UP Board Class 12 General Hindi Question Paper 2024 PDF (Code 302 DI) is available for download here. The General Hindi exam was conducted on February 22, 2024 in the Evening Shift from 2 PM to 5:15 PM. The total marks for the theory paper are 100. Students reported the paper to be easy to moderate.

UP Board Class 12 General Hindi Question Paper 2024 (Code 302 DI) with Solutions

UP Board Class 12 General Hindi Question Paper 2024 PDF UP Board Class 12 General Hindi Solutions 2024 PDF
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Question 1:

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी गद्य की प्रथम पुस्तक माना है:

  • (अ) ‘नासिकेतोपाख्यान’ को
  • (ब) ‘चंद्र चंपू बसन्त की महिमा’ को
  • (स) ‘भाषा योगावाशिष्ठ’ को
  • (द) ‘सुखसागर’ को
Correct Answer: (स) ‘भाषा योगावाशिष्ठ’ को
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आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ‘भाषा योगावाशिष्ठ’ को हिन्दी गद्य की प्रथम पुस्तक माना है। यह संस्कृत ग्रंथ ‘योगवाशिष्ठ’ का हिंदी अनुवाद है।


Question 2:

गुलाबराय की रचना ‘भरी असफलताएँ’ की विधा है:

  • (अ) उपन्यास
  • (ब) नाटक
  • (स) निबंध
  • (द) कहानी
Correct Answer: (स) निबंध
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गुलाबराय की रचना ‘भरी असफलताएँ’ निबंध विधा में लिखी गई है। यह समाज की विभिन्न परिस्थितियों पर केंद्रित व्यंग्यात्मक शैली में लिखित निबंधों का संग्रह है।


Question 3:

‘ब्राह्मण’ पत्रिका के संपादक हैं:

  • (अ) बालकृष्ण भट्ट
  • (ब) धर्मवीर भारती
  • (स) काशीश्वर
  • (द) प्रताप नारायण मिश्र
Correct Answer: (अ) बालकृष्ण भट्ट
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‘ब्राह्मण’ पत्रिका के संपादक बालकृष्ण भट्ट थे। यह पत्रिका समाज सुधार और राष्ट्रीयता से संबंधित विषयों पर आधारित थी।


Question 4:

हजारी प्रसाद द्विवेदी का उपन्यास है:

  • (अ) ‘त्यागपत्र’
  • (ब) ‘ग्राम्यगंधा’
  • (स) ‘पुनर्नवा’
  • (द) ‘पट की खोज’
Correct Answer: (स) ‘पुनर्नवा’
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हजारी प्रसाद द्विवेदी का उपन्यास ‘पुनर्नवा’ है, जो भारतीय संस्कृति, परंपरा और समाज के विभिन्न पहलुओं को दर्शाता है।


Question 5:

कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ की रचना है:

  • (अ) ‘विचार-प्रवाह’
  • (ब) ‘माटी हो गई सोना’
  • (स) ‘परछाई’
  • (द) ‘साहित्य और समाज’
Correct Answer: (ब) ‘माटी हो गई सोना’
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कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ की प्रसिद्ध रचना ‘माटी हो गई सोना’ है, जिसमें उन्होंने ग्रामीण जीवन, संघर्ष और भारतीय संस्कृति का चित्रण किया है।


Question 6:

भारतेन्दुयुगीन कवि हैं:

  • (अ) 'प्रेमचंद'
  • (ब) 'महादेवी वर्मा'
  • (स) 'भवानी प्रसाद मिश्र'
  • (द) 'नरेन्द्र शर्मा'
Correct Answer: (स) 'भवानी प्रसाद मिश्र'
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भवानी प्रसाद मिश्र भारतेन्दुयुगीन कवि नहीं थे। भारतेन्दु हरिश्चंद्र इस काल के प्रमुख कवि थे।


Question 7:

'हुंकार' काव्य के रचयिता हैं:

  • (अ) 'सुमित्रानन्दन पंत'
  • (ब) 'सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय'
  • (स) 'रामधारी सिंह 'दिनकर'
  • (द) 'मुक्तिबोध'
Correct Answer: (स) 'रामधारी सिंह 'दिनकर''
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'हुंकार' काव्य रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित है। यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लिखा गया एक महत्वपूर्ण काव्य संग्रह है।


Question 8:

प्रयोगवादी काव्यधारा के प्रमुख कवि हैं:

  • (अ) 'केदारनाथ अग्रवाल'
  • (ब) 'त्रिलोचन'
  • (स) 'नागार्जुन'
  • (द) 'रामेश्वर बहादुर सिंह'
Correct Answer: (ब) 'त्रिलोचन'
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प्रयोगवादी काव्यधारा के प्रमुख कवि त्रिलोचन थे। वे प्रयोगवाद के प्रवर्तक माने जाते हैं और उनकी कविताएँ नवीन प्रयोगों से भरपूर होती थीं।


Question 9:

'तीसरा सप्तक' का प्रकाशन वर्ष है:

  • (अ) 1959
  • (ब) 1969
  • (स) 1951
  • (द) 1941
Correct Answer: (स) 1951
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'तीसरा सप्तक' का प्रकाशन वर्ष 1951 है। यह हिंदी काव्य के प्रयोगवादी कवियों का एक संग्रह है।


Question 10:

'पल्लव' से उद्धृत कविता 'परिवर्तन' के रचयिता हैं:

  • (अ) 'महादेवी वर्मा'
  • (ब) 'सुमित्रानन्दन पंत'
  • (स) 'सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
  • (द) 'जयशंकर प्रसाद'
Correct Answer: (ब) 'सुमित्रानन्दन पंत'
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'पल्लव' में संकलित 'परिवर्तन' कविता सुमित्रानन्दन पंत द्वारा रचित है। यह छायावादी काव्य शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।


दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

अशोक को जो सम्मान कालिदास से मिला, वह अपेक्षित था। सुतरीयों के आंसिज्जनकनी सुस्पष्ट चरणों के मुख आधार से वह फूलता था, कोमल कणों पर कर्णावतंस के रूप में झूलता था और चंचल नील अलकों की अंजलि शोकों को सौ गुना बढ़ा देती थी। वह महाशोक के मन में मोह पैदा करता था, मर्यादा पुरुषोत्तम के चिन्त में सीता का भ्रम पैदा करता था और मनोज्ञान देवता के एक इशारे पर कन्ये पर से ही झूट उठता था।

Question 11:

उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

Correct Answer:
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उक्त गद्यांश अशोक के सम्मान और उसके महत्व को दर्शाता है। इसमें कालिदास के शब्दों के माध्यम से अशोक की विशेषताओं को उकेरा गया है।


Question 12:

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
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रेखांकित अंश में अशोक के सौंदर्य और उसकी विशेषताओं का उल्लेख किया गया है। यह बताया गया है कि वह कोमल और आकर्षक था, किंतु शोक की अनुभूति को भी बढ़ा देता था।


Question 13:

संस्कृत के किस कवि ने अशोक को सम्मानित किया है?

Correct Answer:
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संस्कृत के प्रसिद्ध कवि कालिदास ने अशोक को सम्मानित किया था। उन्होंने अपनी रचनाओं में अशोक के सौंदर्य और महत्व को विशेष रूप से वर्णित किया है।


Question 14:

अशोक पर फूल आने के समय में लेखक के क्या विचार हैं?

Correct Answer:
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लेखक के अनुसार, अशोक के फूलने का समय विशेष रूप से महत्व रखता है। यह सौंदर्य, कोमलता और भावनात्मक संवेदनशीलता का प्रतीक है। यह समय मानवीय भावनाओं को जागृत करता है।


Question 15:

आंसिज्जनकनी तथा कर्णावतंस के अर्थ लिखिए।

Correct Answer:
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- आंसिज्जनकनी: अश्रु प्रवाह उत्पन्न करने वाली वस्तु।

- कर्णावतंस: कान में पहना जाने वाला आभूषण।


अथवा

दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

निन्दा कुछ लोगों की पूँजी होती है। बड़ा लम्बा-चौड़ा व्यापार फैलाते हैं वे इस पूँजी से। कई लोगों की प्रतिष्ठा ही दूसरों की कलंक-कथाओं के पारायण पर आधारित होती है। बड़े रस-विभोर होकर वे जिस-सतिस की सत्य-कलित कलंक-कथा सुनाते हैं और स्वयं को पूर्ण संत समझने-समझाने की बुद्धि का अनुभव करते हैं।

Question 16:

उपर्युक्त गद्यांश के लेखक और पाठ का नाम लिखिए।

Correct Answer:
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उक्त गद्यांश के लेखक (लेखक का नाम भरें) हैं और यह पाठ (पाठ का नाम भरें) से लिया गया है।


Question 17:

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
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इस अंश में बताया गया है कि कुछ लोग निन्दा को अपनी पूँजी बना लेते हैं और इसे फैलाकर अपनी प्रतिष्ठा बनाते हैं। यह उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।


Question 18:

निन्दा किसकी पूँजी होती है?

Correct Answer:
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जो लोग दूसरों की आलोचना और अपमान करके स्वयं को श्रेष्ठ समझते हैं, उनके लिए निन्दा ही पूँजी होती है। वे दूसरों की गलतियाँ निकालकर अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने का प्रयास करते हैं।


Question 19:

‘सत्य-कलित, कलंक-कथा’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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‘सत्य-कलित’ का अर्थ है सत्य से युक्त और ‘कलंक-कथा’ का अर्थ है किसी व्यक्ति की बदनामी की कहानी। यह बताता है कि कुछ लोग दूसरों की प्रतिष्ठा को गिराने के लिए सत्य का उपयोग भी करते हैं।


Question 20:

कुछ लोगों की प्रतिष्ठा का आधार क्या होता है?

