जोड़ते हैं और विश्व धरोहर के रूप में स्वीकार किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय संगीत, योग, और साहित्य ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है और लोगों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।(ix) वैश्वीकरण किस प्रकार संभव है?
उत्तर:
वैश्वीकरण (Globalization) का तात्पर्य है कि पूरी दुनिया एक-दूसरे से जुड़कर आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से परस्पर निर्भर हो जाए। इसके लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने देशों के बीच की दूरियों को कम कर दिया है। इंटरनेट, परिवहन, और आधुनिक संचार साधनों ने वैश्विक जुड़ाव को बढ़ावा दिया है। केवल विश्व बंधुत्व की भावना से वैश्वीकरण संभव नहीं है, जब तक कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी प्रगति इसे समर्थन न दें।(x) सच्ची मानवता का उदय कब होगा?
उत्तर:
गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिस दिन पृथ्वी के सभी लोग समस्त भेदभाव भुलाकर एक परिवार की तरह आचरण करने लगेंगे, उसी दिन सच्ची मानवता का उदय होगा। इसका अर्थ है कि मानवता का वास्तविक विकास तब होगा जब लोग न केवल अपने लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेम, करुणा और सहयोग की भावना रखेंगे। यह भावना समाज में शांति, सद्भाव और सहयोग को बढ़ावा देगी, जिससे संपूर्ण विश्व का कल्याण होगा। इसलिए, मानवता की सच्ची पहचान 'बंधुत्व की भावना' के प्रसार में निहित है।निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।
(i) किसी घटना के दृश्य एवं प्रत्यक्षदर्शियों या संबंधित व्यक्तियों का कथन दिखा और सुनाकर खबर को प्रमाणिकता प्रदान करना क्या कहलाता है?
उत्तर:
एंकर-बाइट (Anchor Byte) समाचार प्रस्तुत करने की एक तकनीक है, जिसमें किसी घटना के दृश्य, प्रत्यक्षदर्शियों के कथन, या संबंधित व्यक्तियों की आवाज़ के माध्यम से समाचार को प्रमाणिकता प्रदान की जाती है। इससे खबर को अधिक विश्वसनीय और प्रभावशाली बनाया जाता है।(ii) कौन-सा समाचार-पत्र प्रिंट रूप में उपलब्ध न होकर केवल इंटरनेट पर ही उपलब्ध है?
उत्तर:
'प्रभासाक्षी' एक डिजिटल समाचार पोर्टल है, जो केवल इंटरनेट पर उपलब्ध है और इसे प्रिंट में प्रकाशित नहीं किया जाता। अन्य समाचार-पत्रों की तरह इसका कोई मुद्रित संस्करण नहीं होता।(iii) समाचार और फीचर पत्रकारीय लेखन के दो प्रमुख रूप हैं, परंतु दोनों में पर्याप्त अंतर है। अतः निम्नलिखित में से समाचार के लिए अनिवार्य नहीं है:
उत्तर:
समाचार लेखन में सूचना देना, ताज़ी घटनाओं से अवगत कराना और शब्द सीमा का होना आवश्यक होता है। हालांकि, फोटो या ग्राफिक्स होना अनिवार्य नहीं है, क्योंकि कई समाचार केवल लेखन और रिपोर्टिंग के माध्यम से भी प्रस्तुत किए जाते हैं।(iv) कुछ लेखक अपने वैचारिक रुझान और लेखन शैली के लिए पहचाने जाते हैं। ऐसी लोकप्रियता देखकर उन्हें नियमित लेखन का जिम्मा दिया जाता है, उस लेखन को कहा जाता है:
उत्तर:
स्तंभ लेखन (Column Writing) एक नियमित रूप से प्रकाशित होने वाला लेख होता है, जिसमें लेखक किसी विशेष विषय पर अपने विचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और डिजिटल मीडिया में नियमित अंतराल पर प्रकाशित किया जाता है।(v) पार्थ एक पत्रकार है। वे सामान्य समाचारों से आगे बढ़कर विज्ञान-प्रौद्योगिकी विषय से जुड़ी घटनाओं, मुद्दों और समस्याओं का बारीकी से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग को क्या कहा जा सकता है?
