UP Board Class 10 Hindi Question Paper with Answer Key – Code 801 DG. The Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad (UPMSP) conducted the Class 10 Hindi exam (Code 801 DG) in the afternoon session. The medium of the paper was Hindi. The question paper included multiple-choice and descriptive questions, and an answer key / solution set was made available for students to evaluate their performance.

UP Board Class 10 Hindi (Code 801 DG) Question Paper with Answer Key (February 16)

UP Board Class 12 Hindi (Code 801 DG) Question Paper with Solutions PDF Download PDF Check Solutions

Question 1:

‘रस मीमांसा’ के लेखक हैं

  • (1) महादेवी वर्मा
  • (2) रामचन्द्र शुक्ल
  • (3) ‘निराला’
  • (4) महावीर प्रसाद द्विवेदी
Correct Answer: (2) रामचन्द्र शुक्ल
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Step 1: Work–Author recall.

‘रस मीमांसा’ हिन्दी आलोचना का चर्चित निबंध/ग्रन्थ है, जिसके लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हैं।


Step 2: Eliminate distractors.

महादेवी वर्मा (कवयित्री), ‘निराला’ (कवि), और महावीर प्रसाद द्विवेदी (सम्पादक/आलोचक)—इनमें से किसी का प्रमुख कार्य ‘रस मीमांसा’ शीर्षक से नहीं है। अतः सही विकल्प (2) है।
Quick Tip: Author–work mapping is a frequent one-mark item. Memorize hallmark pairs like: रामचन्द्र शुक्ल — ‘रस मीमांसा’.


Question 2:

‘तितली’ कृति की विधा है :

  • (1) कहानी
  • (2) जीवनी
  • (3) उपन्यास
  • (4) नाटक
Correct Answer: (1) कहानी
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Step 1: Identify the work.

‘तितली’ हिन्दी साहित्य की एक प्रसिद्ध कहानी है, जो पाठ्यक्रम में short story के रूप में शामिल की जाती है।


Step 2: Eliminate other genres.

जीवनी (Biography), उपन्यास (Novel) और नाटक (Play)—ये तीनों विधागत रूप से भिन्न हैं और ‘तितली’ इनमें से किसी की श्रेणी में नहीं आती; यह संक्षिप्त गद्य-कथा है, इसलिए कहानी सही है।
Quick Tip: Match well-known titles with their genres: ‘तितली’—कहानी; ‘द्रुवस्वामिनी’—नाटक; ‘गोदान’—उपन्यास; ‘रानी लक्ष्मीबाई’—जीवनी/चरित्र-चित्रण।


Question 3:

डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद लेखक हैं :

  • (1) गाँधी की देन के
  • (2) हिन्दी - साहित्य का इतिहास के
  • (3) इन्द्रजाल के
  • (4) हिन्दी - साहित्य विमर्श के
Correct Answer: (1) गाँधी की देन के
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Step 1: Eliminate known mismatches.

‘हिन्दी - साहित्य का इतिहास’ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की रचना है; ‘इन्द्रजाल’ डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद से सम्बद्ध कृति नहीं; ‘हिन्दी - साहित्य विमर्श’ भी उनकी प्रसिद्ध रचना नहीं है।


Step 2: Match remaining title.

डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद के निबंध ‘गाँधी की देन’ के रूप में जाने जाते हैं, अतः सही विकल्प (1) है।
Quick Tip: पहले प्रसिद्ध जोड़े (लेखक–कृति) हटाइए, फिर शेष विकल्प की पुष्टि कीजिए—त्रुटि की सम्भावना घटती है।


Question 4:

‘साहित्य और कला’ रचना है :

  • (1) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की
  • (2) सुमित्रानन्दन पन्त की
  • (3) भगवतशरण उपाध्याय की
  • (4) जयप्रकाश भारती की
Correct Answer: (3) भगवतशरण उपाध्याय की
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Step 1: Identify the correct author.

‘साहित्य और कला’ शीर्षक का निबंध/आलोचनात्मक लेख भगवतशरण उपाध्याय से सम्बद्ध है।


Step 2: Eliminate distractors.

पन्त मुख्यतः कवि; बख्शी निबंधकार होते हुए भी इस विशिष्ट शीर्षक के रचयिता नहीं; जयप्रकाश भारती का भी यह शीर्षक नहीं मिलता। अतः (3) सही है।
Quick Tip: ऐसे शीर्षकों के लिए पाठ्यपुस्तक/प्रिस्क्राइब्ड एन्थोलॉजी से लेखक—शीर्षक तालिका बना कर दोहराएँ।


Question 5:

शुक्लोत्तर - युग के लेखक हैं :

  • (1) राधाचरण गोस्वामी
  • (2) चतुरसेन शास्त्री
  • (3) दौलतराम
  • (4) धर्मवीर भारती
Correct Answer: (4) धर्मवीर भारती
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Step 1: Understand the term.

‘शुक्लोत्तर - युग’ से तात्पर्य आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के बाद के हिन्दी साहित्य—आलोचना/काव्य—काल से है।


Step 2: Align authors with period.

धर्मवीर भारती नयी पीढ़ी/आधुनिक काल के प्रमुख लेखक हैं, जो शुक्लोत्तर परिप्रेक्ष्य में आते हैं। अन्य विकल्प ऐतिहासिक/विधागत रूप से इस श्रेणी से मेल नहीं खाते। अतः (4) सही है।
Quick Tip: ‘युग’ आधारित प्रश्नों में लेखक को उनके समय-काल और प्रमुख कृतित्व से जोड़कर याद रखें—गलतफ़हमी कम होगी।


Question 6:

रीतिकालीन कवि हैं :

  • (1) केदार भट्ट
  • (2) जायसी
  • (3) पद्माकर
  • (4) कृष्णदास
Correct Answer: (3) पद्माकर
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Step 1: Identify the period.

रीतिकाल (श्रृंगार-प्रधान युग) के प्रमुख कवियों में पद्माकर, बिहारी, केशवदास आदि आते हैं।

Step 2: Eliminate others.


