UP Board is conducting the Class 12 History Board Exam 2026 on February 21, 2026. Class 12 History Question Paper with Solution PDF is available here for download.

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UP Board Class 12 2026 History Question Paper with Solution PDF

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UP Board Class 12 History Question Paper with Solutions

Question 1:

जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर कौन थे?

  • (क) पार्श्वनाथ
  • (ख) विमल
  • (ग) महावीर स्वामी
  • (घ) अजित
Correct Answer: (ग) महावीर स्वामी
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जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी थे। उनका जन्म 599 ईसा पूर्व हुआ था और उन्हें जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक नेताओं में से एक माना जाता है। उनके उपदेशों को 'महावीर के व्रत' कहा जाता है, जो जैन दर्शन की नींव रखते हैं। उन्होंने अहिंसा (अहिंसा), सत्य (सत्य), चोरी न करना (अस्तेय), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (स्वार्थ न रखना) के सिद्धांतों की शिक्षा दी।


चरण 1: विकल्पों का विश्लेषण करें।

- (क) पार्श्वनाथ: गलत — वे 23वें तीर्थंकर थे।

- (ख) विमल: गलत — कोई तीर्थंकर नहीं हैं।

- (ग) महावीर स्वामी: सही — वे 24वें तीर्थंकर हैं।

- (घ) अजित: गलत — वे 2वें तीर्थंकर थे।


चरण 2: निष्कर्ष।

इसलिए, सही उत्तर (ग) है।



अंतिम उत्तर: \[ \boxed{(ग) \, महावीर स्वामी} \]


\begin{quicktipbox
महावीर स्वामी के उपदेश अहिंसा और करुणा पर आधारित हैं, जो जैन धर्म के मूल सिद्धांत हैं। उनका जीवन लाखों अनुयायियों के लिए एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है।
\end{quicktipbox Quick Tip: महावीर स्वामी के उपदेश अहिंसा और करुणा पर आधारित हैं, जो जैन धर्म के मूल सिद्धांत हैं। उनका जीवन लाखों अनुयायियों के लिए एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है।


Question 2:

बी०बी० लाल ने मेरठ जिले (उ०प्र०) के हस्तिनापुर नामक गाँव का उत्खनन कब किया?

  • (क) 1950-51 में
  • (ख) 1951-52 में
  • (ग) 1953-54 में
  • (घ) 1955-56 में
Correct Answer: (ख) 1951-52 में
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बी०बी० लाल, जो एक प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् थे, ने 1951-52 में मेरठ जिले (उत्तर प्रदेश) के हस्तिनापुर नामक गाँव का उत्खनन किया था। हस्तिनापुर, जो महाभारत काल के महत्वपूर्ण स्थलों में से एक माना जाता है, को बी०बी० लाल द्वारा किए गए उत्खनन के परिणामस्वरूप भारतीय इतिहास और संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ। उनके द्वारा की गई खुदाई से कई महत्वपूर्ण कलाकृतियाँ, स्थापत्य और मृदाभांड निकलकर आए, जो उस समय की सभ्यता को उजागर करते हैं।


चरण 1: विकल्पों का विश्लेषण करें।

- (क) 1950-51 में: गलत — उत्खनन इस समय नहीं हुआ था।

- (ख) 1951-52 में: सही — बी०बी० लाल ने इस वर्ष में उत्खनन किया था।

- (ग) 1953-54 में: गलत — यह समय उत्खनन के लिए सही नहीं था।

- (घ) 1955-56 में: गलत — उत्खनन इस समय नहीं हुआ था।


चरण 2: निष्कर्ष।

इसलिए, सही उत्तर (ख) है।



अंतिम उत्तर: \[ \boxed{(ख) \, 1951-52 में} \]


\begin{quicktipbox
बी०बी० लाल के उत्खनन ने भारतीय पुरातत्व विज्ञान में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है और उन्होंने भारतीय इतिहास को और गहराई से समझने में मदद की।
\end{quicktipbox Quick Tip: बी०बी० लाल के उत्खनन ने भारतीय पुरातत्व विज्ञान में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है और उन्होंने भारतीय इतिहास को और गहराई से समझने में मदद की।


Question 3:

सती प्रथा का उन्मूलन किस वर्ष हुआ था?

  • (क) 1827 ई०
  • (ख) 1828 ई०
  • (ग) 1829 ई०
  • (घ) 1830 ई०
Correct Answer: (ग) 1829 ई०
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सती प्रथा का उन्मूलन 1829 ई० में हुआ था। यह उन्मूलन भारतीय समाज सुधारक राजा राममोहन राय की कड़ी मेहनत और ब्रिटिश शासक लॉर्ड विलियम बेंटिक के सहयोग से हुआ। राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई और इस प्रथा को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास किए। इसके परिणामस्वरूप, ब्रिटिश सरकार ने 1829 में एक कानून पारित किया, जिसमें सती प्रथा को गैरकानूनी घोषित किया गया और सती होने पर दंड का प्रावधान किया गया। इस कानून ने भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण सुधार की नींव रखी।


