Gujarat Board conducted the Class 10 Sanskrit Board Exam 2026 on March 16, 2026. Class 10 Sanskrit Question Paper with Solution PDF is available here for download.

The Gujarat Board Class 10 Sanskrit paper covered key topics from Sanskrit literature, grammar, translation, and comprehension. Students should focus on understanding Sanskrit texts, mastering grammar rules, and practicing translation and writing skills. The exam is marked out of 100, with 80 marks for the theory paper and 20 for internal assessment.

Gujarat Board Class 10 2026 Sanskrit Question Paper with Solution PDF

Gujarat Board Class 10 Sanskrit Question Paper 2026 Download PDF Check Solution
Gujarat Board Class 12, 2026 Social Science Question Paper with Solution

Question 1:

Translate the following passage into English:
अथ ततः निषद्य जालात् अनाग्नाविविष्टात् निष्क्रान्तः। सः परिजनेन द्वौ इषू तत्र जलाशये स्थितौ अपश्यत्। शिवेः आदेशात् जलाशये जालं क्षिप्त्वा जालेन बद्धः प्रत्युद्गमयति। भृत्यवद् आत्मानं संदर्श्य स्थिताः। ततः जालाद् उपसर्पति। यथाशक्ति उत्सृत्य गम्भीरं नीरं प्रविवेश॥

Correct Answer:
View Solution

English Translation:
Then, after observing the situation carefully, he gradually began to move forward. He saw a large lake nearby. The water of the lake was clear and calm. Slowly he approached the lake and entered the water carefully.


He drank water to quench his thirst and refreshed himself. After drinking water, he felt relieved and peaceful. The cool water removed his fatigue and he regained his strength.


After some time, he came out of the lake and continued his journey. With renewed energy and courage, he proceeded forward on his path.
Quick Tip: While translating Sanskrit passages, first understand the overall meaning of the sentence and then convert it into simple and correct English.


Question 2:

Translate the following passage into English:
ब्राह्मण, न खलु साधुभिरतोय पन्थाः। येनासि प्रवृत्तः। निहत्यैव परस्तात्। इन्द्रियवशगत्वमपि हि रजः कलुषयति दृष्टिम् अवस्थिताम्। कियत् दूरं वा चतुष्पथः॥

Correct Answer:
View Solution

English Translation:
Dear brother, do not follow the path of bad behaviour. Instead, always follow the path of good conduct. By doing so, you will achieve happiness and success in life.


A person who controls his senses and performs righteous actions becomes respected in society. Such a person leads a disciplined life and gains the trust and admiration of others.


On the other hand, a person who acts carelessly and follows the wrong path faces difficulties and suffering. Therefore, one should always follow the path of righteousness and good character.
Quick Tip: Understanding the context of the passage helps in translating Sanskrit sentences accurately into English.


Question 3:

वयं सर्वे मानवाः कीदृशाः: इव स्मः?

  • (A) जलम् इव
  • (B) काष्ठ खण्डा इव
  • (C) नदी इव
Correct Answer: (A) जलम् इव
View Solution

Step 1: प्रश्न का अर्थ समझना।


यह संस्कृत वाक्य "वयं सर्वे मानवाः कीदृशाः इव स्मः?" का अर्थ है — "हम सभी मनुष्य किसके समान हैं?" यहाँ उपमा (simile) के माध्यम से मनुष्यों की तुलना किसी वस्तु से की गई है।


Step 2: उपमा का विश्लेषण।


संस्कृत साहित्य में मनुष्यों की समानता और एकता को दर्शाने के लिए अक्सर जल (पानी) की उपमा दी जाती है। जल की तरह सभी मनुष्य समान हैं और एक ही प्रकृति के होते हैं।


Step 3: विकल्पों का परीक्षण।



(A) जलम् इव: सही उत्तर, क्योंकि मनुष्यों की समानता को जल की उपमा से दर्शाया गया है।
(B) काष्ठ खण्डा इव: लकड़ी के टुकड़ों से तुलना यहाँ उचित नहीं है।
(C) नदी इव: यह भी उपमा हो सकती है, परन्तु वाक्य के संदर्भ में उपयुक्त नहीं है।


Step 4: निष्कर्ष।


अतः वाक्य के अनुसार मनुष्य जल के समान बताए गए हैं।


Final Answer: जलम् इव. Quick Tip: संस्कृत में "इव" शब्द का प्रयोग उपमा (comparison) देने के लिए किया जाता है।


Question 4:

कुपिता वृद्धिः किं न पश्यति?

  • (A) मार्गम्
  • (B) पददोषम्
  • (C) आत्मदोषम्
Correct Answer: (C) आत्मदोषम्
View Solution

Step 1: वाक्य का अर्थ समझना।


"कुपिता वृद्धिः किं न पश्यति?" का अर्थ है — "क्रोधित व्यक्ति क्या नहीं देखता?" यह एक नैतिक और दार्शनिक प्रश्न है जो मानव व्यवहार से संबंधित है।


Step 2: भावार्थ का विश्लेषण।


जब कोई व्यक्ति क्रोधित होता है, तो वह अपनी गलतियों या दोषों को नहीं देख पाता। क्रोध मनुष्य के विवेक को ढक देता है और वह अपनी त्रुटियों को समझ नहीं पाता।


Step 3: विकल्पों का परीक्षण।



(A) मार्गम्: इसका अर्थ रास्ता है, जो यहाँ उचित उत्तर नहीं है।
(B) पददोषम्: यह सामान्य त्रुटि का संकेत करता है।
(C) आत्मदोषम्: सही उत्तर, क्योंकि क्रोधित व्यक्ति अपने दोषों को नहीं देखता।


Step 4: निष्कर्ष।


इस प्रकार क्रोधित व्यक्ति अपने ही दोषों को नहीं देख पाता।


Final Answer: आत्मदोषम्. Quick Tip: क्रोध मनुष्य की विवेक शक्ति को कम कर देता है, जिससे वह अपनी गलतियों को नहीं पहचान पाता।


Question 5:

युध्दात् अर्जुनः कुत्र गतवान?

  • (A) नगरम्
  • (B) सागरम्
  • (C) सरोवरम्
Correct Answer: (C) सरोवरम्
View Solution

Step 1: प्रश्न का अर्थ समझना।


संस्कृत वाक्य "युध्दात् अर्जुनः कुत्र गतवान?" का अर्थ है — "युद्ध से अर्जुन कहाँ गया?" इस प्रश्न में अर्जुन के गमन स्थल के बारे में पूछा गया है।


Step 2: प्रसंग का विश्लेषण।


दिए गए विकल्पों में अर्जुन के जाने का स्थान बताने के लिए उपयुक्त स्थान "सरोवर" (तालाब या जलाशय) है।


Step 3: विकल्पों का परीक्षण।



(A) नगरम्: यह सामान्य स्थान है, परंतु प्रश्न के संदर्भ में उपयुक्त नहीं है।
(B) सागरम्: समुद्र की ओर जाना यहाँ संदर्भ के अनुसार सही नहीं है।
(C) सरोवरम्: सही उत्तर, क्योंकि अर्जुन सरोवर की ओर गया बताया गया है।


Step 4: निष्कर्ष।


अतः अर्जुन युद्ध से सरोवर की ओर गया।


Final Answer: सरोवरम्. Quick Tip: संस्कृत प्रश्नों में "कुत्र" का अर्थ "कहाँ" होता है और यह स्थान से संबंधित उत्तर की अपेक्षा करता है।


Question 6:

शक्तिकुमारः द्वाविंशतिवर्षीयः जातः सन् किम् अचिन्तयत् ?

Correct Answer:
View Solution

Step 1: प्रसंगः

यदा शक्तिकुमारः द्वाविंशतिवर्षीयः अभवत्, तदा सः स्वजीवनस्य विषये गम्भीरतया चिन्तयितुम् आरब्धवान्।


Step 2: तस्य चिन्तनम्

सः अचिन्तयत् यत् इदानीं सः पर्याप्तः परिपक्वः जातः अस्ति तथा स्वकर्तव्यं ज्ञातुम् आवश्यकम् अस्ति। सः अपि अचिन्तयत् यत् तेन स्वमातापितॄणां कीर्तिः वर्धनीया तथा स्वराज्यस्य सेवा कर्तव्या।


Step 3: निष्कर्षः

अतः शक्तिकुमारः निश्चयं कृतवान् यत् सः साहसेन अग्रे गच्छेत् तथा परिश्रमं कृत्वा जीवनस्य सफलतां प्राप्नुयात्।
Quick Tip: युवावस्था जीवनस्य महत्वपूर्णः कालः अस्ति, यदा मनुष्यः स्वकर्तव्यस्य विषये चिन्तयति।


Question 7:

कः वास्तविकसुखस्य अयोग्यः अस्ति ?

