UP Board Class 10 Social Science Question Paper 2024 PDF ( Code 825 IX) is available for download here. The Social Science exam was conducted on February 27, 2024 in the Morning Shift from 8:30 AM to 11:45 AM. The total marks for the theory paper are 70. Students reported the paper to be moderate.
 

UP Board Class 10 Social Science Question Paper 2024 (Code 825 IX) with Solutions

UP Board Class 10 Social Science Question Paper With Answer Key

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Question 1:

निम्नलिखित में से कौन-सा आन्दोलन महात्मा गाँधी ने नहीं चलाया ?

  • (A) असहयोग आन्दोलन
  • (B) सविनय अवज्ञा आन्दोलन
  • (C) चम्पारन आन्दोलन
  • (D) खिलाफत आन्दोलन
Correct Answer: (D) खिलाफत आन्दोलन
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महात्मा गाँधी ने असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन और चम्पारन आन्दोलन चलाए थे, लेकिन उन्होंने खिलाफत आन्दोलन को नहीं चलाया। खिलाफत आन्दोलन का नेतृत्व मुख्य रूप से मोहम्मद अली और शौकत अली ने किया था।


Question 2:

1789 में फ्रांस में राष्ट्रवाद की प्रथम अभिव्यक्ति का क्या परिणाम हुआ ?

  • (A) फ्रांस की क्रान्ति
  • (B) नेपोलियन का उदय
  • (C) जर्मनी का एकीकरण
  • (D) निरंकुश गजतंत्र का प्राग्म्भ
Correct Answer: (A) फ्रांस की क्रान्ति
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1789 में फ्रांस में राष्ट्रवाद की प्रथम अभिव्यक्ति के परिणामस्वरूप फ्रांस की क्रान्ति हुई। इस क्रान्ति ने न केवल फ्रांस की राजनीतिक संरचना को बदल दिया, बल्कि पूरी दुनिया में राष्ट्रवाद और लोकतंत्र के सिद्धांतों को प्रोत्साहित किया।


Question 3:

'गुलामगिरी' के लेखक कौन थे ?

  • (A) ई.वी. रामास्वामी
  • (B) ज्योतिबा फुले
  • (C) भीमराव रामजी अम्बेडकर
  • (D) बाल गंगाधर निल्क
Correct Answer: (B) ज्योतिबा फुले
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'गुलामगिरी' के लेखक ज्योतिबा फुले थे। इस पुस्तक में उन्होंने समाज में व्याप्त जातिवाद और शोषण के खिलाफ आवाज उठाई थी और भारतीय समाज में समानता की आवश्यकता को व्यक्त किया था।


Question 4:

1929 की महामंदी का प्रमुख कारण क्या था ?

  • (A) कृषि क्षेत्र में अति उत्पादन
  • (B) कृषि क्षेत्र में न्यून उत्पादन
  • (C) बेरोज़गारी
  • (D) प्रमुख बैंकों का ध्वंसायी होना
Correct Answer: (D) प्रमुख बैंकों का ध्वंसायी होना
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1929 की महामंदी का प्रमुख कारण कृषि क्षेत्र में अति उत्पादन था। इसके कारण कृषि मूल्य गिर गए, जो आर्थिक संकट का कारण बने। इसके परिणामस्वरूप बेरोज़गारी और आर्थिक संकट पैदा हुआ, जो महामंदी का कारण बना।


Question 5:

1944 में अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की स्थापना कहाँ की गई थी ?

  • (A) ब्रिटेन
  • (B) संयुक्त राज्य अमेरिका
  • (C) फ्रांस
  • (D) भाग्त
Correct Answer: (B) संयुक्त राज्य अमेरिका
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1944 में अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की स्थापना संयुक्त राज्य अमेरिका में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना था।


Question 6:

श्रीलंका में निम्नलिखित में से कौन-सा समूह अल्पसंख्यक है ?