चरण 1: विकल्पों का विश्लेषण करें।

- (क) 1827 ई०: गलत — सती प्रथा का उन्मूलन इस समय नहीं हुआ था।

- (ख) 1828 ई०: गलत — यह वर्ष भी सती प्रथा के उन्मूलन का वर्ष नहीं था।

- (ग) 1829 ई०: सही — 1829 में सती प्रथा को समाप्त करने वाला कानून पारित हुआ।

- (घ) 1830 ई०: गलत — यह वर्ष सती प्रथा के उन्मूलन का वर्ष नहीं था।


चरण 2: निष्कर्ष।

इसलिए, सही उत्तर (ग) है।



अंतिम उत्तर: \[ \boxed{(ग) \, 1829 ई०} \]


\begin{quicktipbox
सती प्रथा का उन्मूलन भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण सुधार था, जिसने महिलाओं की स्थिति को बेहतर बनाने में मदद की।
\end{quicktipbox Quick Tip: सती प्रथा का उन्मूलन भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण सुधार था, जिसने महिलाओं की स्थिति को बेहतर बनाने में मदद की।


Question 4:

ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की मृत्यु हुई थी –

  • (क) 1235 ई० में
  • (ख) 1265 ई० में
  • (ग) 1325 ई० में
  • (घ) 1356 ई० में
Correct Answer: (क) 1235 ई० में
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ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी एक प्रसिद्ध सूफी संत थे, जिनका महत्वपूर्ण योगदान दिल्ली सल्तनत के दौरान सूफी मत के प्रचार-प्रसार में था। वे दिल्ली के कुतुब मीनार के पास स्थित कुतुब साहिब दरगाह के संस्थापक थे। उनका जन्म 1173 ई० में हुआ था और उनकी मृत्यु 1235 ई० में हुई थी। उनकी शिक्षाओं ने भारतीय समाज में अध्यात्मिक सुधार लाने का कार्य किया।


चरण 1: विकल्पों का विश्लेषण करें।

- (क) 1235 ई० में: सही — ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की मृत्यु 1235 ई० में हुई थी।

- (ख) 1265 ई० में: गलत — यह वर्ष उनकी मृत्यु का नहीं है।

- (ग) 1325 ई० में: गलत — यह वर्ष भी उनकी मृत्यु का नहीं था।

- (घ) 1356 ई० में: गलत — यह वर्ष उनकी मृत्यु का नहीं था।


चरण 2: निष्कर्ष।

इसलिए, सही उत्तर (क) है।



अंतिम उत्तर: \[ \boxed{(क) \, 1235 ई० में} \]


\begin{quicktipbox
ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की शिक्षाएँ आज भी सूफी मत के अनुयायियों के लिए एक मार्गदर्शन के रूप में मानी जाती हैं।
\end{quicktipbox Quick Tip: ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की शिक्षाएँ आज भी सूफी मत के अनुयायियों के लिए एक मार्गदर्शन के रूप में मानी जाती हैं।


Question 5:

‘किताब-उल-हिन्द’ के लेखक थे-

  • (क) मार्कोपोलो
  • (ख) इब्नबतूता
  • (ग) अलबरूनी
  • (घ) बर्नियर
Correct Answer: (ग) अलबरूनी
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Step 1: Understanding the Concept:

मध्यकालीन भारत के इतिहास को समझने के लिए विदेशी यात्रियों के वृत्तांत बहुत महत्वपूर्ण हैं। 'किताब-उल-हिन्द' भारत के धर्म, दर्शन, खगोल विज्ञान और सामाजिक जीवन का विस्तृत वर्णन करती है।


Step 2: Detailed Explanation:

अलबरूनी महमूद गजनवी के साथ भारत आया था। उसने अरबी भाषा में 'किताब-उल-हिन्द' (जिसे 'तहरीक-ए-हिन्द' भी कहा जाता है) लिखी। इस पुस्तक में 80 अध्याय हैं जो भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं।


Step 3: Final Answer:

‘किताब-उल-हिन्द’ के लेखक अलबरूनी थे। Quick Tip: अलबरूनी पहला मुस्लिम विद्वान था जिसने संस्कृत सीखी और पुराणों का अध्ययन किया।


Question 6:

एम०आर० मुगल द्वारा 1974 में किस स्थान का उत्खनन प्रारंभ किया गया था?

  • (क) कालीबंगा
  • (ख) लोथल
  • (ग) बहावलपुर
  • (घ) हड़प्पा
Correct Answer: (ग) बहावलपुर
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Step 1: Understanding the Concept:

सिंधु घाटी सभ्यता के विस्तार को समझने के लिए विभिन्न पुरातत्वविदों ने अलग-अलग क्षेत्रों में सर्वेक्षण और उत्खनन किया है। एम.आर. मुगल (मोहम्मद रफीक मुगल) का कार्य मुख्य रूप से चोलिस्तान रेगिस्तान और बहावलपुर क्षेत्र पर केंद्रित था।


Step 2: Detailed Explanation:

पाकिस्तानी पुरातत्वविद् डॉ. एम.आर. मुगल ने 1974 में बहावलपुर (जो अब पाकिस्तान में है) के पास चोलिस्तान रेगिस्तान के सूखे हुए हकरा नदी के तल में सर्वेक्षण और उत्खनन कार्य शुरू किया था। उनके इस कार्य से हड़प्पा सभ्यता के प्रारंभिक और विकसित चरणों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।


Step 3: Final Answer:

एम.आर. मुगल द्वारा 1974 में बहावलपुर क्षेत्र का उत्खनन प्रारंभ किया गया था। Quick Tip: एम.आर. मुगल के शोध ने यह सिद्ध किया कि हकरा नदी के किनारे हड़प्पा काल की बस्तियों का घनत्व बहुत अधिक था।


Question 7:

‘मुन्तखाब उत-तवारीख’ की रचना किसने की?