Correct Answer:
View Solution

Step 1: वास्तविकसुखस्य अर्थः

वास्तविकं सुखं सदाचारात्, सत्याचरणात् तथा संयमेन प्राप्तं भवति।


Step 2: अयोग्यः कः ?

यः मनुष्यः दुष्कर्माणि करोति, अन्यान् पीडयति तथा अधर्ममार्गं अनुसरति, सः वास्तविकसुखस्य अयोग्यः भवति।


Step 3: निष्कर्षः

अतः अधर्ममार्गं अनुसरन्तः जनाः वास्तविकसुखस्य अयोग्याः भवन्ति।
Quick Tip: सत्यं, संयमः तथा सदाचारः एव वास्तविकसुखस्य आधारः अस्ति।


Question 8:

अर्जुनः सरसः जलं पातुं गतः तदा अपरिचितः पुरुषः तस्मै किम् उक्तवान् ?

Correct Answer:
View Solution




Step 1: प्रसंगः

यदा अर्जुनः सरसः समीपं जलं पातुं गतः, तदा एकः अपरिचितः पुरुषः तत्र आगतः।


Step 2: तस्य वचनम्

सः अर्जुनं अवदत् — “त्वं मम प्रश्नानां उत्तरं दत्त्वा एव एतत् जलं पातुं शक्नोषि।”


Step 3: निष्कर्षः

एवं सः पुरुषः अर्जुनस्य बुद्धिं धैर्यं च परीक्षितुम् इच्छति स्म।
Quick Tip: महाभारते अनेकाः कथाः सन्ति यत्र प्रश्नोत्तरैः नायकस्य बुद्धिः परीक्ष्यते।


Question 9:

विक्रमस्य दादशवर्षाणि मिन्द्रुजाः जयसिंहः मालवविषयं कृत्वावान् विजयानन्तरं जयसिंहः युवतेः यथावर्णं सर्वं धनं गृहीत्वा अनहिलपुरं प्रत्यागन्तवान्। धनेन सह तत्रत्याः प्रभुत्वाधिकारी तस्य हस्तगताः जाताः। अस्मिन् प्रयाणे बहवोऽपि प्रजाः आसन्। तेषु भोजेन विरचितं सारस्वतीकण्ठाभरण नाम प्रसिद्धं भोजव्याकरणमपि एकतमम् आसीत्।
सिद्धराजः जयसिंहः कदा मालवविजयं कृतवान्?

Correct Answer:
View Solution




Step 1: गद्यांश का अध्ययन.

गद्यांश में बताया गया है कि सिद्धराज जयसिंह ने मालव देश पर विजय प्राप्त की थी।


Step 2: प्रश्न का आशय.

प्रश्न यह जानना चाहता है कि सिद्धराज जयसिंह ने मालव विजय कब प्राप्त की।


Step 3: गद्यांश से उत्तर.

गद्यांश के अनुसार उन्होंने युद्ध करके विजय प्राप्त की।


Final Answer:

सिद्धराजः जयसिंहः युद्धेन मालवविजयं कृतवान्।
Quick Tip: संस्कृत गद्यांश प्रश्नों के उत्तर सामान्यतः उसी गद्यांश के वाक्यों से बनाए जाते हैं।


Question 10:

यशोवर्मणः प्रत्यागते कस्य हस्तगतः जातः?

Correct Answer:
View Solution




Step 1: गद्यांश का संदर्भ.

गद्यांश में वर्णन है कि यशोवर्मण युद्ध में पराजित होकर सिद्धराज जयसिंह के अधिकार में आ गया।


Step 2: प्रश्न का विश्लेषण.

प्रश्न पूछता है कि वह किसके हाथ में चला गया।


Step 3: निष्कर्ष.

यशोवर्मण सिद्धराज जयसिंह के अधीन हो गया।


Final Answer:

यशोवर्मणः प्रत्यागते सिद्धराजस्य हस्तगतः जातः।
Quick Tip: हस्तगतः शब्द का अर्थ होता है – किसी के अधिकार में आ जाना।


Question 11:

भोज्ये प्रत्यागते केचित् प्रजाः आसन्?

Correct Answer:
View Solution




Step 1: गद्यांश का अध्ययन.

गद्यांश में बताया गया है कि भोजन के समय बहुत से लोग वहाँ उपस्थित थे।


Step 2: प्रश्न का विश्लेषण.

प्रश्न पूछता है कि भोजन के समय कैसी प्रजा वहाँ थी।


Step 3: निष्कर्ष.

भोजन के समय अनेक प्रजा वहाँ उपस्थित थी।


Final Answer:

भोज्ये प्रत्यागते बहवः प्रजाः आसन्।
Quick Tip: संस्कृत में बहवः का अर्थ होता है – बहुत से या अनेक।


Question 12:

जयसिंहः कस्य युते सर्वं धनं गृहीतवान्?

Correct Answer:
View Solution




Step 1: गद्यांश का संदर्भ.

गद्यांश में बताया गया है कि जयसिंह ने यशोवर्मण को पराजित करके उसका धन अपने अधिकार में ले लिया।


Step 2: प्रश्न का विश्लेषण.

प्रश्न पूछता है कि जयसिंह ने किसके साथ युद्ध करके धन प्राप्त किया।


Step 3: निष्कर्ष.

यह धन यशोवर्मण से प्राप्त किया गया।


Final Answer:

जयसिंहः यशोवर्मणस्य युते सर्वं धनं गृहीतवान्।
Quick Tip: युते शब्द का अर्थ है – युद्ध में या युद्ध के साथ।


Question 13:

Translate the following verses into English:
तेलं मर्द्य काये तं ततः स्नानं समाचरेत्।
यथाविधि जलेनैव वस्त्रं स्वच्छं प्रधावयेत्॥
पूर्वाभिमुखमासीनः कुर्यात् सन्ध्याविधिं तथा।
वस्त्रं धृत्वा नित्यं प्रातराशं अश्नीयात्॥

Correct Answer:
View Solution




Step 1: Understanding the context.

The verse describes the daily routine and discipline that a person should follow in the morning for cleanliness and spiritual practice.


Step 2: Meaning of the first line.

A person should massage oil on the body and then take a bath properly.


Step 3: Meaning of the middle lines.

After bathing, one should wash clothes properly with water and sit facing the east to perform the daily Sandhya (prayer or ritual).


Step 4: Meaning of the last line.

After wearing clean clothes and completing the morning rituals, one should take breakfast regularly.


Final Translation:

A person should first massage oil on the body and then take a proper bath. After that, the clothes should be washed properly with water. Sitting facing the east, one should perform the Sandhya rituals. Then, after wearing clean clothes, one should take breakfast regularly in the morning.
Quick Tip: Many Sanskrit verses describe the ideal daily routine, emphasizing cleanliness, discipline, and spiritual practices like Sandhya.


Question 14:

Translate the following verses into English:
वृद्धोऽपि स युवा धनी सत्यः कवची शशी।
न चाचार्याद्वात कुशली वेदौ ये न गमिष्यति॥
इन्द्रादयः क्रोधतमाश्च तस्कराः कुलनन्दनाः।
राक्षसाश्चण्डिकाद्याः पतन्त्यत्र अपराधिनः॥

Correct Answer:
View Solution




Step 1: Understanding the theme.

The verse describes the importance of knowledge, discipline, and moral behavior in life.


Step 2: Meaning of the first lines.

Even an old person may appear youthful, wealthy, truthful, and strong, but these qualities alone are not enough without proper knowledge and guidance.


Step 3: Meaning of the middle lines.

A person who does not learn from a teacher and does not study the Vedas cannot truly become wise or skilled.


Step 4: Meaning of the last lines.

Those who are influenced by anger, ignorance, or wrongful actions eventually fall into trouble and suffering.


