UP Board Class 12 Hindi Question Paper 2025 PDF (Code 301 HA) is available for download here. The Mathematics exam was conducted on March 9, 2025 in the Evening Shift from 2:00 PM to 5:15 PM. The total marks for the theory paper are 100. Students reported the paper to be easy to moderate.
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UP Board Class 12 Hindi Question Paper 2025 (Code 301 HA) with Solutions
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Choose the correct option to answer the following questions:
(a) 'धुवस्वामिनी' की गाथा-विशेषता है:
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पद १: कृति की पहचान और लेखक।
'ध्रुवस्वामिनी' हिंदी साहित्य के छायावाद युग के प्रमुख स्तंभ, जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति है।
पद २: साहित्यिक विधा का विश्लेषण।
इस रचना की संरचना संवादों (dialogues) और दृश्यों (scenes) पर आधारित है, जिसे मंच पर अभिनय करने के लिए लिखा गया है। साहित्य की जिस विधा में कथा को पात्रों के संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है, उसे 'नाटक' कहते हैं। 'ध्रुवस्वामिनी' तीन अंकों में विभाजित एक नाटक है।
पद ३: अन्य विकल्पों से भिन्नता।
यह 'उपन्यास' नहीं है क्योंकि उपन्यास में कथा का विस्तृत गद्य वर्णन होता है, जबकि इसमें कथा संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है। यह एक 'कहानी' से अधिक विस्तृत है और इसकी संरचना कहानी जैसी नहीं है। यह 'जीवनी' भी नहीं है क्योंकि यह एक ऐतिहासिक पात्र पर आधारित साहित्यिक रचना है, न कि किसी का तथ्यात्मक जीवन-वृत्तांत।
पद ४: निष्कर्ष।
अपनी संरचना, शैली और उद्देश्य के आधार पर, 'ध्रुवस्वामिनी' निस्संदेह एक 'नाटक' है। यह जयशंकर प्रसाद के सर्वश्रेष्ठ नाटकों में से एक माना जाता है।
Final Answer: \[ \boxed{सही उत्तर (C) नाटक है।} \] Quick Tip: When identifying literary works, distinguish between their forms (novel, story, play, biography) based on their structure and narrative style.
(b) 'आवारा मसीहा' जीवनी- कृति के लेखक हैं:
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पद १: कृति की पहचान और विषय।
'आवारा मसीहा' हिंदी साहित्य की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध जीवनी विधा की रचना है। यह जीवनी सुप्रसिद्ध बंगाली उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन पर आधारित है।
पद २: लेखक का परिचय।
इस कालजयी जीवनी की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार विष्णु प्रभाकर ने की थी। उन्होंने शरतचंद्र के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गहन शोध किया, जिसके लिए उन्होंने लगभग चौदह वर्षों तक परिश्रम किया।
पद ३: कृति का महत्व।
विष्णु प्रभाकर ने इस कृति के माध्यम से शरतचंद्र के विद्रोही, संवेदनशील और मानवतावादी व्यक्तित्व को अत्यंत प्रामाणिकता और सजीवता के साथ प्रस्तुत किया है। यह केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि एक युग का साहित्यिक दस्तावेज़ भी है।
पद ४: निष्कर्ष।
अतः, शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन पर आधारित जीवनी 'आवारा मसीहा' के लेखक विष्णु प्रभाकर हैं।
Final Answer: \[ \boxed{सही उत्तर (D) विष्णु प्रभाकर है।} \] Quick Tip: When identifying authors, consider their contribution to the literary and social reform movements, as these are often key to understanding their works.
(c) आचार्य हज़ारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित कृति नहीं है:
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पद १: प्रश्न का विश्लेषण।
इस प्रश्न में हमें यह पहचानना है कि दिए गए चार विकल्पों में से कौन सी एक रचना आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा नहीं लिखी गई है। इसके लिए हमें उनकी प्रमुख रचनाओं की जानकारी होनी चाहिए।
पद २: विकल्पों का मूल्यांकन।
आइए हम दिए गए विकल्पों की जाँच करें:
(B) 'कबीर': यह आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध आलोचनात्मक ग्रंथ है, जिसमें उन्होंने संत कबीर का मूल्यांकन एक नए दृष्टिकोण से किया है। यह उनकी एक महत्वपूर्ण कृति है।
(C) 'हिन्दी साहित्य की भूमिका': यह भी आचार्य द्विवेदी द्वारा रचित हिंदी साहित्य के इतिहास पर एक मौलिक और प्रभावशाली ग्रंथ है।
(D) 'कल्पवृक्ष': यह आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का एक प्रसिद्ध ललित निबंध-संग्रह है।
पद ३: सही उत्तर का निर्धारण।
उपरोक्त विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि 'कबीर', 'हिन्दी साहित्य की भूमिका' और 'कल्पवृक्ष' तीनों ही आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। विकल्प (A) 'कलात्मक' उनकी किसी ज्ञात कृति का नाम नहीं है।
पद ४: निष्कर्ष।
अतः, 'कलात्मक' वह कृति है जो आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित नहीं है।
Final Answer: \[ \boxed{सही उत्तर (A) 'कलात्मक' है।} \] Quick Tip: When identifying works of famous authors, focus on their most significant contributions and check if the given title aligns with their recognized works.
(d) दीनदयाल उपाध्याय द्वारा सम्पादित पत्र है:
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दीनदयाल उपाध्याय भारतीय राजनीति और समाज सेवा के महान नेता थे। उन्होंने 'पाञ्जजन्य' नामक पत्र का संपादन किया था, जो भारतीय राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का एक प्रभावी माध्यम था।
Step 2: Conclusion.
इसलिए 'पाञ्जजन्य' को सही उत्तर के रूप में चुना गया है।
Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (A) 'पाञ्जजन्य'.} \] Quick Tip: When studying historical figures, focus on their major contributions, such as publications or movements they were associated with, for better understanding.
(e) जैनेन्द्र कुमार की रचना है:
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जैनेन्द्र कुमार हिंदी के प्रमुख साहित्यकार थे और उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक मुद्दों का गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'वातायन' शामिल है, जो उनकी एक महत्वपूर्ण काव्यकृति है।
Step 2: Conclusion.