  • (क) बदायूँनी
  • (ख) अबुल फजल
  • (ग) काजवीनी
  • (घ) गुलबदन बेगम
Correct Answer: (क) बदायूँनी
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Step 1: Understanding the Concept:

मुगल काल में इतिहास लेखन की समृद्ध परंपरा थी। 'मुन्तखाब-उत-तवारीख' सम्राट अकबर के शासनकाल का एक आलोचनात्मक इतिहास है, जो उस समय की धार्मिक और राजनीतिक स्थितियों पर प्रकाश डालता है।


Step 2: Detailed Explanation:

अब्दुल कादिर बदायूँनी ने 'मुन्तखाब-उत-तवारीख' की रचना की थी। बदायूँनी अकबर के कट्टर आलोचक थे और उन्होंने इस पुस्तक में अकबर की धार्मिक नीतियों (दीन-ए-इलाही) की तीखी आलोचना की है। इसके विपरीत अबुल फजल ने 'अकबरनामा' लिखी थी, जो अकबर के पक्ष में लिखी गई थी।


Step 3: Final Answer:

‘मुन्तखाब उत-तवारीख’ की रचना बदायूँनी ने की थी। Quick Tip: बदायूँनी ने इस पुस्तक को गुप्त रूप से लिखा था क्योंकि उन्हें डर था कि अकबर की नीतियों की आलोचना के कारण उन्हें दंड मिल सकता है।


Question 8:

लखनऊ में 1857 की क्रांति का नेतृत्व कौन कर रहा था?

  • (क) बिरजिस कादिर
  • (ख) नाना साहेब
  • (ग) कुंवर सिंह
  • (घ) बेगम हजरत महल
Correct Answer: (घ) बेगम हजरत महल
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Step 1: Understanding the Concept:

1857 का विद्रोह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध पहला बड़ा सशस्त्र विद्रोह था। भारत के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय नेताओं ने अपनी रियासतों को बचाने के लिए इसका नेतृत्व किया था।




Step 2: Detailed Explanation:

अवध की राजधानी लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने किया था। उन्होंने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को नवाब घोषित कर दिया और अंग्रेजों के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया। अंततः लखनऊ पर अंग्रेजों का कब्जा होने के बाद वे नेपाल चली गईं।


Step 3: Final Answer:

लखनऊ में 1857 की क्रांति का नेतृत्व बेगम हजरत महल कर रही थीं। Quick Tip: लखनऊ में विद्रोह 4 जून, 1857 को शुरू हुआ था और सर हेनरी लॉरेंस इस विद्रोह के दौरान रेजिडेंसी की रक्षा करते हुए मारे गए थे।


Question 9:

‘सहायक संधि’ लागू करने का श्रेय किस गवर्नर जनरल को जाता है?

  • (क) कर्जन
  • (ख) वेलेजली
  • (ग) कॉर्नवालिस
  • (घ) हेस्टिंग्ज
Correct Answer: (ख) वेलेजली
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Step 1: Understanding the Concept:

सहायक संधि (Subsidiary Alliance) ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और भारतीय रियासतों के बीच एक ऐसी संधि थी, जिसने भारतीय राजाओं को पूरी तरह से अंग्रेजों पर निर्भर बना दिया।


Step 2: Detailed Explanation:

लॉर्ड वेलेजली (1798-1805) ने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार के लिए सहायक संधि प्रणाली को व्यापक रूप से लागू किया। इस संधि को स्वीकार करने वाले राज्य को अपनी सुरक्षा के लिए ब्रिटिश सेना रखनी पड़ती थी और एक ब्रिटिश रेजिडेंट को अपने दरबार में रखना अनिवार्य था।


Step 3: Final Answer:

‘सहायक संधि’ लागू करने का श्रेय लॉर्ड वेलेजली को जाता है। Quick Tip: हैदराबाद के निजाम पहले भारतीय शासक थे जिन्होंने 1798 में वेलेजली की सहायक संधि को स्वीकार किया था।


Question 10:

‘ए बंच ऑफ ओल्ड लेटर्स’ का प्रकाशन (सम्पादन) किया था-

  • (क) जवाहरलाल नेहरू ने
  • (ख) जयप्रकाश नारायण ने
  • (ग) नरेन्द्र देव ने
  • (घ) एन०जी० रंगा ने
Correct Answer: (क) जवाहरलाल नेहरू ने
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Step 1: Understanding the Concept:

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान नेताओं के बीच पत्रों का आदान-प्रदान विचारों के साझाकरण का प्रमुख माध्यम था। इन पत्रों का संकलन ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।


Step 2: Detailed Explanation:

'ए बंच ऑफ ओल्ड लेटर्स' (A Bunch of Old Letters) जवाहरलाल नेहरू द्वारा संपादित पत्रों का एक संकलन है। इसमें मुख्य रूप से महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर और अन्य समकालीन नेताओं द्वारा नेहरू को लिखे गए पत्रों को शामिल किया गया है। यह पुस्तक 1958 में प्रकाशित हुई थी।


Step 3: Final Answer:

‘ए बंच ऑफ ओल्ड लेटर्स’ का प्रकाशन और सम्पादन जवाहरलाल नेहरू ने किया था। Quick Tip: यह संकलन केवल व्यक्तिगत पत्र नहीं है, बल्कि यह उस समय की भारतीय राजनीति और राष्ट्रीय आंदोलन के वैचारिक विकास का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।


Question 11:

लोथल पुरास्थल की खोज किस वर्ष और किसने की?

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

लोथल सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख बंदरगाह शहर था, जो वर्तमान में गुजरात के अहमदाबाद जिले में स्थित है। यह व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र था।




Step 2: Detailed Explanation:

लोथल पुरास्थल की खोज 1954 में प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् एस० आर० राव (शिकारीपुरा रंगनाथ राव) द्वारा की गई थी। यहाँ की खुदाई से हड़प्पाकालीन गोदी (Dockyard), धान की भूसी और शतरंज के समान खेल के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।


Step 3: Final Answer:

लोथल की खोज वर्ष 1954 में एस० आर० राव ने की थी। Quick Tip: लोथल को 'लघु हड़प्पा' या 'लघु मोहनजोदड़ो' के नाम से भी जाना जाता है और यह साबरमती नदी की सहायक नदी 'भोगवा' के किनारे स्थित है।


Question 12:

प्रभावती गुप्त कौन थी? उसका विवाह किसके साथ हुआ था?

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

प्राचीन भारतीय इतिहास में महिलाओं की राजनीतिक स्थिति को समझने के लिए प्रभावती गुप्त का उदाहरण अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने शासिका के रूप में भी कार्य किया था।


Step 2: Detailed Explanation:

प्रभावती गुप्त गुप्त वंश के शक्तिशाली सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) की पुत्री थी। उसका विवाह दक्षिण भारत के वाकाटक वंश के राजा रुद्रसेन द्वितीय के साथ हुआ था। रुद्रसेन की मृत्यु के बाद प्रभावती ने अपने नाबालिग पुत्रों की संरक्षिका के रूप में शासन संभाला था।


Step 3: Final Answer:

प्रभावती गुप्त चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री थी और उनका विवाह वाकाटक नरेश रुद्रसेन द्वितीय से हुआ था। Quick Tip: प्रभावती गुप्त के 'पुणे ताम्रपत्र' अभिलेख से गुप्तकालीन भूमि दान और प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।


Question 13:

मुन्तखाब-उत-तवारीख किसकी रचना है?

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

यह मुगलकालीन साहित्य का एक प्रमुख ग्रंथ है जो अकबर के शासनकाल का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है।


Step 2: Detailed Explanation:

'मुन्तखाब-उत-तवारीख' की रचना अब्दुल कादिर बदायूँनी ने की थी। इस ग्रंथ में बदायूँनी ने अकबर की धार्मिक नीतियों और 'दीन-ए-इलाही' की कड़ी आलोचना की है, जिसके कारण इसे गुप्त रूप से लिखा गया था।


Step 3: Final Answer:

यह ग्रंथ अब्दुल कादिर बदायूँनी की रचना है। Quick Tip: बदायूँनी ने रामायण और महाभारत का फारसी में अनुवाद भी किया था।


Question 14:

महाराजा मेहताब चन्द कौन थे?

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

मेहताब चन्द का संबंध औपनिवेशिक काल के दौरान बंगाल के प्रमुख जमींदार परिवारों से था।


Step 2: Detailed Explanation:

महाराजा मेहताब चन्द बर्दवान (वर्धमान) के राजा थे। उनके शासनकाल के दौरान ही 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 'इस्तमरारी बंदोबस्त' (स्थायी बंदोबस्त) लागू किया गया था। यद्यपि उनकी जमींदारी पर संकट आया था, लेकिन उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता से अपनी संपत्तियों को नीलामी से बचा लिया था।


Step 3: Final Answer:

महाराजा मेहताब चन्द बर्दवान (बंगाल) के महाराजा थे। Quick Tip: स्थायी बंदोबस्त के तहत राजाओं को 'जमींदार' कहा जाने लगा था और उन्हें एक निश्चित राजस्व सरकार को देना होता था।


Question 15:

1857 के विद्रोह के कोई दो कारण लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

1857 का विद्रोह अचानक हुई कोई घटना नहीं थी, बल्कि यह ब्रिटिश शासन के प्रति वर्षों से संचित असंतोष का परिणाम था।


Step 2: Detailed Explanation:

विद्रोह के दो प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

1. धार्मिक कारण: सैनिकों को दी जाने वाली 'एनफील्ड राइफल' के कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी होने की अफवाह ने हिंदू और मुस्लिम दोनों सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया।

2. राजनीतिक कारण: लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत झाँसी, सतारा और नागपुर जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया गया, जिससे भारतीय शासकों में गहरा असंतोष फैल गया।


Step 3: Final Answer:

विद्रोह के दो प्रमुख कारण चर्बी वाले कारतूसों का मुद्दा और डलहौजी की साम्राज्यवादी विलय नीति (गोद निषेध नीति) थे। Quick Tip: मंगल पांडे 1857 के विद्रोह के पहले शहीद थे, जिन्होंने बैरकपुर छावनी में चर्बी वाले कारतूसों के इस्तेमाल के खिलाफ आवाज उठाई थी।


Question 16:

हड़प्पा सभ्यता के किन्हीं दो क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता) अपनी नगरीय योजना और विकसित संस्कृति के लिए जानी जाती है। इसके विभिन्न नगरों की अपनी विशिष्ट विशेषताएं थीं।


Step 2: Detailed Explanation:

हड़प्पा सभ्यता के दो प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:

1. मोहनजोदड़ो: इसका अर्थ है 'मृतकों का टीला'। यहाँ से एक विशाल स्नानागार (Great Bath) और विशाल अन्नागार के साक्ष्य मिले हैं। यह नगर दो भागों—दुर्ग (ऊपरी भाग) और निचला शहर में विभाजित था।


2. लोथल: यह गुजरात में स्थित इस सभ्यता का प्रमुख बंदरगाह (Dockyard) था। यहाँ से समुद्री व्यापार के प्रमाण मिले हैं। यहाँ घरों के दरवाजे मुख्य सड़क की ओर खुलते थे, जो अन्य नगरों से भिन्न था।


Step 3: Final Answer:

हड़प्पा सभ्यता के दो मुख्य क्षेत्र मोहनजोदड़ो (विशाल स्नानागार के लिए प्रसिद्ध) और लोथल (प्रमुख बंदरगाह नगर) थे। Quick Tip: मोहनजोदड़ो की सबसे विशिष्ट विशेषता उसकी जल निकासी प्रणाली (Drainage System) थी, जो उस समय के विश्व में सबसे उन्नत थी।


Question 17:

महाभारत पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

महाभारत विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है, जो प्राचीन भारत के सामाजिक, राजनैतिक और धार्मिक जीवन का दर्पण है।


Step 2: Detailed Explanation:

महाभारत की रचना का श्रेय महर्षि वेदव्यास को दिया जाता है। मूल रूप से इसमें 8,800 श्लोक थे (जय संहिता), जो कालांतर में बढ़कर 1 लाख से अधिक हो गए।

- विषय वस्तु: यह कुरु वंश के दो परिवारों—कौरवों और पांडवों के बीच सत्ता के संघर्ष और युद्ध की कथा है।

- श्रीमद्भगवद्गीता: महाभारत के 'भीष्म पर्व' का अंश है, जिसमें कृष्ण ने अर्जुन को निष्काम कर्म का उपदेश दिया है।

- महत्व: यह 'पंचम वेद' के रूप में भी जाना जाता है और धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष का मार्ग दिखाता है।


Step 3: Final Answer:

महाभारत वेदव्यास द्वारा रचित एक विशाल महाकाव्य है जो कौरव-पांडव युद्ध के माध्यम से धर्म की स्थापना का संदेश देता है। Quick Tip: महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र के मैदान में 18 दिनों तक चला था और इसके 18 पर्व (अध्याय) हैं।


Question 18:

भक्ति आन्दोलन के कारणों का वर्णन कीजिए।

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

भक्ति आंदोलन मध्यकालीन भारत का एक सांस्कृतिक और धार्मिक सुधार आंदोलन था जिसने ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत प्रेम और भक्ति पर जोर दिया।


Step 2: Detailed Explanation:

भक्ति आंदोलन के उदय के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:

1. सामाजिक कुरीतियाँ: हिंदू धर्म में व्याप्त जातिवाद, छुआछूत और जटिल कर्मकांडों के विरुद्ध जनता में असंतोष था।

2. इस्लाम का प्रभाव: इस्लाम के एकेश्वरवाद (एक ईश्वर) और समानता के सिद्धांत ने भारतीय विचारकों को प्रभावित किया।

3. सरल मार्ग की खोज: संस्कृत भाषा और कठिन यज्ञों के स्थान पर क्षेत्रीय भाषाओं में सरल भक्ति मार्ग की आवश्यकता महसूस की गई।

4. संतों का योगदान: कबीर, नानक और मीरा जैसे संतों ने प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया जिससे जनसामान्य प्रेरित हुआ।


Step 3: Final Answer:

जातिगत भेदभाव, जटिल कर्मकांड और संतों द्वारा प्रचारित सरल धार्मिक मार्ग भक्ति आंदोलन के प्रमुख प्रेरक कारण थे। Quick Tip: भक्ति आंदोलन की शुरुआत दक्षिण भारत में आलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों द्वारा की गई थी।


Question 19:

विजयनगर की जल-आवश्यकताओं को किस प्रकार पूरा किया जाता था?