Final Translation:

Even if a person appears strong, wealthy, or virtuous, he cannot become truly wise without learning from a teacher and studying sacred knowledge. Those who act under the influence of anger or wrongdoing ultimately fall into difficulties and punishment.
Quick Tip: Sanskrit verses often emphasize the importance of learning from a teacher (Guru) and gaining knowledge through discipline.


Question 15:

पर्जन्यः कदा वर्षति?

  • (A) ह्यः
  • (B) अद्य
  • (C) काले
  • (D) श्वः
Correct Answer: (C) काले
View Solution




Step 1: प्रश्न का अर्थ समझना।


संस्कृत वाक्य "पर्जन्यः कदा वर्षति?" का अर्थ है — "वर्षा कब होती है?" यहाँ "पर्जन्यः" का अर्थ वर्षा या मेघ से है और "कदा" का अर्थ कब होता है।


Step 2: शब्दों का अर्थ।


दिए गए विकल्पों में अलग-अलग समय को दर्शाने वाले शब्द हैं। इनका अर्थ इस प्रकार है:
ह्यः = कल (बीता हुआ दिन),
अद्य = आज,
काले = समय आने पर / उचित समय पर,
श्वः = कल (आने वाला दिन)।


Step 3: विकल्पों का विश्लेषण।



(A) ह्यः: इसका अर्थ बीते हुए कल से है, जो यहाँ उपयुक्त नहीं है।
(B) अद्य: आज का संकेत करता है, परन्तु सामान्य कथन के रूप में सही नहीं बैठता।
(C) काले: सही उत्तर, क्योंकि वर्षा उचित समय पर या ऋतु के अनुसार होती है।
(D) श्वः: इसका अर्थ आने वाला कल है, जो यहाँ उपयुक्त नहीं है।


Step 4: निष्कर्ष।


इस प्रकार प्रश्न के अनुसार वर्षा उचित समय पर होती है, इसलिए सही उत्तर "काले" है।


Final Answer: काले. Quick Tip: संस्कृत में "कदा" का अर्थ "कब" होता है और इसका उत्तर समय से संबंधित शब्दों से दिया जाता है।


Question 16:

ज्ञानं कः लभते?

  • (A) भक्तिमान्
  • (B) धनवान्
  • (C) गुणवान्
  • (D) श्रद्धावान्
Correct Answer: (D) श्रद्धावान्
View Solution




Step 1: वाक्य का अर्थ समझना।


"ज्ञानं कः लभते?" का अर्थ है — "ज्ञान कौन प्राप्त करता है?" यह प्रश्न व्यक्ति के गुणों और उसकी मानसिक स्थिति से संबंधित है।


Step 2: संस्कृत सूक्ति का संदर्भ।


संस्कृत में एक प्रसिद्ध कथन है — "श्रद्धावान् लभते ज्ञानम्" जिसका अर्थ है कि श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति ही ज्ञान प्राप्त करता है।


Step 3: विकल्पों का परीक्षण।



(A) भक्तिमान्: भक्ति रखने वाला व्यक्ति।
(B) धनवान्: धन रखने वाला व्यक्ति।
(C) गुणवान्: गुणों से युक्त व्यक्ति।
(D) श्रद्धावान्: सही उत्तर, क्योंकि श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करता है।


Step 4: निष्कर्ष।


इस प्रकार संस्कृत सूक्ति के अनुसार श्रद्धावान् व्यक्ति ही ज्ञान प्राप्त करता है।


Final Answer: श्रद्धावान्. Quick Tip: संस्कृत का प्रसिद्ध वाक्य है — "श्रद्धावान् लभते ज्ञानम्", अर्थात श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति ही ज्ञान प्राप्त करता है।


Question 17:

किम् उपादेयम् अस्ति?

  • (A) कार्यम्
  • (B) अकार्यं
  • (C) गुरुवचनम्
  • (D) मित्रवचनम्
Correct Answer: (C) गुरुवचनम्
View Solution




Step 1: प्रश्न का अर्थ समझना।


"किम् उपादेयम् अस्ति?" का अर्थ है — "क्या ग्रहण करने योग्य है?" यहाँ यह पूछा गया है कि जीवन में किस बात को अपनाना या स्वीकार करना उचित है।


Step 2: नैतिक शिक्षा का संदर्भ।


भारतीय परंपरा और संस्कृत साहित्य में गुरु के वचनों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। गुरु का मार्गदर्शन जीवन में सही दिशा देता है।


Step 3: विकल्पों का विश्लेषण।



(A) कार्यम्: सामान्य कार्य को दर्शाता है।
(B) अकार्यं: जो नहीं करना चाहिए।
(C) गुरुवचनम्: सही उत्तर, क्योंकि गुरु के वचन जीवन में अपनाने योग्य होते हैं।
(D) मित्रवचनम्: मित्र का वचन हमेशा सही हो यह आवश्यक नहीं है।


Step 4: निष्कर्ष।


अतः जीवन में ग्रहण करने योग्य वस्तु गुरु का वचन है।


Final Answer: गुरुवचनम्. Quick Tip: भारतीय परंपरा में गुरु को ज्ञान का स्रोत माना गया है, इसलिए उनके वचनों को जीवन में अपनाना चाहिए।


Question 18:

अपवर्गदायकः शिवस्य मूर्तिः ॐ-वर्णैः कथं निर्मिता?

Correct Answer:
View Solution




Step 1: प्रश्नस्य अर्थः।

अयं प्रश्नः पृच्छति यत् ॐ-चिह्नेन शिवस्य मूर्तिः कथं कल्पिता अस्ति।


Step 2: ॐ-चिह्नस्य महत्वम्।

ॐ इति पवित्रः ध्वनिः अस्ति। अस्य चिह्नस्य विभिन्नाः रेखाः भगवतः शिवस्य रूपं दर्शयन्ति।


Step 3: आध्यात्मिकः भावः।

भगवान् शिवः मोक्षदायकः इति मन्यते। अतः ॐ-चिह्नं शिवस्य प्रतीकरूपेण स्वीक्रियते।


Final Answer:

ॐ-वर्णस्य आकृत्या शिवस्य अपवर्गदायिनी मूर्तिः निर्मिता इति उच्यते।
Quick Tip: ॐ इति परमपवित्रः ध्वनिः अस्ति, यः शिवस्य प्रतीकत्वेन स्वीक्रियते।


Question 19:

पतिः प्रति पत्नी केन प्रकारेण वाणीम् उच्चारयेत्?

Correct Answer:
View Solution




Step 1: प्रश्नस्य आशयः।

अत्र पृच्छ्यते यत् पत्नी पतिना सह कथं वदेत्।


Step 2: शिष्टाचारः।

पत्नी पतिना सह सद्भावेन, विनयेन च भाषेत।


Step 3: मधुरवाणी।

सा नम्रतया, मधुरया च वाण्या स्वपतिना सह संभाषणं कुर्यात्।


Final Answer:

पत्नी पतिना सह नम्रया मधुरया च वाण्या भाषेत।
Quick Tip: मधुरा वाणी सर्वत्र सौहार्दं जनयति।


Question 20:

कासु कासु परिस्थितिषु भक्तः मातरं रक्षणार्थं प्रार्थयते?

Correct Answer:
View Solution




Step 1: प्रश्नस्य अर्थः।

अत्र पृच्छ्यते यत् भक्तः कासु अवस्थासु देव्या: प्रार्थनां करोति।


Step 2: विपत्तिकाले।

भक्तः संकटे, भयकाले, रोगकाले च मातरं प्रार्थयते।


Step 3: रक्षणार्थम्।

सः देव्या: कृपां रक्षणं च प्रार्थयति।


Final Answer:

भक्तः संकटे, भयकाले, रोगकाले च मातरं रक्षणार्थं प्रार्थयते।
Quick Tip: भक्ताः देव्या: कृपां सर्वदा प्रार्थयन्ति।


Question 21:

कार्यस्य आरम्भं न कुर्वन् पुरुषः कथं ज्ञायते?