Correct Answer:
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कुछ लोगों की प्रतिष्ठा दूसरों की आलोचना और निन्दा करने पर आधारित होती है। वे दूसरों की त्रुटियों को उजागर करके अपने आपको श्रेष्ठ साबित करने का प्रयास करते हैं।


दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

मेरे प्यारे नव जलद से कंज से नैन वाले
जोके आये न मधुवन से ओ न भेजा संदेशा। 
मैं रो-रो के प्रिय-विरह से बावली हो रही हूँ। 
जोके मेरे सब दुख-कथा श्याम को तू सुना दे॥ 

Question 21:

(क) प्रस्तुत पद्यांश का संदर्भ लिखिए।

Correct Answer:
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प्रस्तुत पद्यांश प्रसिद्ध भक्तिकालीन कवि सूरदास द्वारा रचित है। इस काव्यांश में गोपियों की विरह वेदना का मार्मिक चित्रण किया गया है। वे श्रीकृष्ण से मिलन के लिए व्याकुल हैं।


Question 22:

(ख) पवन-दूतिका द्वारा किसने किसको संदेश भेजा है?

Correct Answer:
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इस पद्यांश में गोपियाँ पवन को अपना दूत मानकर श्रीकृष्ण को संदेश भेज रही हैं। वे अपने प्रिय श्रीकृष्ण के विरह में दुखी हैं और उनसे पुनर्मिलन की इच्छा व्यक्त कर रही हैं।


Question 23:

(ग) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
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रेखांकित अंश में गोपियाँ अपने प्रिय श्रीकृष्ण के संदेश की प्रतीक्षा कर रही हैं। वे अत्यंत दुखी होकर यह प्रकट कर रही हैं कि श्रीकृष्ण की ओर से कोई समाचार नहीं आया, जिससे उनकी विरह वेदना और बढ़ गई है।


Question 24:

(घ) प्रस्तुत पद्यांश में श्रीकृष्ण के सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया है?

Correct Answer:
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इस पद्यांश में श्रीकृष्ण के सौंदर्य को ‘नव जलद’ (नवीन काले मेघ) के समान बताया गया है, जिससे उनका सुंदर, मनमोहक स्वरूप स्पष्ट होता है। साथ ही, उनके नेत्रों की उपमा ‘कंज’ (कमल) से दी गई है, जो उनकी अपार सुंदरता को दर्शाती है।


Question 25:

(ङ) प्रस्तुत पद्यांश में मुख्य रस तथा उसका स्थायी भाव लिखिए।

Correct Answer:
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इस पद्यांश में श्रृंगार रस की प्रधानता है, जिसमें विप्रलंभ श्रृंगार (विरह भाव) प्रमुख रूप से व्यक्त किया गया है। इस रस का स्थायी भाव रति है, जो प्रेम की गहनता को दर्शाता है।


अथवा

मैं नीर भरी दुःख की बदली। 
स्पंदन में चिर निश्चय बसा, 
क्रंदन में आहट विषम हँसी, 
नयनों में दीपक से जलते 
पलकों में निर्झरी मचली! 

Question 26:

उपर्युक्त पद्यांश का शोधक एवं रचना का नाम लिखिए।

Correct Answer:
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उक्त पद्यांश की रचनाकार महादेवी वर्मा हैं। यह रचना उनके प्रसिद्ध काव्य संग्रह "नीरजा" से ली गई है।


Question 27:

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
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इस पद्यांश में कवयित्री ने अपने हृदय की पीड़ा को व्यक्त किया है। 'नीर भरी दुःख की बदली' के माध्यम से उन्होंने अपने हृदय में छिपे गहरे दुःख को दर्शाया है। 'स्पंदन में चिर निश्चय बसा' पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि कवयित्री का हृदय सदैव करुणा और पीड़ा से भरा हुआ है।


Question 28:

‘नयनों में दीपक से जलते’ में कौन-सा अलंकार प्रस्तुत हुआ है? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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‘नयनों में दीपक से जलते’ में उपमा अलंकार का प्रयोग किया गया है। इसमें कवयित्री ने अपने नेत्रों को दीपक की ज्योति के समान जलता हुआ बताया है, जिससे उनकी वेदना और करुणा स्पष्ट होती है।


Question 29:

कवयित्री के निःसंग रहने का क्या कारण है?

Correct Answer:
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कवयित्री का निःसंग रहने का कारण उनका गहरा आत्मिक दुःख है। वे अपने जीवन को पीड़ा और करुणा से भरा हुआ मानती हैं और इसलिए स्वयं को संसार से अलग-थलग अनुभव करती हैं।


Question 30:

उपर्युक्त पद्यांश में कवयित्री ने स्वयं को क्या बताया है?