उत्तर:
विशेषीकृत रिपोर्टिंग (Specialized Reporting) वह पत्रकारिता होती है, जिसमें पत्रकार किसी विशेष क्षेत्र जैसे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राजनीति, खेल, स्वास्थ्य आदि पर गहन शोध और विश्लेषण करता है। पार्थ की रिपोर्टिंग विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़ी घटनाओं पर केंद्रित है, इसलिए यह विशेषीकृत रिपोर्टिंग कहलाएगी।निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।
कविता एक उड़ान है
चिड़िया के बहाने
कविता की उड़ान
भला चिड़िया क्या जाने
बाहर भीतर
इस पर, उस घर
कविता के पंख लगा
उड़ने के माने
चिड़िया क्या जाने?
(i) कवि ने कविता के विषय में क्या बताया?
उत्तर:
कवि ने कविता को एक उड़ान के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसका अर्थ है कि यह एक निरंतर यात्रा की तरह है। कविता केवल शब्दों का संकलन नहीं होती, बल्कि यह एक यात्रा होती है, जो विचारों और भावनाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाती है।(ii) कविता और चिड़िया में समानता है।
उत्तर:
कविता और चिड़िया दोनों की उड़ान होती है, लेकिन कविता की उड़ान विचारों और भावनाओं की होती है, जबकि चिड़िया की उड़ान भौतिक होती है।(iii) निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए पद्यांश के अनुसार सही कथन का चयन करें।
उत्तर:
चिड़िया की उड़ान भौतिक सीमाओं तक सीमित होती है, जबकि कविता की उड़ान कल्पना, भावनाओं और विचारों के माध्यम से असीमित होती है। कविता किसी भी दिशा में जा सकती है, समय और स्थान की सीमाओं को पार कर सकती है।(iv) 'कविता के पंख लगा उड़ने के माने' में 'कविता के पंख' से तात्पर्य है:
उत्तर:
'कविता के पंख' का अर्थ कविता की कल्पनाशीलता से है, जिससे यह विचारों को नई ऊंचाइयों तक ले जाती है। कविता केवल शब्दों का खेल नहीं होती, बल्कि यह कल्पना और रचनात्मकता के माध्यम से नई दिशाओं में उड़ान भरती है।(v) कविता की उड़ान को कौन नहीं समझ सकता?
उत्तर:
विद्या (ज्ञान) केवल तथ्य और तर्क तक सीमित होती है, जबकि कविता की उड़ान कल्पना और भावनाओं से प्रेरित होती है। इसलिए, एक विशुद्ध तार्किक व्यक्ति कविता की उड़ान और उसके गहरे अर्थों को पूरी तरह समझ नहीं सकता।निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।
हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी बातें हो रही हैं, पर त्याग का कहीं नाम-निशान नहीं है। अर्थ आज एकमात्र साधन रह गया है। हम चटखारे लेकर इसके या उसके भ्रष्टाचार की बातें करते हैं, पर क्या कभी हमने जाँचा है कि अपने स्तर पर, अपने दायरे में, हम उसी भ्रष्टाचार के अंग तो नहीं बन रहे हैं? काले मेघों के दल उमड़ते हैं, पानी झमाझम बरसता है, पर गगरी फूटी की फूटी रह जाती है, बैल प्याले के प्यासे रह जाते हैं। आखिर कब बदलेगी यह स्थिति?