Correct Answer:
View Solution




Step 1: प्रश्नस्य अर्थः।

अत्र पृच्छ्यते यत् यः पुरुषः कार्यस्य आरम्भं न करोति सः कः इति।


Step 2: आलस्यस्य लक्षणम्।

यः कार्यं न आरभते सः आलसी इति कथ्यते।


Step 3: निष्कर्षः।

तस्मात् सः पुरुषः आलसी इति ज्ञायते।


Final Answer:

कार्यस्य आरम्भं न कुर्वन् पुरुषः आलसी इति ज्ञायते।
Quick Tip: आलस्यं मनुष्यस्य शत्रुः इति नीतिशास्त्रे उक्तम्।


Question 22:

सर्वे भवन्तु \hspace{2cm} भवन्तु॥

Correct Answer:
View Solution




Step 1: श्लोक की पहचान।

यह प्रसिद्ध संस्कृत प्रार्थना श्लोक है जो सबके कल्याण की कामना करता है।


Step 2: पूर्ण श्लोक।

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।


Final Answer:

सुखिनः
Quick Tip: यह श्लोक समस्त मानवजाति के सुख और स्वास्थ्य की कामना करता है।


Question 23:

यस्माच्छ्रियते \hspace{2cm} मे प्रियः॥

Correct Answer:
View Solution




Step 1: श्लोक का अर्थ।

यह श्लोक प्रिय व्यक्ति के गुणों का वर्णन करता है।


Step 2: श्लोक की पूर्ति।

यस्माच्छ्रियते धर्मः स मे प्रियः।


Final Answer:

धर्मः
Quick Tip: धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति समाज में सम्मान और प्रेम प्राप्त करता है।


Question 24:

विवादे विवादे _______ लभेका प्रभवानी॥

Correct Answer:
View Solution




Step 1: श्लोक का संदर्भ।

यह श्लोक वाद-विवाद में धैर्य और बुद्धिमत्ता के महत्व को बताता है।


Step 2: श्लोक की पूर्ति।

विवादे विवादे जयते तत्त्वबोधः।


Final Answer:

जयते तत्त्वबोधः
Quick Tip: संस्कृत नीतिश्लोकों में वाद-विवाद से सत्य और ज्ञान की प्राप्ति का विचार व्यक्त किया जाता है।


Question 25:

निम्नलिखित नाट्यसंवादस्य संस्कृतेन अर्थं लिखत :

Correct Answer:
View Solution




शाण्डिल्यः: न तावत् पठिष्यामि?

परिव्राजकः: किमर्थम्?

शाण्डिल्यः: पठनस्य तावत् अर्थं ज्ञातुम् इच्छामि।

परिव्राजकः: पठितः जनः कालान्तरेण पण्डितः भवति। तस्मात् पठ।

शाण्डिल्यः: पठनेन किं भविष्यति?


अर्थः:

शाण्डिल्यः पृच्छति यत् सः किमर्थं पठेत्। सः पठनस्य प्रयोजनं ज्ञातुम् इच्छति। परिव्राजकः वदति यत् पठनात् मनुष्यः कालान्तरेण पण्डितः भवति। अतः सः पठितुम् उपदिशति।
Quick Tip: पठनं मनुष्यं ज्ञानवन्तं पण्डितं च करोति।


Question 26:

निम्नलिखित नाट्यसंवादस्य संस्कृतेन अर्थं लिखत :

Correct Answer:
View Solution




पुत्रः: एषा घटना अत्यन्तं दुःखदायिनी। अतः घटनास्थलात् दूरं भवामि।

सुतः: सत्यं वदसि भवान्।

पुत्रः: वस्तुतः मनुष्यः यदि मनुष्यवत् आचरति तदा सः दुर्घटनायाः साक्षी भूत्वा तत्रैव कार्यं करोति।


अर्थः:

अत्र पुत्रः वदति यत् एषा घटना अत्यन्तं दुःखदायिनी अस्ति, अतः सः तस्मात् स्थानात् दूरं गन्तुम् इच्छति। सुतः तस्य वचनं सत्यं मन्यते। अनन्तरं पुत्रः वदति यत् यः मनुष्यः वास्तवतः मानवतया आचरति, सः दुर्घटनायाः साक्षी भूत्वा तत्र आवश्यकं कार्यं करोति।
Quick Tip: सत्यः मनुष्यः संकटसमये अपि धैर्यं धृत्वा उचितं कर्म करोति।


Question 27:

एहि एहि पुत्र!

Correct Answer:
View Solution




कः वदति ?

धृतराष्ट्रः


कस्मै वदति ?

शान्तनवे


व्याख्या :

धृतराष्ट्रः स्नेहेन शान्तनवं प्रति "एहि एहि पुत्र!" इति वदति। अस्य वाक्यस्य अर्थः अस्ति — "आगच्छ, आगच्छ पुत्र!" इति।
Quick Tip: “एहि” इति शब्दः संस्कृते “आगच्छ” इत्यर्थे प्रयुज्यते।


Question 28:

भो भगवन्! इदम् उद्यानम्।

Correct Answer:
View Solution




कः वदति ?

शकुनिः


कस्मै वदति ?

धृतराष्ट्राय


व्याख्या :

शकुनिः धृतराष्ट्रं प्रति एतत् वाक्यं वदति। अस्य अर्थः — “हे भगवन्! एतत् उद्यानम् अस्ति।”
Quick Tip: “भो भगवन्” इति संबोधनं सम्मानपूर्वकं प्रयुज्यते।


Question 29:

श्रेष्ठं स्थानं ते।

Correct Answer:
View Solution




कः वदति ?

चाणक्यः


कस्मै वदति ?

शान्तनवे


व्याख्या :

चाणक्यः शान्तनवं प्रति एतत् वाक्यं वदति। अस्य अर्थः — “तव स्थानं श्रेष्ठम् अस्ति।”
Quick Tip: संस्कृते “श्रेष्ठम्” इति शब्दः उत्तमम् अथवा सर्वोत्तमम् इत्यर्थे प्रयुज्यते।


Question 30:

चाणक्यः चन्दनदासं चन्द्रगुप्तस्य प्रथमं विरोधिनं कुतः मन्यते?

Correct Answer:
View Solution




Step 1: प्रसंगः।

चन्द्रगुप्तस्य राज्यलाभसमये चाणक्यः तस्य शत्रून् अन्विष्यति।


Step 2: कारणम्।

चन्दनदासः राक्षसस्य परममित्रम् आसीत्। राक्षसः चन्द्रगुप्तस्य राज्यस्य विरोधी आसीत्।


Step 3: निष्कर्षः।

अतः चाणक्यः मन्यते यत् राक्षसस्य सहायत्वात् चन्दनदासः अपि चन्द्रगुप्तस्य प्रथमः विरोधी अस्ति।
Quick Tip: मित्रस्य सहायः प्रायः तस्य पक्षं समर्थयति, अतः चन्दनदासः राक्षसस्य पक्षे आसीत्।


Question 31:

शाण्डिल्यः उद्यानं प्रवेष्टुं कुतः भीतः अस्ति?

Correct Answer:
View Solution




Step 1: प्रसंगः।

शाण्डिल्यः उद्यानस्य समीपे स्थितः आसीत् तथा तत्र प्रवेशं कर्तुं चिन्तयति।


Step 2: कारणम्।

सः मन्यते यत् उद्याने कश्चन भयङ्करः प्राणी अथवा सर्पः भवितुम् शक्नोति।


Step 3: निष्कर्षः।

एतस्मात् कारणात् शाण्डिल्यः उद्यानं प्रवेष्टुं भीतः आसीत्।
Quick Tip: भयस्य कारणं अज्ञातवस्तु भवति, अतः शाण्डिल्यः उद्यानप्रवेशे भीतः आसीत्।


Question 32:

कः मनुष्यः पशुवत् मन्यते?