Correct Answer:
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इस पद्यांश में कवयित्री ने स्वयं को "नीर भरी दुःख की बदली" बताया है। यह रूपक अलंकार का सुंदर उदाहरण है, जहाँ उन्होंने स्वयं को दुःख से भरी एक बदली के रूप में प्रस्तुत किया है जो जीवन में केवल पीड़ा और करुणा को दर्शाती है।


Question 31:

लेखकों की सूची:

  • (A) हरिशंकर परसाई
  • (B) प्रो. जी. मुद्गल राठी
  • (C) हजारी प्रसाद द्विवेदी
Correct Answer:
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हरिशंकर परसाई हिंदी के प्रसिद्ध व्यंग्यकार थे। उनके व्यंग्य समाज की विसंगतियों को उजागर करते हैं। उनकी भाषा सरल व प्रभावशाली है। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं:
रानी नागफनी की कहानी, तट की खोज, विकलांग श्रद्धा का दौर आदि।


Question 32:

निम्नलिखित में से किसी एक कवि का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख कृतियों का उल्लेख कीजिए : (अधिकतम शब्द-सीमा: 80 शब्द)

कवियों की सूची:

  • (A) मैथिलीशरण गुप्त
  • (B) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
  • (C) ‘अज्ञेय’
Correct Answer:
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रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को हिंदी का राष्ट्रकवि कहा जाता है। उन्होंने वीर रस और राष्ट्रभक्ति से प्रेरित कविताएँ लिखीं। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं:
"रश्मिरथी", "उर्वशी", "कुरुक्षेत्र", "परशुराम की प्रतीक्षा" आदि। उनकी काव्यशैली ओजस्वी और प्रेरणादायक है।


Question 33:

‘पज्वलाइट’ कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए। (अधिकतम शब्द-सीमा: 80 शब्द)

Correct Answer:
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‘पज्वलाइट’ कहानी समाज में व्याप्त नैतिक पतन, स्वार्थ और मानवता के ह्रास को दर्शाती है। इसमें यह दिखाया गया है कि कैसे लालच और अमानवीयता मानवीय मूल्यों को समाप्त कर देती है। यह कहानी पाठकों को नैतिकता और सामाजिक मूल्यों को बनाए रखने की प्रेरणा देती है।


अथवा

Question 34:

‘बहादुर’ कहानी की कथावस्तु का सार लिखिए। (अधिकतम शब्द-सीमा: 80 शब्द)

Correct Answer:
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‘बहादुर’ कहानी एक ऐसे पात्र की संघर्षमयी यात्रा को दर्शाती है जो कठिनाइयों के बावजूद अपने आदर्शों से नहीं डिगता। कहानी में बहादुरी, निष्ठा और संघर्ष की भावना को विशेष रूप से दर्शाया गया है। यह पाठकों को आत्मनिर्भरता और साहस का संदेश देती है।


Question 35:

‘त्यागपथी’ खंडकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।

Correct Answer:
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‘त्यागपथी’ खंडकाव्य त्याग, बलिदान और कर्तव्यनिष्ठा पर आधारित है। यह नायक के संघर्षों और आदर्शों की कहानी प्रस्तुत करता है, जिसमें वह समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को सर्वोपरि मानता है। यह पाठकों को निस्वार्थ सेवा और सच्चे आदर्शों की प्रेरणा देता है।


Question 36:

‘त्यागपथी’ खंडकाव्य के आधार पर ‘हर्षवर्धन’ का चरित्रांकन कीजिए।

Correct Answer:
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‘हर्षवर्धन’ एक आदर्श नायक है, जिसमें त्याग, परोपकार और सहृदयता जैसे गुण हैं। वह समाज की भलाई के लिए अपने व्यक्तिगत सुखों का त्याग करता है। उसकी संघर्षशील प्रवृत्ति, कर्तव्यपरायणता और उच्च विचार उसे एक महान व्यक्तित्व बनाते हैं।


Question 37:

(i) ‘पृथ्वीराज’ खंडकाव्य के नायक की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

Correct Answer:
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‘पृथ्वीराज’ खंडकाव्य में पृथ्वीराज चौहान को एक वीर, स्वाभिमानी और संघर्षशील नायक के रूप में चित्रित किया गया है। वे सत्य और न्यायप्रिय राजा थे, जिनमें अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा थी। उनकी वीरता और रणकौशल अद्वितीय थे। उन्होंने अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए मुहम्मद गोरी से कई युद्ध लड़े। पृथ्वीराज का चरित्र आत्मसम्मान, कर्तव्यपरायणता और पराक्रम का प्रतीक है।


Question 38:

(ii) ‘पृथ्वीराज’ खंडकाव्य की कथावस्तु लिखिए।

Correct Answer:
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‘पृथ्वीराज’ खंडकाव्य में पृथ्वीराज चौहान के जीवन और संघर्ष की गाथा प्रस्तुत की गई है। इसमें पृथ्वीराज और मुहम्मद गोरी के बीच हुए युद्धों का वर्णन मिलता है। यह काव्य पृथ्वीराज के पराक्रम, वीरता और आत्मसम्मान को दर्शाता है। उनकी अंतिम विजय और पराजय का चित्रण इस खंडकाव्य में विशेष रूप से किया गया है।


Question 39:

(i) ‘आलोकतंत्र’ खंडकाव्य के छठे सर्ग (नमक सत्याग्रह) की कथा अपने शब्दों में लिखिए।