(i) गद्यांश में प्रयुक्त "त्याग" शब्द का समानार्थी शब्द हो सकता है:
उत्तर:
'त्याग' शब्द का समानार्थी 'त्याजन' होता है, जिसका अर्थ है किसी चीज़ को छोड़ना या त्याग करना।(ii) गद्यांश का केंद्रीय भाव है:
उत्तर:
इस गद्यांश में भ्रष्टाचार के बढ़ते प्रभाव और समाज पर उसके दुष्प्रभावों की चर्चा की गई है।(iii) निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए गद्यांश के अनुसार सही कथन का चयन करें:
उत्तर:
गद्यांश में बताया गया है कि व्यक्ति को अपने कार्यों का आत्मविश्लेषण करना चाहिए और यह देखना चाहिए कि कहीं वह स्वयं भी भ्रष्टाचार का भाग तो नहीं बन रहा।(iv) स्तंभ-I में दिए गए कथनों के आशय को स्तंभ-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए:
| स्तंभ-I | स्तंभ-II |
|---|---|
| 1. पानी झमाझम बरसता है। | (i) अपार धन-राशि व्यर्थ की जाती है। |
| 2. काले मेघों के दल उमड़ते हैं। | (ii) जन-समाज की आवश्यकताओं/स्थिति स्थिर-सी रह जाती है। |
| 3. गगरी फूटी रह जाती है, बैल प्याले के प्यासे रह जाते हैं। | (iii) भ्रष्टाचार हेतु अनेक योजनाएँ बनती हैं। |
उत्तर:
गद्यांश में प्रतीकात्मक रूप से भ्रष्टाचार और अपव्यय को दर्शाने के लिए इन वाक्यांशों का उपयोग किया गया है।(v) "आखिर कब बदलेगी यह स्थिति?" गद्यांश से उद्धृत इस कथन के संदर्भ में लिखिए कि देश की स्थिति कैसे बदलेगी।
उत्तर:
गद्यांश में भ्रष्टाचार को समाप्त करने और समाज में नैतिकता लाने की बात कही गई है। जब लोग त्याग की भावना अपनाएँगे और भ्रष्टाचार से दूर रहेंगे, तब स्थिति बदलेगी।निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।
(i) लेखक ने यशोधर बाबू को किशनदा का कौन-सा पुत्र कहा है?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, लेखक ने यशोधर बाबू को किशनदा का "मानस पुत्र" कहा है। इसका अर्थ यह है कि वे उनके विचारों, आदर्शों और सोच को अपनाने वाले पुत्र की तरह थे, भले ही वे जन्म से उनके पुत्र न हों। यह पुत्रत्व मानसिक और आत्मिक संबंधों पर आधारित होता है।(ii) मुअनजोदड़ो के सबसे ऊँचे चबूतरे पर क्या विद्यमान है?
उत्तर:
मुअनजोदड़ो, जो सिंधु घाटी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण नगर था, उसके सबसे ऊँचे चबूतरे पर बौद्ध स्तूप स्थित है। यह स्तूप बाद के काल में वहाँ निर्मित किया गया था, जो इस क्षेत्र में बौद्ध धर्म के प्रभाव को दर्शाता है। यह एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है जो इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए अत्यधिक महत्व रखता है।(iii) मुअनजोदड़ो की मुख्य सड़क की चौड़ाई कितनी है?
उत्तर:
मुअनजोदड़ो की मुख्य सड़क की चौड़ाई लगभग 33 फीट थी। यह सड़कें सुव्यवस्थित और समकोण पर निर्मित थीं, जिससे प्राचीन नगर नियोजन की उत्कृष्टता झलकती है। नगर की यह विशेषता इसे विश्व की सबसे योजनाबद्ध सभ्यताओं में से एक बनाती है।(iv) 'सिल्वर वैडिंग' पाठ के संदर्भ में निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन: सिल्वर वैडिंग की भव्य पार्टी भी यशोधर बाबू को 'समहाउ इंप्रॉपर' लगी।
कारण: यशोधर बाबू को केक काटना विलायती परंपरा और बचकानी बात मालूम होती थी।
उत्तर:
यशोधर बाबू को 'सिल्वर वैडिंग' की भव्यता अप्राकृतिक और अनावश्यक लगी, क्योंकि वे परंपरागत भारतीय मूल्यों के व्यक्ति थे। उन्हें केक काटना एक पश्चिमी और बचकानी परंपरा लगी, जो भारतीय संस्कृति से मेल नहीं खाती थी। इसलिए, कथन और कारण दोनों सही हैं, और कारण कथन की सही व्याख्या करता है।(v) 'जूझ' पाठ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार—मंत्री मास्टर गणित पढ़ाते थे।
मास्टर सौंदलगेकर के प्रयास से लेखक की हिंदी भाषा सुधरने लगी।
लेखक अपने अध्यापक से सुनी कविताएँ पढ़ाई करते हुए नहीं गाता था।
लेखक के पिता उसे पढ़ने के लिए प्रेरित करते थे—इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
(vi) अपने बेटों से तमाम तरह की शिकायतें होने पर भी यशोधर बाबू को उन पर गर्व क्यों था?