जायसी आदिकाल/मध्यकाल के सूफ़ी काव्य परम्परा से हैं; केदार भट्ट छन्दशास्त्री हैं; ‘कृष्णदास’ को रीति-काव्य के शीर्ष कवियों में नहीं गिना जाता। अतः (3) सही है।
Quick Tip: युग-आधारित प्रश्नों में—कवि का काल, शैली और प्रमुख कृति को साथ में याद रखें।


Question 7:

‘छत्रसाल दर्शन’ के रचयिता हैं :

  • (1) मतीराम
  • (2) भूषण
  • (3) घनानन्द
  • (4) ‘हरिऔध’
Correct Answer: (2) भूषण
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Step 1: Recall the author.

‘छत्रसाल दर्शन’ बुन्देला नरेश छत्रसाल की वीर-स्तुति संबंधी रचना है, जिसके रचयिता भूषण हैं।


Step 2: Eliminate distractors.

मतीराम—रीति-निबंध/काव्य; घनानन्द—श्रृंगारिक कवि; ‘हरिऔध’—आधुनिक कालीन कवि/निबंधकार—इनमें किसी की ‘छत्रसाल दर्शन’ शीर्षक रचना नहीं। इसलिए (2) सही है।
Quick Tip: वीर-रस संबंधी शीर्षकों को भूषण, आल्हा-उदल, छत्रसाल जैसी ऐतिहासिक हस्तियों से जोड़कर याद करें।


Question 8:

‘तारसप्तक’ के सम्पादक हैं :

  • (1) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
  • (2) नरेन्द्र शर्मा
  • (3) भवानीप्रसाद मिश्र
  • (4) केशव
Correct Answer: (1) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
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Step 1: Identify the editor.

प्रयोगवाद/नयी कविता का महत्त्वपूर्ण संकलन ‘तारसप्तक’ अज्ञेय द्वारा सम्पादित है।


Step 2: Context.

यह संकलन सात कवियों के काव्य का संकलन है और आधुनिक हिन्दी काव्य-धारा का प्रतिनिधि ग्रन्थ माना जाता है। इसलिए (1) सही है।
Quick Tip: ‘सप्तक’ नाम सुनते ही—अज्ञेय (सम्पादक) और आधुनिक काव्य आंदोलनों को याद करें।


Question 9:

सुमित्रानन्दन पन्त की रचना है :

  • (1) ‘ज्ञानदीप’
  • (2) ‘युगवाणी’
  • (3) ‘प्रेमवाटिका’
  • (4) ‘क्षणदा’
Correct Answer: (2) ‘युगवाणी’
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Step 1: Match work to poet.

‘युगवाणी’ सुमित्रानन्दन पन्त का प्रसिद्ध काव्य-संग्रह है।


Step 2: Eliminate others.

‘प्रेमवाटिका’ (रसखान), ‘ज्ञानदीप’ तथा ‘क्षणदा’ पन्त की कृतियाँ नहीं हैं। अतः (2) सही है।
Quick Tip: छायावादी कवि—पन्त, प्रसाद, निराला, महादेवी—की प्रतिनिधि रचनाओं की सूची अलग से तैयार रखें।


Question 10:

‘स्मृति की रेखाएँ’ साहित्य की विधा है :

  • (1) जीवनी
  • (2) भेंटवार्ता
  • (3) संस्मरण
  • (4) नाटक
Correct Answer: (3) संस्मरण
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Step 1: Identify the genre.

‘स्मृति की रेखाएँ’ शीर्षक संस्मरण (memoir) का द्योतक है—व्यक्तिगत स्मृतियों पर आधारित लेखन।


Step 2: Differentiate from close genres.

जीवनी किसी अन्य व्यक्ति का जीवन-वृत्तान्त है; भेंटवार्ता साक्षात्कार/संवाद; नाटक नाट्य-रूप—ये संस्मरण से भिन्न हैं। इसलिए (3) सही है।
Quick Tip: विधाएँ पहचानते समय—जीवनी (Biography), आत्मकथा (Autobiography), संस्मरण (Memoir) के भेद स्पष्ट रखें।


Question 11:

‘करुण रस’ का स्थायीभाव है :

  • (1) भय
  • (2) निर्वेद
  • (3) विस्मय
  • (4) शोक
Correct Answer: (4) शोक
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Step 1: Recall ras–sthāyibhāva pairs.

करुण रस का स्थायीभाव शोक माना गया है (दुःख/विरह से उत्पन्न)।


Step 2: Eliminate others.

भय — भयानक रस; विस्मय — अद्भुत रस; निर्वेद — शान्त रस से सम्बद्ध। इसलिए (4) सही है।
Quick Tip: रसमूल-युग्म याद रखें: शृंगार–रति, हास्य–हास, करुण–शोक, रौद्र–क्रोध, वीर–उत्साह, भयानक–भय, वीभत्स–घृणा, अद्भुत–विस्मय, शान्त–निर्वेद।


Question 12:

‘पीपर पत सरिस मन डोला’ में अलंकार है :

  • (1) उत्प्रेक्षा
  • (2) रूपक
  • (3) उपमा
  • (4) यमक
Correct Answer: (3) उपमा
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Step 1: Identify the marker.

पंक्ति में “सरिस” (= सदृश) उपमान–सूचक शब्द है—यह उपमा का लक्षण है।


Step 2: Apply definition.

मन की चंचलता को ‘पीपर (पीपल) के पत्ते’ से तुलना दी गई है, अतः उपमा अलंकार है।
Quick Tip: उपमा में ‘जैसे/सम/समान/सरिस’ जैसे सूचक चिन्ह खोजें; रूपक में ये सूचक नहीं होते।


Question 13:

“मुनि केवट के बैन, प्रेम लपेते अटपटे।
बिसरे करूना ऐन, चितइ जानकी लखन तनु।”
उपर्युक्त पंक्तियों में छन्द है :

  • (1) रोला
  • (2) सौरठा
  • (3) सवैया
  • (4) कुण्डलिया
Correct Answer: (2) सौरठा
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Step 1: छन्द-लक्षण मिलान.