Correct Answer:
View Solution




Step 1: तत्त्वम्।

मनुष्यस्य विशेषता ज्ञानम्, धर्मः तथा सदाचारः अस्ति।


Step 2: कारणम्।

यः मनुष्यः न ज्ञानं न धर्मं न सदाचारं पालयति, सः केवलं भोगेषु जीवनं यापयति।


Step 3: निष्कर्षः।

अतः यः मनुष्यः धर्मं ज्ञानं च त्यक्त्वा केवलं भोगेषु लीनः भवति, सः पशुवत् मन्यते।
Quick Tip: ज्ञानं धर्मः च मनुष्यस्य विशेषता अस्ति; एतयोः अभावे मनुष्यः पशुवत् भवति।


Question 33:

घटोत्कचस्य पात्रलेखनम्।

Correct Answer:
View Solution




Step 1: परिचयः।

घटोत्कचः महाभारते प्रसिद्धः वीरः आसीत्। सः भीमस्य पुत्रः तथा हिडिम्बाया: तनयः आसीत्।


Step 2: गुणाः।

घटोत्कचः अत्यन्तं बलवान्, साहसी तथा पराक्रमी आसीत्। सः युद्धे मायाशक्तिं उपयोगं कर्तुं समर्थः आसीत्।


Step 3: युद्धे योगदानम्।

महाभारतयुद्धे सः पाण्डवानां साहाय्यं कृतवान्। सः कौरवसेनां प्रति महान् संघर्षं कृतवान् तथा अनेकान् शत्रून् पराजितवान्।


Step 4: निष्कर्षः।

एवं घटोत्कचः पराक्रमः, वीरता तथा पाण्डवानां प्रति निष्ठा इत्यादि गुणैः युक्तः महान् पात्रः आसीत्।
Quick Tip: घटोत्कचः भीमस्य पुत्रः आसीत् तथा महाभारतयुद्धे स्वपराक्रमं प्रदर्शितवान्।


Question 34:

चाणक्यस्य पात्रलेखनम्।

Correct Answer:
View Solution




Step 1: परिचयः।

चाणक्यः प्राचीनभारतस्य महान् राजनीतिज्ञः, अर्थशास्त्रज्ञः तथा आचार्यः आसीत्। सः चन्द्रगुप्तमौर्यस्य गुरु तथा मार्गदर्शकः आसीत्।


Step 2: गुणाः।

चाणक्यः अत्यन्तं बुद्धिमान्, दूरदर्शी तथा कूटनीतिज्ञः आसीत्। सः राज्यनीतौ निपुणः आसीत् तथा देशहिताय कार्यं कृतवान्।


Step 3: योगदानम्।

चाणक्यस्य मार्गदर्शनात् चन्द्रगुप्तः मौर्यसम्राट् अभवत्। चाणक्यः अर्थशास्त्रनामकं प्रसिद्धं ग्रन्थं अपि लिखितवान्।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः चाणक्यः महान् आचार्यः, कुशलः राजनीतिज्ञः तथा भारतस्य इतिहासे महत्वपूर्णं पात्रं आसीत्।
Quick Tip: चाणक्यः चन्द्रगुप्तमौर्यस्य गुरु आसीत् तथा अर्थशास्त्रग्रन्थस्य रचयिता आसीत्।


Question 35:

Explain the lament of Arthadatta caused by misfortune.

Correct Answer:
View Solution




Step 1: प्रसंगः

अर्थदत्तः नाम एकः पुरुषः आसीत्। तस्य जीवनं आरम्भे सुखेन युक्तम् आसीत्, किन्तु दैवदोषात् तस्य जीवनम् अनेकैः क्लेशैः पूर्णम् अभवत्।


Step 2: दुःखस्य कारणम्

अर्थदत्तः दुर्भाग्येन पीडितः आसीत्। तस्य धनहानिः अभवत् तथा जीवनस्य अनेकाः कठिनाः परिस्थितयः तं संतापयन्ति स्म। एतेषां कारणानां फलतः सः अत्यन्तं दुःखी अभवत्।


Step 3: विलापः

स्वदुर्दैवं स्मृत्वा अर्थदत्तः विलापं करोति स्म। सः चिन्तयति स्म यत् दैवेन तस्य जीवनम् एवम् कष्टपूर्णं कृतम्। तस्य वचनैः तस्य मनसि स्थितः गाढः शोकः प्रकटितः।


Step 4: निष्कर्षः

अर्थदत्तस्य विलापः दर्शयति यत् मनुष्यस्य जीवनम् सदा सुखमयं न भवति। कदाचित् दैवदोषेन दुःखानि अपि आगच्छन्ति। तथापि धैर्येण एव तेषां सामना कर्तव्यः।
Quick Tip: संस्कृतकथासु दैवम्, कर्म तथा धैर्यं इत्येतानि जीवनस्य मुख्यतत्त्वानि इति उपदिश्यते।


Question 36:

धृतराष्ट्रः कौरवाणां पिता आसीत्।

Correct Answer:
View Solution




Step 1: कर्ता-निर्णयः।

अस्मिन् वाक्ये “धृतराष्ट्रः” कर्ता अस्ति।


Step 2: सम्बन्ध-प्रयोगः।

“कौरवाणां” इति शब्दः षष्ठी-विभक्तौ प्रयुक्तः अस्ति, यः सम्बन्धं दर्शयति।


Step 3: विधेयः।

“पिता आसीत्” इति वाक्यांशः धृतराष्ट्रस्य स्थानं सूचयति।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः सम्पूर्णस्य वाक्यस्य अर्थः भवति यत् धृतराष्ट्रः कौरवाणां जनकः आसीत्।
Quick Tip: “जनक” अथवा “पिता” शब्दौ संस्कृते पितृत्वं सूचयतः।


Question 37:

मानवः सुखं च दुःखं च अनुभवति।

Correct Answer:
View Solution




Step 1: कर्ता।

अत्र “मानवः” इति शब्दः कर्ता अस्ति।


Step 2: कर्मद्वयम्।

“सुखं” तथा “दुःखं” इति द्वौ शब्दौ कर्मरूपे प्रयुक्तौ स्तः।


Step 3: क्रिया।

“अनुभवति” इति क्रियापदं अनुभवस्य क्रियाम् दर्शयति।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः वाक्यस्य अर्थः भवति यत् मनुष्यः जीवनस्य मध्ये सुखं दुःखं च अनुभवति।
Quick Tip: मानवजीवने सुख-दुःखे उभे समानरूपेण अनुभूयते।


Question 38:

घटोत्कचः जनार्दनस्य सन्देशं आनयति।

Correct Answer:
View Solution




Step 1: कर्ता।

अत्र “घटोत्कचः” इति शब्दः कर्तारं दर्शयति।


Step 2: सम्बन्धः।

“जनार्दनस्य” इति शब्दः षष्ठी-विभक्तौ प्रयुक्तः अस्ति, यः स्वामित्वं दर्शयति।


Step 3: कर्म।

“सन्देशं” इति शब्दः कर्मरूपे प्रयुक्तः अस्ति।


Step 4: क्रिया।

“आनयति” इति क्रियापदं संदेशस्य आगमनं सूचयति।


Step 5: निष्कर्षः।

अतः वाक्यस्य अर्थः भवति यत् घटोत्कचः जनार्दनस्य संदेशं वहित्वा आनयति।
Quick Tip: “सन्देशं आनयति” इति प्रयोगः संदेशं वहित्वा आगच्छति इत्यर्थं दर्शयति।


Question 39:

“भार्या” शब्दस्य समानार्थकं शब्दं अधोदत्तेभ्यः विकल्पेभ्यः चिनुत।
(यात्री, दारा, पतिः

Correct Answer:
View Solution




Step 1: शब्दार्थज्ञानम्।

“भार्या” इति शब्दः पत्नी अथवा स्त्री इत्यर्थे प्रयुज्यते।


Step 2: विकल्पविश्लेषणम्।

“यात्री” इति शब्दः यात्रां कुर्वन् व्यक्ति सूचयति।

“दारा” इति शब्दः पत्नी अथवा स्त्री इत्यर्थे प्रयुक्तः समानार्थकः शब्दः अस्ति।

“पतिः” इति शब्दः भर्तारं दर्शयति।


Step 3: निष्कर्षः।

अतः “भार्या” शब्दस्य समानार्थकः शब्दः “दारा” इति।
Quick Tip: संस्कृते “दारा” शब्दः पत्नी अथवा स्त्री इत्यर्थे समानार्थकत्वेन प्रयुज्यते।


Question 40:

“दरिद्रः” शब्दस्य विलोमशब्दं अधोदत्तेभ्यः विकल्पेभ्यः चिनुत।
( रोगी, पण्डितः, धनिकः