उत्तर:
हालाँकि यशोधर बाबू को अपने बेटों की कई बातों से शिकायत थी, लेकिन समाज में उनके बड़े आदमी के रूप में स्थापित हो जाने के कारण उन्हें गर्व भी था।(vii) पाठशाला जाने की बात लेखक ने सबसे पहले किससे की? 'जूझ' कहानी के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
लेखक ने सबसे पहले अपनी माँ से पाठशाला जाने की इच्छा व्यक्त की थी।(viii) 'जूझ' कहानी से लेखक की किस प्रकृति का उद्घाटन होता है?
उत्तर:
'जूझ' कहानी लेखक के संघर्षशील स्वभाव को दर्शाती है, जिसमें वह कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा प्राप्त करने और आगे बढ़ने की कोशिश करता है।(ix) 'सिल्वर वैडिंग' पाठ में पत्नी द्वारा मकान के संदर्भ में भविष्य की चिंता किए जाने पर यशोधर बाबू द्वारा नकली हँसी हँसने का कारण था:
उत्तर:
यशोधर बाबू ने अपनी गलती को महसूस किया और नकली हँसी से अपनी स्थिति को सँभालने की कोशिश की।(x) लेखक के अनुसार सिंधु सभ्यता का सौंदर्य है, उसके:
उत्तर:
सिंधु सभ्यता समाज-पोषित थी, क्योंकि यह एक संगठित समाज के सहयोग से विकसित हुई थी, जिसमें समानता और सुव्यवस्थित नगर-नियोजन देखने को मिलता है।निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
(क) बन रहेंगे हम रहेंगे
उत्तर:
पर्यावरण का संरक्षण हमारा दायित्व है। आज के आधुनिक युग में औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण पर्यावरण को भारी क्षति पहुँच रही है। वनों की अंधाधुंध कटाई, बढ़ता प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही हैं।
वन हमारे जीवन का आधार हैं। वे न केवल हमें शुद्ध वायु प्रदान करते हैं बल्कि अनेक जीव-जंतुओं का आश्रय भी हैं। वनों के विनाश के कारण वर्षा में कमी, भूमि कटाव और जैव विविधता का नाश हो रहा है। यदि हमें अपने अस्तित्व को बनाए रखना है, तो वनों की रक्षा करनी होगी।
पेड़-पौधों को बचाने के लिए हमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए, वन्यजीवों की सुरक्षा करनी चाहिए और वनों की अंधाधुंध कटाई को रोकना चाहिए। इसके लिए सरकारों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी प्रयास करने होंगे।
"यदि वन रहेंगे, तो हम रहेंगे"—यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन का सत्य है। हमें अपने भविष्य के लिए वनों को बचाना होगा, तभी हम एक स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण में जीवित रह सकेंगे।
(ख) मैंने जब गाड़ी चलाना सीखा
उत्तर:
गाड़ी चलाना सीखना जीवन की सबसे रोमांचक उपलब्धियों में से एक है। जब मैंने पहली बार गाड़ी चलाना सीखा, तो मन में एक अलग ही उत्साह था।
पहले दिन, मेरे पिता ने मुझे कार के बेसिक नियंत्रण समझाए। उन्होंने बताया कि कैसे एक्सीलेटर, ब्रेक और क्लच का सही इस्तेमाल करना चाहिए। शुरुआती कुछ दिन मेरे लिए चुनौतीपूर्ण थे। कभी कार झटके से बंद हो जाती, तो कभी अचानक रफ्तार पकड़ लेती। लेकिन धीरे-धीरे अभ्यास से मेरा आत्मविश्वास बढ़ता गया।
सबसे कठिन अनुभव था—रिवर्स गियर में कार चलाना और ट्रैफिक में गाड़ी नियंत्रित करना। धीरे-धीरे, मैंने सड़क के नियमों और संकेतों को समझा और ट्रैफिक में गाड़ी चलाने का आत्मविश्वास हासिल किया।
आज, गाड़ी चलाना मेरे लिए न केवल एक स्किल है, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता का प्रतीक भी है। इसने मुझे अनुशासन और धैर्य का महत्व भी सिखाया है।
(ग) समावेशी शिक्षा
उत्तर:
समावेशी शिक्षा का अर्थ है सभी बच्चों को समान अवसर प्रदान करना, चाहे वे किसी भी जाति, धर्म, लिंग, सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि या शारीरिक और मानसिक अक्षमताओं से ग्रस्त हों। यह शिक्षा का एक ऐसा मॉडल है जिसमें कोई भी बच्चा खुद को उपेक्षित महसूस नहीं करता।
समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है कि हर बच्चे को बिना भेदभाव के सीखने का अवसर मिले। इसके तहत दिव्यांग बच्चों को भी समान रूप से शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार दिया जाता है। इसके लिए स्कूलों में विशेष सुविधाएँ, प्रशिक्षित शिक्षक और अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है।
समावेशी शिक्षा से समाज में समानता, सहिष्णुता और आपसी सहयोग की भावना विकसित होती है। यह बच्चों को एकजुट होकर सीखने और एक बेहतर नागरिक बनने में मदद करता है।
इसलिए, समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है ताकि हर बच्चा बिना किसी बाधा के अपनी शिक्षा पूरी कर सके और समाज में योगदान दे सके।
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर लगभग 40 शब्दों में निर्देशानुसार उत्तर दीजिए। (2×2=4 अंक)
(क) कहानी और नाटक में क्या-क्या समानताएँ हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
- कहानी और नाटक दोनों साहित्य की विधाएँ हैं जिनमें पात्र, कथानक और संवाद होते हैं।
- दोनों में घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन किया जाता है।
- नाटक में संवाद अधिक होते हैं और दृश्यात्मकता होती है, जबकि कहानी में वर्णनात्मक शैली होती है।
- पाठकों या दर्शकों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करते हैं।
- सामाजिक, ऐतिहासिक या काल्पनिक विषयों पर आधारित हो सकते हैं।
अथवा
(ख) रेडियो नाटक लेखन में किन-किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है?
उत्तर:
- संवाद प्रभावशाली और स्पष्ट होने चाहिए।
- ध्वनि प्रभाव (Sound Effects) उचित तरीके से उपयोग किए जाने चाहिए।
- भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए ताकि श्रोता आसानी से समझ सकें।
- पात्रों की आवाज़ और संवादों में भावनाएँ झलकनी चाहिए।
- नाटक की अवधि उपयुक्त होनी चाहिए ताकि श्रोताओं की रुचि बनी रहे।
(ii) एकरात्मक लेखन में लेखक अपने विचार रखने हेतु स्वतंत्र है, फिर भी इस प्रकार का लेखन करते समय किस तरह के विचार व्यक्त किए जाने चाहिए?
उत्तर:
- विचार स्पष्ट और संगठित होने चाहिए।
- लेखन तथ्यपरक और तर्कसंगत होना चाहिए।
- समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले विचार होने चाहिए।
- भाषा सहज और संप्रेषणीय होनी चाहिए।
- लेखन में निष्पक्षता और संतुलन बनाए रखना चाहिए।
अथवा
(ख) रेडियो नाटक में ध्वनि-संकेतों के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
- परिस्थिति का निर्माण: जैसे बारिश, तूफान, गाड़ी की आवाज़ आदि।
- भावनाओं को दर्शाना: जैसे हँसी, रोना, तालियाँ, चीख आदि।
- संवादों को प्रभावी बनाना: जैसे दरवाजे की चरमराहट, घड़ी की टिक-टिक आदि।
- वातावरण निर्माण: जैसे मंदिर की घंटियाँ, बाज़ार का शोर आदि।
ध्वनि संकेतों का सही प्रयोग रेडियो नाटक को प्रभावशाली और यथार्थपरक बनाता है।
निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए।
(क) 'इंटरनेट पत्रकारिता' की लोकप्रियता के तीन कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
- तत्काल सूचना (Instant Information): इंटरनेट पत्रकारिता में समाचार तुरंत प्रकाशित और अपडेट किए जा सकते हैं, जिससे लोग वास्तविक समय में ताजा समाचार प्राप्त कर सकते हैं।
- व्यापक पहुंच (Wide Reach): इंटरनेट पर समाचार को किसी भी स्थान से पढ़ा जा सकता है। यह वैश्विक स्तर पर लोगों को जोड़ने का कार्य करता है।
- मल्टीमीडिया उपयोग (Use of Multimedia): इंटरनेट पत्रकारिता में केवल लेख नहीं बल्कि वीडियो, ऑडियो, इन्फोग्राफिक्स और चित्रों का भी प्रयोग किया जाता है, जिससे समाचार अधिक प्रभावशाली और आकर्षक बनते हैं।
(ख) पत्रकारीय विशेषज्ञता से क्या आशय है? यह व्यावसायिक विशेषज्ञता से किस रूप में भिन्न है?