  • (A) तमिल
  • (B) ईसाई
  • (C) सिंहली
  • (D) मुस्लिम
Correct Answer: (A) तमिल
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श्रीलंका में तमिल समुदाय अल्पसंख्यक है। सिंहली समुदाय वहाँ का प्रमुख जातीय समूह है, जबकि तमिल समुदाय एक अल्पसंख्यक समूह के रूप में रहता है।


Question 7:

भारत में संघीय व्यवस्था है क्योंकि :

  • (A) यहाँ शक्तियों का विकेन्द्रीकरण है।
  • (B) यहां शक्तियों का केन्द्रीयकरण है।
  • (C) संविधान लचीला है।
  • (D) उपयुक्त में कोई नहीं
Correct Answer: (A) यहाँ शक्तियों का विकेन्द्रीकरण है।
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भारत में संघीय व्यवस्था है क्योंकि यहाँ शक्तियों का विकेन्द्रीकरण किया गया है। संघीय व्यवस्था का मतलब है कि विभिन्न स्तरों पर, जैसे केंद्र और राज्य, के पास अपनी-अपनी शक्तियाँ होती हैं।


Question 8:

निम्नलिखित में से कौन-सा संघीय राज्य नहीं है ?

  • (A) मणिपुर
  • (B) हिमाचल प्रदेश
  • (C) दिल्ली
  • (D) त्रिपुरा
Correct Answer: (C) दिल्ली
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दिल्ली एक संघीय राज्य नहीं है, बल्कि यह एक केंद्र शासित प्रदेश है। मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और त्रिपुरा भारतीय संघ के राज्य हैं।


Question 9:

निम्नलिखित में से किस व्यवस्था के लिए राजनीतिक दल आवश्यक शर्तं हैं ?

  • (A) राजतंत्र
  • (B) लोकतंत्र
  • (C) नानाशाही
  • (D) मनाबाद
Correct Answer: (B) लोकतंत्र
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राजनीतिक दल लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त होते हैं क्योंकि वे नागरिकों को सरकार चुनने, नीतियाँ बनाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर प्रदान करते हैं।


Question 10:

निम्नलिखित में से किसका सम्बन्ध लोकतंत्र से नहीं है ?

  • (A) जनमत
  • (B) गजनीनिक टल
  • (C) उत्तरदायी शासन
  • (D) बहुसंख्यकों का शासन
Correct Answer: (D) बहुसंख्यकों का शासन
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गजनीनिक टल का लोकतंत्र से कोई सम्बन्ध नहीं है। लोकतंत्र में जनमत, उत्तरदायी शासन और बहुसंख्यकों का शासन प्रमुख तत्व होते हैं।


Question 11:

निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज धात्विक है ?

  • (A) कोयला
  • (B) अभ्रक
  • (C) चूना-पत्थर
  • (D) लौह-अयस्क
Correct Answer: (D) लौह-अयस्क
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लौह-अयस्क एक धात्विक खनिज है। इसे खनिजों से निकालकर लोहे का उत्पादन किया जाता है। कोयला, अभ्रक और चूना-पत्थर अन्य प्रकार के खनिज हैं, लेकिन ये धात्विक नहीं हैं।


Question 12:

कपास की खेती के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी मिट्टी उपयुक्त है ?

  • (A) काली मिट्टी
  • (B) लाल मिट्टी
  • (C) जलोढ़ मिट्टी
  • (D) लैटेराइट मिट्टी
Correct Answer: (A) काली मिट्टी
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कपास की खेती के लिए काली मिट्टी (जिसे रेज़ोला मिट्टी भी कहा जाता है) उपयुक्त होती है। यह मिट्टी कपास के पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होती है।


Question 13:

निम्नलिखित में से कौन-से उद्योग में कच्चे माल के रूप में बॉक्साइट का प्रयोग किया जाता है ?

  • (A) सीमेंट
  • (B) ऐलुमिनियम
  • (C) लोहा एवं इस्पात
  • (D) कागज़
Correct Answer: (B) ऐलुमिनियम
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बॉक्साइट का उपयोग ऐलुमिनियम उद्योग में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। यह ऐलुमिनियम धातु का मुख्य स्त्रोत है।


Question 14:

निम्नलिखित में से किसको सेवा क्षेत्रक भी कहते हैं ?