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

विजयनगर साम्राज्य (हम्पी) एक शुष्क क्षेत्र में स्थित था, इसलिए वहां के शासकों ने जल प्रबंधन की उन्नत तकनीकें विकसित की थीं।


Step 2: Detailed Explanation:

जल आवश्यकताओं की पूर्ति के प्रमुख साधन थे:

1. तुंगभद्रा नदी: यह विजयनगर के लिए जल का मुख्य स्रोत थी। नदी पर बांध बनाकर नहरें निकाली गई थीं।

2. कमलापुरम जलाशय: यह एक विशाल हौज था जिसका उपयोग न केवल सिंचाई के लिए बल्कि शाही केंद्र तक पानी ले जाने के लिए भी किया जाता था।

3. हीरिया नहर: यह नहर तुंगभद्रा नदी के बांध से पानी लाती थी और इसका उपयोग घाटी की खेती में किया जाता था।

4. प्राकृतिक कुंड: पहाड़ियों से आने वाले झरनों के पानी को संचित करने के लिए कृत्रिम तालाब बनाए गए थे।



Step 3: Final Answer:

विजयनगर में जल की पूर्ति तुंगभद्रा नदी पर बने बांधों, कमलापुरम जलाशय और हीरिया नहर के माध्यम से की जाती थी। Quick Tip: विजयनगर का शाही केंद्र पूरी तरह से जल प्रबंधन प्रणालियों पर निर्भर था ताकि घेराबंदी के समय पानी की कमी न हो।


Question 20:

‘राज्य हड़प नीति’ क्या थी?

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

यह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारतीय रियासतों को अपने साम्राज्य में मिलाने की एक आक्रामक राजनीतिक नीति थी।


Step 2: Detailed Explanation:

राज्य हड़प नीति (Doctrine of Lapse) को लॉर्ड डलहौजी ने लागू किया था। इसके मुख्य बिंदु थे:

- यदि किसी भारतीय शासक की मृत्यु बिना किसी प्राकृतिक उत्तराधिकारी (पुत्र) के हो जाती थी, तो वह अपनी रियासत किसी को गोद नहीं दे सकता था।

- ऐसी स्थिति में वह राज्य स्वतः ही ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा बन जाता था।

- इस नीति के तहत सतारा, झाँसी, नागपुर और संबलपुर जैसी रियासतों को हड़प लिया गया।


Step 3: Final Answer:

राज्य हड़प नीति डलहौजी द्वारा शुरू की गई एक व्यवस्था थी जिसके तहत बिना वारिस वाले राज्यों को ब्रिटिश शासन में मिला लिया जाता था। Quick Tip: यह नीति 1857 के विद्रोह के प्रमुख कारणों में से एक थी, क्योंकि इसने भारतीय राजाओं में भारी असंतोष पैदा कर दिया था।


Question 21:

संविधान सभा के उद्देश्यों में किन आदर्शों पर जोर दिया गया है?

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

संविधान सभा का मुख्य लक्ष्य एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना था जो न्याय, समानता और स्वतंत्रता के मूल्यों पर आधारित हो। इन आदर्शों को 'उद्देश्य प्रस्ताव' में प्रस्तुत किया गया था।


Step 2: Detailed Explanation:

13 दिसंबर, 1946 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' में निम्नलिखित आदर्शों पर जोर दिया गया:

- संप्रभुता: भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु गणराज्य होगा।

- न्याय: सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

- स्वतंत्रता: विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास और उपासना की स्वतंत्रता।

- समानता: प्रतिष्ठा और अवसर की समानता प्रदान करना।

- अल्पसंख्यक सुरक्षा: अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और जनजातीय क्षेत्रों के लिए उचित सुरक्षात्मक उपाय करना।


Step 3: Final Answer:

संविधान सभा ने मुख्य रूप से न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और लोकतंत्र जैसे उच्च लोकतांत्रिक आदर्शों पर जोर दिया है। Quick Tip: यही 'उद्देश्य प्रस्ताव' आगे चलकर भारतीय संविधान की 'प्रस्तावना' (Preamble) का आधार बना।


Question 22:

स्तूप की संरचना का वर्णन कीजिए।
अथवा
कबीर के जीवन व शिक्षाओं पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

स्तूप एक अर्ध-गोलाकार संरचना है जिसका उद्भव बुद्ध के अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए हुआ था। वहीं, कबीर मध्यकालीन भारत के महान रहस्यवादी संत थे जिन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई।


Step 2: Detailed Explanation:

स्तूप की संरचना:
1. अण्ड: यह एक अर्ध-वृत्ताकार मिट्टी का टीला होता है।
2. हर्मिका: अण्ड के ऊपर एक चौकोर संरचना होती है जो देवताओं के निवास का प्रतीक है।
3. यष्टि और छत्रावली: हर्मिका से एक मस्तूल (यष्टि) निकलता है जिस पर तीन छतरियाँ लगी होती हैं।
4. वेदिका और तोरण: स्तूप के चारों ओर घेरा (वेदिका) और प्रवेश द्वार (तोरण) होते हैं, जो अक्सर सुंदर नक्काशी से सजे होते हैं।