'वातायन' जैनेन्द्र कुमार की एक प्रसिद्ध रचना है, जबकि अन्य विकल्पों में से कोई भी इस लेखक से संबंधित नहीं है।
Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (A) 'वातायन'.} \] Quick Tip: When identifying literary works, focus on the author's most celebrated and iconic creations.
(a) निम्नलिखित में से प्रतिभावादी कवि नहीं हैं:
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त्रिलोचन शास्त्री, नागार्जुन और केदारनाथ अग्रवाल तीनों प्रमुख हिंदी कवि हैं, जो भारतीय साहित्य में अपनी विशेष पहचान रखते हैं और उनकी रचनाओं में प्रतिभावादी दृष्टिकोण दिखाई देता है। जबकि गिरिराज कुमार माथुर के साहित्य में यह विशिष्टता नहीं पाई जाती है।
Step 2: Conclusion.
गिरिराज कुमार माथुर प्रतिभावादी कवि नहीं हैं, इसलिए विकल्प (D) सही उत्तर है।
Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (D) गिरिराज कुमार माथुर.} \] Quick Tip: When studying literary figures, focus on the distinct literary movements they represent to accurately identify their contributions.
(b) 'तारसप्तक' के कवियों को 'गाहो के अवशेष' किसने कहा है?
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रामविलास शर्मा भारतीय साहित्य में प्रसिद्ध आलोचक और कवि थे। उन्होंने 'तारसप्तक' के कवियों को 'गाहो के अवशेष' कहा था। इस शब्द का अर्थ था कि ये कवि समाज में विद्यमान पुरानी सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के खिलाफ खड़े थे।
Step 2: Conclusion.
इसलिए सही उत्तर (B) 'रामविलास शर्मा' है, जिन्होंने 'तारसप्तक' के कवियों को 'गाहो के अवशेष' कहा।
Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (B) रामविलास शर्मा ने.} \] Quick Tip: When analyzing literary works, consider the perspectives and critiques of renowned critics, as they often provide significant insights into the social and cultural relevance of the works.
(c) लेखक और 'सांस्कृतिक पुरस्कार' से सम्मानित उसकी कृति का एक गलत युग्म है:
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'प्रसुराम की प्रतीक्षा' रवींद्रनाथ ठाकुर की रचना नहीं है। यह काव्य-संग्रह 'विप्लव' के संदर्भ में आता है, जो सुमित्रानंदन पंत की रचना है।
Step 2: Conclusion.
इसलिए (C) रवींद्रनाथ ठाकुर - 'प्रसुराम की प्रतीक्षा' को गलत युग्म के रूप में चुना गया है।
Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (C) रवींद्रनाथ ठाकुर - 'प्रसुराम की प्रतीक्षा'.} \] Quick Tip: When studying literary works, always check the attribution of works and the respective contributions of authors, as sometimes similar works can be mistakenly attributed to different authors.
(d) इनमें से मैशलीकरण गुणक की काव्यकृति है:
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'लोकयात्रा' की काव्यकृति, जो कि मैशलीकरण गुणक का आदान-प्रदान करती है, वास्तविक जन जीवन को दर्शाती है। यह काव्य कृतियाँ सामान्य जन की समस्याओं और संघर्षों को प्रस्तुत करती हैं, जो 'लोकयात्रा' की रचनाओं में साफ नजर आता है।
Step 2: Conclusion.
इसलिए सही उत्तर (A) 'लोकयात्रा' है, जो इस विशेष काव्यकृति को परिभाषित करता है।
Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (A) 'लोकयात्रा'.} \] Quick Tip: When analyzing literary works, consider the social and cultural implications and how they reflect real-world issues through artistic forms.
(e) धर्मवीर भारती की रचना नहीं है:
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धर्मवीर भारती भारतीय साहित्य के महत्वपूर्ण रचनाकार हैं। 'सूत्र का सातवां छोडा' उनके द्वारा नहीं लिखा गया है, यह एक भ्रम है। अन्य काव्यरचनाएँ जैसे 'कृष्णाय' और 'धूप के धान' उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं।
Step 2: Conclusion.
इसलिए सही उत्तर (D) 'सूत्र का सातवां छोडा' है, जो धर्मवीर भारती की रचनाओं में शामिल नहीं है।
Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (D) 'सूत्र का सातवां छोडा'.} \] Quick Tip: Always cross-check the authorship of literary works, especially when dealing with famous writers, to avoid confusion with similar works.
Answer the following questions based on the given passage:
भूमि का निरीक्षण देने से किसी ने कहा है, वह अनंत काल से है। उसके भौतिक रूप, सौंदर्य और सम्पत्ति के प्रति हमेशा हमारा आवश्यक ध्यान है। भूमि के प्रभावी स्वास्थ्य के प्रति हम जितने अधिक जागरूक होते हैं, उतनी ही हमारी राष्ट्रव्यापी बदलाव की संभावना होती है। यह पृथ्वी सच्चे उद्देश्य में सम्पूर्ण राष्ट्रव्यापी विचारधाराओं की जन्मी है। जो राष्ट्रवादी पृथ्वी के साथ नहीं जुड़ी वह मिलती रहती है। पृथिवीता की जड़े पृथ्वी में जितनी गहरी होंगी उतना ही राष्ट्र भावों का अंगूर उत्पन्न होगा। इसलिए पृथ्वी के भौतिक स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त करना, उसकी सुंदरता, उपयोगिता और महिमा को पहचानना आवश्यक धर्म है।
(a) उपयुक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए:
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गद्यांश में पृथ्वी के महत्व, इसके भौतिक स्वास्थ्य, और राष्ट्र के उत्थान में इसके योगदान पर विचार किया गया है। लेखक ने पृथ्वी के महत्व को समझाते हुए इसके भौतिक रूप और हमारी जिम्मेदारी के बारे में बताया है।
लेखक का नाम: 'राहुल सांकृत्यायन'
Final Answer: \[ \boxed{लेखक का नाम 'राहुल सांकृत्यायन' है।} \] Quick Tip: When asked to identify an author, focus on understanding the theme and style of writing in the passage to determine who the author might be.