Correct Answer:
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‘आलोकतंत्र’ खंडकाव्य का छठा सर्ग भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नमक सत्याग्रह पर आधारित है। इसमें महात्मा गांधी के नेतृत्व में अंग्रेजों के अन्यायपूर्ण कानूनों के विरुद्ध संघर्ष को दर्शाया गया है। यह खंड सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर अत्याचारों के विरुद्ध प्रतिरोध की प्रेरणा देता है।


Question 40:

(ii) ‘आलोकतंत्र’ खंडकाव्य के आधार पर महात्मा गांधी का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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महात्मा गांधी को ‘आलोकतंत्र’ खंडकाव्य में सत्य, अहिंसा और आत्मबलिदान का प्रतीक माना गया है। वे दृढ़ संकल्पित नेता थे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसा का मार्ग अपनाया। उनकी सहनशीलता, संघर्षशीलता और सामाजिक चेतना इस खंडकाव्य में स्पष्ट रूप से झलकती है।


Question 41:

(i) ‘श्रवणकुमार’ खंडकाव्य के आधार पर दशरथ की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

Correct Answer:
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दशरथ ‘श्रवणकुमार’ खंडकाव्य में एक संवेदनशील और न्यायप्रिय राजा के रूप में चित्रित किए गए हैं। वे अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित थे, किंतु एक भूल के कारण उन्होंने एक निर्दोष ब्राह्मण पुत्र की हत्या कर दी। उनके हृदय में पश्चाताप की भावना थी, जो उनकी करुणा और धर्मपरायणता को दर्शाती है।


Question 42:

(ii) ‘श्रवणकुमार’ खंडकाव्य के ‘अयोध्या’ सर्ग की कथावस्तु लिखिए।

Correct Answer:
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‘अयोध्या’ सर्ग में दशरथ द्वारा अनजाने में श्रवणकुमार की हत्या किए जाने की कथा है। जब श्रवणकुमार के माता-पिता को इसका पता चलता है, तो वे दशरथ को श्राप देते हैं कि वे भी पुत्र वियोग में प्राण त्यागेंगे। यह खंड करुणा, न्याय और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देता है।


Question 43:

(i) ‘सत्य की जीत’ खंडकाव्य के आधार पर ‘दुशासन’ का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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‘सत्य की जीत’ खंडकाव्य में दुशासन को अहंकारी, अधर्मी और अन्यायी व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया है। उसने द्रौपदी के चीरहरण में मुख्य भूमिका निभाई और अधर्म का समर्थन किया। अंततः वह अपने पापों के कारण महाभारत के युद्ध में मृत्यु को प्राप्त हुआ।


Question 44:

(ii) ‘सत्य की जीत’ खंडकाव्य का कथासार लिखिए।

Correct Answer:
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‘सत्य की जीत’ खंडकाव्य में सत्य, धर्म और न्याय की विजय को दर्शाया गया है। इसमें महाभारत के युद्ध का वर्णन है, जहाँ धर्म के मार्ग पर चलने वाले पांडव अंततः विजय प्राप्त करते हैं और अधर्म पराजित होता है। यह खंड नैतिकता और आदर्शों का संदेश देता है।


Question 45:

(i) ‘परिश्रम’ खंडकाव्य का कथासार अपने शब्दों में लिखिए।

Correct Answer:
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‘परिश्रम’ खंडकाव्य में यह संदेश दिया गया है कि सफलता के लिए कठिन परिश्रम और आत्मनिर्भरता आवश्यक है। इसमें एक नायक की कहानी है, जो संघर्ष और श्रम के बल पर अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। यह काव्य आत्मनिर्भरता और धैर्य की प्रेरणा देता है।


Question 46:

(ii) ‘परिश्रम’ खंडकाव्य के आधार पर ‘कर्ण’ का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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‘परिश्रम’ खंडकाव्य में कर्ण को एक महान योद्धा और दानी पुरुष के रूप में चित्रित किया गया है। उनका जीवन संघर्षमय रहा, फिर भी उन्होंने कभी सत्य और कर्तव्य का त्याग नहीं किया। उनकी महानता उनकी दानशीलता, वीरता और दृढ़ संकल्प में प्रकट होती है।


Question 47:

(क) निम्नलिखित संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का संदर्भ-सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
संस्कृत गद्यांश:
संस्कृतस्य साहित्यं सरसं, व्याकरणञ्च सुनिश्चितम् । तस्य गद्ये पद्ये च लालित्यं,
भावबोधसामर्थ्यम्, अद्वितीय श्रुतिमाधुर्यञ्च वर्तते। किं बहुना चिरनिर्माणार्थं यादृर्शी सत्प्रेरणां
संस्कृतवाङ्मयं ददाति न तादृर्शी किञ्विदन्यत् । मूलभूतानां मानवीयगुणानां यादृशी विवेचना
संस्कृतसाहित्ये वर्तते, नान्यत्र तादृशी।

Correct Answer:
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संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश में संस्कृत भाषा के महत्व और उसकी विशेषताओं का वर्णन किया गया है।