  • (A) प्राथमिक क्षेत्रक
  • (B) द्वितीयक क्षेत्रक
  • (C) तृतीयक क्षेत्रक
  • (D) चतुर्थक क्षेत्रक
Correct Answer: (C) तृतीयक क्षेत्रक
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तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और पर्यटन जैसी सेवाएँ शामिल होती हैं।


Question 15:

सार्वजनिक क्षेत्रक तथा निजी क्षेत्रक के विभाजन का आधार है :

  • (A) रोज़गार की शर्तें
  • (B) आर्थिक गतिविधियों की प्रकृति
  • (C) उद्यमों का स्वामित्व
  • (D) उद्यमों में नियोजित श्रमिकों की संख्या
Correct Answer: (C) उद्यमों का स्वामित्व
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सार्वजनिक क्षेत्रक और निजी क्षेत्रक के विभाजन का मुख्य आधार उद्यमों का स्वामित्व होता है। सार्वजनिक क्षेत्रक में राज्य या सरकार का स्वामित्व होता है, जबकि निजी क्षेत्रक में निजी व्यक्तियों या कंपनियों का स्वामित्व होता है।


Question 16:

एजेण्डा-21 का सम्बन्ध किससे है ?

  • (A) ओज़ोन क्षरण (अबक्षय) से
  • (B) जलवायु परिवर्तन से
  • (C) वैश्विक तापन से
  • (D) सततपोषणीय (संधारणीय) विकास से
Correct Answer: (D) सततपोषणीय (संधारणीय) विकास से
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एजेण्डा-21 का सम्बन्ध सततपोषणीय (संधारणीय) विकास से है। यह संयुक्त राष्ट्र का एक पहल है, जो वैश्विक स्तर पर पर्यावरण और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करता है।


Question 17:

उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम कब बना था ?

  • (A) 1980
  • (B) 1990
  • (C) 1986
  • (D) 2001
Correct Answer: (C) 1986
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उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम 1986 में बना था। यह अधिनियम उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा और उनके खिलाफ होने वाले धोखाधड़ी के मामलों पर निवारण के लिए लागू किया गया था।


Question 18:

बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक की शुरुआत कब हुई थी ?

  • (A) 1960
  • (B) 1980
  • (C) 1970
  • (D) 1990
Correct Answer: (C) 1970
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बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक की शुरुआत 1970 में हुई थी। यह बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को सूक्ष्म ऋण (Microfinance) प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।


Question 19:

निम्नलिखित में से कौन-सा जैव-संसाधन है ?

  • (A) लोहा
  • (B) ताँबा
  • (C) मत्स्य पालन (उद्योग)
  • (D) चट्टानें
Correct Answer: (C) मत्स्य पालन (उद्योग)
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मत्स्य पालन (उद्योग) एक जैव-संसाधन है, क्योंकि यह जीवित जैविक संसाधनों, जैसे मछलियों और अन्य जल जीवों से संबंधित है। लोहा, ताँबा और चट्टानें खनिज संसाधन होते हैं।


Question 20:

निम्नलिखित में से किस देश का मानव विकास सूचकांक सर्वोच्च है ?

  • (A) बांग्लादेश
  • (B) पाकिस्तान
  • (C) श्रीलंका
  • (D) नेपाल
Correct Answer: (C) श्रीलंका
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श्रीलंका का मानव विकास सूचकांक (HDI) सर्वोच्च है। श्रीलंका ने शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार करके अपने मानव विकास सूचकांक को बेहतर बनाया है।


Question 21:

भारत की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर प्रथम विश्व युद्ध के प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।

Correct Answer:
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प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) का भारत की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा।

आर्थिक प्रभाव:
1. मूल्य वृद्धि और महंगाई:
युद्ध के कारण ब्रिटिश साम्राज्य को युद्ध सामग्री की आपूर्ति के लिए धन की आवश्यकता थी, जिससे भारत से संसाधनों की अत्यधिक निकासी की गई। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत में वस्त्र, खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक सामान की कीमतों में वृद्धि हुई, जिससे आम जनता पर आर्थिक दबाव पड़ा।


2. करों में वृद्धि:
युद्ध के वित्तीय बोझ को पूरा करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने भारत में विभिन्न करों में वृद्धि की। इस कारण किसानों और श्रमिक वर्ग को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।


3. व्यापार और उद्योग पर प्रभाव:
युद्ध के कारण ब्रिटेन ने भारतीय कच्चे माल की आपूर्ति की अधिकता के कारण भारतीय उद्योगों को उन्नति का अवसर प्रदान किया। वहीं, युद्ध के बाद के समय में भारतीय उद्योगों की स्थिति कमजोर हुई, क्योंकि ब्रिटेन ने अपनी औद्योगिक उत्पादन को बढ़ाया और भारतीय बाजार पर अपनी प्रभुता बनाए रखी।