Answer the following questions based on the given passage:
Passage:
रूप्यता और दिव्य स्वतंत्रता अनमोल हैं, रूप्यता के अभाव में कोई भी चीज़ मान्य नहीं होती। नित्य सृष्टि किसी भी सर्वजन की मौलिक उन्नति की प्रामाणिकता सूचित करती है और उसकी स्थिति में कोई भी चीज़ वस्तुत: जनता और समाज के द्वारा स्वीकृत नहीं होती! गली-मोहल्लों से झूके हुए समाज जैसे आगे बढ़ नहीं पाता, वैसे ही पुरानी तितलियाँ एवं शूलों की परंपरागत लेकिन पर चलने वाली भाषा भी जन-सेवकों के गीत देने में व्यर्थ होती है। अस्मर्थ ही रह जाती है। भाषा समृद्धि के आंदोलन का एक सशक्त माध्यम है और ऐसी सक्षमता वह तभी प्राप्त कर सकती है जब अपने युगपुरुष सही मुहावरों को ग्रहण कर सके।
(a) उपयुक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए:
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गद्यांश में संसार के समाजिक, भौतिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में बताया गया है। यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि भाषा सामाजिक बदलाव के लिए एक सशक्त माध्यम है।
लेखक का नाम: 'राहुल सांकृत्यायन'
Final Answer: \[ \boxed{लेखक का नाम 'राहुल सांकृत्यायन' है।} \] Quick Tip: When answering questions about the passage, always focus on understanding the main theme and underlying message to identify the author correctly.
Answer the following questions based on the given passage:
प्रेम–मद–छोटे पा मर्त कबो के कहि
थके अंग निनि सिखिलता मुहाई है।
कहे 'तालकर' ये आवात चकते उशी
माने छिद्यत कुंड भावना छुलाई है।
धर्त धरै पे ना उदार अति आदु सि
सार बहलिन जो ओंध–अधिकारि है।
एक कर रणे नवंति जुड़ा को दिये
एक कर संथ बर राधिक पढ़ाई है।
(a) प्रस्तुत पंक्ताओं के पाठ और रचनाकार का नाम लिखिए:
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यह गद्यांश शिक्षा के महत्व को दर्शाता है, इसमें बच्चों के प्रयास और संघर्ष को व्यक्त किया गया है। लेखक ने प्रेम और शैक्षिक उद्देश्य को प्रमुखता से प्रस्तुत किया है।
लेखक का नाम: 'रामचंद्र शुक्ल'
Final Answer: \[ \boxed{लेखक का नाम 'रामचंद्र शुक्ल' है।} \] Quick Tip: When answering such questions, focus on recognizing the style and theme of the passage to identify the author and the subject of the text.
Answer the following questions based on the given passage:
'मधुर गम्भीर देश के, नीले रोम बालों में के वर्ण,
ढक रहे थे उसका वपु कांत बन रहा था वह कोमल गवँ।
नील परिधान बीच सुखमार खुल रहा मुळ अभुला अंग,
खिला हो जैसे विद्युल्लि का फूल मेख-वन् बीज गुलाबी रंग।
(a) प्रस्तुत पंक्ताओं के पाठ और रचनाकार का नाम लिखिए:
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यह गद्यांश प्रकृति के वर्णन से संबंधित है, जहां लेखक ने प्रकृति के सुंदर दृश्य को व्यक्त किया है। लेखक ने नीले आकाश, बालों में लहराने वाले रंग और खिलते फूलों का खूबसूरत चित्रण किया है।
रचनाकार का नाम: 'निराला'
Final Answer: \[ \boxed{रचनाकार का नाम 'निराला' है।} \] Quick Tip: To identify the author in a question, focus on the style and themes discussed in the passage. In this case, nature and imagery are common features in Nirala's work.
Answer the following questions with a brief description of the author’s life and works (maximum 80 words):
(i) जैनेन्द्र कुमार
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जैनेन्द्र कुमार भारतीय साहित्य के महत्वपूर्ण लेखक रहे हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य में उपन्यास, कहानी और निबंध के क्षेत्र में योगदान दिया है। उनकी रचनाओं में समाज की जटिलताओं और व्यक्तित्व के संघर्ष को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। उनका लेखन भारतीय जीवन और संस्कृति के प्रति गहरी समझ को दर्शाता है।
Final Answer: \[ \boxed{जैनेन्द्र कुमार हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखक हैं जिन्होंने उपन्यास, कहानी और निबंध में योगदान दिया।} \] Quick Tip: For such questions, focus on the key achievements, literary contributions, and major themes associated with the author.
Answer the following questions with a brief description of the poet’s life and works (maximum 80 words):
(i) जयशंकर प्रसाद
Solution:
जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के महान कवि और नाटककार थे। उनका योगदान हिन्दी कविता और नाटक लेखन में अत्यधिक महत्वपूर्ण था। वे छायावादी युग के प्रमुख कवि थे। उनकी काव्यशैली में गंभीरता, चित्रात्मकता और आत्मनिर्भरता थी। उनके प्रमुख रचनाएँ 'कानन कुसुम', 'आंधी', और 'झरना' हैं।
Final Answer: \[ \boxed{जयशंकर प्रसाद छायावादी युग के प्रमुख कवि और नाटककार थे।} \]
% Quick Tip
\begin{quicktipbox
When writing about poets, focus on their contribution to the literary movement, their major works, and their unique style.
\end{quicktipbox
% Topic: Indian Poetry
\hrule
(ii) सुमित्रानंदन पंत
Solution:
सुमित्रानंदन पंत भारतीय साहित्य के प्रमुख कवि थे, जो छायावाद के एक और स्तंभ थे। उनकी कविता में प्रकृति, प्रेम और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी श्रद्धा का चित्रण मिलता है। उनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ 'चिदंबरा', 'पल्लव' और 'रानी' हैं। पंत जी की कविता में रोमांटिकता और सौंदर्य का अद्वितीय मिश्रण है।
Final Answer: \[ \boxed{सुमित्रानंदन पंत छायावाद के महान कवि थे जिनकी रचनाओं में प्रकृति और प्रेम का प्रमुख स्थान है।} \]
% Quick Tip
\begin{quicktipbox
For romantic poets, emphasize their connection with nature, emotional depth, and cultural themes, as seen in their works.