उत्तर:
पत्रकारीय विशेषज्ञता: किसी विशेष क्षेत्र में पत्रकारिता का गहन ज्ञान और विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करना। इसमें राजनीति, विज्ञान, खेल, अर्थशास्त्र, स्वास्थ्य आदि विषयों पर शोधपूर्ण रिपोर्टिंग शामिल होती है।
व्यावसायिक विशेषज्ञता से अंतर:
| पत्रकारीय विशेषज्ञता | व्यावसायिक विशेषज्ञता |
|---|---|
| यह सूचना संप्रेषण और समाचार विश्लेषण से संबंधित होती है। | यह किसी विशेष व्यवसाय या पेशे में कुशलता और दक्षता से संबंधित होती है। |
| इसमें निष्पक्षता और तथ्यपरकता आवश्यक होती है। | इसमें लाभ, उत्पादन और व्यापार को प्राथमिकता दी जाती है। |
| पत्रकार विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। | पेशेवर व्यक्ति किसी उद्योग या कंपनी की उन्नति और व्यावसायिक सफलता पर ध्यान केंद्रित करता है। |
निष्कर्ष: पत्रकारीय विशेषज्ञता समाज में जागरूकता फैलाने और सूचना प्रसारित करने के लिए होती है, जबकि व्यावसायिक विशेषज्ञता किसी विशेष कार्यक्षेत्र में दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित होती है।
(ग) साहित्यिक लेखन से समाचार लेखन की कला किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
| साहित्यिक लेखन | समाचार लेखन |
|---|---|
| कल्पनाशीलता पर आधारित होता है। | तथ्य और सच्चाई पर आधारित होता है। |
| लेखक अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकता है। | पत्रकार को निष्पक्ष रहना आवश्यक होता है। |
| इसमें सौंदर्य, भावनाएँ और शैलियाँ महत्वपूर्ण होती हैं। | इसमें स्पष्टता, संक्षिप्तता और सटीकता आवश्यक होती है। |
निष्कर्ष: साहित्यिक लेखन में रचनात्मकता और कल्पनाशीलता होती है, जबकि समाचार लेखन तटस्थ और वास्तविक तथ्यों पर आधारित होता है।
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
(क) 'जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास' 'पतंग' कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि कवि ने ऐसा किसके लिए और क्यों कहा है?
उत्तर:
कवि ने इस पंक्ति में पतंग के धागे बनाने वाले मजदूरों और बुनकरों के संदर्भ में कहा है। वे लोग जन्म से ही सूत और कपास से जुड़े होते हैं। उनका जीवन धागा कातने, कपड़ा बुनने और पतंगों के लिए मांझा तैयार करने में बीत जाता है। यह उनकी परंपरागत आजीविका को दर्शाता है, जिससे वे जीवनभर जुड़े रहते हैं।
(ख) 'बात सीधी थी पर' कविता के आधार पर लिखिए कि कवि ने 'भाषा को सहूलियत' से बरतने की सलाह क्यों दी है?