दोहा-परिवार का सौरठा छन्द 24 मात्राएँ (13+11) के विन्यास के साथ आता है, किन्तु दुति/गति-भेद से अंत्यानुप्रास-विन्यास भिन्न होता है।


Step 2: पंक्तियों का विन्यास.

दोहा-सदृश मात्रा-विन्यास होते हुए यति/तुकान्त के कारण यह सौरठा के रूप में प्रतिष्ठित है; अतः (2) सही।
Quick Tip: दोहा (13+11) और सौरठा (11+13/दोहा-विन्यास का उलट/भिन्न तुकान्त) के सूक्ष्म भेद को उदाहरणों से याद करें।


Question 14:

‘अनुचर’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है :

  • (1) अन
  • (2) अनु
  • (3) अ
  • (4) आ
Correct Answer: (2) अनु
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Step 1: Morphological split.

‘अनु’ (उपसर्ग) + ‘चर’ (धात्वर्थ/चलना) = अनुचर (पीछे-पीछे चलने वाला/सेवक)।


Step 2: Eliminate others.

‘अन’, ‘अ’, ‘आ’ यहाँ उपयुक्त रूप में नहीं बैठते। इसलिए (2) सही।
Quick Tip: उपसर्ग पहचानते समय—शब्द के आरम्भिक खंड को मूलधातु/प्रातिपदिक से अलग करके अर्थ-परिवर्तन जाँचें।


Question 15:

प्रत्यय के प्रकार हैं :

  • (1) दो
  • (2) चार
  • (3) पाँच
  • (4) तीन
Correct Answer: (1) दो
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Step 1: State the taxonomy.

प्रत्यय सामान्यतः दो प्रकार के माने जाते हैं—कृत (धातु पर लगने वाले) और तद्धित (प्रातिपदिक/संज्ञा पर लगने वाले)।


Step 2: Examples.

कृत: -अ, -ना (जैसे, लेख + ना = लेखना), तद्धित: -इय, -क (जैसे, ग्राम + ईय = ग्रामीय)।
Quick Tip: कृत = धातु-जन्य; तद्धित = संज्ञा-जन्य—यह सूत्र याद रखें।


Question 16:

‘वेद-पुराण’ में समास है :

  • (1) द्विगु
  • (2) बहुव्रीहि
  • (3) द्वन्द्व
  • (4) तत्पुरुष
Correct Answer: (3) द्वन्द्व
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Step 1: Identify relation.

‘वेद’ और ‘पुराण’—दो स्वतंत्र पद समान-स्तर पर और से जुड़े हैं; अर्थ—“वेद तथा पुराण”।


Step 2: Apply rule.

समपद बहुवचनार्थक समाहार होने पर द्वन्द्व समास बनता है; अतः (3) सही।
Quick Tip: “X और Y” जैसा सम्बन्ध दिखे तो पहले द्वन्द्व की जाँच करें; “X का Y” हो तो तत्पुरुष सम्भावित।


Question 17:

‘परमोद’ शब्द का तत्सम रूप है :

  • (1) पूमोद
  • (2) प्रमुद
  • (3) प्रमोद
  • (4) प्रमाद
Correct Answer: (3) प्रमोद
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Step 1: Restore tatsama spelling.

लोक-रूप ‘परमोद’ में ‘र’ की संधि/विकृति से ‘प्रमोद’ (आनन्द) बनता है—यह सही तत्सम है।


Step 2: Eliminate confusions.

‘प्रमुद’ अशुद्ध; ‘प्रमाद’ अर्थतः ‘चूक/अविवेक’—भिन्न शब्द। अतः (3) सही।
Quick Tip: तत्सम रूपों में मूल संस्कृत धातु/प्रातिपदिक की शुद्ध वर्तनी पर लौटें—अर्थ से भी पुष्टि करें।


Question 18:

‘इत्यादि’ में सन्धि है :

  • (1) यण सन्धि
  • (2) गुण सन्धि
  • (3) वृद्धि सन्धि
  • (4) जश्त्व सन्धि
Correct Answer: (1) यण सन्धि
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Step 1: Observe substitution.

‘इति + आदि’ के मेल पर ‘इत्यादि’—यहाँ इ + आ के संयोग में य् का आगम दिखता है, जिसे यण सन्धि कहते हैं।


Step 2: Differentiate.

गुण/वृद्धि स्वर-वृद्धि कराते हैं; जश्त्व व्यञ्जन-परिवर्तन—यहाँ उपयुक्त नहीं। इसलिए (1) सही।
Quick Tip: जब ‘इ/ई/उ/ऊ’ के बाद स्वर आए और ‘य/व’ झलकें, तो यण-सन्धि की जाँच करें।


Question 19:

‘फलेन’ शब्द का वचन एवं विभक्ति है :

  • (1) द्विवचन, चतुर्थी विभक्ति
  • (2) एकवचन, पञ्चमी विभक्ति
  • (3) बहुवचन, षष्ठी विभक्ति
  • (4) एकवचन, तृतीया विभक्ति
Correct Answer: (4) एकवचन, तृतीया विभक्ति
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Step 1: Identify ending.

संस्कृत-रूप ‘-ेन’ प्रत्यय तृतीया एकवचन (करण/साधन कारक) का चिह्न है—जैसे “फलेन” = “फल से / फल द्वारा”。


Step 2: Conclude.

अतः वचन = एकवचन, विभक्ति = तृतीया।
Quick Tip: करण कारक के संस्कृत रूप प्रायः “-ेन” (तृतीया एकवचन) से पहचाने जाते हैं—देवेन, हस्तेन, फलेन।


Question 20:

‘अपठम्’ धातु का वचन एवं पुरुष है :

  • (1) द्विवचन, उत्तम पुरुष
  • (2) एकवचन, प्रथम पुरुष
  • (3) बहुवचन, मध्यम पुरुष
  • (4) एकवचन, उत्तम पुरुष
Correct Answer: (4) एकवचन, उत्तम पुरुष
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Step 1: Recognize the verb ending.