\end{quicktipbox
(iii) रामधारी सिंह 'दिनकर'
View Solution
जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के महान कवि और नाटककार थे। उनका योगदान हिन्दी कविता और नाटक लेखन में अत्यधिक महत्वपूर्ण था। वे छायावादी युग के प्रमुख कवि थे। उनकी काव्यशैली में गंभीरता, चित्रात्मकता और आत्मनिर्भरता थी। उनके प्रमुख रचनाएँ 'कानन कुसुम', 'आंधी', और 'झरना' हैं।
Final Answer: \[ \boxed{जयशंकर प्रसाद छायावादी युग के प्रमुख कवि और नाटककार थे।} \] Quick Tip: When writing about poets, focus on their contribution to the literary movement, their major works, and their unique style.
Answer the following questions in about 80 words:
(i) ‘पनचलाईट’ अथवा ‘बहत्तर’ कहानी के प्रमुख पात्र का चित्र-विवरण कीजिए।
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'पनचलाईट' कहानी में मुख्य पात्र एक सामान्य व्यक्ति है, जो जीवन में एक बड़ा बदलाव महसूस करता है। वह अपनी परिस्थितियों से जूझते हुए अपने अस्तित्व के बारे में सवाल उठाता है। उसकी आंतरिक संघर्ष, इच्छाएँ, और भावनाएँ कहानी के मुख्य विषय होते हैं। उसकी जिजीविषा, सामाजिक उत्पीड़न से मुक्ति की आवश्यकता और अपने सपनों को पूरा करने की इच्छा ने उसे कहानी का केंद्रीय पात्र बना दिया है।
Final Answer: \[ \boxed{'पनचलाईट' में मुख्य पात्र वह व्यक्ति है जो जीवन में संघर्ष कर रहा है और अपनी जिजीविषा से खुद को साबित करने की कोशिश कर रहा है।} \] Quick Tip: For character descriptions, focus on their personal struggles, desires, and how their journey reflects the central theme of the story.
Answer the following questions based on the given passage:
(i) ‘सरस्वती खंडकाव्य’ के आधार पर 'द्रौपदी' का चित्र-चित्रण कीजिए।
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'सरस्वती खंडकाव्य' में 'द्रौपदी' का चित्रण बहन और पत्नी के रूप में किया गया है, जो अपने जीवन के विभिन्न संघर्षों को सशक्त रूप से दर्शाती है। द्रौपदी का चरित्र उनकी साहसिकता, वीरता और सम्मान की प्रतीक है। वह महाभारत की सबसे महत्वपूर्ण नारी पात्रों में से एक हैं, जिन्होंने पांडवों के लिए लड़ाई की और अपने आत्मसम्मान के लिए युद्ध किया। इस काव्य में द्रौपदी की छवि बहन, पत्नी और मां के रूप में उभरती है, जो अपने परिवार के लिए प्राणों की आहुति देने को तैयार रहती है। वह एक योद्धा की तरह आत्मविश्वास से भरी होती हैं, और हर कठिनाई के बावजूद अपने विश्वासों पर अडिग रहती हैं।
Final Answer: \[ \boxed{द्रौपदी का चित्रण एक साहसी, वीर और अपने सम्मान के लिए संघर्ष करने वाली महिला के रूप में किया गया है।} \] Quick Tip: When analyzing literary characters, focus on their strengths, moral decisions, and their development throughout the narrative.
(ii) ‘द्रौपदी’ खंडकाव्य के आधार पर ‘राजस्थ्री’ की चारित्रिक विशेषताएँ विस्तार से लिखिए।
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‘द्रौपदी’ खंडकाव्य में राजस्थ्री का चित्रण एक संघर्षशील और आत्मनिर्भर महिला के रूप में किया गया है। वह न केवल अपने समाज में एक प्रतिष्ठित स्थान रखती है, बल्कि उसके द्वारा किये गए संघर्ष और बलिदान ने उसे एक आदर्श महिला के रूप में प्रस्तुत किया है। उसकी साहसिकता, दयालुता, और उसके जीवन की संघर्षपूर्ण यात्रा ने उसे एक सशक्त व्यक्तित्व बना दिया है। उसका चरित्र नारी शक्ति और आत्मसम्मान का प्रतीक बनता है।
राजस्थ्री की चारित्रिक विशेषताओं में सबसे प्रमुख हैं:
1. **साहस और आत्मनिर्भरता**: वह अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाती है और किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहती है।
2. **समाज में प्रतिष्ठा**: वह अपने समाज के लिए सम्मानजनक और आदर्श महिला के रूप में देखी जाती है।
3. **संघर्षशीलता**: उसने जीवन के हर कठिन मोड़ पर संघर्ष किया और अपने आत्मसम्मान को कभी भी कम नहीं होने दिया।
Final Answer: \[ \boxed{राजस्थ्री का चित्रण साहसी, आत्मनिर्भर, और संघर्षशील महिला के रूप में किया गया है।} \] Quick Tip: When describing character traits, focus on their core strengths and how they overcome challenges within the context of the story.
‘श्रवणकुमार’ खंडकाव्य के आधार पर ‘श्रवणकुमार’ का चरित्र-चित्रण कीजिए।
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‘श्रवणकुमार’ खंडकाव्य में श्रवणकुमार का चित्रण एक आदर्श पुत्र के रूप में किया गया है। वह अपने माता-पिता के प्रति पूरी तरह से समर्पित है और उनका सम्मान करता है। उसकी शारीरिक कष्टों को सहते हुए भी, वह अपने कर्तव्यों को निभाता है। वह न केवल अपनी माता-पिता की इच्छाओं का पालन करता है, बल्कि उनका सम्मान भी करता है। उसका चरित्र एक निष्ठावान और कर्तव्यपरायण व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया है।
श्रवणकुमार की विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **कर्तव्यनिष्ठा**: वह अपने माता-पिता की सेवा में समर्पित है और उनके लिए हर कठिनाई को सहता है।
2. **समर्पण**: वह अपने कर्तव्यों के प्रति पूर्ण समर्पण दर्शाता है, भले ही वह शारीरिक या मानसिक रूप से कष्ट सहन कर रहा हो।
3. **साहस**: उसने अपनी माता-पिता की इच्छाओं के प्रति पूरी निष्ठा से कार्य किया, जो एक साहसिक और प्रेरणादायक उदाहरण है।
Final Answer: \[ \boxed{श्रवणकुमार का चित्रण कर्तव्यपरायण, समर्पित और साहसी व्यक्ति के रूप में किया गया है।} \] Quick Tip: In character analysis, focus on how the character's actions reflect their core values and how they respond to challenges.