Correct Answer: (3) धनिकः
View Solution




Step 1: शब्दार्थः।

“दरिद्रः” इति शब्दः निर्धनः अथवा गरीबः इत्यर्थे प्रयुज्यते।


Step 2: विकल्पपरीक्षणम्।

“रोगी” इति शब्दः अस्वस्थं जनं सूचयति।

“पण्डितः” इति शब्दः विद्वान् इत्यर्थे प्रयुज्यते।

“धनिकः” इति शब्दः धनवान् व्यक्ति सूचयति।


Step 3: निष्कर्षः।

अतः “दरिद्रः” शब्दस्य विलोमशब्दः “धनिकः” इति।
Quick Tip: दरिद्रः = निर्धनः, धनिकः = धनवान्। एते उभौ विलोमशब्दौ स्तः।


Question 41:

अधोदत्तस्य क्रियापदस्य वर्तमानकालस्य प्रथमपुरुषस्य एकवचनरूपं लिखत।
(पठति, पठसि, पठः )

Correct Answer:
View Solution




Step 1: पुरुषनिर्णयः।

संस्कृते प्रथमपुरुषः सः, सा, तत् इत्यादीनां विषये प्रयुज्यते।


Step 2: एकवचनरूपम्।

वर्तमानकाले प्रथमपुरुषस्य एकवचनरूपं सामान्यतः “ति” इत्यन्तेन भवति।


Step 3: उदाहरणम्।

धातुः “पठ्” इत्यस्य वर्तमानकालरूपं प्रथमपुरुषे एकवचने “पठति” भवति।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः सही उत्तरम् “पठति” इति।
Quick Tip: प्रथमपुरुष एकवचन वर्तमानकालरूपं प्रायः “ति” इत्यन्तेन भवति।


Question 42:

अधोदत्तस्य क्रियापदस्य सामान्यभविष्यत्कालस्य अन्यपुरुष बहुवचनरूपं लिखत।
वदति, वदसि, वदिष्यन्ति

Correct Answer: वदिष्यन्ति
View Solution




Step 1: क्रियापदस्य धातुः।

अत्र मूलधातुः “वद्” अस्ति, यस्य अर्थः “कथयति” इति भवति।


Step 2: भविष्यत्कालस्य निर्माणम्।

संस्कृते सामान्यभविष्यत्कालः धातोः “इष्य” प्रत्ययेन निर्मीयते। अतः “वद् + इष्य” इत्यस्मात् “वदिष्य” इति रूपं भवति।


Step 3: पुरुष-वचन-रूपम्।

अन्यपुरुष बहुवचनस्य अन्त्यप्रत्ययः “न्ति” भवति। अतः “वदिष्य + न्ति” = “वदिष्यन्ति” इति रूपं सिद्धम्।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः सही उत्तरम् “वदिष्यन्ति” इति।
Quick Tip: भविष्यत्कालरूपे धातोः “इष्य” प्रत्ययः प्रयुज्यते तथा बहुवचने “न्ति” इति अन्त्यरूपं भवति।


Question 43:

अधोदत्तस्य क्रियापदस्य आज्ञार्थे एकवचनरूपं लिखत।
प्रविशामि, प्रविशतु, प्रविश

Correct Answer: प्रविश
View Solution




Step 1: धातुः।

अत्र मूलधातुः “विश्” अस्ति, यस्य अर्थः “प्रवेशं करोति” इति।


Step 2: आज्ञार्थरूपम्।

आज्ञार्थे क्रियापदं आदेशं सूचयति। एकवचने सामान्यतः धातुरूपं एव प्रयुज्यते।


Step 3: विकल्पविश्लेषणम्।

“प्रविशामि” प्रथमपुरुष एकवचन वर्तमानकालः।

“प्रविशतु” अन्यपुरुष एकवचन आज्ञार्थः।

“प्रविश” मध्यमपुरुष एकवचन आज्ञार्थरूपम्।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः एकवचन आज्ञार्थरूपं “प्रविश” इति।
Quick Tip: आज्ञार्थे मध्यमपुरुष एकवचने धातुरूपं प्रायः सरलरूपेण प्रयुज्यते।


Question 44:

अधोदत्तस्य क्रियापदस्य विध्यर्थे बहुवचनरूपं लिखत।
पठेयुः, पठेतु, पठेताम्

Correct Answer: पठेयुः
View Solution




Step 1: धातुः।

अत्र मूलधातुः “पठ्” अस्ति, यस्य अर्थः “अध्ययनं करोति” इति।


Step 2: विधिलिङ् प्रयोगः।

विधिलिङ् लकारः इच्छा, सम्भावना अथवा उपदेशं सूचयति।


Step 3: बहुवचनरूपम्।

विधिलिङ् लकारे बहुवचनरूपं सामान्यतः “युः” इति प्रत्ययेन समाप्तं भवति।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः सही उत्तरम् “पठेयुः” इति।
Quick Tip: विधिलिङ् लकारे बहुवचनरूपे प्रायः “युः” इति प्रत्ययः दृश्यते।


Question 45:

‘सः विजय घोषं कृत्वा जन समूहस्य समीपम् आगच्छत्।’ तस्य वाक्यस्य ‘स्म’ प्रयोगेन शुद्ध वाक्य लिखत।

Correct Answer:
View Solution




Step 1: प्रश्न को समझना।


प्रश्न में दिए गए संस्कृत वाक्य को ‘स्म’ शब्द का प्रयोग करते हुए शुद्ध रूप में लिखना है। संस्कृत में ‘स्म’ का प्रयोग भूतकाल को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह क्रिया के साथ जुड़कर यह बताता है कि कार्य पहले हुआ करता था या भूतकाल में घटित हुआ था।


Step 2: वाक्य का विश्लेषण।


दिए गए वाक्य में मुख्य क्रिया "आगच्छत्" है जिसका अर्थ है "आया" या "आता था"। यदि इस क्रिया के साथ "स्म" जोड़ा जाए तो यह भूतकाल का स्पष्ट संकेत देता है।


Step 3: ‘स्म’ का प्रयोग।


संस्कृत व्याकरण के अनुसार ‘स्म’ को मुख्य क्रिया के बाद रखा जाता है। इसलिए सही वाक्य होगा:
"सः विजयघोषं कृत्वा जनसमूहस्य समीपम् आगच्छत् स्म।"


Step 4: निष्कर्ष।


इस प्रकार ‘स्म’ का प्रयोग करने पर वाक्य भूतकाल का बोध कराता है और वाक्य व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध हो जाता है।


Final Answer:
सः विजयघोषं कृत्वा जनसमूहस्य समीपम् आगच्छत् स्म। Quick Tip: संस्कृत में ‘स्म’ का प्रयोग भूतकाल को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है और इसे सामान्यतः क्रिया के बाद रखा जाता है।


Question 46:

अधोदत्तस्य नामपदस्य सप्तमी विभक्तेः एकवचनरूपं लिखत।
शरीरस्य, शरीरे, शरीरम्

Correct Answer: शरीरे
View Solution




Step 1: शब्दपरिचयः।

अत्र मूलशब्दः “शरीर” इति अस्ति, यस्य अर्थः देहः इति भवति।


Step 2: विभक्तिनिर्णयः।

प्रश्ने सप्तमी विभक्तेः एकवचनरूपं अपेक्षितम्। सप्तमी विभक्ति स्थानं अथवा स्थितिं दर्शयति।


Step 3: रूपनिर्माणम्।

“शरीर” शब्दस्य सप्तमी एकवचनरूपं “शरीरे” इति भवति।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः सही उत्तरम् “शरीरे” इति।
Quick Tip: सप्तमी विभक्तिः सामान्यतः “कुत्र?” इति प्रश्नस्य उत्तरं ददाति।


Question 47:

अधोदत्तस्य नामपदस्य षष्ठी विभक्तेः बहुवचनरूपं लिखत।
पूजाः, पूजानाम्, पूजाभ्यः

Correct Answer: पूजानाम्
View Solution




Step 1: शब्दपरिचयः।

अत्र मूलशब्दः “पूजा” इति अस्ति, यस्य अर्थः उपासना अथवा आराधना इति भवति।


Step 2: विभक्तिनिर्णयः।

षष्ठी विभक्तिः सम्बन्धं दर्शयति तथा “कस्य?” इति प्रश्नस्य उत्तरं ददाति।


Step 3: रूपनिर्माणम्।

“पूजा” शब्दस्य षष्ठी बहुवचनरूपं “पूजानाम्” इति भवति।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः सही उत्तरम् “पूजानाम्” इति।
Quick Tip: षष्ठी विभक्तिः सम्बन्धं सूचयति तथा बहुवचने सामान्यतः “नाम्” इति अन्त्यरूपं भवति।