राजनीतिक प्रभाव:

1. राष्ट्रीय आंदोलन में वृद्धि:
युद्ध के दौरान भारत में ब्रिटिश शासन के प्रति विरोध में तेजी आई। भारतीय नेताओं ने युद्ध के दौरान भारत को आत्मनिर्भर बनाने की मांग उठाई। महात्मा गांधी और अन्य नेताओं ने असहमति व्यक्त की और राष्ट्रीय आंदोलन को नया बल दिया।


2. ब्रिटिश शासन की नीतियों में बदलाव:
ब्रिटिश सरकार ने भारतीय सैनिकों के बल पर युद्ध लड़ा, लेकिन इसके बावजूद उसने भारतीयों को राजनीतिक अधिकारों में कोई विशेष बदलाव नहीं दिया। इससे भारतीयों में असंतोष और नाराजगी बढ़ी। यह असंतोष 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसे घटनाओं में सामने आया।


3. नई राजनीतिक पार्टियों और आंदोलन का जन्म:
प्रथम विश्व युद्ध के बाद भारतीय राजनीति में बदलाव आया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य संगठन अधिक उग्र और आक्रामक हो गए, और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम को और भी तेज कर दिया।


निष्कर्ष:
प्रथम विश्व युद्ध ने भारत की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को कई दृष्टिकोणों से प्रभावित किया। आर्थिक दृष्टि से महंगाई, करों की वृद्धि और संसाधनों की निकासी से जनता पर दबाव पड़ा। वहीं, राजनीतिक दृष्टि से यह युद्ध भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की गति को तेज करने वाला महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
%Quicktip
\begin{tcolorbox[quicktip]
प्रथम विश्व युद्ध ने भारतीय समाज और राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए, जिससे भारत में स्वतंत्रता संग्राम को और गति मिली।
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Question 22:

प्रौद्योगिकी ने किस प्रकार वैश्वीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया ? किन्हीं दो कारणों की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
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प्रौद्योगिकी ने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को तीव्र गति से बढ़ावा दिया है। निम्नलिखित दो प्रमुख कारण हैं, जिनके द्वारा प्रौद्योगिकी ने वैश्वीकरण में योगदान दिया:

1. संचार तकनीकी में उन्नति:
प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक प्रमुख योगदान संचार तकनीकों का विकास है। इंटरनेट, मोबाइल फोन, और सैटेलाइट संचार जैसे उपकरणों ने दुनिया को एक "ग Global Village" बना दिया है। इन उपकरणों ने वैश्विक स्तर पर जानकारी और विचारों के आदान-प्रदान को आसान और तेज बना दिया। जिससे व्यापार, शिक्षा, संस्कृति, और राजनीति के विभिन्न क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिला।


2. परिवहन में सुधार:
प्रौद्योगिकी ने परिवहन के क्षेत्र में भी अद्वितीय सुधार किए हैं। उच्च गति वाले रेल, विमानों और कंटेनर शिपिंग जैसी तकनीकों ने उत्पादों और सेवाओं के वैश्विक परिवहन को तेज, सस्ता और अधिक प्रभावी बना दिया। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि हुई, और कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर अपने उत्पादों और सेवाओं का विस्तार किया।


निष्कर्ष:
प्रौद्योगिकी ने संचार और परिवहन में सुधार के द्वारा वैश्वीकरण की प्रक्रिया को अधिक सुलभ और प्रभावी बना दिया। इसने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बढ़ावा दिया और व्यापार के नए अवसर पैदा किए।
%Quicktip
\begin{tcolorbox[quicktip]
प्रौद्योगिकी ने दुनिया को एक सघन नेटवर्क के रूप में जोड़ने में मदद की, जिससे वैश्वीकरण की प्रक्रिया और भी तेज हो गई।
\end{tcolorbox


Question 23:

"लोकतंत्र सभी सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं का समाधान करता है ।" इस कथन की तर्कों सहित पुष्टि कीजिए।

Correct Answer:
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लोकतंत्र के सिद्धांतों और व्यवस्थाओं ने हमेशा यह दावा किया है कि यह समाज के सभी पहलुओं में सुधार करता है और समस्याओं का समाधान प्रदान करता है। निम्नलिखित तर्कों के माध्यम से इस कथन की पुष्टि की जा सकती है:

1. अधिकारों और स्वतंत्रता की सुरक्षा:
लोकतंत्र में हर नागरिक को अपने विचारों, विश्वासों और अभिव्यक्तियों की स्वतंत्रता मिलती है। यह सभी वर्गों के लोगों को समान अवसर प्रदान करता है, जो समाज की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं के समाधान में सहायक होता है। जैसे, महिलाओं, दलितों, और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का संरक्षण होता है।

2. प्रतिनिधित्व और भागीदारी:
लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को चुनावों के माध्यम से अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार होता है। यह सुनिश्चित करता है कि सरकार जनता की इच्छाओं और आवश्यकताओं के अनुसार कार्य करे। इससे सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं को हल करने में मदद मिलती है।

3. जिम्मेदार शासन:
लोकतंत्र में सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है। यदि सरकार अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाती है, तो चुनावों के माध्यम से उसे बदलने का अधिकार जनता को होता है। इससे शासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित होता है, जो सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं के समाधान में सहायक होता है।

4. विकास और समृद्धि:
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारों को नागरिकों के विकास के लिए योजनाएं बनानी पड़ती हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, और सामाजिक कल्याण जैसी योजनाओं से आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का समाधान किया जाता है। लोकतंत्र में स्थिरता और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है, जो समाज के विकास में सहायक है।

निष्कर्ष:
लोकतंत्र ने विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं के समाधान के लिए एक मंच प्रदान किया है। यह तर्कों द्वारा यह सिद्ध होता है कि लोकतंत्र सभी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम है।


Question 24:

एक संसाधन के रूप में मिट्टी के महत्त्व का उल्लेख कीजिए तथा भारत में पाई जाने वाली किन्हीं दो प्रकार की मिट्टियों का वर्णन कीजिए।

Correct Answer:
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मिट्टी एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है जो जीवन के लिए आवश्यक है। यह कृषि के लिए सबसे बुनियादी संसाधन है और विभिन्न प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करती है। मिट्टी से ही वनस्पतियाँ और पेड़-पौधे उगते हैं, जो पर्यावरण में ऑक्सीजन का संचार करते हैं और मानव जीवन के लिए आवश्यक भोजन, लकड़ी, औषधियाँ और अन्य उत्पाद प्रदान करते हैं।

मिट्टी के महत्त्व के कुछ प्रमुख बिंदु:

1. कृषि के लिए आधार:
मिट्टी कृषि के लिए सबसे जरूरी संसाधन है, जो फसलों की उगाई और उनकी वृद्धि के लिए पोषक तत्व प्रदान करती है।


2. पर्यावरणीय संतुलन:
मिट्टी जल, वायु और पोषक तत्वों के भंडारण के रूप में कार्य करती है, जिससे प्राकृतिक संतुलन बनाए रखा जाता है।


3. सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण:
कृषि पर निर्भर देशों के लिए मिट्टी एक आर्थिक संसाधन है, जो रोजगार और विकास के अवसर प्रदान करती है।


भारत में पाई जाने वाली दो प्रमुख प्रकार की मिट्टियाँ:

1. काली मिट्टी (रेज़ोला मिट्टी):

काली मिट्टी मुख्य रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, और कर्नाटका के क्षेत्रों में पाई जाती है। यह मिट्टी कपास की खेती के लिए बहुत उपयुक्त मानी जाती है क्योंकि इसमें जल धारण की क्षमता अधिक होती है और यह पौधों के लिए पोषक तत्वों से भरपूर होती है।


2. लाल मिट्टी:

लाल मिट्टी विशेष रूप से दक्षिण भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में पाई जाती है। यह मिट्टी बारीक कणों वाली होती है और इसमें आयरन का अंश अधिक होता है, जिससे यह लाल रंग की होती है। यह मिट्टी आमतौर पर चावल, गन्ना और ज्वार जैसी फसलों के लिए उपयुक्त होती है।


निष्कर्ष:
मिट्टी न केवल कृषि के लिए आवश्यक है, बल्कि यह पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। भारत में विभिन्न प्रकार की मिट्टियाँ मौजूद हैं, जिनका उपयोग कृषि के लिए किया जाता है।
%Quicktip
\begin{tcolorbox[quicktip]
मिट्टी का सही उपयोग और संरक्षण कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए जरूरी है, साथ ही यह पर्यावरणीय स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।
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Question 25:

भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव पर टिप्पणी कीजिए।

Correct Answer:
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वैश्वीकरण का भारतीय कृषि पर गहरा प्रभाव पड़ा है। वैश्वीकरण के कारण भारतीय कृषि में कई सकारात्मक और नकारात्मक बदलाव आए हैं।

वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव:
1. नए बाजारों तक पहुँच:
वैश्वीकरण के कारण भारतीय किसानों को वैश्विक बाजारों तक पहुँच मिली है, जिससे उनके उत्पादों की मांग और मूल्य बढ़े हैं। विशेष रूप से, भारतीय मसाले, चाय, और फल जैसी चीजों का निर्यात बढ़ा है।


2. तकनीकी उन्नति:
वैश्वीकरण के कारण कृषि तकनीकियों में सुधार हुआ है। अधिक उन्नत बीज, कृषि यांत्रिकीकरण, और सिंचाई तकनीकों ने उत्पादकता को बढ़ाया है।


3. वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता:
वैश्वीकरण के कारण विदेशी निवेश और सहायता भारतीय कृषि में आने लगी है, जिससे कृषि क्षेत्र में विकास हुआ है।


वैश्वीकरण के नकारात्मक प्रभाव:

1. कृषि संकट:
वैश्वीकरण ने छोटे किसानों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के सामने ला खड़ा किया है, जिससे उनकी आय में गिरावट आई है। बड़े पैमाने पर कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों की स्थिति कमजोर हुई है।


2. पर्यावरणीय समस्याएँ:
उन्नत कृषि तकनीकों और उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता में कमी आई है और जलवायु परिवर्तन से कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है।


3. समाज में असमानता:
वैश्वीकरण से छोटे और बड़े किसानों के बीच अंतर बढ़ा है। बड़े किसान लाभ कमा रहे हैं, जबकि छोटे किसान संकट का सामना कर रहे हैं।


निष्कर्ष:
वैश्वीकरण ने भारतीय कृषि में कई सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव डाले हैं। जहां यह भारतीय किसानों के लिए नए अवसर लेकर आया है, वहीं छोटे किसानों के लिए चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करता है।
%Quicktip
\begin{tcolorbox[quicktip]
वैश्वीकरण भारतीय कृषि को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में लाता है, लेकिन यह किसानों के लिए अधिक समुचित नीतियों की आवश्यकता को भी उजागर करता है।
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Question 26:

महात्मा गाँधी द्वारा चलाए गए तीन सत्याग्रह आन्दोलनों के कारण और परिणाम बताइए।

Correct Answer:
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महात्मा गाँधी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तीन प्रमुख सत्याग्रह आंदोलनों का नेतृत्व किया, जिनका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के खिलाफ अहिंसक तरीके से विरोध करना था। इन आंदोलनों के कारण और परिणाम निम्नलिखित हैं:

1. चम्पारन सत्याग्रह (1917):
- कारण:
चम्पारन सत्याग्रह का उद्देश्य बिन तामिल प्रथा के खिलाफ था, जिसमें किसानों से कच्चे रेशम की खेती करने के लिए जबरन बलात्कारी कार्य लिया जाता था। किसानों को भारी करों और अन्य शोषण का सामना करना पड़ा।

- परिणाम:
इस सत्याग्रह के परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने किसानों की परेशानियों को स्वीकार किया और उन्हें करों में राहत दी। इस आंदोलन ने गाँधीजी को भारतीय राजनीति में एक प्रमुख नेता के रूप में स्थापित किया।


2. असहमति सत्याग्रह (1919):
- कारण:
रौलेट एक्ट (1919) के खिलाफ यह आंदोलन शुरू किया गया, जिसे भारतीयों को बिना मुकदमे के गिरफ्तार करने का अधिकार मिलता था। यह कानून भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को कुचलने का एक तरीका था।

- परिणाम:
इस आंदोलन ने देशभर में व्यापक विरोध फैलाया, और महात्मा गाँधी की नेतृत्व क्षमता को और भी मजबूत किया। इसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार को रौलेट एक्ट को वापस लेना पड़ा।