‘श्रवणकुमार’ खंडकाव्य की प्रमुख घटनाओं का उल्लेख कीजिए।
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‘श्रवणकुमार’ खंडकाव्य में श्रवणकुमार की यात्रा और उसके द्वारा अपने माता-पिता की सेवा करने की प्रमुख घटनाएँ हैं। पहली घटना तब होती है जब वह अपनी माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर ले जाने के लिए कंधे पर उठाता है। दूसरी घटना तब होती है जब श्रवणकुमार के कंधे पर एक बाण लगता है, और वह मृत्युपूर्व अपने माता-पिता को अपने कर्तव्यों का पालन करने की इच्छा जताता है। इन घटनाओं से उसके संघर्ष और समर्पण की झलक मिलती है।
श्रवणकुमार के जीवन में ये घटनाएँ उसके चरित्र को उजागर करने वाली हैं, जो न केवल एक कर्तव्यपरायण पुत्र के रूप में, बल्कि एक साहसी और सशक्त व्यक्ति के रूप में भी दिखती हैं।
Final Answer: \[ \boxed{श्रवणकुमार की प्रमुख घटनाएँ उसके संघर्ष और कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाती हैं।} \] Quick Tip: When writing about events in a literary piece, focus on how they drive the character's development and reflect the themes of the story.
‘मुक्ति’ खंडकाव्य के प्रसिद्ध पात्र की चरित्रात्मक विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
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‘मुक्ति’ खंडकाव्य में प्रमुख पात्रों में मुक्ति का चित्रण एक संघर्षशील और साहसी महिला के रूप में किया गया है। मुक्ति की विशेषताएँ उसके कर्तव्यों, संघर्षों, और समाज के पारंपरिक बंधनों से मुक्ति पाने की उसकी इच्छा पर आधारित हैं। मुक्ति का चरित्र अपने आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करता है।
मुक्ति की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **साहस और आत्मनिर्भरता**: मुक्ति ने अपने जीवन के कठिन मोड़ों पर साहसिक निर्णय लिए और समाज की धारा से हटकर अपने कर्तव्यों का पालन किया।
2. **संघर्षशीलता**: मुक्ति ने अपनी स्वतंत्रता और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए समाज के रूढ़िवादी विचारों से संघर्ष किया।
3. **नारी शक्ति का प्रतीक**: मुक्ति का चरित्र नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण है, जो अपनी स्थिति को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करती है।
Final Answer: \[ \boxed{मुक्ति का चित्रण एक साहसी, आत्मनिर्भर, और संघर्षशील महिला के रूप में किया गया है।} \] Quick Tip: In character analysis, focus on the character’s internal growth and the external forces that influence their decisions and actions.
‘मुक्ति’ खंडकाव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
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‘मुक्ति’ खंडकाव्य में मुक्ति के चरित्र को संघर्ष, साहस, और नारी शक्ति का प्रतीक बनाकर प्रस्तुत किया गया है। यह खंडकाव्य न केवल एक आदर्श महिला के रूप में मुक्ति का चित्रण करता है, बल्कि यह एक सामाजिक दृष्टिकोण को भी उजागर करता है। मुक्ति का जीवन उसके अधिकारों की रक्षा, आत्मनिर्भरता, और स्वतंत्रता की ओर एक प्रेरणास्त्रोत यात्रा है।
Final Answer: \[ \boxed{‘मुक्ति’ खंडकाव्य में मुक्ति का चित्रण संघर्षशील और साहसी महिला के रूप में किया गया है।} \] Quick Tip: When analyzing a literary work, consider how the main character’s traits are reflective of the themes and issues of the time.
‘सत्य की जीत’ खंडकाव्य की प्रमुख घटनाओं का वर्णन कीजिए।
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‘सत्य की जीत’ खंडकाव्य में सत्य के अंतर्निहित बल और उसकी सत्यता के प्रति विश्वास को प्रमुख रूप से चित्रित किया गया है। यह खंडकाव्य जीवन के संघर्षों में सत्य के पथ पर चलने की कठिनाई और उसके अंत में मिलने वाली विजय की कहानी है। इस काव्य में प्रमुख घटनाएँ सत्य के संघर्ष, झूठ और धोखे के खिलाफ उस सत्य के विजयी होने की घटनाएँ हैं।
1. **सत्य का संघर्ष**: काव्य में सत्य को उसके मार्ग में आने वाली कठिनाइयों के बावजूद निरंतर संघर्ष करते हुए दिखाया गया है।
2. **झूठ का पर्दाफाश**: काव्य में झूठ और धोखे के माध्यम से सत्य के मार्ग को अवरुद्ध करने की घटनाएँ और उनके परिणामों का विवरण है।
3. **सत्य की विजय**: अंत में सत्य की विजय होती है, जब झूठ और धोखा हार जाते हैं और सत्य अपना स्थान प्राप्त करता है।
Final Answer: \[ \boxed{‘सत्य की जीत’ खंडकाव्य में सत्य के संघर्ष और उसकी विजय की घटनाओं का चित्रण किया गया है।} \] Quick Tip: In literature, the theme of truth often reflects a moral journey, focusing on the triumph of right over wrong.