रूप ‘-अम्’ (जैसे—अपठम्) लङ्-लकार/भूतकाल में उत्तम पुरुष एकवचन का संकेत है—“मैंने पढ़ा।”


Step 2: Validate by substitution.

“अहं अपठम्” = I read (past); अतः एकवचन, उत्तम पुरुष सही।
Quick Tip: संस्कृत भूतकाल (लङ्) में—उत्तम पु. एक. -म्, मध्यम पु. एक. -ः, प्रथम पु. एक. -त्—ये अन्त्य-चिह्न याद रखें।


Question 1A:

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

मित्रता के लिए यह आवश्यक नहीं है कि दो मित्र एक ही प्रकार के कार्य करते हों या एक की रुचि हो।इसी प्रकार प्रकृति और आचारण की समानता भी आवश्यक नहीं है। दो भिन्नप्रकृति के मनुष्यों में बराबर प्रीति और मित्रता रही है। राम धीमे और शान्त प्रकृति के थे, लक्ष्मण उग्र और उद्दाम प्रकृति के थे, पर दोनों भाइयों में अत्यन्त प्रगाढ़ स्नेह था। उदार तथा उच्चाचार कर्ण और लोभी दुर्योधन के स्वभाव में कुछ विशेष समानता न थी पर उन दोनों की मित्रता खूब निबाही।

  • (i) प्रस्तुत अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
  • (ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
  • (iii) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक क्या कहना चाहता है?
Correct Answer:
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(i) पाठ–लेखक:

यह अंश मित्रता के वास्तविक आधार पर केन्द्रित व्याख्यात्मक निबंध से लिया गया है (राम–लक्ष्मण, कर्ण–दुर्योधन के उदाहरण)। पाठ-शीर्षक/लेखक आपकी पुस्तक के अनुसार अंकित किए जाएँ।


(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:

कथन का अभिप्राय है कि सच्ची मित्रता स्वभाव, रुचि या आचरण की समानता पर नहीं, बल्कि विश्वास, निष्ठा और समर्पण पर टिकी होती है। अतः भिन्न प्रकृति के लोग भी गहरी मित्रता निभा सकते हैं।


(iii) लेखक का आशय:

लेखक दिखाता है कि मित्रता का मूलाधार चरित्र की सच्चाई, परस्पर सम्मान और विश्वास है; समानता केवल सहायक तत्व है, अनिवार्य नहीं। राम–लक्ष्मण तथा कर्ण–दुर्योधन के उदाहरण इस सिद्धान्त को पुष्ट करते हैं।
Quick Tip: व्याख्या-प्रश्न में पहले \(\textbf{संदर्भ}\), फिर \(\textbf{भावार्थ}\) और अंत में \(\textbf{निष्कर्ष}\) ज़रूर लिखें—उत्तर संतुलित बनता है।

अथवा


Question 1B:

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

अजन्ता संसार की चित्रकलाओं में अपना अद्वितीय स्थान रखता है। इतने प्राचीन काल के इतने सजीव, इतने गतिमान, इतने बहुसंयत कथा-प्राण चित्र कहीं नहीं बने। अजन्ता के चित्रों ने देश–विदेश सर्वत्र की चित्रकला को प्रभावित किया। उसका प्रभाव पूर्व के देशों की कला पर तो पड़ा ही, मध्य-पूर्वीय एशिया भी उसके कल्पनात्मक प्रभाव से बन्धित न रह सका।

  • (i) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
  • (ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
  • (iii) अजन्ता की कला का बाहर के देशों पर क्या प्रभाव पड़ा?
Correct Answer:
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(i) पाठ–लेखक:

अंश अजन्ता की भित्तिचित्र कला की उत्कृष्टता और वैभव का वर्णन करता है; पाठ/लेखक को आपके पाठ्यक्रमानुसार अंकित करें।


(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:

‘सजीव’—चित्रों में जीवन-गतिशीलता और संवेदना; ‘गतिमान’—रेखांकन/आकृतियों में गति का बोध; ‘बहुसंयत’—रंग-संयोजन, रेखाओं और भाव-प्रस्तुति में संतुलन एवं अनुशासन। तीनों मिलकर अजन्ता-चित्रों की कलात्मक परिपक्वता सिद्ध करते हैं।


(iii) बाह्य प्रभाव:

अजन्ता की कला ने भारत सहित पूर्वी देशों और मध्य-पूर्वीय एशिया की कलाधाराओं को रूप-विन्यास, भाव-संयम और कथात्मकता के स्तर पर प्रभावित किया; अनेक शैलियों में इसके अनुगामी रूप दिखाई देते हैं।
Quick Tip: कला-विषयक उत्तरों में \(\textbf{रूप, रंग, रचना, भाव, प्रभाव}\) जैसे कीवर्ड का उपयोग करें।


Question 2A:

दिए गए निर्गुण-सम्बन्धी पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

निरगुण कौन देश को बासी ?
मधुकर कहि समुझाइ साँहि दे, बुढ़ाती साँच न हाँसी।।
को है जनक, कौन है जननी, कौन नारि, को दासी ?
कोहे बरण, भेषहिं के कैसी, किहिं रस मैं अडिगलासी ?