अनुवाद: संस्कृत साहित्य में रसों की अभिव्यक्ति अत्यंत प्रभावशाली होती है। इसकी भाषा व्याकरण के सुसंगठित नियमों से सुसज्जित है। संस्कृत के गद्य और पद्य में अद्भुत लालित्य, भावनाओं की गहन अभिव्यक्ति तथा मधुरता पाई जाती है। इसके माधुर्य और प्रभावशाली ध्वनि के कारण यह भाषा दिव्य अनुभूति प्रदान करती है।


अथवा

Question 48:

संस्कृत गद्यांश:
महामना विद्वान् वक्ता, धार्मिको नेता, पटुः पत्रकारश्चासीत्। परमस्य सर्वोच्चगुणः जनसेवैव आसीत्। यत्र कुत्रापि अयं जनान् दुःखितान् पीड्यमानांश्चापश्यत् तत्रैव सः शीघ्रमेव उपस्थितः। सर्वविधं साहाय्यञ्च अकरोत्। प्राणिसेवा अस्य स्वभाव एवासीत्।

Correct Answer:
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संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश में एक महान व्यक्ति के गुणों और उनकी समाजसेवा की भावना का वर्णन किया गया है।

अनुवाद: यह महान व्यक्ति एक विद्वान, कुशल वक्ता, धार्मिक नेता और योग्य पत्रकार था। उसका सबसे बड़ा गुण जनसेवा था। जब भी उसने कहीं दुखी या पीड़ित लोगों को देखा, तो वह तुरंत उनकी सहायता के लिए पहुँच जाता। उसने हर प्रकार से जरूरतमंदों की सहायता की। प्राणियों की सेवा करना उसका स्वाभाविक गुण था।


Question 49:

निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों में से किसी एक श्लोक का संदर्भ-सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
संस्कृत श्लोक:
जलविन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः।

सः हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च॥

Correct Answer:
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संदर्भ: प्रस्तुत श्लोक में निरंतर प्रयास और धीरे-धीरे अर्जित ज्ञान के महत्व को बताया गया है।

अनुवाद: जिस प्रकार पानी की बूंद-बूंद से घड़ा धीरे-धीरे भर जाता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी निरंतर प्रयास करके ज्ञान, धर्म और धन की प्राप्ति करनी चाहिए। निरंतर प्रयास और धैर्य से ही व्यक्ति अपने जीवन में उन्नति कर सकता है।


अथवा

Question 50:

निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों में से किसी एक श्लोक का संदर्भ-सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
संस्कृत श्लोक:
न मे रोचते भद्रं वः उलूकस्यभिषेचनम्।

अक्रुद्धस्य मुखं पश्य कथं क्रुद्धो भविष्यति।।

Correct Answer:
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संदर्भ: प्रस्तुत श्लोक में यह बताया गया है कि अनुचित व्यक्ति को सम्मानित करना समाज के लिए हितकर नहीं होता।

अनुवाद: मुझे यह अच्छा नहीं लगता कि उल्लू को राजा बनाया जाए। यदि किसी व्यक्ति को स्वाभाविक रूप से क्रोध नहीं आता, तो यह कैसे संभव है कि वह क्रोधित होने पर भयावह रूप धारण कर लेगा? अर्थात्, जो व्यक्ति योग्य नहीं है, उसे सत्ता देना व्यर्थ है।


Question 51:

का वर्षा जब कृषि सुखाने

Correct Answer:
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अर्थ: जब समय निकल जाए, तो बाद में सहायता या उपाय करने का कोई लाभ नहीं होता।

वाक्य प्रयोग:
रवि परीक्षा के बाद पढ़ाई करने लगा, यह तो वही बात हो गई "का वर्षा जब कृषि सुखाने"।


Question 52:

अधजल गगरी छलकत जाय

Correct Answer:
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अर्थ: जो व्यक्ति अल्पज्ञानी होता है, वह अधिक दिखावा करता है।

वाक्य प्रयोग:
रमेश को गणित के कुछ ही सूत्र याद हैं, फिर भी वह बड़ा ज्ञानी बनने की कोशिश करता है। "अधजल गगरी छलकत जाय" उस पर बिल्कुल सही बैठता है।


Question 53:

आग बबूला होना

Correct Answer:
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अर्थ: अत्यधिक क्रोधित होना।

वाक्य प्रयोग:
जब श्याम को पता चला कि उसके मित्र ने उसे धोखा दिया है, तो वह "आग बबूला" हो गया।


Question 54:

आसमान टूट पड़ना

Correct Answer:
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अर्थ: अचानक बड़ी मुसीबत आ जाना।

वाक्य प्रयोग:
पिता की मृत्यु के बाद अनिल के परिवार पर तो "आसमान टूट पड़ा"।


Question 55:

‘गुरुदेव’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?

Correct Answer:
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गद्यांश में ‘गुरुदेव’ शब्द का प्रयोग रवींद्रनाथ टैगोर के लिए किया गया है। वे एक महान कवि, लेखक, चित्रकार और शिक्षाविद् थे, जिन्होंने शांति निकेतन की स्थापना की थी।


Question 56:

गुरुदेव ने शांति निकेतन छोड़कर कहीं और रहने का मन क्यों बनाया?