‘सत्य की जीत’ खंडकाव्य के आधार पर ‘युधिष्ठिर’ का चरित्रचित्रण कीजिए।
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‘सत्य की जीत’ खंडकाव्य में युधिष्ठिर का चित्रण एक सत्यनिष्ठ और न्यायप्रिय राजा के रूप में किया गया है। वह न केवल धर्म का पालन करता है, बल्कि अपने परिवार और राज्य की भलाई के लिए हमेशा कर्तव्यनिष्ठ रहता है। युधिष्ठिर का चरित्र सत्य, न्याय, और त्याग का आदर्श प्रस्तुत करता है। वह हर परिस्थिति में सत्य बोलता है और उसे अपने जीवन का सर्वोत्तम मार्ग मानता है।
युधिष्ठिर की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **धर्मनिष्ठता**: युधिष्ठिर ने हमेशा धर्म का पालन किया और सत्य के मार्ग पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वाह किया।
2. **न्यायप्रियता**: वह सभी के साथ निष्पक्ष और न्यायपूर्ण व्यवहार करता है, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो।
3. **त्याग और कर्तव्यनिष्ठा**: युधिष्ठिर का जीवन त्याग और कर्तव्य के प्रति अडिग निष्ठा का प्रतीक है।
Final Answer: \[ \boxed{‘सत्य की जीत’ खंडकाव्य में युधिष्ठिर का चित्रण सत्यनिष्ठ, न्यायप्रिय और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति के रूप में किया गया है।} \] Quick Tip: In literary character analysis, focus on how the character’s actions align with the central themes of the work, such as truth, justice, or sacrifice.
‘आलोककृत’ खंडकाव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
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‘आलोककृत’ खंडकाव्य में मुख्य रूप से आधुनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं और उन पर प्रभाव डालने वाली घटनाओं का चित्रण किया गया है। इसमें मनुष्य की मानसिक स्थितियों, सामाजिक संघर्षों, और व्यक्तिगत जीवन के उतार-चढ़ाव का चित्रण मिलता है। खंडकाव्य की विशेषताएँ उसकी गहरी सोच, जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करने वाली कविताएँ, और व्यक्तित्व के संघर्षों को व्यक्त करने वाली भावनाएँ हैं।
आलोककृत की विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **समाज और व्यक्ति का संघर्ष**: यह खंडकाव्य समाज और व्यक्ति के बीच निरंतर संघर्ष और सामंजस्य का चित्रण करता है।
2. **मानसिक और भावनात्मक संघर्ष**: इसमें व्यक्तियों के मानसिक और भावनात्मक उतार-चढ़ाव और उनसे जुड़ी जटिलताओं का उल्लेख किया गया है।
3. **नैतिकता और मूल्य**: काव्य में नैतिकता और मूल्य की बहस और उनके व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन पर प्रभाव का भी विश्लेषण किया गया है।
Final Answer: \[ \boxed{‘आलोककृत’ खंडकाव्य में समाज और व्यक्ति के संघर्ष, मानसिक संघर्षों, और नैतिक मूल्यों की विशेषताएँ दी गई हैं।} \] Quick Tip: In literary analysis, focus on how themes such as individual struggle, societal norms, and personal growth are developed throughout the narrative.
‘आलोककृत’ खंडकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
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‘आलोककृत’ खंडकाव्य में नायक का चित्रण एक संघर्षशील और विचारशील व्यक्ति के रूप में किया गया है। वह अपने जीवन में विभिन्न मानसिक और भावनात्मक संघर्षों से जूझता है, परंतु उसका उद्देश्य हमेशा समाज के भले के लिए होता है। नायक का चरित्र न केवल आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि वह सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन में अपने कर्तव्यों को निभाने का प्रयास करता है।
नायक की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **संघर्षशीलता**: नायक अपने जीवन के कठिनतम क्षणों में भी संघर्ष करता है और अपनी समस्याओं का समाधान खोजता है।
2. **विचारशीलता**: नायक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर सोचने और विश्लेषण करने में विश्वास रखता है।
3. **नैतिकता**: वह अपने नैतिक सिद्धांतों से कभी नहीं भटकता और हमेशा सही का साथ देता है।
Final Answer: \[ \boxed{‘आलोककृत’ खंडकाव्य में नायक का चित्रण संघर्षशील, विचारशील और नैतिक व्यक्ति के रूप में किया गया है।} \] Quick Tip: When analyzing a protagonist in literature, examine how their internal conflicts and actions align with the overarching themes of the work.
निम्नलिखित संस्कृत गाथाओं में से किसी एक का संस्कृत-हिंदी में अनुवाद कीजिए।
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संस्कृत गाथाओं का अनुवाद करते समय, हमें गाथा के भावार्थ को पूरी तरह से समझकर उसे सही संदर्भ में हिंदी में प्रस्तुत करना चाहिए। संस्कृत गाथाएँ अक्सर जीवन के नैतिक पहलुओं और आदर्शों को व्यक्त करती हैं, जिन्हें सरल और सुबोध हिंदी में व्यक्त करना आवश्यक है।
इस गाथा का हिंदी अनुवाद इस प्रकार किया जा सकता है:
"जो ज्ञान से परिपूर्ण है और जो सत्य की ओर अग्रसर है, वह व्यक्ति जीवन में उन्नति प्राप्त करता है। उसका मनुष्यत्व और ज्ञान हर बाधा को पार कर सफलता प्राप्त करता है। हमें भी उसी मार्ग पर चलकर अपनी मन की शांति और स्थिरता को प्राप्त करना चाहिए।"
Final Answer: \[ \boxed{संस्कृत गाथा का अनुवाद सत्य और ज्ञान के महत्व को दर्शाते हुए जीवन के सर्वोत्तम मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।} \] Quick Tip: When translating philosophical texts, ensure that the core message remains intact while making it accessible in the target language.
‘सत्य, धर्म और ज्ञान’ पर आधारित गाथा का अनुवाद कीजिए।
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सत्य, धर्म और ज्ञान के सिद्धांतों को समझना और उन्हें जीवन में अपनाना बहुत महत्वपूर्ण है। गाथाओं में दिए गए संदेशों को हम अपनी दैनिक जीवन में उतार सकते हैं। यह गाथा जीवन के श्रेष्ठ मार्ग की ओर मार्गदर्शन करती है।
इस गाथा का हिंदी अनुवाद इस प्रकार होगा:
"सत्य ही हमारे जीवन का मार्गदर्शक है। धर्म का पालन करना और ज्ञान प्राप्त करना हमें सत्य के मार्ग पर चलने में सहायता करता है। यह तीनों हमें जीवन में शांति और संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।"
Final Answer: \[ \boxed{गाथा का अनुवाद सत्य, धर्म, और ज्ञान के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।} \] Quick Tip: While translating, focus on the universality of themes like truth and justice that transcend linguistic boundaries.