पावोगी पुनि किया आपनो, जो रे करोगे गाँसी।
सुनत मौन है रहयो बावरी, सूर सबै मति नासी।।

  • (i) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
  • (ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
  • (iii) निर्गुण ब्रह्म के वर्णन में क्या कठिनाई व्यक्त की है?
Correct Answer:
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(i) सन्दर्भ:

पंक्तियाँ निर्गुण भक्ति-परम्परा से हैं जहाँ ईश्वर को नाम-रूप से परे माना गया है।


(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:

कवि पूछता है—निर्गुण का न पिता, न माता, न पत्नी, न सेविका—अर्थात वह सांसारिक संबंधों से परे है; उसे मानवीय रिश्तों/वर्गीकरणों में नहीं बाँधा जा सकता।


(iii) वर्णन की कठिनाई:

निर्गुण अवर्णनीय है—वाणी/बुद्धि उसकी पूर्ण अनुभूति नहीं करा सकती; इसलिए कवि मौन को भी उपयुक्त मानता है।
Quick Tip: पद्य-व्याख्या में \(\textbf{संदर्भ–भावार्थ–कला–संदेश}\) का क्रम रखें।


अथवा

Question 2B:

दिए गए पद्यांश (चींटी) पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

चींटी को देखा ?
वह सरल, विरल, काली रेखा।
तन के ताले-सी जो हिल-डुल
चलती लघु पद पल्लव मिल-गुल
वह है पिपीलिका पाँति।

देखो वह किस भाँति
काम करती वह सतत !
कण-कण कणके चुनती अविरत !

  • (i) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
  • (ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
  • (iii) कवि ‘वह है पिपीलिका पाँति’ के द्वारा जीवन के किस आदर्श की ओर संकेत करता है?
Correct Answer:
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(i) सन्दर्भ:

कविता प्रकृति-दर्शन के माध्यम से परिश्रम, अनुशासन और सामूहिकता का आदर्श प्रस्तुत करती है।


(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:

‘लघु पद पल्लव मिल-गुल’—चींटियाँ बहुत छोटे-छोटे पैरों से ताल-मेल में चलती हैं; उनकी चाल में एकता, लय और अनुशासन झलकता है।


(iii) संकेतित आदर्श:

कवि निरन्तर श्रम, टीम-वर्क, अनुशासन, धैर्य और लगन के आदर्श की प्रेरणा देता है—छोटा जीव भी सतत प्रयास से बड़ा कार्य साध लेता है।
Quick Tip: आदर्श-आधारित उत्तर में \(\textbf{कर्मठता, अनुशासन, एकता, धैर्य}\) जैसे मूल्य-शब्द जोड़ें।


Question 3A:

दिए गए संस्कृत गद्यांश (वाराणसी) का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

वाराणसी सुप्रसिद्धा प्राचीना नगरी। इयं विमलसलिलतस्य गङ्गायाः कूले स्थिताः। अस्या: घटटानां वरण्याकृतिः; पङ्क्तितः धवलायां चन्द्रिकायां बहु रजते। आगन्तुकाः पर्यटकाः देशेषु: नित्यं अत्र आयान्ति, अस्याः घटटालानां शोभा विलोक्य इयं बहु प्रशंसिता।

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

गद्यांश वाराणसी की ऐतिहासिक प्रसिद्धि, भौगोलिक स्थिति और घाटों की सौन्दर्य-छटा का वर्णन करता है।


हिन्दी अनुवाद:

“वाराणसी अत्यन्त प्राचीन और सुप्रसिद्ध नगरी है। यह निर्मल जल वाली गंगा के तट पर स्थित है। इसके घाटों की रचना वरणनीय है; श्वेत चाँदनी में ये घाट अत्यधिक दमकते हैं। देश-विदेश से पर्यटक प्रतिदिन यहाँ आते हैं और घाटों की शोभा देखकर इस नगरी की बहुत प्रशंसा करते हैं।”
Quick Tip: अनुवाद में पहले \(\textbf{क्रिया}\) पकड़ें, फिर \(\textbf{कर्त्ता–कर्म}\) जोड़ें; कठिन पदों के \(\textbf{समास/विभक्ति}\) अलग करके अर्थ स्पष्ट करें।


अथवा

Question 3B:

दिए गए संस्कृत गद्यांश (राजनीतिक संवाद) का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

आहा! राष्ट्रदेवः! यवनराज! एकम् इदं भारतराज्यं, बहूनि चान्य राज्यानि, बहवश्च शासकाः। त्वं मैत्रीं \- इच्छसि, तान् विभज्य भारतं जेत्तुम् इच्छसि। आम्भीकिः चायं प्रत्यक्षं प्रणमामः।

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

यह अंश राजनीतिक/कूटनीतिक प्रसंग का है जिसमें यवन-राज से संवाद है।


हिन्दी अनुवाद:

“आह! राष्ट्र-देव! यवन-राज! यह भारत-राज्य एक है; और भी बहुत से राज्य तथा शासक हैं। तुम मैत्री चाहते हो, पर उन्हें विभाजित करके भारत को जीतना भी चाहते हो। हम आम्भीक (दूत/प्रतिनिधि) प्रत्यक्ष उपस्थित होकर प्रणाम करते हैं।”
Quick Tip: राजनीतिक संस्कृत गद्य में \(\textbf{सम्बोधन}\), \(\textbf{इच्छासूचक}\) धातुएँ (इच्छसि), और \(\textbf{समास}\) पहचानकर वाक्य-रचना करें।


Question 4A:

दिए गए संस्कृत पद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

अपदो दूरगामी च साक्षरो न च पण्डितः ।
अमूष् स्पुटवक्त्रा च यो जानाति स पण्डितः ॥

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

यह श्लोक एक नीतिमूलक/पहेली-प्रधान पद्यांश है, जिसमें सच्चे पण्डित की पहचान बताई गई है।


हिन्दी अनुवाद (भावानुवाद):

“बिना पैरों के भी जो बहुत दूर जाता है, तथा साक्षर होने पर भी जो पण्डित (ज्ञानी) नहीं होता—इन जैसी बातों (पहेलियों/उदाहरणों) को साफ़-साफ़ समझ कर बताने वाला ही सच्चा पण्डित है।”


टिप्पणी:

‘अपदः दूरगामी’ (बिना पैर दूर जाने वाला) जैसे उदाहरण ध्वनि/वायु/विचार/कीर्ति आदि पर लागू होते हैं; श्लोक का उद्देश्य अर्थविवेक और स्पष्ट कथन को विद्वत्ता का मापदण्ड ठहराना है।
Quick Tip: संस्कृत पद्य के \(\textbf{भावानुवाद}\) में—(i) \(\textbf{विषय}\) (क्या कहा), (ii) \(\textbf{लक्ष्य}\) (उद्देश्य), (iii) \(\textbf{शब्द-पहचान}\) (समास/विशेषण)—तीनों स्पष्ट रखें।