अथवा (कबीर की शिक्षाएँ):
- एकेश्वरवाद: कबीर ने ईश्वर की एकता पर बल दिया। उन्होंने उसे 'राम', 'रहीम', 'अल्लाह' और 'हरि' जैसे विभिन्न नामों से पुकारा।
- मूर्ति पूजा का विरोध: वे बाहरी आडंबरों और मूर्ति पूजा के कट्टर विरोधी थे।
- समानता: उन्होंने जाति-पाँति और ऊँच-नीच के भेदभाव को सिरे से नकारा।
- भाषा: उनकी शिक्षाएँ 'साखी' और 'सबद' के रूप में 'बीजक' नामक ग्रंथ में संकलित हैं।

Step 3: Final Answer:

स्तूप बुद्ध की पवित्रता का प्रतीक है जिसकी संरचना में अण्ड, हर्मिका और तोरण मुख्य हैं। कबीर ने प्रेम, समानता और निराकार ईश्वर की भक्ति का संदेश दिया। Quick Tip: साँची का स्तूप (मध्य प्रदेश) भारत में स्तूप वास्तुकला का सबसे बेहतरीन और संरक्षित उदाहरण माना जाता है।


Question 23:

इस्तमरारी बंदोबस्त से ईस्ट इंडिया कम्पनी को क्या लाभ हुए थे?
अथवा
भारतीय राष्ट्रीय/स्वतन्त्रता आंदोलन में महात्मा गांधी की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

इस्तमरारी (स्थायी) बंदोबस्त ब्रिटिश आर्थिक नीति थी, जबकि महात्मा गांधी का नेतृत्व भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण चरण था जिसे 'गांधी युग' कहा जाता है।


Step 2: Detailed Explanation:

इस्तमरारी बंदोबस्त के लाभ (कंपनी को):
1. निश्चित आय: कंपनी को प्रतिवर्ष मिलने वाला राजस्व निश्चित हो गया, जिससे उन्हें अपना बजट बनाने में आसानी हुई।
2. वफादार वर्ग: इस व्यवस्था ने जमींदारों के रूप में एक ऐसा वर्ग तैयार किया जो ब्रिटिश शासन का समर्थक बना रहा।
3. प्रशासनिक सरलता: अब कंपनी को हर खेत का सर्वेक्षण करने की आवश्यकता नहीं थी; जिम्मेदारी जमींदार की थी।

अथवा (गांधीजी की भूमिका):
- सत्याग्रह और अहिंसा: गांधीजी ने सत्य और अहिंसा को राजनीतिक हथियार बनाया।
- जन आंदोलन: उन्होंने चंपारण, असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलनों के माध्यम से आम जनता (किसानों, मजदूरों) को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा।
- सामाजिक सुधार: उन्होंने छुआछूत के विरुद्ध लड़ाई लड़ी और 'हरिजन' उत्थान पर बल दिया।
- स्वदेशी: चरखा और खादी के माध्यम से आत्मनिर्भरता का संदेश दिया।

Step 3: Final Answer:

स्थायी बंदोबस्त ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थिरता प्रदान की। महात्मा गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक अहिंसक जन आंदोलन में बदल दिया। Quick Tip: इस्तमरारी बंदोबस्त 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किया गया था।


Question 24:

भारतीय संविधान की मूल विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
अथवा
अमेरिकी गृह युद्ध ने भारत में रैयत समुदाय के जीवन को कैसे प्रभावित किया।

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

भारतीय संविधान दुनिया का सबसे विशाल लिखित संविधान है। वहीं, 1861 का अमेरिकी गृह युद्ध भारत के दक्कन क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना थी।


Step 2: Detailed Explanation:

भारतीय संविधान की विशेषताएँ:
1. लिखित और विस्तृत: यह दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है।
2. प्रभुत्वसंपन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य: ये इसके मूल आधार स्तंभ हैं।
3. मौलिक अधिकार: नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए 6 मौलिक अधिकार दिए गए हैं।
4. संसदीय प्रणाली: भारत में केंद्र और राज्यों में संसदीय शासन व्यवस्था अपनाई गई है।
5. कठोरता और लचीलेपन का मिश्रण: इसमें संशोधन की प्रक्रिया न तो बहुत कठिन है और न ही अत्यंत सरल।

अथवा (अमेरिकी गृह युद्ध का प्रभाव):
- कपास की मांग: युद्ध के कारण अमेरिका से ब्रिटेन को होने वाली कपास की आपूर्ति बंद हो गई, जिससे भारतीय कपास की मांग अचानक बढ़ गई।
- रैयतों को ऋण: साहूकारों ने भारतीय किसानों (रैयतों) को कपास उगाने के लिए खूब कर्ज दिया।
- अल्पकालिक समृद्धि: कुछ समय के लिए किसानों को लाभ हुआ, लेकिन जैसे ही 1865 में युद्ध समाप्त हुआ, मांग गिर गई।
- कर्ज का जाल: साहूकारों ने कर्ज वापस मांगना शुरू किया, जिससे दक्कन में 1875 के 'दक्कन दंगे' हुए।