उत्तर:
कवि ने 'बात सीधी थी पर' कविता में भाषा को सहज और सुगम बनाने की बात कही है। उनका मत है कि भाषा व्यक्ति की अभिव्यक्ति का माध्यम है और इसे जटिल बनाने की बजाय सहजता से प्रयोग करना चाहिए। अत्यधिक कठिन या कृत्रिम भाषा संचार में बाधा बन सकती है। कवि का उद्देश्य सरल और प्रभावी संप्रेषण को बढ़ावा देना है।
(ग) फिराक की रुबाइयों में उभरे घरेलू जीवन के बिंबों का सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
फिराक की रुबाइयों में घरेलू जीवन के सहज और आत्मीय बिंब दिखाई देते हैं। उनकी कविताओं में रसोई में चूल्हे की आंच, घर का आंगन, बच्चों की किलकारियां, और पारंपरिक भारतीय जीवन की झलक मिलती है। ये बिंब पाठकों को अपने परिचित घरेलू वातावरण का अनुभव कराते हैं। उनका सौंदर्य सादगी और आत्मीयता में निहित है, जो सामान्य जनजीवन को गहराई से प्रतिबिंबित करता है।
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए:
(क) 'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' कविता के आधार पर बताइए कि चिड़ियों के परों में चंचलता आने के क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' कविता में चिड़ियों के परों में चंचलता संध्या होने और घर लौटने की व्यग्रता को दर्शाती है। दिन समाप्त होने से पहले वे अपने घोंसले में लौटने की जल्दी में होती हैं, इसलिए उनकी उड़ान और गतिविधियाँ तेज हो जाती हैं।
(ख) 'उषा' कविता में 'राख से लीपा हुआ चौका (अभी गीला पड़ा है)' से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
इस पंक्ति का अभिप्राय है कि रात के अंधकार के बाद उषा (प्रभात) का आगमन हो रहा है। यह दर्शाता है कि रात के समय जलते चूल्हे की राख से लीपा चौका अभी भी गीला है, यानी रात अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और प्रभात की पहली किरणें धीरे-धीरे धरती को स्पर्श कर रही हैं।
(ग) तुलसी के अनुसार पेट की आग कैसी है और इसे किस प्रकार बुझाया जा सकता है?
उत्तर:
तुलसीदास के अनुसार, पेट की आग अत्यंत भयानक होती है, जो मनुष्य को हर हाल में भोजन प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। इसे केवल अन्न और जल से ही शांत किया जा सकता है। यह पंक्ति जीविका की अनिवार्यता को दर्शाती है, जिससे कोई भी व्यक्ति अछूता नहीं रह सकता।
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
(क) अनेक कमियों के होते हुए भी भक्तिन लेखिका के लिए अनमोल क्यों थी?
उत्तर:
- भक्तिन की कई कमियों के बावजूद वह लेखिका के लिए अनमोल थी, क्योंकि—
- वह अपने कार्य में निपुण और निष्ठावान थी।
- उसकी सरलता और स्नेहभाव ने लेखिका के मन में विशेष स्थान बना लिया था।
- उसकी ईमानदारी और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण ने उसे लेखिका के जीवन में अपरिहार्य बना दिया था।
(ख) 'यही आवाज़ मृत गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी।' 'पहलवान की ढोलक' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि गाँव को मृत क्यों कहा गया है और मृत गाँव को कौन-सी आवाज़ किस प्रकार संजीवनी देने का कार्य करती थी?
उत्तर:
- गाँव को 'मृत' कहा गया है क्योंकि—
- वहाँ जीवन में उत्साह और हलचल नहीं थी।
- लोगों के मन में निराशा और निष्क्रियता का भाव था।
- वहाँ सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का अभाव था।
- पहलवान की ढोलक की आवाज़ इस गाँव में संजीवनी शक्ति का काम करती थी। यह गाँववासियों में नवीन ऊर्जा भरती थी, जिससे वे जीवन में नई आशा और प्रेरणा प्राप्त करते थे।
(ग) लेखक ने शिरीष को अवधूत-रूप किन कारणों से माना है?