निम्नलिखित संस्कृत पंक्तियों में से किसी एक का संस्कृत-हिंदी में अनुवाद कीजिए।
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संस्कृत गाथाओं का अनुवाद करते समय हमें गाथा के अर्थ को पूरी तरह से समझकर उसका सही संदर्भ में अनुवाद करना चाहिए। संस्कृत गाथाएँ अक्सर जीवन के सिद्धांतों, शिक्षा और आदर्शों पर आधारित होती हैं। यह गाथा भी ज्ञान, सहानुभूति और सही आचरण की महत्वपूर्ण शिक्षा देती है।
इस गाथा का हिंदी अनुवाद इस प्रकार होगा:
"जो व्यक्ति सभी के साथ सहानुभूति से व्यवहार करता है, वह जीवन में शांति और सुख प्राप्त करता है। उसी व्यक्ति का जीवन सफल होता है, जो किसी के प्रति कोई बुरा भाव नहीं रखता और सभी को समान दृष्टि से देखता है।"
Final Answer: \[ \boxed{संस्कृत गाथा का अनुवाद सहानुभूति, सत्य और समानता के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।} \] Quick Tip: When translating ancient texts, try to maintain the original essence while making sure the message is clear and relevant for modern readers.
‘सहानुभूति और ज्ञान’ पर आधारित गाथा का अनुवाद कीजिए।
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सहानुभूति और ज्ञान पर आधारित गाथाएँ जीवन में सामंजस्य और समझदारी को स्थापित करने में सहायक होती हैं। यह गाथाएँ जीवन के उच्चतम सिद्धांतों को व्यक्त करती हैं और हमें सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं।
इस गाथा का हिंदी अनुवाद इस प्रकार होगा:
"सहानुभूति से भरा हुआ व्यक्ति ज्ञान के मार्ग पर चलता है और समाज में शांति और संतुलन स्थापित करता है। यही व्यक्ति अपने कार्यों से समाज को बेहतर दिशा प्रदान करता है।"
Final Answer: \[ \boxed{गाथा का अनुवाद सहानुभूति और ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।} \] Quick Tip: Focus on the central idea when translating moral teachings, as they hold universal relevance across cultures.
(a) मैत्री यात्रा में किम् आवश्यकं ?
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(b) काकः क्रुत्स्नं विवरणं कथं अकृतः ?
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N/A
(c) मुखं कालात् किम् गच्छति ?
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N/A
(d) पण्डितत्वं किम् अस्ति ?
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उत्तर:
\begin{quote
पण्डितत्वं ज्ञानं, विवेकं, तथा विश्वज्ञान के प्रति गहरे समर्पण को संदर्भित करता है। पण्डितः निरंतर अध्ययन, आस्थायुक्तता और संसार की वास्तविकता का अनुशीलन करता है।
\end{quote
Final Answer: \[ \boxed{सभी प्रश्नों के उत्तर सरलतम संस्कृत शब्दों में दिए गए हैं।} \] Quick Tip: In Sanskrit translation, focus on using the correct verb forms and contextually accurate words to retain the meaning of the original text.
‘वीर’ रस और ‘शांत’ रस की परिभाषा लिखकर एक उदाहरण दीजिए।
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‘वीर’ रस: वीर रस साहस, शक्ति, और संघर्ष का प्रतिनिधित्व करता है। यह रस उस समय का उपयोग किया जाता है जब व्यक्ति के भीतर संघर्ष और पराक्रम का भाव उत्पन्न होता है।
**उदाहरण**:
“शिवाजी ने दुश्मनों से लोहा लिया और अपनी वीरता से इतिहास रचा।”
‘शांत’ रस: शांत रस का अर्थ शांति, संतोष, और आत्मिक शांति से होता है। यह रस उन परिस्थितियों में व्यक्त किया जाता है, जब मनुष्य के भीतर शांति, विनम्रता, और संतोष का भाव होता है।
**उदाहरण**:
“उसने मंदिर में जाकर शांति की प्रार्थना की।”
Final Answer: \[ \boxed{‘वीर’ रस और ‘शांत’ रस की परिभाषा और उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं।} \] Quick Tip: When explaining emotions like ‘वीर’ and ‘शांत’, focus on the specific traits that evoke these feelings, such as bravery or calmness.
‘उमा’ अंककार रस और ‘अनंन्व’ अंकलिंग की परिभाषा लिखकर एक उदाहरण दीजिए।
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‘उमा’ अंककार रस: यह रस उर्जा, उत्साह और जागरूकता का प्रतीक है। यह रस तब व्यक्त किया जाता है जब किसी में ऊर्जा का भरा होना या हर्ष और उत्साह का होना व्यक्त हो।
**उदाहरण**:
“उसने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हर कठिनाई को चुनौती दी।”
‘अनंन्व’ अंकलिंग: यह रस किसी वस्तु की निरंतरता और शाश्वतता की भावना को व्यक्त करता है। जब कुछ स्थायी और सर्वकालिक होता है, तब यह रस व्यक्त किया जाता है।
**उदाहरण**:
“चाँद की चाँदनी रातें अनंत काल से यूँ ही चाँद को सजाती रहेंगी।”
Final Answer: \[ \boxed{‘उमा’ अंककार रस और ‘अनंन्व’ अंकलिंग की परिभाषा और उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं।} \] Quick Tip: For Ras theory, understanding the emotional and situational context is key to identifying the correct Ras.
‘चौपाई’ छंद अंककार और ‘उकेन्द्रवृत्त’ छंद की परिभाषा लिखकर एक उदाहरण दीजिए।
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‘चौपाई’ छंद: चौपाई छंद एक विशेष छंद प्रकार है जिसमें प्रत्येक चरण में आठ या दस मात्राएँ होती हैं। यह छंद विशेष रूप से भक्ति और वीर गीतों में प्रयुक्त होता है।
**उदाहरण**:
“राम का नाम जपें और भवसागर से पार हो जाएं।”
‘उकेन्द्रवृत्त’ छंद: उकेन्द्रवृत्त छंद एक विशेष प्रकार का छंद है, जिसमें चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में बारह मात्राएँ होती हैं।
**उदाहरण**:
“संग्राम की भूमि में वीरों का नाम अमर होता है।”
Final Answer: \[ \boxed{‘चौपाई’ और ‘उकेन्द्रवृत्त’ छंद की परिभाषा और उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं।} \] Quick Tip: When explaining poetic meters, focus on syllable count and rhythm structure to distinguish different types of verses.