Step 3: Final Answer:

भारतीय संविधान लोकतंत्र और अधिकारों का रक्षक है। अमेरिकी गृह युद्ध ने भारतीय कपास किसानों को पहले समृद्ध बनाया और फिर कर्ज के गहरे संकट में धकेल दिया। Quick Tip: भारतीय संविधान को बनने में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था।


Question 25:

निम्नलिखित ऐतिहासिक तिथियों से सम्बंधित घटनाओं का उल्लेख कीजिए-

(i) 1950 ई०

(ii) 1539 ई०

(iii) 1540 ई०

(iv) 1664 ई०

(v) 1765 ई०

(vi) 1206 ई०

(vii) 1336 ई०

(viii) 1510 ई०

(ix) 1526 ई०

(x) 1875 ई०

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

इतिहास में तिथियाँ केवल समय का सूचक नहीं होतीं, बल्कि वे उन महत्वपूर्ण परिवर्तनों और घटनाओं की गवाह होती हैं जिन्होंने समाज और राजनीति की दिशा बदली।


Step 2: Detailed Explanation:

दी गई तिथियों से संबंधित महत्वपूर्ण घटनाएँ निम्नलिखित हैं:
\begin{table[h!]
\centering
\begin{tabular{|l|l|l|
\hline
क्रमांक & तिथि & ऐतिहासिक घटना
\hline
(i) & 1950 ई० & 26 जनवरी को भारतीय संविधान लागू हुआ और भारत एक गणतंत्र बना।
\hline
(ii) & 1539 ई० & चौसा का युद्ध (शेरशाह सूरी और हुमायूँ के बीच)।
\hline
(iii) & 1540 ई० & कन्नौज (बिलग्राम) का युद्ध; हुमायूँ की हार और शेरशाह सूरी का दिल्ली पर कब्जा।
\hline
(iv) & 1664 ई० & फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना।
\hline
(v) & 1765 ई० & इलाहाबाद की संधि; ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी मिली।
\hline
(vi) & 1206 ई० & कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा दिल्ली सल्तनत (गुलाम वंश) की स्थापना।
\hline
(vii) & 1336 ई० & हरिहर और बुक्का द्वारा विजयनगर साम्राज्य की स्थापना।
\hline
(viii) & 1510 ई० & पुर्तगाली गवर्नर अल्बुकर्क द्वारा बीजापुर से गोवा की विजय।
\hline
(ix) & 1526 ई० & पानीपत का प्रथम युद्ध; बाबर द्वारा मुगल साम्राज्य की स्थापना।
\hline
(x) & 1875 ई० & दक्कन के दंगे (महाराष्ट्र) और आर्य समाज की स्थापना (स्वामी दयानंद सरस्वती)।
\hline
\end{tabular
\end{table

Step 3: Final Answer:

उपरोक्त तालिका उन महत्वपूर्ण युद्धों, संधियों और आंदोलनों को दर्शाती है जो भारतीय इतिहास के विभिन्न कालखंडों (प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक) से संबंधित हैं। Quick Tip: मुगल काल और दिल्ली सल्तनत की शुरुआत की तिथियों (1526 और 1206) को याद रखना बहुत जरूरी है क्योंकि ये भारतीय इतिहास के बड़े बदलाव के केंद्र हैं।


Question 26:

दिए गए भारत के रेखा मानचित्र पर निम्न स्थानों को × चिन्ह द्वारा दर्शाइए तथा उनके नाम भी लिखिए।

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

ऐतिहासिक स्थानों को मानचित्र पर अंकित करने से हमें उस समय की भौगोलिक स्थिति और राजनीतिक विस्तार को समझने में सहायता मिलती है।




Step 2: Detailed Explanation:

प्रश्नानुसार स्थानों की पहचान निम्नलिखित है:

(i) लोथल (गुजरात): सिंधु घाटी सभ्यता का वह स्थान जहाँ गोदीबाड़ा (बंदरगाह) स्थित था।
(ii) मद्रास (चेन्नई): जहाँ 1887 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का तीसरा अधिवेशन (बदरुद्दीन तैयबजी की अध्यक्षता में) हुआ था।
(iii) इलाहाबाद (प्रयागराज): जहाँ नेहरू परिवार का निवास स्थान 'आनन्द भवन' स्थित है।
(iv) कलकत्ता (कोलकाता): जहाँ 1886 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का द्वितीय अधिवेशन (दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में) हुआ था।
(v) अहमदाबाद (गुजरात): जहाँ महात्मा गांधी ने 1917 में साबरमती आश्रम की स्थापना की थी।


Step 3: Final Answer:

मानचित्र पर ये स्थान क्रमशः गुजरात (लोथल, साबरमती), उत्तर प्रदेश (इलाहाबाद), पश्चिम बंगाल (कलकत्ता) और तमिलनाडु (मद्रास) राज्यों में स्थित हैं। Quick Tip: मानचित्र भरते समय हमेशा तटीय क्षेत्रों (जैसे लोथल और मद्रास) को ध्यान से अंकित करें ताकि सटीक स्थान की पहचान हो सके।