अथवा

Question 4B:

दिए गए संस्कृत पद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
धान्यानामनुमतं किम्? स धनानां स्वादु किमुत्तमम् ।
लाभानामुत्तमं किं स्यात्? सुभगानां स्वादु किमुत्तमम् ॥

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

श्लोक आदर्श-चिंतन है—जीवन के विविध क्षेत्रों में श्रेष्ठ/प्रिय क्या है, यह प्रश्नोत्तर शैली में रखा गया है।


हिन्दी अनुवाद (भावानुवाद):

“अन्न/धान्यों में सबसे स्वीकार/श्रेष्ठ क्या है? धन में सबसे स्वादु/प्रिय (सरस) क्या है?

लाभों में सबसे अच्छा क्या माना जाए? और सौभाग्य/सौंदर्य में सबसे प्रिय क्या है?”

(परम्परागत व्याख्या में उत्तर—सन्तोष/धान्य में अन्न, धन में धर्म/कीर्ति, लाभ में स्वास्थ्य/सद्गति, सौभाग्य में सद्गुण/सदाचार—जिनका आशय नैतिक श्रेष्ठता से है।)
Quick Tip: जब श्लोक \(\textbf{प्रश्न-रूप}\) में हो, अनुवाद में \(\textbf{प्रश्न-भाव}\) बनाए रखें; पारम्परिक \(\textbf{उत्तरों}\) को \(\textbf{टिप्पणी}\) में जोड़ा जा सकता है।


Question 5(क):

‘तृमूल’ खण्डकाव्य के आधार पर
(i) प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) ‘तृमूल’ खण्डकाव्य का कथानक संक्षेप में लिखिए।

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(i) चरित्र-चित्रण:

प्रमुख पात्र दृढ़-संकल्प, नैतिक, कर्तव्यनिष्ठ तथा संवेदनशील है; संकट में भी धैर्य और आत्मसंयम नहीं छोड़ता; निजी हित से पहले धर्म/समाजहित को रखता है।


(ii) कथानक-संक्षेप:

काव्य में नायक का आत्मद्वन्द्व, आदर्श–व्यवहार का संघर्ष, और अंततः धर्म–नीति की विजय के साथ समाधान प्रस्तुत है; प्रसंगों में प्रतिकूल परिस्थितियों पर सत्यनिष्ठा की विजय मुख्य धुरी है।
Quick Tip: चरित्र-उत्तर = गुण + कर्म + परिणाम — तीनों पहलुओं से लिखें।


Question 5 (ख):

‘अमृतपूजा’ खण्डकाव्य की

(i) कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
(ii) श्रीकृष्ण का चरित्रांकन कीजिए।

Correct Answer: Subjective with textual alignment.
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(i) कथावस्तु:

काव्य भक्ति-सौरभ से भरा है—कृष्ण-जन्म, बाल-लीलाएँ, गोपी-भक्ति, कंस-वध, धर्म-स्थापना जैसे प्रसंग भावमय ढंग से जुड़े हैं; समापन लोककल्याण/धर्मरक्षा के संदेश पर होता है।

(ii) चरित्रांकन (श्रीकृष्ण):

करुणामय, माधुर्य-पूर्ण, लोकनायक—मार्गदर्शक (गीता-सार), रक्षक (धर्मसंस्थापन), लीलकौशल और वात्सल्य का समन्वय।
Quick Tip: देव-चरित्र = गुण (दया/धर्म) + भूमिका (रक्षक/मार्गदर्शक) + प्रसंग (प्रतीकात्मक घटनाएँ)।


Question 5 (ग):

‘कर्मवीर भरत’ खण्डकाव्य के आधार पर

(i) भरत का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) किसी एक सर्ग का कथानक लिखिए।

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(i) भरत का चरित्र:

धर्मनिष्ठ, भ्रातृभक्त, त्यागी, विनयी—राम को राज्य-स्वामी मानकर खड़ाऊँ-न्यासन चलाते हैं; जनकल्याण व मर्यादा के पालनकर्ता।


(ii) सर्ग-सार (उदाहरण):

चित्रकूटगमन—विनयपूर्वक राज्य-प्रस्ताव, राम का न्यासनिर्णय, भरत का न्यासी-शासन और जन-कल्याण—त्याग और मर्यादा का उत्कर्ष।
Quick Tip: रामकथा-उत्तर में “मर्यादा–त्याग–भ्रातृभक्ति”—इन तीन सूत्रों पर बिंदु सजाएँ।


Question 5 (घ):

‘कर्ण’ खण्डकाव्य के आधार पर

(i) कर्ण का चरित्रांकन कीजिए।
(ii) तृतीय सर्ग की कथा अपने शब्दों में लिखिए।

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(i) कर्ण का चरित्र:

दानवीर, मित्रनिष्ठ, शौर्यवान, स्वाभिमानी—जन्म-रहस्य व सामाजिक अवमानना के बावजूद प्रतिभा से प्रतिष्ठित; मित्र-निष्ठा के कारण धर्मसंकट में।


(ii) तृतीय सर्ग (संकेतात्मक):

कवच-कुण्डल दान, इन्द्र–कर्ण प्रसंग, युद्ध-पूर्व नैतिक द्वन्द्व, अर्जुन-प्रतिस्पर्धा की पृष्ठभूमि—वीर–करुण रस की प्रधानता।
Quick Tip: कर्ण = दान + निष्ठा + स्वाभिमान + धर्मद्वन्द्व — चारों अवश्य लिखें।


Question 5 (ङ):

‘ज्योति – जवाहर’ खण्डकाव्य के आधार पर

(i) नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।

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(i) नायक (जवाहरलाल नेहरू):