Correct Answer:
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गुरुदेव ने शांति निकेतन छोड़ने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि उनका स्वास्थ्य बहुत अच्छा नहीं था। इसके अलावा, वे श्रीनिकेतन के पुराने मिट्टीले मकान में रहना चाहते थे। यह भी संभव है कि वे किसी नए वातावरण में जाने की इच्छा रखते थे।


Question 57:

उनके समीप तक पहुँचने में क्या कठिनाई थी?

Correct Answer:
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गद्यांश के अनुसार, गुरुदेव जिस तलघर में रहने लगे थे, वहाँ तक पहुँचने के लिए लोहे की चक्करदार सीढ़ी थी। वृद्ध और कमजोर होने के कारण रवींद्रनाथ टैगोर के लिए इस सीढ़ी पर चढ़ना बहुत कठिन था। फिर भी, उन्हें बड़ी कठिनाई से वहाँ ले जाया गया।


Question 58:

(i) अंबु - अंब

  • (A) आम और बादल
  • (B) माता और पानी
  • (C) माता और पिता
  • (D) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer:
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सही: (ब) माता और पानी

स्पष्टीकरण:
अंबु का अर्थ होता है **पानी**, जबकि अंब का अर्थ **माता** होता है।


Question 59:

(ii) भवन - भुवन

  • (A) घर और संसार
  • (B) लोक और परलोक
  • (C) ग्राम और जगत
  • (D) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer:
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सही: (अ) घर और संसार

स्पष्टीकरण:
भवन का अर्थ **घर** होता है, जबकि भुवन का अर्थ **संसार** या **दुनिया** होता है।


Question 60:

निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो अर्थ लिखिए:

  • (A) वारिद
  • (B) द्विज
  • (C) मित्र
Correct Answer:
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यहाँ द्विज शब्द के दो अर्थ दिए गए हैं:
(A) ब्राह्मण – जो दो बार जन्मा हो।
(B) पक्षी – अंडे से उत्पन्न होने वाला जीव।


Question 61:

निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक सही शब्द का चयन करके लिखिए:

(i) जिसका कहीं अंत न हो:

  • (अ) अनेक
  • (ब) अनंत
  • (स) अगण्य
  • (द) अभिन्न
Correct Answer: (ब) अनंत
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जिसका कहीं अंत न हो, उसे अनंत कहा जाता है। संस्कृत से लिया गया यह शब्द ‘अंत’ (सीमा) के विपरीत अर्थ को व्यक्त करता है।


Question 62:

(ii) कम बोलने वाला:

  • (अ) अतिभाषी
  • (ब) बहुभाषी
  • (स) मितभाषी
  • (द) मृदुभाषी
Correct Answer: (स) मितभाषी
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जो कम बोलता है, उसे मितभाषी कहा जाता है। ‘मित’ का अर्थ ‘थोड़ा’ होता है, इसलिए यह शब्द कम बोलने वाले व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है।


Question 63:

निम्नलिखित में से किसी दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए:

  • (A) पुनी पराया धन होता है।
  • (B) आज मेरा बड़ा भाई आ गया।
  • (C) तुम मेरे को पुस्तक दे दो।
  • (D) मैं इस लड़के को पढ़ाया हूँ।
Correct Answer:
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यहाँ सभी वाक्यों को शुद्ध किया गया है:


(A) पुनी → पुंजी


शुद्ध वाक्य: पुंजी पराया धन होता है।
(B) आज मेरा बड़ा भाई आ गया। (यह वाक्य पहले से ही शुद्ध है।)
(C) मेरे को → मुझे


शुद्ध वाक्य: तुम मुझे पुस्तक दे दो।
(D) पढ़ाया हूँ → पढ़ा रहा हूँ


शुद्ध वाक्य: मैं इस लड़के को पढ़ा रहा हूँ।


Question 64:

(क) ‘करुण’ रस अथवा ‘शांत’ रस का लक्षण बताते हुए उसका एक उदाहरण लिखिए।

Correct Answer:
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करुण रस:
करुण रस वह रस है, जो शोक, दुःख या पीड़ा की भावना उत्पन्न करता है। इसका स्थायी भाव शोक होता है।

उदाहरण:
"सखि वे मुझसे कह कर जाते,

कहा छोड़ अब परदेश बसे।"

शांत रस:
शांत रस वह रस है, जिसमें वैराग्य, त्याग और मन की शांति की भावना होती है। इसका स्थायी भाव निर्वेद होता है।

उदाहरण:
"सब कुछ छोड़ चला मैं, अब तेरा ही सहारा।"


Question 65:

(ख) ‘रोल्हे’ अलंकार अथवा ‘उत्प्रेक्षा’ अलंकार का लक्षण एवं एक उदाहरण लिखिए।

Correct Answer:
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उत्प्रेक्षा अलंकार:
जब किसी वस्तु या व्यक्ति में किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति की कल्पना की जाती है, तब उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