Question 48:

उपपदविभक्तेः प्रयोगं कृत्वा रिक्तस्थानं पूरयत।
गुरुः ............ सह उपविष्टः आसीत्।
(शिष्येण, शिष्यस्य, शिष्ये)

Correct Answer: शिष्येण
View Solution




Step 1: उपपदप्रयोगः।

“सह” इति उपपदेन सह प्रयोगे तृतीया विभक्तिः प्रयुज्यते।


Step 2: विकल्पपरीक्षणम्।

“शिष्येण” तृतीया विभक्तेः एकवचनरूपम् अस्ति।

“शिष्यस्य” षष्ठी विभक्तिः अस्ति।

“शिष्ये” सप्तमी विभक्तिः अस्ति।


Step 3: नियमः।

“सह” इति शब्देन तृतीया विभक्तेः प्रयोगः भवति।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः सही उत्तरम् “शिष्येण” इति।
Quick Tip: संस्कृते “सह” इति शब्देन तृतीया विभक्तिः अनिवार्यतया प्रयुज्यते।


Question 49:

प्रकोष्ठे पूर्तक संख्यापदं लिखित्वा रिक्तस्थानं पूरयत।
कूपे ............ कन्या गता।
(एकम्, एका, एकाम्)

Correct Answer: एका
View Solution




Step 1: वाक्यस्य अवलोकनम्।

अत्र “कन्या” इति शब्दः स्त्रीलिङ्गे अस्ति।


Step 2: संख्यापदस्य लिङ्गानुसारम्।

संस्कृते संख्यापदं सम्बद्धस्य शब्दस्य लिङ्गानुसारं रूपं गृह्णाति।


Step 3: विकल्पविश्लेषणम्।

“एकम्” नपुंसकलिङ्गरूपम्।

“एका” स्त्रीलिङ्गरूपम्।

“एकाम्” द्वितीया विभक्तिरूपम्।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः “कन्या” इति स्त्रीलिङ्गशब्देन सह “एका” इति रूपं युक्तम्।
Quick Tip: संख्यापदानि लिङ्गानुसारं परिवर्तन्ते।


Question 50:

रेखाङ्कित पदस्य कृतन्तप्रकारं विकल्पेभ्यः लिखत।
तत्र युक्तं सापत्यं क्षणमपि अत्र \underline{अवस्थायाम्।
(सम्बन्ध भूतकृत्यम्, हेत्वर्थे कृतन्तम्, कर्मणि भूतकृत्यम्)

Correct Answer: हेत्वर्थे कृतन्तम्
View Solution




Step 1: कृतन्तपरिचयः।

कृतन्तपदानि धातोः कृत् प्रत्ययेन निर्मीयन्ते।


Step 2: रेखाङ्कितपदस्य विचारः।

“अवस्थायाम्” इति पदं क्रियाया कारणं वा हेतुम् सूचयति।


Step 3: प्रकारनिर्णयः।

यत् पदं क्रियायाः कारणं दर्शयति तत् हेत्वर्थे कृतन्तम् इति कथ्यते।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः अत्र कृतन्तप्रकारः “हेत्वर्थे कृतन्तम्” इति।
Quick Tip: हेत्वर्थे कृतन्तम् क्रियायाः कारणं दर्शयति।


Question 51:

अधोदत्तस्य सन्धिविच्छेदं लिखत।
घटोत्कचस्य

Correct Answer: घटोत्कच + अस्य
View Solution




Step 1: सन्धिपरिचयः।

संस्कृते द्वयोः पदयोः संयोगेन सन्धिः भवति।


Step 2: पदविभाजनम्।

“घटोत्कचस्य” इति पदं द्वयोः पदयोः संयोगात् निर्मितम्।


Step 3: मूलपदानि।

मूलपदे “घटोत्कच” तथा “अस्य” इति स्तः।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः सन्धिविच्छेदः “घटोत्कच + अस्य” इति।
Quick Tip: सन्धिविच्छेदे संयुक्तं पदं पृथक् पदयोः विभज्यते।


Question 52:

अधोदत्तस्य संयुक्तपदस्य उत्तरदोषं विकल्पेभ्यः लिखत।
भोजनम् + अस्ति

Correct Answer: भोज्यास्ति
View Solution




Step 1: सन्धिप्रक्रिया।

संस्कृते द्वयोः पदयोः संयोगेन सन्धिः भवति।


Step 2: पदयोः संयोगः।

“भोजनम्” तथा “अस्ति” इति पदयोः संयोगे सन्धिः भवति।


Step 3: ध्वनिपरिवर्तनम्।

संयोगे ध्वनिपरिवर्तनं भवति तथा नूतनरूपं निर्मीयते।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः संयुक्तरूपं “भोज्यास्ति” इति भवति।
Quick Tip: सन्धौ पदद्वयस्य संयोगे ध्वनिपरिवर्तनं भवति।


Question 53:

अधोदत्तस्य सामासिकपदस्य समासप्रकारं विकल्पेभ्यः लिखत।
काष्ठखण्डः
(कर्मधारयः, अव्ययीभावः, तत्पुरुषः)

Correct Answer: तत्पुरुषः
View Solution




Step 1: समासपरिचयः।

समासः द्वयोः अथवा अधिकानां पदानां संक्षिप्तरूपं भवति।


Step 2: पदविभाजनम्।

“काष्ठखण्डः” इति पदं “काष्ठस्य खण्डः” इति विग्रहवाक्येन स्पष्टं भवति।


Step 3: प्रकारनिर्णयः।

षष्ठीसम्बन्धे प्रयुक्तः समासः तत्पुरुषसमासः इति कथ्यते।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः अयं समासः तत्पुरुषसमासः अस्ति।
Quick Tip: षष्ठीसम्बन्धयुक्तः समासः सामान्यतः तत्पुरुषसमासः भवति।


Question 54:

अधोदत्तस्य सामासिकपदस्य समासप्रकारं विकल्पेभ्यः लिखत।
कार्यकार्यम्
(बहुव्रीहिः, द्वन्द्वः, अव्ययीभावः)

Correct Answer: द्वन्द्वः
View Solution




Step 1: समासस्य अर्थः।

“कार्यकार्यम्” इति पदं “कार्यं च अकार्यं च” इति विग्रहवाक्येन बोध्यते।


Step 2: प्रकारविश्लेषणम्।

यत्र द्वे पदे समानमहत्त्वेन प्रयुज्येते तत्र द्वन्द्वसमासः भवति।


Step 3: निष्कर्षः।

अतः “कार्यकार्यम्” इति पदं द्वन्द्वसमासस्य उदाहरणम्।
Quick Tip: “च” इति संयोजकस्य प्रयोगे सामान्यतः द्वन्द्वसमासः भवति।


Question 55:

अधोदत्तानि वाक्यानि कथानुक्रमेण स्थापयत।
(A) एतानि पात्राणि मम न सन्ति।
(B) एकदा कुटुम्बे चित्तिनि वयं निवसामः धृतिकोऽपि लघुयो वर्तते।
(C) अतः केनापि उपायेन मया अस्य व्यवस्थापनम्।
(D) एतानि लब्धानि सन्ति पात्राणि स्वतः पात्राणामुपरि सन्ति।

Correct Answer: (B) → (A) → (C) → (D)
View Solution




Step 1: प्रारम्भवाक्यनिर्णयः।

कथायाः आरम्भः सामान्यतः “एकदा” इति शब्देन भवति। अतः (B) इति वाक्यं प्रथमं स्थानं प्राप्नोति।


Step 2: समस्यावर्णनम्।

तत्पश्चात् पात्राणां अभावः दर्शितः अस्ति। “एतानि पात्राणि मम न सन्ति” इति (A) वाक्यं समस्या दर्शयति।


Step 3: उपायचिन्तनम्।

तदनन्तरं समस्या समाधानार्थं उपायः चिन्त्यते। “अतः केनापि उपायेन…” इति (C) वाक्यं तृतीयं भवति।


Step 4: परिणामः।

अन्ते परिणामः सूच्यते। “एतानि लब्धानि सन्ति पात्राणि…” इति (D) वाक्यं अन्तिमं स्थानं प्राप्नोति।


Step 5: निष्कर्षः।

अतः सही क्रमः (B) → (A) → (C) → (D) इति।
Quick Tip: संस्कृतकथासु “एकदा” इति शब्दः प्रायः कथायाः आरम्भं सूचयति।


Question 56:

अधोदत्तं गद्यं पठित्वा प्रश्नानां उत्तराणि संस्कृते लिखत।

Correct Answer:
View Solution




(A) तत्र स्नानं केन कृतम्?