3. दांडी मार्च (1930):
- कारण:
दांडी मार्च का उद्देश्य ब्रिटिश शासन द्वारा लगाए गए नमक कानून के खिलाफ था। गाँधीजी ने यह सत्याग्रह नमक पर कर लगाने के विरोध में किया, जो भारतीयों के लिए अत्यधिक शोषणकारी था।

- परिणाम:
दांडी मार्च ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक नया आंदोलन खड़ा किया और भारतीयों में एकजुटता का संचार किया। यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक निर्णायक मोड़ पर ले आया और अंततः ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ व्यापक विरोध फैल गया।


निष्कर्ष:
महात्मा गाँधी द्वारा चलाए गए सत्याग्रह आंदोलनों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को अहिंसा के मार्ग पर मजबूती दी और ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय जनता में जागरूकता और एकता का संचार किया।

%Quicktip
\begin{tcolorbox[quicktip]
सत्याग्रह आंदोलनों ने अहिंसा और असहमति के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नया दिशा दी और भारतीयों को अपनी शक्ति का अहसास कराया।
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Question 27:

"भारत में चुनाव कभी-कभी जातियों पर ही निर्भर करते हैं।" क्यों ? इस स्थिति से छुटकारा पाने के लिए कोई दो उपाय सुझाइए।

Correct Answer:
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भारत में जातिवाद एक गहरी जड़ें जमा चुकी सामाजिक समस्या है, जो कभी-कभी चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चुनावों में जातिवाद का प्रभाव इस प्रकार है:

चुनावों में जातिवाद पर निर्भरता के कारण:
1. जाति आधारित राजनीति:
भारतीय राजनीति में अक्सर जातियाँ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल होती हैं। राजनीतिक दलों को अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए जातिगत समीकरणों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है, जिससे चुनावों में जातिवाद का प्रभाव बढ़ता है।


2. समाज में जातिगत असमानताएँ:
भारतीय समाज में जातियों के बीच असमानता और भेदभाव की लंबी परंपरा रही है। जातिवाद पर आधारित चुनाव प्रचार और उम्मीदवारों का चयन, खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में, जातियों के आधार पर वोटिंग को प्रभावित करता है।


इस स्थिति से छुटकारा पाने के उपाय:
1. शिक्षा और जागरूकता:
जातिवाद को समाप्त करने के लिए समाज में शिक्षा और जागरूकता फैलानी चाहिए। यदि लोगों में जातिवाद के खिलाफ समझ और विरोध उत्पन्न होता है, तो वे चुनावों में जाति के आधार पर नहीं, बल्कि उम्मीदवार की योग्यता और नीतियों को देखकर मतदान करेंगे।


2. जातिवाद विरोधी कानूनों का कड़ा पालन:
सरकार को जातिवाद को बढ़ावा देने वाले किसी भी प्रकार के चुनावी प्रचार पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। इसके साथ ही जातिवाद के खिलाफ कड़े कानून लागू करने चाहिए, ताकि चुनावों में इस प्रकार के भेदभाव से बचा जा सके।


निष्कर्ष:
जातिवाद भारतीय राजनीति में एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है, लेकिन इससे छुटकारा पाने के लिए शिक्षा, जागरूकता और कानूनी कड़े उपायों की आवश्यकता है।
%Quicktip
\begin{tcolorbox[quicktip]
जातिवाद से छुटकारा पाने के लिए समाज को जातिवाद की जगह समानता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना चाहिए।
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Question 28:

चावल की खेती हेतु उपयुक्त भौगोलिक दशाओं की विवेचना कीजिए तथा भारत में किन्हीं तीन प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
View Solution

चावल भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसल है, और इसकी खेती के लिए विशेष भौगोलिक दशाएँ आवश्यक होती हैं।

चावल की खेती हेतु उपयुक्त भौगोलिक दशाएँ:
1. जलवायु:
चावल की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय और उष्ण मौसम की आवश्यकता होती है। यह फसल गर्म और आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह से बढ़ती है, जहां वर्षा अधिक होती है।


2. मिट्टी:
चावल की खेती के लिए दलदली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जो जल धारण करने की क्षमता रखती है। यह मिट्टी नमी को लंबे समय तक बनाए रखने में सक्षम होती है, जिससे चावल की अच्छी फसल होती है।