(i) राष्ट्र की एकता : वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता
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N/A
(ii) वन-संरक्षण का महत्व और उपाय
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(iii) विद्यार्थी और राजनीति
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(iv) भारतीय समाज में नारी का स्थान
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(v) बेरोजगारी निवारण में कुटीर एवं लघु उद्योग की भूमिका
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कुटीर और लघु उद्योग देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। ये उद्योग न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करते हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास के अवसर प्रदान करते हैं। लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देने से बेरोजगारी की समस्या का समाधान संभव है।
Final Answer: \[ \boxed{सभी विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई है।} \] Quick Tip: Focus on the current relevance of the topic and how the issues mentioned are being addressed in modern society.
(i) 'त्वर' का सम्प्राप्ति-प्रसंग है:
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Step 1: Understanding 'त्वर'.
'त्वर' एक संस्कृत शब्द है, जो किसी कार्य की जल्दी और तीव्रता को दर्शाता है। इसका उपयोग तात्कालिक गति और तत्परता को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
Step 2: Conclusion.
'त्वर' का सही प्रसंग 'लव + तान्' के रूप में है, जो इस शब्द की तीव्रता और तुरंतता को दर्शाता है।
Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (A) लव + तान्.} \] Quick Tip: When interpreting Sanskrit words, identify their root components and how they combine to form specific meanings and contexts.
(iii) 'वीर' का सम्प्राप्ति-प्रसंग है:
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Step 1: Understanding 'वीर'.
'वीर' शब्द का संबंध साहस और पराक्रम से होता है। यह रस वीरता और पराक्रम की भावना को व्यक्त करता है, जो किसी व्यक्ति की साहसिकता और संघर्षशीलता को दर्शाता है।
Step 2: Conclusion.
'वीर' का सम्प्राप्ति-प्रसंग 'वीर + रस' के रूप में है, क्योंकि यह शब्द वीरता और साहस का प्रतीक है और वीर रस के अर्थ को व्यक्त करता है।
Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (A) वीर + रस.} \] Quick Tip: When identifying the Ras (emotional flavor), consider the context in which it is used and the emotion it evokes in the reader.
(i) 'सकर्म' में समास है:
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Step 1: Understanding 'सकर्म'.
'सकर्म' शब्द में 'स' (सह) और 'कर्म' (कार्य) का मेल होता है। यह एक कर्मधारय समास है, जिसमें एक शब्द का दूसरा शब्द के साथ संबंध होता है।
Step 2: Conclusion.
'सकर्म' में कर्मधारय समास है, क्योंकि इसमें दो शब्दों के बीच एक विशेष संबंध को दर्शाया गया है।
Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (C) कर्मधारय.} \] Quick Tip: In Samas (compound formation), identifying whether it's a कर्मधारय or other types is key to understanding how the components relate.
(i) 'पुष्तत' में प्रत्यय है:
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Step 1: Understanding 'पुष्तत'.
'पुष्तत' में तव्यं प्रत्यय का प्रयोग हुआ है, जो किसी क्रिया के पूर्ण होने की अवस्था को दर्शाता है।
Step 2: Conclusion.
'पुष्तत' में तव्यं प्रत्यय है, जो 'पुष्ट' (विकसित, संपन्न) शब्द से संबंधित है।
Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (C) तव्यं.} \] Quick Tip: When identifying the suffix (प्रत्यय), focus on the root word and its context within the sentence.
(i) 'महत्वसेनप्रशान' का उदाहरण है:
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Step 1: Understanding 'महत्वसेनप्रशान'.
'महत्वसेनप्रशान' का अर्थ है किसी महत्वपूर्ण कार्य का उदाहरण देना। यह शब्द किसी चीज की महत्ता को स्पष्ट करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।
Step 2: Conclusion.
'महत्वसेनप्रशान' का सही उदाहरण 'कृष्णस्य पुस्तकम् अस्ति' है, क्योंकि यह कोई महत्वपूर्ण और विशिष्ट वस्तु को संदर्भित करता है।
Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (C) कृष्णस्य पुस्तकम् अस्ति।} \] Quick Tip: In Sanskrit, focus on context to determine which example appropriately reflects the meaning of a word or phrase.
राज्य पत्राचार नियम के मुख्य प्रावधान को बस चालक के असंस्कृत व्यवहार का उल्लेख करते हुए एक शिकायती पत्र लिखिए।
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To,
परिवहन विभाग,
शहर यातायात विभाग,
(स्थान नाम),
तिथि: (तिथि).
विषय: बस चालक के असंस्कृत व्यवहार के संबंध में शिकायत।
मान्यवर,
मैं (तिथि) को बस मार्ग संख्या 25 पर यात्रा करते हुए बस चालक द्वारा किए गए असंस्कृत व्यवहार के बारे में आपकी जानकारी में लाना चाहता हूँ। बस चालक ने न केवल यात्रियों के साथ अशिष्ट भाषा का प्रयोग किया, बल्कि उसने यात्रियों के प्रति असम्मानजनक और अपमानजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया, जिससे यात्रा के दौरान माहौल अत्यंत असुविधाजनक हो गया।
राज्य परिवहन कोड के अनुसार, इस प्रकार का व्यवहार बिल्कुल अस्वीकार्य है, और मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करें ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।
मैं उम्मीद करता हूँ कि शीघ्र कार्यवाही की जाएगी।
सादर,
\newline
(नाम)
(पता)
(फोन नंबर)
Final Answer: \[ \boxed{शिकायत पत्र को उचित रूप से लिखा गया है।} \] Quick Tip: शिकायत पत्र लिखते समय भाषा संयमित और स्पष्ट होनी चाहिए ताकि आपकी बात पूरी तरह से समझी जा सके।







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