दूरदर्शी, मानवीय, वैज्ञानिक दृष्टि, लोकतांत्रिक मूल्य—विश्व-मित्रता, बहुलतावाद, वक्तृत्व-कौशल और सौम्य नेतृत्व।


(ii) कथावस्तु:

स्वाधीनता-संग्राम, जेल-जीवन, राष्ट्र-निर्माण का स्वप्न; ‘ज्योति’ प्रतीक मार्गदर्शक प्रकाश/आदर्श का द्योतक—नवभारत की परिकल्पना।
Quick Tip: जीवनीपरक काव्य = व्यक्ति-गुण + ऐतिहासिक प्रसंग + राष्ट्र/समाज का लक्ष्य।


Question 5 (च):

‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के आधार पर

(i) चन्द्रशेखर आज़ाद का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) कथानक का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

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(i) चरित्र:

निडर, अनुशासित, संगठन-क्षम, आत्मबलिदानी—राष्ट्र-निष्ठ; कठिन परिस्थितियों में भी हौसला और रणनीति बनाए रखते हैं।


(ii) सारांश:

क्रान्तिकारी जीवन-यात्रा, दमन के विरुद्ध संघर्ष, साथियों का संगठन, और अंतिम बलिदान—काव्य में वीर–उत्साह और देशप्रेम का उत्कर्ष।
Quick Tip: क्रान्तिकारी चरित्र में “साहस + अनुशासन + संगठन + बलिदान” — चार स्तम्भों पर उत्तर टिकाएँ।


Question 5 (छ):

‘मेवाड़ – मुकुट’ खण्डकाव्य के आधार पर

(i) महाराणा प्रताप का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ii) किसी एक सर्ग की कथा अपने शब्दों में लिखिए।

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(i) चरित्र:

अदम्य स्वाभिमान, रणकौशल, स्वातन्त्र्य-प्रेम, जन-हितैषी—विपन्नता में भी धैर्य/रणनीति नहीं छोड़ते; गौरव-प्रतीक।


(ii) सर्ग-सार (उदाहरण):

वन-जीवन की कठोरता, भामाशाह का सहयोग, गुरिल्ला-रणनीति, और मेवाड़-पुनरुत्थान—वीरता व आत्मसम्मान का उत्कर्ष।
Quick Tip: ऐतिहासिक नायक = काल-परिदृश्य + संघर्ष-रणनीति + मूल्य (स्वाभिमान/स्वतंत्रता)।


Question 5 (ज):

‘जय सुभाष’ खण्डकाव्य के आधार पर

(i) सुभाषचन्द्र बोस की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
(ii) काव्य की कथावस्तु अपने शब्दों में लिखिए।

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(i) चारित्रिक विशेषताएँ:

अटूट संकल्प, नेतृत्व-प्रभा, अनुशासन, त्याग/बलिदान; आज़ाद हिन्द फौज के संगठन में दूरदर्शिता।


(ii) कथावस्तु:

देशनिकासी, विदेशी सहयोग, I.N.A. का गठन, स्वराज-संकल्प—ओजस्वी शैली में प्रस्तुत; समन्वित संदेश—स्वाधीनता हेतु समवेत प्रयास।
Quick Tip: जीवनी-उत्तर में “व्यक्तित्व-गुण + लक्ष्य + उपलब्धि/प्रभाव” — यह त्रिवेणी लिखें।


Question 5 (झ):

‘मुक्तिदूत’ खण्डकाव्य के

(i) नायक का चरित्रांकन कीजिए।
(ii) द्वितीय सर्ग की कथावस्तु लिखिए।

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(i) चरित्रांकन:

नायक स्वाधीनता-संदेश का वाहक—साहसी, संयमी, कर्मठ, आदर्शवादी—वाणी में ओज, कर्म में नैतिक दृढ़ता; जनता में जागरण जगाता है।


(ii) द्वितीय सर्ग:

जन-जागरण का विस्तार, दमन-नीति के विरुद्ध आह्वान, संगठन/संयम के साथ संघर्ष-संकल्प; स्वतंत्रता-प्रेरणा का उभार—घटनाएँ राष्ट्रभाव को तीव्र करती हैं।
Quick Tip: जब सटीक घटनाएँ याद न हों, थीम-आधारित क्रम—“स्थिति → संघर्ष → संकल्प → परिणाम”—से उत्तर गढ़ें।


Question 6(क):

निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय दीजिए तथा उनकी किसी एक रचना का नामोल्लेख कीजिए :

  • (i) जयशंकर प्रसाद
  • (ii) डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद
  • (iii) भगवतशरण उपाध्याय
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(i) जयशंकर प्रसाद — संक्षिप्त जीवन-परिचय: छायावाद के प्रमुख स्तम्भ; काशी (वाराणसी) में जन्म; कवि, नाटककार, कथाकार।

रचना-नाम (कोई एक): कामायनी (महाकाव्य), आँसू (काव्य), ध्रुवस्वामिनी/स्कन्दगुप्त/चन्द्रगुप्त (नाटक)।


(ii) डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद — संक्षिप्त जीवन-परिचय: स्वतंत्रता सेनानी, संवैधानिक सभा के अध्यक्ष और भारत के प्रथम राष्ट्रपति; सरल जीवन, लेखन व लोकसेवा में रुचि।

रचना-नाम (कोई एक): आत्मकथा, भारत का संविधान, गाँधी की देन (निबंधात्मक लेख)।


(iii) भगवतशरण उपाध्याय — संक्षिप्त जीवन-परिचय: प्रख्यात आलोचक, निबंधकार, इतिहास-बोध से युक्त विद्वान; साहित्य और संस्कृति पर गहन अध्ययन।

रचना-नाम (कोई एक): साहित्य और कला, भारतीय काव्यशास्त्र, कविता का विकास (आलोचनात्मक ग्रन्थ)।
Quick Tip: जीवन-परिचय में \(\textbf{(जन्म-स्थान/काल)}\) + (मुख्य पहचान) + (योगदान/आन्दोलन) + (1–2 रचनाएँ)—ये चार बिंदु लिखें।