उत्तरम् — तत्र स्नानं गृहस्वामिना कृतम्।


(B) तत्र कः वसति स्म?

उत्तरम् — तत्र एकः कुक्कुरः वसति स्म।


(C) कुक्कुरः किम् अकरोत्?

उत्तरम् — कुक्कुरः बालकं रक्षितवान्।


(D) गृहस्वामी किम् अकरोत्?

उत्तरम् — गृहस्वामी कुक्कुरं हत्वा पश्चात् खेदम् अनुभवत्।
Quick Tip: अयं प्रसंगः प्रसिद्धस्य “ब्राह्मणः तथा निष्ठावान् कुक्कुरः” इति कथायाः उदाहरणम्।


Question 57:

विष्णु शर्मा — कस्य ग्रन्थस्य लेखकः अस्ति?

Correct Answer: पञ्चतन्त्रम्
View Solution




Step 1: लेखकपरिचयः।

विष्णु शर्मा प्राचीनभारते प्रसिद्धः संस्कृतविद्वान् आसीत्।


Step 2: ग्रन्थविशेषः।

तेन नीतिशिक्षार्थं प्रसिद्धः ग्रन्थः “पञ्चतन्त्रम्” रचितः।


Step 3: निष्कर्षः।

अतः विष्णु शर्मा “पञ्चतन्त्रम्” इति ग्रन्थस्य लेखकः अस्ति।
Quick Tip: पञ्चतन्त्रम् नीतिकथानां प्रसिद्धः संस्कृतग्रन्थः अस्ति।


Question 58:

वाल्मीकि: — कस्य ग्रन्थस्य लेखकः अस्ति?

Correct Answer: रामायणम्
View Solution




Step 1: कविपरिचयः।

महर्षिः वाल्मीकि: संस्कृतसाहित्ये आदिकविः इति प्रसिद्धः।


Step 2: महाकाव्यम्।

तेन रचितं महान् संस्कृतमहाकाव्यं “रामायणम्” इति।


Step 3: निष्कर्षः।

अतः वाल्मीकि: “रामायणम्” इति ग्रन्थस्य रचयिता अस्ति।
Quick Tip: वाल्मीकि: संस्कृतसाहित्ये आदिकविः इति कथ्यते।


Question 59:

विशाखदत्तः — कस्य ग्रन्थस्य लेखकः अस्ति?

Correct Answer: मुद्राराक्षसम्
View Solution




Step 1: लेखकपरिचयः।

विशाखदत्तः प्रसिद्धः संस्कृतनाटककारः आसीत्।


Step 2: नाटकविशेषः।

तेन रचितं प्रसिद्धं नाटकं “मुद्राराक्षसम्” इति।


Step 3: निष्कर्षः।

अतः विशाखदत्तः “मुद्राराक्षसम्” इति नाटकस्य लेखकः अस्ति।
Quick Tip: मुद्राराक्षसम् प्रसिद्धं ऐतिहासिकं संस्कृतनाटकम् अस्ति।


Question 60:

अस्य सिद्धान्तस्य उपदेशः वार्षिके शताब्द्ये पूर्व आचार्येण पतञ्जलिना स्वकीय व्याकरणमहाभाष्ये कृतः। तत्र ते कथयन्ति – “समानजु समायुषु समवयुषु व्यासक्ताः कुत्सिते नैव कुशलाः; कुशः सहस्रते, न पाण्डवः पाण्डुतिः।”

Correct Answer:
View Solution




Step 1: प्रसंगस्य परिचयः।

आचार्यः पतञ्जलिः संस्कृतव्याकरणस्य महान् आचार्यः आसीत्। तेन व्याकरणमहाभाष्ये अनेकान् नैतिकान् सिद्धान्तान् उपदिष्टवान्।


Step 2: वाक्यस्य तात्पर्यम्।

अस्मिन् वचने पतञ्जलिः सूचयति यत् केवलं बाह्यरूपेण वा नाममात्रेण कस्यचित् श्रेष्ठता न निश्चितुं शक्यते।


Step 3: उदाहरणविवरणम्।

यथा “कुशः” नाम्ना सहस्राणि तृणानि सन्ति, किन्तु तेषु सर्वे उपयोगी न भवन्ति। तथैव “पाण्डव” इति नाम्ना सर्वे जनाः महान् न भवन्ति।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः मनुष्यस्य मूल्यं तस्य कर्मणा गुणैः च ज्ञायते, न केवलं नाम्ना वा बाह्यरूपेण।
Quick Tip: संस्कृतसाहित्ये आचार्यपतञ्जलिः व्याकरणमहाभाष्यस्य रचयिता इति प्रसिद्धः।


Question 61:

यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते
निर्घर्षण-च्छेदन-ताप-ताडनैः।
तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते
श्रुतेन शीलेन गुणेन कर्मणा॥

Correct Answer:
View Solution




Step 1: श्लोकस्य अनुवादः।

यथा सुवर्णं चत्वारिभिः उपायैः परीक्ष्यते — निर्घर्षणेन (घर्षणेन), छेदननेन, तापेन तथा ताडनेन; तथैव मनुष्यः अपि चत्वारिभिः उपायैः परीक्ष्यते — श्रुतेन (विद्यया), शीलेन (सदाचारणेन), गुणेन तथा कर्मणा।


Step 2: भावार्थः।

यथा सुवर्णस्य वास्तविकमूल्यं ज्ञातुं तस्य विविधप्रकारेण परीक्षा क्रियते, तथैव मनुष्यस्य वास्तविकस्वभावः अपि तस्य विद्या, आचार, गुण तथा कर्माणि दृष्ट्वा ज्ञायते।


Step 3: अर्थविस्तारः।

मनुष्यस्य महानता केवलं वचनेन न ज्ञायते, अपितु तस्य आचरणेन एव स्पष्टा भवति। यः विद्वान्, सदाचारी, गुणवान् तथा सत्कर्मशीलः भवति, सः एव वास्तविकरूपेण श्रेष्ठः मनुष्यः भवति।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः अस्मिन् श्लोके उपदेशः अस्ति यत् मनुष्यस्य मूल्यं तस्य ज्ञान, आचार, गुण तथा कर्मेषु निहितम् अस्ति।
Quick Tip: यथा सुवर्णस्य परीक्षा भवति, तथैव मनुष्यस्य अपि तस्य गुणैः कर्मभिः च परीक्षा भवति।


Question 62:

सुखे हि दुःखान्यनुभूय शोभते
घनान्धकारेष्विव दीपदर्शनम्।
सुखाद् यो याति नरो दरिद्रतां
धृतः शरीरेण पुनः स जीवति॥

Correct Answer:
View Solution




Step 1: श्लोकस्य अनुवादः।

सुखस्य अनुभवः तदा अधिकं शोभते, यदा मनुष्यः पूर्वं दुःखस्य अनुभवम् अपि कृतवान् भवति। यथा घोरान्धकारे दीपस्य दर्शनं अधिकं सुखदं भवति।


Step 2: भावार्थः।

जीवने सुखदुःखे उभे अपि आवश्यकौ अनुभवौ स्तः। दुःखानुभवेन एव सुखस्य वास्तविकमूल्यं ज्ञायते।


Step 3: अर्थविस्तारः।

यः मनुष्यः सुखात् दरिद्रतां गच्छति, सः दुःखस्य अनुभवेन जीवनस्य यथार्थं बोधं प्राप्नोति। तस्य धैर्यं तथा अनुभवः तं पुनः जीवनमार्गे अग्रे नयति।


Step 4: निष्कर्षः।

अतः अस्मिन् श्लोके उपदेशः अस्ति यत् दुःखानुभवेन एव सुखस्य वास्तविकमहत्त्वं ज्ञायते।
Quick Tip: दुःखानुभवेन एव सुखस्य महत्त्वं स्पष्टं भवति।

Gujarat Board Class 10 Sanskrit Board Exam Final Revision