उदाहरण:
"वह पर्वत ऐसा लगता है, मानो कोई विशाल हाथी खड़ा हो।"


Question 66:

(ग) ‘दोहा’ छंद अथवा ‘चौपाई’ छंद का लक्षण एवं एक उदाहरण लिखिए।

Correct Answer:
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दोहा छंद:
दोहा छंद में प्रत्येक पंक्ति में 24 मात्राएँ होती हैं, जिसमें दो चरण होते हैं। पहले और तीसरे भाग में 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे भाग में 11-11 मात्राएँ होती हैं।

उदाहरण:
"बड़े बड़ों को चाहिए, छोटों को सम्हाल।

छोटे बनते बड़े हैं, जब पाती हैं पाल।।"


Question 67:

छात्रावास की जीवन-शैली विषय पर अपने मित्र को एक पत्र लिखिए।

Correct Answer:
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प्रिय मित्र,

मुझे आशा है कि तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे। मैं इस पत्र के माध्यम से तुम्हें छात्रावास की जीवन-शैली के बारे में बताना चाहता हूँ। छात्रावास जीवन में हमें अनुशासन, आत्मनिर्भरता और मित्रता का महत्व समझ में आता है।

हम यहाँ सुबह जल्दी उठते हैं, समय पर कक्षाएँ लगती हैं और उसके बाद खेल-कूद तथा अन्य गतिविधियाँ होती हैं। छात्रावास में रहकर हमें आत्मनिर्भर बनना सीखना पड़ता है।

मुझे आशा है कि तुम भी कभी छात्रावास जीवन का अनुभव अवश्य करोगे।

तुम्हारा मित्र,

(नाम)


Question 68:

विद्यालय में खेल-कूद की सामग्री की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रधानाचार्य को एक प्रार्थना-पत्र लिखिए।

Correct Answer:
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प्रधानाचार्य महोदय,

विषय: खेल-कूद की सामग्री उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध।

सविनय निवेदन है कि हमारे विद्यालय में खेल-कूद की पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं है। इससे विद्यार्थियों को खेल-कूद की गतिविधियों में कठिनाई हो रही है।

अतः आपसे अनुरोध है कि विद्यालय में आवश्यक खेल सामग्री उपलब्ध करवाई जाए, जिससे छात्र पूर्ण रूप से खेल-कूद में भाग ले सकें।

सादर,

(नाम)

(कक्षा)


Question 69:

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर अपनी भाषा-शैली में निबंध लिखिए:

  • (A) भारत में कृषि क्रांति
  • (B) भारतीय लोकतंत्र का भविष्य
  • (C) विज्ञान: वरदान या अभिशाप
  • (D) विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व
  • (E) मेरा प्रिय कवि/लेखक
Correct Answer:
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यहाँ विषय ‘विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व’ पर निबंध प्रस्तुत किया गया है:

भूमिका:
विद्यार्थी जीवन व्यक्ति के संपूर्ण जीवन की नींव होती है। यह वह समय होता है जब व्यक्ति अपने भविष्य का निर्माण करता है। इस दौरान अनुशासन का पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि अनुशासन ही सफलता की कुंजी है।

अनुशासन का अर्थ:
अनुशासन का अर्थ है अपने कार्यों को एक निर्धारित नियम और अनुशासित तरीके से करना। यह आत्मनियंत्रण और समय-प्रबंधन की कला है जो व्यक्ति को जीवन में सफलता दिलाती है।

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व:

(A) समय का सदुपयोग: अनुशासन के माध्यम से विद्यार्थी अपने समय का सही उपयोग करना सीखता है।
(B) शिक्षा में सफलता: अनुशासन के बिना अध्ययन में निरंतरता बनाए रखना कठिन होता है।
(C) चरित्र निर्माण: अनुशासित व्यक्ति का व्यक्तित्व सुदृढ़ होता है और वह समाज में सम्मान प्राप्त करता है।
(D) आत्मनिर्भरता: अनुशासन व्यक्ति को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाता है।
(E) लक्ष्य प्राप्ति: अनुशासन के बिना कोई भी अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।


अनुशासन के अभाव में हानि:
जो विद्यार्थी अनुशासनहीन होते हैं, वे अपने अध्ययन पर ध्यान नहीं देते और जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करते हैं। अनुशासन की कमी से आलस्य, असफलता और अव्यवस्था का जन्म होता है।

अनुशासन कैसे अपनाएँ?

नियमित दिनचर्या का पालन करें।
पढ़ाई और खेल-कूद में संतुलन बनाए रखें।
बड़ों का आदर करें और अनुशासित जीवन व्यतीत करें।


निष्कर्ष:
अनुशासन ही विद्यार्थी जीवन को सफल और सार्थक बनाता है। जो विद्यार्थी अनुशासन का पालन करते हैं, वे जीवन में महान कार्य कर सकते हैं। अनुशासन केवल विद्यार्थी जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे जीवन में सफलता की कुंजी होता है।


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