Question 6(ख):

निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय दीजिए और उनकी एक प्रमुख रचना का नामोल्लेख कीजिए :

  • (i) तुलसीदास
  • (ii) महादेवी वर्मा
  • (iii) रामनरेश त्रिपाठी
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(i) तुलसीदास — जीवन-परिचय: भक्तिकाल के महाकवि; रामभक्ति की अमर परम्परा के प्रवर्तक।

प्रमुख रचना: रामचरितमानस (सात काण्ड), विनयपत्रिका, कवितावली।


(ii) महादेवी वर्मा — जीवन-परिचय: छायावाद की योगेश्वरी; संवेदनशील काव्य और गद्य; नारी-चेतना की प्रवक्ता।

प्रमुख रचना: यामा (काव्य), अतीत के चलचित्र, श्रृंखला की कड़ियाँ (गद्य)।


(iii) रामनरेश त्रिपाठी — जीवन-परिचय: खड़ीबोली-काव्य के आरम्भिक साधक; लोक-भावना और सरल भाषा के कवि।

प्रमुख रचना: पावन, मानस-सी, सुधा (काव्य-संग्रह)।
Quick Tip: कवि-उत्तर में \(\textbf{युग/धारा (भक्ति/छायावाद)}\), \(\textbf{शैली}\), \(\textbf{मुख्य प्रवृत्ति}\) और \(\textbf{1–2 कृतियाँ}\) जरूर दें।


Question 7:

अपनी पाठ्यपुस्तक से कण्ठस्थ किया हुआ कोई एक श्लोक लिखिए जो इस प्रश्न-पत्र में न आया हो।

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उदाहरण (गीता 2.47):

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥


भावार्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म पर है, फल पर कभी नहीं; फल-हेतु बनने या अकर्मण्यता से जुड़ने की प्रवृत्ति न हो।
Quick Tip: श्लोक लिखते समय \(\textbf{पूरा पाठ}\) और \(\textbf{स्रोत/भावार्थ}\) भी जोड़ें—अंक सुरक्षित रहते हैं।


Question 8:

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों का उत्तर संस्कृत में दीजिए :

  • (i) श्वेतकेतुः कस्य पुत्रः आसीत् ?
  • (i) श्वेतकेतुः कस्य पुत्रः आसीत् ?
  • (ii) विश्वस्य भर्ता कः ?
  • (iii) आतुरस्य मित्रं कः भवति ?
  • (iv) चन्द्रशेखरः स्वपितुः नाम किम् अकथयत् ?
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(i) श्वेतकेतुः उद्दालकस्य (आरुणेः) पुत्रः आसीत्।

(ii) विष्णुः विश्वस्य भर्ता अस्ति।

(iii) वैद्यः आतुरस्य मित्रं भवति।

(iv) चन्द्रशेखरः स्वपितुः नाम “स्वाधीनता” इति अकथयत्।
Quick Tip: लघु-वाक्यों में \(\textbf{कर्त्ता–कर्म–क्रिया}\) का क्रम रखें; \(\textbf{विभक्ति}\) (षष्ठी–कर्म, प्रथमा–कर्त्ता) स्पष्ट लिखें।


Question 9:

निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए :

  • (i) स्वच्छ भारत अभियान
  • (ii) विज्ञान—वरदान या अभिशाप
  • (iii) पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और समाधान
  • (iv) जनसंख्या वृद्धि की समस्या और समाधान
  • (v) विद्यार्थी जीवन में खेल का महत्व
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मॉडल निबन्ध (विकल्प iii): \; पर्यावरण प्रदूषण—समस्या और समाधान


भूमिका: आधुनिक विकास-यात्रा ने मानव को सुविधा दी, पर वायु, जल, मृदा, ध्वनि—सब स्तरों पर प्रदूषण ने जीवन-संतुलन बिगाड़ दिया। वैश्विक तापवृद्धि, जैव-विविधता ह्रास, चरम मौसमी घटनाएँ—इनका सम्बन्ध सीधे प्रदूषण से है।


प्रमुख कारण: अनियंत्रित औद्योगिकीकरण, कोयला-आधारित ऊर्जा, वाहनों से निकास, प्लास्टिक-अपशिष्ट, नदी-प्रदूषण, अंधाधुंध वृक्ष-निधन, रासायनिक कृषि।


प्रभाव: श्वसन-रोग, जलजनित व्याधियाँ, कृषि-भूमि की उर्वरा-घटौती, वन्यजीवों का संकट, समुद्री-परितंत्र का क्षरण, चरम मौसम से आर्थिक-हानि।


समाधान: (क) नवीकरणीय ऊर्जा (सौर/पवन/हरित-हाइड्रोजन), (ख) सार्वजनिक परिवहन व ई-गतिशीलता, (ग) कचरा-प्रबंधन—घटाओ, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण; (घ) जल-शोधन व औद्योगिक उत्सर्जन-मानक; (ङ) सतत कृषि—जैविक/प्राकृतिक विधियाँ; (च) शहरी हरित क्षेत्र व वृक्षारोपण; (छ) पर्यावरण-शिक्षा व नागरिक भागीदारी।


सरकारी–सामुदायिक पहल: कड़े क़ानून, कार्बन-कर/उत्सर्जन-व्यापार, स्थानीय निकाय द्वारा ठोस-अपशिष्ट प्रबंधन; स्कूल–महाविद्यालय स्तर पर स्वच्छता अभियान, नदी मित्र व जल-जीवन-हरियाली जैसी योजनाएँ।


उपसंहार: प्रकृति संसाधन नहीं, सह-अस्तित्व का आधार है। तकनीक, नीति और जन-सहभागिता के त्रिसूत्र से ही प्रदूषण-समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
Quick Tip: निबन्ध का ढाँचा रखें—\(\textbf{भूमिका → कारण → प्रभाव → समाधान → उपसंहार}\); हर भाग में 2–3 ठोस बिंदु लिखें।