3. जलवायु में नमी:
चावल को पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है, और इसलिए इसे सिंचाई की व्यवस्था भी चाहिए। मानसून के दौरान अधिक वर्षा वाली क्षेत्रों में चावल की खेती होती है।


भारत में चावल के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र:
1. पश्चिम बंगाल:
पश्चिम बंगाल भारत का सबसे बड़ा चावल उत्पादक राज्य है। यहाँ की जलवायु और मिट्टी चावल की खेती के लिए उपयुक्त हैं।


2. उत्तर प्रदेश:
उत्तर प्रदेश में भी चावल की खेती बड़े पैमाने पर होती है। यहाँ की गंगा-यमुना और अन्य नदियों की घाटियों में चावल की फसल प्रमुख रूप से उगाई जाती है।


3. तमिलनाडु:
तमिलनाडु भी चावल का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। यहाँ की जलवायु और सिंचाई के उचित साधन चावल की खेती को बढ़ावा देते हैं।


निष्कर्ष:
चावल की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु, जलवायु में नमी और दलदली मिट्टी आवश्यक होती है। भारत में प्रमुख उत्पादक क्षेत्र जैसे पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में चावल की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।
%Quicktip
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चावल की खेती के लिए जलवायु और मिट्टी की विशेषताएँ बहुत महत्वपूर्ण होती हैं, जिनका ध्यान रखना आवश्यक है ताकि फसल की अच्छी पैदावार हो।
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Question 29:

विश्व व्यापार संगठन (WTO) के क्रियाकलापों का वर्णन कीजिए।

Correct Answer:
View Solution

विश्व व्यापार संगठन (WTO) का उद्देश्य वैश्विक व्यापार व्यवस्था को सुदृढ़ और सुचारु बनाना है। यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो वैश्विक व्यापार से संबंधित नियमों को नियंत्रित करता है और सदस्य देशों के बीच व्यापार विवादों का समाधान करता है।

WTO के प्रमुख क्रियाकलापों का विवरण:

1. व्यापार नियमों का निर्माण और निगरानी:
WTO के तहत देशों के बीच व्यापार के नियम बनाए जाते हैं। यह संगठन यह सुनिश्चित करता है कि सदस्य देशों के बीच व्यापार निष्पक्ष और बिना किसी अवरोध के हो। WTO द्वारा बनाई गई व्यापार संधियाँ जैसे GATT (General Agreement on Tariffs and Trade), जो वस्त्र, कृषि, और औद्योगिक उत्पादों के व्यापार पर कवर करती हैं, सदस्य देशों में लागू होती हैं।


2. व्यापार विवादों का समाधान:
WTO विवादों के समाधान के लिए एक प्रभावी प्रणाली प्रदान करता है। जब कोई देश किसी अन्य देश के साथ व्यापार संबंधों में किसी प्रकार की समस्या या विवाद उत्पन्न करता है, तो WTO उस विवाद का समाधान करता है। इसका उद्देश्य देशों के बीच व्यावसायिक संबंधों को बनाए रखना और विवादों को उचित तरीके से हल करना है।


3. व्यापार के लिए खुला वातावरण बनाना:
WTO अपने सदस्य देशों के लिए व्यापार के दरवाजे खोलने के लिए काम करता है। यह सभी देशों को समान अवसर प्रदान करने का प्रयास करता है, जिससे विकासशील और विकसित देशों के बीच व्यापार में संतुलन बने।


4. विकसित देशों और विकासशील देशों के बीच संतुलन:
WTO यह सुनिश्चित करता है कि विकसित और विकासशील देशों के बीच व्यापार के संदर्भ में कोई भेदभाव न हो। यह विशेष रूप से विकासशील देशों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार अवसर प्रदान करने के लिए काम करता है।


निष्कर्ष:
विश्व व्यापार संगठन ने वैश्विक व्यापार को सुचारु बनाने और विवादों का समाधान करने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान किया है। यह संगठन देशों के बीच व्यापार के नियमों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों को सशक्त बनाता है।
%Quicktip
\begin{tcolorbox[quicktip]
WTO का मुख्य उद्देश्य वैश्विक व्यापार को समृद्ध और निष्पक्ष बनाना है, ताकि सभी देशों को समान अवसर मिलें और आर्थिक विकास हो सके।
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