उत्तर:
- लेखक ने शिरीष को अवधूत रूप में इसलिए माना क्योंकि—
- यह अपने परिवेश से अलग एक स्वतंत्र और अद्वितीय वृक्ष है।
- शिरीष अपने नाजुक फूलों के बावजूद कठोर जलवायु सहन कर सकता है।
- यह किसी बाहरी सहायता के बिना भी पूर्ण रूप से विकसित होता है।
- यह अपनी प्रकृति में निस्वार्थ और संतोषी होता है, जो अवधूत के गुणों से मेल खाता है।
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए:
(क) पर्चेज़िंग पावर से क्या तात्पर्य है, बाज़ार पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
- "पर्चेज़िंग पावर" का अर्थ खरीदने की शक्ति से है, अर्थात किसी व्यक्ति या समाज की वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने की क्षमता।
- इसका बाज़ार पर सीधा प्रभाव पड़ता है—
- यदि पर्चेज़िंग पावर अधिक होगी, तो उपभोग बढ़ेगा और बाज़ार में माँग अधिक होगी।
- यदि पर्चेज़िंग पावर कम होगी, तो उत्पादन घट सकता है, जिससे आर्थिक मंदी आ सकती है।
(ख) आंबेडकर की कल्पना का समाज कैसा होगा? 'श्रम विभाजन और जाति-प्रथा' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
- आंबेडकर ने जातिविहीन और समानता पर आधारित समाज की कल्पना की थी, जहाँ—
- व्यक्ति की पहचान उसकी योग्यता और श्रम से होगी, न कि उसकी जाति से।
- समाज में सभी को समान अवसर मिलेंगे और किसी को जन्म के आधार पर श्रेष्ठ या निम्न नहीं माना जाएगा।
- जाति-आधारित श्रम विभाजन समाप्त होगा, जिससे प्रत्येक व्यक्ति को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार कार्य करने की स्वतंत्रता मिलेगी।
(ग) 'पानी दे, गुड़धानी दे' 'काले मेघा पानी दे' पाठ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि गुड़धानी क्या है और इसकी माँग भी क्यों की जा रही है?
उत्तर:
- गुड़धानी एक पारंपरिक व्यंजन है, जिसमें भुने हुए चने और गुड़ का मिश्रण होता है। इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- वर्षा के अभाव में बच्चे और किसान वर्षा के लिए प्रार्थना करते हुए गुड़धानी माँगते हैं, क्योंकि वर्षा होने पर अच्छी फसल होती है और जीवन में समृद्धि आती है।
पूरक पाठ्यपुस्तक पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए:
(क) 'सिल्वर वैडिंग' कहानी के संदर्भ में वर्तमान समाज के परिवार की संरचना और स्वरूप पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
- 'सिल्वर वैडिंग' कहानी के आधार पर वर्तमान समाज की पारिवारिक संरचना—
- संयुक्त परिवारों की जगह एकल परिवार अधिक हो गए हैं।
- आर्थिक स्वतंत्रता और आधुनिक जीवनशैली ने परिवारों में दूरी बढ़ा दी है।
- यथार्थवादी सोच ने पारिवारिक भावनाओं को कमजोर कर दिया है, जिससे संबंधों में औपचारिकता बढ़ गई है।
(ख) 'जूझ' शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसके शीर्षक का औचित्य सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
- "जूझ" का अर्थ संघर्ष करना, कठिनाइयों से लड़ना और सफलता प्राप्त करना होता है।
- कहानी में लेखक का संघर्ष शिक्षा प्राप्त करने और अपने जीवन को सुधारने के लिए था।
- शीर्षक इस बात को दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी हार न मानकर संघर्ष करते रहना चाहिए।
(ग) उदाहरण सहित सिद्ध कीजिए कि मुअनजो-दड़ो की सभ्यता लघुता में भी महत्ता का अनुभव कराने वाली सभ्यता थी।
उत्तर:
- मुअनजो-दड़ो एक प्राचीन सभ्यता थी, जो आकार में भले ही बड़ी न थी, लेकिन—
- योजनाबद्ध नगर-निर्माण (चौड़ी सड़कें, नालियाँ, जल निकासी प्रणाली) दर्शाता है कि यह सभ्यता उन्नत थी।
- विशाल स्नानागार और व्यापारिक केंद्र इसे एक विकसित समाज का रूप देते हैं।
- संस्कृति, कला और सामाजिक व्यवस्था के विकास के कारण इसे लघुता में भी महत्त्वपूर्ण सभ्यता माना जाता है।







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